‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 23 दिसंबर। बांग्लादेशी घुसपैठियों के संदेह में रायपुर पुलिस ने आज सुबह से सभी थाना इलाकों में बस्ती मोहल्लों में दबिश दी है। सुबह 6 बजे पुलिस की टीमों ने राजातालाब, बैजनाथ पारा,संजय नगर, शंकर नगर, मोवा पंडरी शामिल हैं। अब तक 100 से अधिक संदेहियों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन में पूछताछ, सत्यापन किया जा रहा है। इनमें से सर्वाधिक बैजनाथ पारा, राजा तालाब से हिरासत में लिए जाने की खबर है। इनका आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज सभी की जांच की जा रही है। वहीं किसी को भी रिजर्व लाइन के अंदर जाने की अनुमति नहीं है। सभी परिजनों का बाहर गेट के पास बड़ा जमावड़ा है।
परिजनों को पूछने पर पता चला कि सुबह-सुबह पुलिस आई और कुछ नहीं बताया और परिजनों को ले कर आ गई। किसी को फर्जी सिम का मामले में भी लाने की जानकारी दी गई है। इससे पहले पुलिस ने ऑपरेशन समाधान’ के तहत दूसरे राज्यों से आए 1 हजार से ज्यादा लोगों की तस्दीक की। इसके बाद एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह के निर्देश में सुबह चार बजे शहर के अलग-अलग इलाकों में छापामार अभियान चलाया गया। सीएसपी रैंक के अधिकारियों ने इस अभियान को लीड किया और बीट वाइज संदेहियों से पुलिस लाइन में संदेहियों के दस्तावेजों की जांच जारी है।
यह कार्रवाई रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान और पतासाजी के लिए की गई। शुरुआती जांच में करीब 100 से ज्यादा ऐसे लोग सामने आए, जो पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश बॉर्डर के बताए जा रहे हैं। पुलिस को इनके दस्तावेज दुरुस्त नहीं मिले हैं। इसकी जांच के लिए हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इनके मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच भी की जा रही है। ये ऑटो चलाने और अन्य काम करते हैं। पुलिस ने इन पर कड़ी निगरानी रखने की बात कही है। दूसरे राज्य के लोग पूछताछ में केवल हाल के एक-दो सालों में रायपुर आने की जानकारी दे पाए। पुलिस को यह स्पष्ट नहीं है कि ये लोग कब से शहर में रह रहे हैं। ज्यादातर ने हाल के वर्षों में आने की बात बताई।
पुलिस ने करीब छह माह ऐसी कार्रवाई दूसरी बार की है। इस दौरान टिकरापारा इलाके से दो सगे भाइयों को मुंबई में गिरफ्तार किया था। साथ ही एक दंपति को बेटी समेत ढाका डिपोर्ट भी किया जा चुका है।
दिल्ली से मिला था इनपुट: पुलिस सूत्रों ने बताया कि साइबर क्राइम विभाग को दिल्ली से इनपुट मिला था। इसके मुताबिक विदेशी एप पर चैटिंग करने वाले लोगों की चैटिंग हिस्ट्री निकाल पुलिस ने आधी रात छापेमारी कर संदेहियों को पूछताछ के लिए थाने ले गई। इनमें एक होटल मालिक, एक कपड़ा दुकान दार भी शामिल हैं। सभी लोग अपने खास औऱ राजनीतिक रसूखदार लोगों से संपर्क कर रिहाई के प्रयास भी शुरू कर दिए ।
पुलिस आखिर क्या बताना, और कैसा खौफ पैदा करना चाह रही है-फैजल
इस धरपकड़ की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग पुलिस लाइन पहुंचने लगे। इनमें पकड़े गए लोगों के परिजन भी शामिल हैं। इनके साथ पहुंचे वरिष्ठ अधिवक्ता फैजल रिजवी ने मीडिया से चर्चा में बताया कि जो भी मुसलमान हज, उमरा करने सउदी अरब जाते हैं, तो उनकी अपना कुशलक्षेम बताने अपने परिजनों से सामान्य कॉल या वाट्सएप पर बात नहीं हो पाती। वे लोग आईएमओ एप डाउनलोड कर आसानी से बात कर सकते हैं। इनमें से जिन लोगों ने इस एप के जरिए बात की थी पुलिस ने उन्हें ही आज सुबह घर-घर जाकर उठा लाई है। इनमें कई बुजुर्ग 70-80 वर्ष के हैं। महिलाएं 65 से 80 वर्ष की हैं। तो कुछ लडक़े हैं। इनकी कुल संख्या 119 है। फैजल के मुताबिक पुलिस अफसरों ने बताया कि इन लोगों ने आईएमओ से बात की है। इनका विदेशी लिंक है। मैंने कहा कि हज उमरा हिन्दुस्तान में नहीं हो सकता, सउदी अरब जाना पड़ेगा, जो विदेश है। और ये लोग वहां से बात नहीं होने के कारण आईएमओ से बात करते हैं। फैजल ने आपत्ति की कि पहले इन सभी को 10-11 बजे थाने बुलाते, नहीं आने पर उठाया जा सकता था। इस तरह 6 बजे सोते लोगों को उठाकर लाना उचित नहीं है। नए बीएनएस कानून में है कि सूर्यास्त के बाद सूर्योदय से पहले महिलाओं से पूछताछ नहीं की जा सकती। ऐसा उठाकर लाना गैरकानूनी संविधान के खिलाफ है। पुलिस आखिर क्या बताना चाह रही है। कैसा खौफ पैदा करना चाह रही है। ऐसे लोगों को लाया गया है, जो 100-200 साल से रह रहे हैं। 10वीं पीढ़ी के संभ्रांत लोग हैं। कोई प्रिसिपल है, तो कोई रिटायर्ड अधिकारी। फैजल ने कहा कि जमीन में एसे बिठाकर रखे हैं, जैसे कोई चोर उच्चके और बड़े अपराधी हों। इन लोगों ने सुबह की दिनचर्या भी नहीं की, दवा नहीं मिली, नास्ता नास्ता नहीं किया। फैजल ने बताया कि कोई व्यक्ति विदेश जा रहा है, उसे अपने परिजनों से बात करने का अधिकार है। इनमें से कुछ ने लॉकडाउन से पहले, तो कुछ ने दो साल पहले बात किया था उन्हें भी पकड़ लाया। यह पूरी कार्रवाई असंवैधानिक है।