‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोंडागांव, 10 मई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर शनिवार को जिला न्यायालय परिसर कोंडागांव में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ रमेश सिन्हा ने वर्चुअल माध्यम से किया। इसके बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोंडागांव के अध्यक्ष खिलावन राम रिगरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर लोक अदालत की शुरुआत की।
लोक अदालत के लिए जिला न्यायालय कोंडागांव में तीन, तालुका विधिक सेवा समिति केशकाल में एक, तालुका विधिक सेवा समिति नारायणपुर में दो तथा राजस्व प्रकरणों के लिए कोंडागांव और नारायणपुर में एक-एक खंडपीठ का गठन किया गया। इस प्रकार कुल आठ खंडपीठों में मामलों की सुनवाई हुई।
लोक अदालत में राजीनामा योग्य मामलों, समरी प्रकरणों तथा प्री-लिटिगेशन मामलों का आपसी सहमति से निराकरण किया गया। नगरपालिका, विद्युत विभाग, दूरसंचार विभाग, बीमा कंपनियों और बैंकों से जुड़े मामलों का भी निपटारा किया गया।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आपराधिक मामलों के चार, चेक बाउंस के पांच, बैंक रिकवरी के 1237, ऋण वसूली के 251, मोटर दुर्घटना दावा के 18, ट्रैफिक चालान के 1615 और राजस्व से जुड़े 37,331 मामलों का निराकरण किया गया। इसके अलावा बिजली बिल के 1953, नगरपालिका के 853, दूरसंचार के 100, पारिवारिक विवाद के दो, मध्यस्थता के सात, सिविल का एक तथा अन्य श्रेणी के 30 मामलों का भी निपटारा हुआ।
मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों में 2 करोड़ 5 लाख 15 हजार रुपये, मध्यस्थता मामलों में 32 लाख 19 हजार 641 रुपये, चेक बाउंस मामलों में 7 लाख 33 हजार 348 रुपये तथा अन्य विभिन्न मामलों में राशि संबंधी अवार्ड पारित किए गए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार, सभी न्यायालयों और राजस्व न्यायालयों के माध्यम से कुल 43,407 प्रकरणों का निराकरण हुआ तथा कुल 2 करोड़ 57 लाख 23 हजार 206 रुपये का अवार्ड पारित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान जिला चिकित्सालय कोंडागांव की टीम ने स्वास्थ्य शिविर भी लगाया, जहां पक्षकारों की बीपी और शुगर जांच कर दवाइयां वितरित की गईं। साथ ही अधिकार मित्रों द्वारा जागरूकता के लिए लघु वीडियो भी दिखाए गए।
लोक अदालत में समझौते से प्रकरणों का निराकरण कराने वाले पक्षकारों को न्यायाधीशों द्वारा काजू, जामुन, आंवला और नींबू के पौधे भेंट किए गए। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी था।