‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 2 जनवरी। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित, छत्तीसगढ़ के गौरव और समकालीन हिंदी कविता के शिखर पुरुष विनोद कुमार शुक्ल के 89वें जन्मदिन के अवसर पर राजधानी रायपुर के वृंदावन हॉल में एक सादगीपूर्ण स्मरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्मरण विनोद जी – सब कुछ होना, बचा रहेगा शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत शाम 4 बजे हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक बिरादरी ने अपने प्रिय कवि को शब्दों, सुरों और स्मृतियों के माध्यम से याद किया।
कार्यक्रम में साहित्य जगत से जुड़े लेखक, कवि, संस्कृतिकर्मी और विनोद कुमार शुक्ल के आत्मीय जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने अपने-अपने संस्मरण साझा करते हुए उस कवि को याद किया, जिसने साधारण शब्दों में असाधारण संसार रचा।
इस अवसर पर डॉ. सुयोग पाठक, गजेंद्र साहू, सत्यम वर्मा, हेमंत यादव, ऋषिका दत्त, तमन्ना सिंह और रितु सेलट द्वारा विनोद कुमार शुक्ला की चयनित कविताओं का पाठ किया गया। कविताओं के साथ ढोलक पर गजमान नायक की संगत ने वातावरण को और जीवंत बना दिया। वहीं, सुप्रसिद्ध गायिका भारती सिंह ने कबीर भजन का सुमधुर गायन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों ने विनोद जी से जुड़े अपने निजी अनुभव साझा किए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्मरण आयोजन पूरी तरह सादगीपूर्ण रहा और आम जन के लिए खुला रखा गया, जिसमें हर आयु वर्ग के साहित्य प्रेमियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान देश–विदेश साहित्य क्षेत्र से जुड़े अनेक वरिष्ठ और युवा रचनाकारों ने विनोद कुमार शुक्ल से जुड़े अपने संस्मरण साझा किए। विशेष रूप से सिंगापुर से आईं साहित्यप्रेमी नीतू गुजराल सहित रमेश अनुपम, डॉ. सुमन मिश्रा, राजकुमार सोनी, जानवी पांडे, डॉ. सोम गोस्वामी, संकेत ठाकुर, राजीव बक्शी, विनोद वर्मा, आनंद हर्षुल, त्रिलोक महावर्स और पूर्व डीआईजी किशोर अग्रवाल ने विनोद जी के व्यक्तित्व, उनकी सादगी और रचनात्मक संवेदना को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल केवल कवि नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के ऐसे रचनाकार थे, जिनकी उपस्थिति मात्र से साहित्य जीवंत हो उठता था।
इस आयोजन का समन्वय छत्तीसगढ़ फिल्म एवं विजुअल आर्ट सोसाइटी द्वारा किया गया।
विनोद कुमार शुक्ल, जिनकी कविताएं, कहानियां और उपन्यास हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं, का निधन 23 जनवरी 2025 को रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में हुआ था। उनके 89वें जन्मदिन, 1 जनवरी 2026, पर आयोजित यह स्मरण कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि था, बल्कि उस संवेदनशील कवि के शब्दों को फिर से जीने का अवसर भी— जिनके लिए सब कुछ होना अभी बचा रह गया ।