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Date : 04-Oct-2019

तहसीलदार के आश्वासन के बाद भूख हड़ताल खत्म 

छत्तीसगढ़ संवाददाता
कुरूद, 4 अक्टूबर।
काम की मांग लेकर बगौद के मेगा फूड पार्क में भूख हड़ताल पर बैठे बंजारी के लोगों ने तहसीलदार द्वारा कार्रवाई का भरोसा दिलाए जाने के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया है। 

ज्ञात हो कि ग्राम बगौद के मेगा फूड पार्क सेक्टर1 में संघवी फूड प्रोडक्ट संचालित हो रही है। जहां स्थानीय लोगों को रोजगार देने के बजाय एमपी, यूपी, बिहार के लोगों को काम लिया जा रहा है और स्थानीय व क्षेत्रिय लोगों को कोई तवज्जो नहीं दिया जा रहा है।

जिससे नाराज होकर ग्राम बंजारी के हमाल, मजदूरों ने बुधवार की सुबह से संघवी फूड प्रोडक्टस के सामनें तंबू तानकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। इस दौरान कंपनी के कोई भी अधिकारी-कर्मचारी को न तो अंदर जाने दिया जा रहा है और न ही बाहर आनें दिया जा रहा था।

जिसकी जानकारी होने पर तहसीलदार भूपेन्द्र गावड़े, जनपद सीईओ श्री गोस्वामी, टीआई बिपिन लकड़ा रात्रि 8  बजे फूड पार्क पहुंचे। जहां उन्होनें हड़तालियों से चर्चा की और उद्योग विभाग के नीति अनुसार स्थानीय युवाओं को काम देने के संबंध में कार्रवाईका भरोसा दिलाया। जिसके बाद ग्रामीणों ने अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल स्थगित किया। पूर्व सरपंच अशोक महिलांग, धनीराम टंडन का कहना है कि अगर उनके गांव के लोगों को काम नहीं दिया गया तो दशहरा के बाद पुन: आंदोलन शुरू किया जायेगा।   

 


Date : 04-Oct-2019

संयुक्त शिक्षक संघ मांगों को ले कल सौंपेंगे ज्ञापन 

कुरूद, 4 अक्टूबर। संयुक्त शिक्षक संघ द्वारा प्रदेश भर में शिक्षक पंचायत एवं एल बी संवर्ग की विभिन्न समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम से ब्लाक के एसडीएम, जनपद सीईओ और बीईओ को कल ज्ञापन सौंपेगें। 

अध्यक्ष हुमन चन्द्राकर ने बताया कि समस्त पंचायत संवर्ग के शिक्षकों को शिक्षा विभाग में पूर्ण संविलियन पूर्व सेवा अवधि को जोडक़र समयमान क्रम्मोन्नत वेतन, दिवंगत शिक्षकों के आश्रितजन को नियम शिथिलता कर अनुकम्पा नियुक्ति, सहायक शिक्षक एल बी की वेतन विसंगती, विभागीय पदोन्नति स्वयं के व्यय पर बीएड डीएड धारियों को दो वेतन वृद्धि लंबित महंगाई भत्ता, महिला शिक्षको संतान पालन अवकाश का लाभ, ग्रीष्मकालिन अवकाश के 6 0 दिवस के आधार पर दिये जाने वाले अनुपातिक अर्जित अवकाश को 45 दिवस अवकाश के आधार पर 15 दिन का संचित अर्जित अवकाश प्रदान करना आदि समस्या को लेकर साढ़े 11 बजे शनिवार को ज्ञापन सांैपा जायेगा। 

 


Date : 04-Oct-2019

शास. महाविद्यालय में मनी गांधी-शास्त्री जयंती

खरोरा, 4 अक्टूबर। शास. महाविद्यालय में गांधी-शास्त्री जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम आरंभ से पूर्व कार्यक्रम अधिकारी डॉ. बाल्मीकि साहू रासेयो के स्वयं सेवकों के साथ महाविद्यालय परिसर एवं शौचालय की सफाई कर स्वच्छता के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन किए। 

कार्यक्रम का आरंभ मुख्य अतिथि नीलेश गोयल, अध्यक्ष प्राचार्य डॉ आर के दुबे एवं घृतलहरे सर, सी बी धुरंधर, आर के वर्मा, डॉ चंद्रसेन, प्राध्यापकों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। सभी अतिथियों का गुलाल लगाकर अभिनंदन किया गया।  छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढक़र कार्यक्रम में भाग लेते हुए गांधीजी के जीवनादर्शों, विचारों पर क्रमबद्ध विचार रखे। 

संस्था प्रमुख प्राचार्य डॉ. आर के दुबे ने कहा कि यह वर्ष गांधीजी की 150वीं जयंती वर्ष ही नहीं है, अपितु गांधीजी की सहयोगियों में महत्त्वपूर्ण उनकी सहधर्मिणी कस्तूरबा गांधी का भी 150वीं जयंती वर्ष है। जय जवान जय किसान का नारा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को भी स्मरण किया गया। 
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. बाल्मीकि साहू ने सभी मंचस्थ अतिथियों का आभार जताया।

 


Date : 04-Oct-2019

कंडेल सत्याग्रह के प्रणेता के परिजनों से की सीएम ने चर्चा

छत्तीसगढ़ संवाददाता
धमतरी, 4 अक्टूबर।
प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज धमतरी जिले के गौरव ग्राम कण्डेल में कंडेल नहर सत्याग्रह के प्रणेता बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के घर जाकर उनके परिजनों से भेंट की। मुख्यमंत्री ने बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के पैतृक घर पर उनके तथा महात्मा गांधी के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री बघेल ने बाबू छोटे लाल के प्रपौत्र यतीश श्रीवास्तव से भेंटकर उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि के संबंध में चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री एवं अन्य कैबिनेट मंत्रियों ने चना मुर्रा का लुफ्त उठाया। इस अवसर पर प्रदेश के उद्योग मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा, कैबिनेट मंत्री जयसिंह अग्रवाल, प्रेमसाय सिंह, विधायक मोहन मंडावी उपस्थित रहे। 


Date : 04-Oct-2019

धन्यधरा धमतरी, जहां गांधी ने दो बार जाकर किया था अंग्रेजों के खिलाफ शंखनाद, कंडेल के किसानों की आवाज दिल्ली तक पहुंची थी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर विशेष

ताराशंकर सिन्हा
धमतरी, 4 अक्टूबर।
इतिहास के पन्नों में वही नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज होते हैं जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस का साथ नहीं छोड़ते। आज जिले का रूप ले चुका धमतरी कभी तहसील हुआ करता था, जहां के भोले-भाले किसानों ने अंग्रेजों के तानाशाही रवैए के विरूद्ध आवाज बुलंद की थी। यहां तक कि इसकी गूंज दिल्ली तक भी पहुंची, जिसके बाद भारतीय राष्ट्रीय आंदोलनों के अग्रचर, पुरोधा और राष्ट्र के गौरव महात्मा गांधी यहां आना पड़ा, वह भी एक नहीं, दो-दो बार..। सम्पूर्ण भारतवर्ष के कोने-कोने में क्रांति की ज्वाला धधक रही थी, तब तत्कालीन सेंट्रल प्रॉविन्स एण्ड बरार प्रांत के रायपुर जिले की धमतरी तहसील भी इससे अछूती नहीं रही। पंडित सुन्दरलाल शर्मा, नारायणराव मेघावाले, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, नत्थूजी जगताप जैसे मूर्धन्य प्रणेताओं ने स्वतंत्रता आंदोलनों में अपनी सहभागिता दी। धमतरी के दो बड़े आंदोलनों ने पूरे राष्ट्र का ध्यानाकृष्ट किया, जिनमें वर्ष 1920 में कण्डेल नहर सत्याग्रह और 1933 में सविनय अवज्ञा आंदोलन शामिल हैं। इन दोनों आंदोलनों का उल्लेख किए बिना धमतरी के स्वर्णिम इतिहास की जानकारी अधूरी रह जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दोनों ही आंदोलनों के दौरान अपने पुण्य-पग धमतरी में धरे, जिसके चलते धमतरी को राष्ट्रपटल पर बड़ी पहचान मिली।  
ब्रिटिश हुकूमत के दौर में जब फिरंगी और उनकी नीतियों की मुखालफत करने की किसी में हिम्मत नहीं होती थी, ऐसे में धमतरी के ग्राम कण्डेल के किसानों ने बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के नेतृत्व में अंग्रेजों की दमन नीति के विरूद्ध नहर सत्याग्रह छेड़ा। यह तब की बात है, जब गुजरात के विख्यात बारदोली आंदोलन ने अंगड़ाई भी नहीं ली थी।

तत्कालीन तहसील मुख्यालय धमतरी से पूर्व दिशा की ओर 18 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम कण्डेल बसा है। बिटिश शासनकाल में महानदी नहर योजना के तहत सन् 1912-15 में रूद्री बैराज का निर्माण किया गया था, जहां से नहर-नालियों के जरिए आसपास के गांवों में फसलों के लिए सिंचाई सुविधा दी जाती थी। सिंचाई विभाग के अधिकारी उक्त नहर से खेतों में पानी देने के लिए किसानों से दस वर्ष का अनुबंध करना चाहते थे। अनुबंध की राशि अधिक होने के चलते किसान इसके लिए कतई तैयार नहीं थे, क्योंकि इतनी भारी-भरकम राशि से एक बड़ा तालाब बनाया जा सकता था। करारनामा से इंकार करने से बौखलाए सिंचाई अधिकारी अगस्त 1920 में नहर को काटकर पानी खेतों में बहा दिया। संयोगवश उसी दिन क्षेत्र में भारी बारिश हुई। उल्टे अधिकारियों ने गांववालों पर नहर काटकर पानी चोरी करने का आरोप लगाते हुए कण्डेल के ग्रामीणों पर 4 हजार 304 रूपए का जुर्माना थोप दिया। (आज के समय में यह राशि लाखों रूपए में आंकी जा सकती है)। उक्त जुर्माना राशि को वसूलने अंग्रेज अधिकारी तरह-तरह के हथकण्डे अपनाने शुरू कर दिए। ऐसे में सीधे-सादे ग्रामीणों का साथ देने गांव के मालगुजार बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव उनका साथ देने आगे आए। उन्होंने इसका शांतिपूर्वक विरोध करते हुए इसे नहर सत्याग्रह का नाम दिया। 

सितम्बर 1920 में ग्रामवासियों और धमतरी तहसील के प्रमुख नेताओं की बैठक कण्डेल में जिसमें बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के अलावा पंडित सुंदरलाल शर्मा, नारायणराव (फडऩवीस) मेघावाले आदि नेताओं ने सत्याग्रह के साथ ब्रिटिश नौकरशाही का विरोध करने का निर्णय लिया। जुर्माना राशि की वसूली नहीं होते देख किसानों की चल-अचल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश विभाग के अधिकारियों ने दिया। इसके बाद किसानों के सभी मवेशियों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें नीलाम करने का असफल प्रयास हुआ। पहले धमतरी शहर के बैला बाजार में बोली लगाने की कोशिशें हुईं, जिसमें देशभक्त व उत्साही लोगों ने नीलाम में हिस्सा लेना तो दूर, बाजार के आसपास भी नहीं गए। इससे लज्जित ब्रिटिश शासन के कर्मचारी भूखे-प्यासे मवेशियों को क्रमश: मगरलोड, भेण्डरी, कुरूद सहित आसपास के बड़े बाजारों में घुमाते रहे। रायपुर जिला ही नहीं, जिले के बाहर दुर्ग, भाठापारा के मवेशी बाजारों में भी नीलाम के लिए लेकर गए, लेकिन सत्याग्रही किसानों एवं नेताओं के निवेदन पर कोई भी व्यक्ति नीलामी को तैयार नहीं हुआ। इस दौरान भूख-प्यास के मारे कुछ मवेशियों ने दम तोड़ दिया। नीलामी नहीं होने की हताशा व खीझ में ब्रिटिश सरकार ने इसके बाद दमनचक्र अपना शुरू किया। बाबू छोटेलाल और उनके चचेरेभाई लालजी श्रीवास्तव गिरफ्तार कर लिए गए। इसके बाद भी ग्रामीणों ने सत्याग्रह जारी रखा। इसी बीच केन्द्रीय नेतृत्व को आमंत्रित करने के लिए पंडित सुन्दरलाल शर्मा और नत्थूजी जगताप दिसम्बर 1920 में कलकत्ता गए तथा गांधी जी को इसमें हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। इसे बापू ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। इधर गांधी जी के छत्तीसगढ़ आने की खबर लगते ही रायपुर के डिप्टी कमिश्नर को वस्तुस्थिति की जांच के लिए 19 दिसम्बर को कण्डेल भेजा गया, जहां जांच के बाद आरोप को बेबुनियाद पाया गया। अंतत: अंग्रेजी हुकूमत बैकफुट पर जुर्माने की राशि माफ करने का निर्णय लिया। इस प्रकार गांधी जी के आगमन के पूर्व ही ब्रिटिश शासन ने घुटने टेक दिए। इसके बावजूद किसानों ने अपना आंदोलन जारी रखा।

गांधी के स्वागत में उमड़ा धमतरी
जाते-जाते कहा-धमतरीवासी चम्पारण के लोगों से अधिक जागरूक हैं। इधर महात्मा गांधी 20 दिसम्बर 1920 को ट्रेन से मौलाना शौकत अली के साथ रायपुर पहुंचे, फिर 21 दिसम्बर को धमतरी में आगमन हुआ। नगर के प्रवेश द्वार मकईबंद चैक (वर्तमान घड़ी चैक) पर उनके पहुंचते ही पूरा इलाका जय हिन्द, भारतमाता की जय, वंदे मातरम् और महात्मा गांधी की जय जैसे देशभक्ति नारों से गूंज उठा। सुबह से सडक़ के दोनों ओर हजारों की तादाद में स्त्री-पुरूषों ने पुष्पवर्षा करते हुए उनका स्वागत किया। सभा की व्यवस्था स्थानीय जानू हुसैन के बाड़े में की गई थी। भीड़ की अधिकता के चलते गांधी जी का सभा स्थल तक पहुंचना संभव नहीं था, ऐसे में पुरूर के उमर सेठ नामक कच्छी व्यापारी ने उन्हें अपने कंधे पर बिठाकर सभा स्थल तक पहुंचाया। इसी जगह पर स्थानीय मालगुजार बाजीराव कृदत्त ने उन्हें 501 रूपए की थैली भेंट की। इस दौरान गांधीजी ने अपने भाषण में कण्डेल नहर सत्याग्रह की अहिंसापूर्वक अभूतपूर्व जीत की बधाई देते हुए भविष्य में भी इसी राह पर चलते की इच्छा जताई। धमतरी की राजनैतिक गतिविधियों की जानकारी लेते हुए कहा कि यहां पर चम्पारण के लोगों से कहीं अधिक जागरूकता देखने को मिली है। इस बात को उन्होंने रायपुर में आयोजित आमसभा में भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया। गांधीजी के संबोधन के बाद धमतरी के मालगुजार दाऊ डोमार सिंह नंदवंशी, सेठ हंसराज तेजपाल, किशनगिरी गोसाईं, रघुनाथराव जाधव, सेठ मोहनलाल मुंशीलाल, वीरजी भाई राजपुरिया, मोहम्मद अब्दुल करीम, छोटेलाल दाऊ, अब्दुल हकीम वकील, सेठ उस्मान अब्बा, भानजी भाई ठेकेदार एवं बदरूद्दीन मालगुजार ने उनसे संक्षिप्त भेंट की। इस प्रकार छत्तीसगढ़ ही नहीं, भारतवर्ष के राष्ट्रीय आंदोलनों के इतिहास में धमतरी के कण्डेल नहर सत्याग्रह ने प्रमुख से स्थान बना लिया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान गांधीजी का 1933 में धमतरी पुनरागमन
कण्डेल नहर सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी का धमतरी आगमन हुआ था, तदुपरांत सविनय अवज्ञा आंदोलन दौरान धमतरी की जमीन पर उनका पुनरागमन हुआ था। नवम्बर के तीसरे सप्ताह में गांधीजी छत्तीसगढ़ आए। इसी क्रम में 24 नवम्बर 1933 को सुबह आठ बजे वे रायपुर से धमतरी मोटर से पहुंचे। उनके साथ मीराबेन, ठक्कर बापा, महादेव देसाई और जमनालाल बजाज की पुत्री भी थीं। गांधीजी के नगर आगमन के अवसर पर मकईबंद चैक पर नारायणराव मेघावाले तथा नगरपालिका परिषद की ओर से नत्थूजी जगताप ने पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया। तदुपरांत दाजी मराठी कन्या शाला में विशाल सभा को संबोधित किया। तत्पश्चात् बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के धमतरी स्थित निवास के सामने महिलाओं की सभा को संबोधित किया, जिसके बाद महिलाओं ने जेवर के तौर पर पहने हुए सोने-चांदी के अपने आभूषणों को उतारकर स्वेच्छा से गांधीजी को आंदोलन को गति देने व अछूतोद्धार के लिए भेंट की। इनमें यशोदाबाई कृदत्त और सावित्री बाई देवांगन प्रमुख थीं। तदुपरांत गांधी जी की तीसरी सभा नगरपालिका स्कूल प्रांगण में हुई। यहां पर मालगुजार खम्हनलाल साव ने उन्हें सिक्कों व रूपयों से भरी थैली का गुप्तदान किया, जबकि नगरवासियों की ओर से नारायणराव मेघावाले ने 501 रूपए की थैली भेंट की। स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति नगरवासियों की निष्ठा को देखकर गांधी ने कहा- यह तहसील भारत की दूसरी बारदोली है..।

आंदोलन के साथ-साथ गांधीजी यहां अछूतोद्धार में भी संलग्न रहे। धमतरी के चरण सतनामी, बिशाल सतनामी और लालाराम सतनामी ने गांधीजी से भेंटकर अपने साथ मोहल्ले में चलने का आग्रह किया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। मोहल्ले की स्वच्छता देखकर वे प्रभावित हुए और साफ-सफाई को आगे भी बनाए रखने की बात मोहल्लावासियों से कही। इस दौरान गांधीजी के दोपहर के भोजन की व्यवस्था समाज के मुखिया चरण सतनामी ने की थी। दोपहर तीन बजे के बाद गांधीजी नवापारा-राजिम के लिए रवाना हुए।

इस आंदोलन के पहले भी वर्ष 1930 में धमतरी तहसील के राष्ट्रभक्तों ने अनेक सत्याग्रह व आंदोलन में हिस्सा लिया। इनमें गट्टासिल्ली सत्याग्रह (जून-1930), रूद्री-नवागांव जंगल सत्याग्रह (अगस्त-1930) का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। जंगल सत्याग्रह के दौरान मींधु कुम्हार की मृत्यु हो गई थी, जबकि धारा-144 के दौरान 27 लोगों को अर्थदण्ड और 23 आंदोलनकारियों को छह माह का कारावास (इनमें श्री मेघावाले को एक वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी) से भी दण्डित किया गया था। इस प्रकार राष्ट्रीय आंदोलनों के दौरान धमतरी के देशभक्तों ने प्रत्येक गतिविधि में बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। गांधी जी का दो बार नगर आगमन ने इसे और भी ऐतिहासिक व गौरवपूर्ण बना दिया।