सिम्स में कार्यशाला
छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 18 दिसंबर। महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी उपचार को लेकर सिम्स अस्पताल में एक दिवसीय निरंतर चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यशाला रखा गया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी नवीनतम चिकित्सकीय जानकारियों से अपडेट करना रहा।
कार्यशाला में देशभर से जुड़े विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सर्वाइकल कैंसर के कारणों, जोखिम कारकों और शुरुआती लक्षणों पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने पैप स्मीयर, एचपीवी टेस्ट जैसी आधुनिक जांच तकनीकों और उपलब्ध उपचार विधियों की जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसरों में शामिल है, लेकिन नियमित जांच और समय पर पहचान से इसकी प्रभावी रोकथाम संभव है।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि एचपीवी टीकाकरण, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और नियमित चिकित्सकीय परामर्श से सर्वाइकल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। कार्यशाला के दौरान प्रश्नोत्तरी सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 200 प्रतिभागी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े, जबकि छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के चिकित्सक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट वक्ता डॉ. सुप्रिता नायक (जीएमसी, नागपुर) द्वारा “सर्वाइकल कैंसर के ग्लैंडुलर लीजन” विषय पर व्याख्यान से हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मधूमिता मूर्ति, अधिष्ठाता सिम्स रहीं। आयोजन अध्यक्ष डॉ. भानू प्रताप सिंह, विभागाध्यक्ष पैथोलॉजी सिम्स बिलासपुर एवं चिकित्सा अधीक्षक सह-संयुक्त संचालक के.एस.एस.डी. एस.जे.जे. शासकीय सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कोनी रहे।
आयोजन सह-अध्यक्ष डॉ. साधना बागड़े तथा आयोजन सचिव डॉ. चित्रांगी पी. बरपाण्डेय ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आयोजन में डॉ. ज्योति पोते, डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय सिंह, डॉ. आकृति शर्मा, डॉ. रश्मि नायक, डॉ. मनोज क्षत्री, डॉ. ईशान साहू, डॉ. रश्मि साहू, डॉ. नागेन्द्र साहू, डॉ. प्रभाकर प्रधान, डॉ. सौम्य रंजन, डॉ. प्रशांत ठाकूर, डॉ. असीम आनंद मसीह, डॉ. मुकुन्द शर्मा सहित सभी पीजी विद्यार्थियों का उल्लेखनीय योगदान रहा।