बिलासपुर
पुलिस ने मां को लिया था हिरासत में, बिचौलिया फरार
'छत्तीसगढ़' संवाददाता
बिलासपुर, 23 फरवरी। तखतपुर क्षेत्र के चना डोंगरी की रहने वाली उर्वशी श्रीवास ने अपने पति की मौत को सर्पदंश बताकर शासन से चार लाख रुपये की सहायता राशि ले ली। बाद में जांच में खुलासा हुआ कि पति की मौत बीमारी से हुई थी। कलेक्टर के निर्देश पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ। इसी बीच पूछताछ के लिए थाने बुलाए जाने के बाद महिला के बेटे ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
उर्वशी के पति की मौत वर्ष 2022 में हुई थी। परिवार ने उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया था। कुछ समय बाद महिला ने तहसील कार्यालय में आवेदन देकर बताया कि उनके पति की मौत सांप के काटने से हुई है।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसे चार लाख रुपये की राहत राशि मिल गई।
कलेक्टर ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई। रिपोर्ट में साफ हुआ कि मौत बीमारी से हुई थी, न कि सर्पदंश से। इसके आधार पर तहसीलदार ने तखतपुर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया।
बताया जा रहा है कि फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जाली हस्ताक्षर और अन्य कागज तैयार कराए गए थे। इससे शक है कि इसमें किसी गिरोह का हाथ हो सकता है।
शुक्रवार शाम पुलिस ने उर्वशी को बयान के लिए बुलाया। वह अपने बेटे कमलेश के साथ थाने पहुंची। मां को छोड़कर बेटा घर लौट गया। कुछ देर बाद उसने घर में फांसी लगा ली।
परिजनों ने डायल 112 और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पूछताछ में महिला ने बताया कि पति की मौत के कुछ दिन बाद एक बिचौलिया उसके संपर्क में आया था। उसने मुआवजा दिलाने का लालच दिया और आधी रकम खुद लेने की बात कही। महिला ने उसके कहने पर दस्तावेजों में हस्ताक्षर कर दिए।
अब पुलिस उस बिचौलिए की तलाश कर रही है। माना जा रहा है कि उसके पकड़े जाने पर और नाम सामने आ सकते हैं।


