‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 15 मार्च। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जिले में वर्ष 2026 के प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन शनिवार को किया गया, जिसमें हजारों प्रकरण का निराकरण किया गया।
अब्दुल जाहिद कुरैशी, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार के मार्गदर्शन में अमिता जायसवाल सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार के द्वारा जिला बलौदाबाजार में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के द्वारा दीप प्रज्जवलन कर किया गया, जिसमें समस्त न्यायाधीशगण, कर्मचारीगण, स्वास्थ्य विभाग एवं पुलिस विभाग के अधिकारी कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
सबसे हर्ष की बात यह रही कि उपस्थित पक्षकारों के द्वारा भी पूजा-अर्चना कर नेशनल लोक अदालत में सक्रिय सहभागिता ली गई। जिला एवं सत्र न्यायालय एवं व्यवहार न्यायालय भाटापारा, सिमगा, कसडोल में खण्डपीठ का गठन किया गया- अब्दुल जाहिद कुरैशी, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, राजभान सिंह, कुटुम्ब न्यायालय के न्यायाधीश, राकेश कुमार वर्मा, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, विवेक गर्ग, तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, सतीश कुमार जायसवाल, अपर सत्र न्यायाधीश भाटापारा, गिरिश पाल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रशांत भास्कर, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, सारिका नंदे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, श्वेता मिश्रा, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कसडोल, योगिता जांगड़े, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सिमगा, अंकिता गुप्ता एवं अंकिता अग्रवाल, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी भाटापारा की खण्डपीठ थी। साथ ही राजस्व न्यायालयों में भी खण्डपीठ का गठन किया गया था।
कुटुम्ब न्यायालय बलौदाबाजार में गठित खण्डपीठ, पीठासीन अधिकारी राजभान सिंह के द्वारा 20 प्रकरणों का निराकरण किया गया। कुटुम्ब न्यायालय के खण्डपीठ के अधिकारी के प्रयासों से एक ऐसा मामला निराकृत हुआ, जिसमें पिता ने अपने नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा प्राप्त करने हेतु प्रकरण प्रस्तुत किया था।
पीठासीन अधिकारी के द्वारा पक्षकारों को समझाया गया, जिसमें पक्षकार एक साथ जीवन यापन करने और नाबालिग बच्चे के भरण पोषण के लिए तैयार हो गए, जिससे उनका दांपत्य जीवन पुन: स्थापित हो गया।
इसी खण्डपीठ का दूसरा सराहनीय पारिवारिक मामला निराकृत हुआ, जिसमें पत्नी ने अपने पति के विरूद्ध भरण पोषण का आवेदन लगाया था, जिसमें पीठासीन अधिकारी के द्वारा समझाइश दी गई, जिसके परिणाम स्वरूप पक्षकार दाम्पत्य जीवन में रहने के लिए तैयार हो गए। इस प्रकार मामला निराकृत हुआ।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अब्दुल जाहिद कुरैशी के खण्डपीठ में लोक अदालत के कार्यवाही के दौरान एक ऐसा मामला आया, जिसमें पक्षकार किसी कारणवश न्यायालय में उपस्थित नहीं हो पाये। मोटर दावा दुर्घटना प्रकरण संतोषी वगै. वि. देवेन्द्र वगै. में मामले का राजीनामा होना था।
न्यायाधीश के द्वारा त्वरित रूप से विडियों कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से ग्राम गिंदौला, लाहौद से पक्षकारों से जुड़े और बातचीत की गई जिसमें बीमा कम्पनी और पक्षकारां के मध्य 22,00,000/- बाईस लाख रूपये मात्र का समझौता हुआ।
जिला बलौदाबाजार में न्यायालय में लंबित प्रकरण, ट्रैफिक चालान, अन्य पीटी अफेंस एवं राजस्व न्यायालयों सहित कुल 41074 प्रकरण रखे गये थे जिसमें से 40296 प्रकरण का निराकरण किया गया है।
नेशनल लोक अदालत में उपस्थित पक्षकारों के लिए जिला मुख्यालय बलौदाबाजार के साथ-साथ व्यवहार न्यायालय सिमगा, भाटापारा एवं कसडोल में नि: शुल्क चिकित्सा जांच की व्यवस्था की गई थी। नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच में जिला अस्पताल बलौदाबाजार की सहभागिता रही है, साथ ही विशेष सहभागिता चंदा देवी तिवारी अस्पताल की रही है जिनकी पूरी टीम ने उपस्थित होकर नि:शुल्क दवाईयों का वितरण एवं पक्षकारों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसका लाभ पक्षकारों को प्राप्त हुआ।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं समस्त न्यायाधीशगण के द्वारा स्वास्थ्य जांच का लाभ लिया गया। नेशनल लोक अदालत की सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन के द्वारा इस वर्ष भी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।