‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 29 नवंबर। जिला अस्पताल की इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (आईपीएचएल) को भारत सरकार के नेशनल क्वॉलिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्यूएएस) के तहत गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है। जिले के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस प्रमाणन के लिए लैब को जांच प्रक्रियाओं, साफ-सफाई, बायोसेफ्टी, रिपोर्टिंग समय, स्टाफ दक्षता, उपकरण प्रबंधन और डेटा मैनेजमेंट जैसे मापदंडों पर जांच की गई।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह प्रमाणन सरकारी लैबों को निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य करने पर दिया जाता है। बलौदाबाजार की लैब देश में इस श्रेणी में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली लैब बताई जा रही है। प्रथम स्थान पंडरी जिला अस्पताल, रायपुर की लैब को मिला है।
लैब का निरीक्षण और कार्यप्रणाली
जिला अस्पताल का दौरा कर इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब की व्यवस्थाओं, सैंपलिंग प्रक्रिया और रिपोर्टिंग सिस्टम की जानकारी ली गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, लैब का संचालन तकनीशियनों, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और प्रबंधन की संयुक्त जिम्मेदारी है।
प्रतिदिन लगभग 1000-1200 जांचें की जाती हैं। लैब में 100 से अधिक प्रकार के परीक्षण उपलब्ध हैं। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, रिपोर्ट तैयार करने की अवधि कई जांचों में कम है, जिससे मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध हो पाता है।
लैब की प्रमुख इकाइयां
1. सैंपल कलेक्शन सेंटर
सैंपल बारकोड प्रणाली के माध्यम से दर्ज किए जाते हैं, जिससे सैंपल ट्रैकिंग सुनिश्चित होती है।
2. बायोकैमिस्ट्री सेक्शन
शुगर, यूरिक एसिड, किडनी-लिवर प्रोफाइल जैसे परीक्षण मशीन आधारित प्रक्रिया से किए जाते हैं।
3. माइक्रोबायोलॉजी यूनिट
इस इकाई में बैक्टीरिया कल्चर, सेंसिटिविटी टेस्ट और संक्रमण से संबंधित परीक्षण होते हैं।
4. रिपोर्ट कंट्रोल रूम
रिपोर्टें डिजिटल रूप से तैयार की जाती हैं और प्रतिमाह गुणवत्ता ऑडिट किया जाता है।
एनक्यूएएस प्रमाणन प्रक्रिया
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश अवस्थी ने बताया कि एनक्यूएएस प्रक्रिया में ‘ए से एच’ तक चेकलिस्ट के माध्यम से जांच होती है। उनके अनुसार, वेल्लोर की लैब से भेजे गए सैंपलों की जांच कर रिपोर्ट भेजी गई थी, जिनकी सत्यता की पुष्टि मिलने के बाद लैब को प्रमाणन दिया गया।
लैब में कार्यरत तकनीशियन स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के अनुसार कार्य करते हैं। निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई, बायोवेस्ट प्रबंधन, मशीनों की स्थिति, स्टाफ प्रशिक्षण, डेटा रिकॉर्ड तथा रिपोर्ट जारी करने की समयसीमा का परीक्षण किया गया।
जांच सुविधाएं
हमर लैब में 103 जांचें उपलब्ध हैं। इनमें आरएफटी, एलएफटी, लिपिड प्रोफाइल, सीबीसी, ब्लड कल्चर, यूरीन कल्चर, मलेरिया और टीबी की जांच शामिल है। पहले इनमें से कुछ जांचें जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं।
तकनीशियनों ने बताया:
गोपी किशन, आईपीएचएल तकनीशियन-टेस्टिंग से पहले क्वॉलिटी कंट्रोल किया जाता है।
लक्ष्मीनारायण आजाद, एमएलटी-सैंपल को प्रोसेस कर 20-30 मिनट में रिपोर्ट तैयार हो जाती है।
राकेश बंजारे, लैब इंचार्ज-लैब में रोज 1000 से अधिक जांचें होती हैं और मशीनें ऑटोमेटेड हैं।
मरीजों के अनुभव
तुकेश यादव- सीबीसी रिपोर्ट कम समय में मिली और प्रक्रिया समझाई गई।
छोटू-लिवर-किडनी टेस्ट मुफ्त में हो गए और रिपोर्ट व्हाट्सऐप से मिली।
गोविंद पटेल-लिपिड प्रोफाइल और यूरिक एसिड की जांच बिना शुल्क के हुई।
लैब में उपकरणों का अपग्रेडेशन, बायोसेफ्टी और सफाई व्यवस्था का पालन किया जा रहा है। प्रत्येक बैच की जांच के साथ गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया अपनाई जाती है। सभी कार्य डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से संचालित हैं।
रिसेप्शन और पंजीयन से जुड़े कर्मियों नंदिनी साहू और सुमन साहू ने प्रक्रिया की जानकारी दी कि सैंपलिंग और बारकोड पंजीयन के माध्यम से जांच आगे बढ़ाई जाती है।
मरीजों के लिए लाभ-जांच नि:शुल्क, रिपोर्ट समय पर उपलब्ध, दूरस्थ निजी जांच केंद्रों पर निर्भरता में कमी, शुरुआती निदान में सुधार।
सीएमएचओ डॉ. अवस्थी के अनुसार, कई परीक्षण अब जीवनदीप समिति के माध्यम से आउटसोर्स कर नि:शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। रिपोर्टिंग को व्हाट्सऐप और ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आईपीएचएल का एनक्यूएएस प्रमाणित होना जिले के लिए उपलब्धि है और यह दर्शाता है कि सरकारी लैबें निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य कर सकती हैं।