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24-Sep-2020 9:00 PM

रायपुर, 24 सितंबर। स्वास्थ्य चेतना विकास समिति छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तथा राज्य कर्मचारी संघ के पूर्व प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने कोरोना संक्रमण के विषम परिस्थितियों में वर्तमान में राज्य में चल रहे प्रदेश व्यापी एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मियों के आंदोलन पर छत्तीसगढ़ शासन को सुझाव दिया कि वे इनके लिए भी शिक्षा कर्मियों के नियमितीकरण की भांति नीति अपनाकर कार्य योजना तैयार करें और सेवा सुरक्षा ग्रारंटी के साथ सेवा  को नियमित करने का टाइम बाउंड कार्यक्रम घोषित कर मामले पर कर्मचारी नेताओं के साथ चर्चा कर सुलझाने का रास्ता निकाल सकते हैं एवं विधानसभा चुनाव के पहले किए अपने किए गए वायदे पर खरा उतरने का दावा कर सकेंगे। 

उन्होंने  बताया है कि सभी संविदा कर्मचारी को उनकी योग्यता के आधार पर पात्रता अनुसार विभाग ने विभिन्न पदों पर कई वर्ष पहले नियुक्त किया है और अब सरकार के लिये यह बेहतरीन अवसर है कि उन्हें योग्य और अनुभवी कर्मचारी बैठे ठाले मिल जा रहा हैं।

 


24-Sep-2020 9:00 PM

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 24 सितंबर। प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी पीएल पुनिया ने केन्द्र सरकार के कृषि संशोधन बिल की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ये अध्यादेश तो कॉरपोरेट के हितों की तरफ पूरी तरह झुके हुए हैं। श्री पुनिया ने भाजपा नेताओं के उस बयान को गलत बताया जिसमें यह कहा गया कि कांग्रेस ने भी अपने घोषणा पत्र में बिल से जुड़े बिंदुओं को शामिल किया था। प्रदेश प्रभारी ने कहा कि अगर भाजपा को कांग्रेस का घोषणा पत्र इतना पसंद आ रहा है, तो इसकी सभी बातों को लागू करें। कृषि व्यवस्था में सुधार करें। देश के किसानों को मजबूत बनाए, न कि उन्हें कमजोर करने की कोशिश हो।

श्री पुनिया ने वर्चुअल प्रेस कॉफ्रेंस में कहा कि किसानों को खाद, बीज, कीटनाशक दवाई और डीजल पर सब्सिडी देने का जिक्र कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किया था। भाजपा को घोषणा पत्र इतना ही पसंद आ रहा है, तो इसकी सभी बातों को लागू करें।  उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाये गये बेहद खतरनाक किसान विरोधी कानून कभी भी कांग्रेस घोषणापत्र का हिस्सा नहीं थे।

श्री पुनिया ने कहा कि कांग्रेस कृषिव्यापार को सभी बंदिशों से मुक्त करने का वादा था लेकिन हम ये काम किसानों की सुरक्षा के लिए पाँच प्रमुख सुरक्षा कवच तैयार करने के बाद ही करने के पक्ष में हैं। ये पांचों बातें हमारे मैनिफेस्टो में साफ-साफ लिखी हुई है। अभी एक मंडी औसतन साढ़े चार सौ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रको कवर करती है। हमारा वायदा इसे समाप्त कर हर प्रमुख गांव में किसान बाजार तैयार करने का था। इसका अध्यादेश में यह प्रावधान नहीं हैं?

प्रदेश प्रभारी ने कहा कि हमने वायदा किया था कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए कृषि आयात और निर्यात की एक विशेष पॉलिसी तैयार की जाएगी। मगर मोदी सरकार के अध्यादेश तो कॉरपोरेट के हितों की तरफ पूरी तरह झुके हुए हैं। ऐसा वायदा इसलिए किया था क्योंकि अभी के सिस्टम में किसानों की राय को मानना अनिवार्य नहीं है। उनकी राय को नकारा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच हमारी न्याय योजना थी, जिसमें हमने देश की 20फीसदी सबसे गरीब परिवारों को बहत्तर हजार रुपया सालाना देने का वायदा किया था और वो गरीब 20 फीसदी परिवार कौन से हैं? ये छोटे किसान और खेतिहर किसानों के परिवार ही तो हैं। हमारी योजना थी कि 72 हजार रुपया की इनकम गारंटी किसानों कोखुले कृषि व्यापार से होने वाले किसी भी नुकसान के खिलाफ गारंटी होगी।

श्री पुनिया ने कहा सुरक्षा कवच खाद्य सुरक्षा कानून को ठीक से लागू करना था। यदि इस कानून को ठीक से लागूकिया जाता है तो किसानों से सरकारी खरीद बहुत बढ़ जाएगी। लेकिन मोदी सरकार तो इसे उल्टा कमजोर करने की तैयारी में है। उन्होंने चुनौती दी कि किसान को नुकसान पंहुचाने वाले इन कानून से पहले कांग्रेस द्वारा घोषित इस कार्ययोजना को लागू कर किसानों की सुरक्षा के समुचित प्रावधान करे।

 

 

 


24-Sep-2020 8:59 PM

रायपुर, 24 सितंबर। मैट्स यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज ने टैलेंट मैनेजमेंट पर एक ऑनलाइन इंटरेक्टिव सत्र का आयोजन किया और कैसे मैट्स यूनिवर्सिटी के सभी सेमेस्टर के छात्र जीवन में सफल हो सकते हैं सत्र दिलीप मोहंती- नेको जायसवाल इंडस्ट्रीज रायपुर द्वारा लिया गया

सत्र में विशेषज्ञ वक्ता ने सभी प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डाला कि कैसे एक युवा अपनी प्रतिभा का प्रबंधन कर सकता है और वे सफलता के लिए अपने प्रयासों को कैसे निखार कर सकते हैं, स्पीकर ने छात्रों को मानसिक प्रेरणा के लिए नैतिक कहानियां सुनाई और बड़ी प्रसिद्ध हस्तियों के विभिन्न जीवंत उदाहरणों पर प्रकाश डाला कैसे उन्होंने संघर्ष की शुरुआत  और सफल हो गए और उन्होंने अपने मूल्यवान अनुभवों को भी साझा किया।

सत्र की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ उमेश गुप्ता ने की और कुलाधिपति मैट्स यूनिवर्सिटी गजराज पगारिया, ऊप कुलपति डॉ.दीपिका ढांड,महानिदेशक प्रियेश पगारिया और कुलसचिव गोकुलानंद पंडा ने आभार व्यक्त किया और विभाग को इंटरएक्टिव सत्र आयोजित करने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।

सत्र में विभिन्न विभागों के सभी संकाय के प्राध्यापकों के साथ-साथ विभिन्न पाठ्यक्रमों के सभी छात्र उपस्थित थे और प्रश्नकाल सत्र के साथ वार्ता सत्र का समापन हुआ।

 


24-Sep-2020 8:58 PM

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 24 सितंबर। सुराजी गांव योजना के तहत बनाये गये गौठान अब ग्रामीणों के आजीविका  के केंद्र बनने लगे हैं गौठान छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले के  दुर्गूकोंदल विकासखंड के ग्राम पंचायत भंडारडिगी के आश्रित ग्राम गौठान डांगरा में उजाला महिला स्व सहायता समूह के द्वारा गोठान मे सब्जी उत्पादन किया जा रहा है गोठान समिति के अध्यक्ष अशोक नरेटी एवं फलोद्यान भंडारडिगी के उद्यान अधीक्षक आरसी सेंगर, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी मुकेश साहू के मार्गदर्शन में गोठान ग्राम डांगरा में सब्जी का उत्पादन महिला समूह के द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महिला स्व सहायता समूह के अध्यक्ष मानकी नेताम, सचिव मानकुंवर तेता, सदस्य शैलेंद्री,  देवली, सावली के द्वारा गौठान में सब्जी का उत्पादन किया जा रहा है वही उद्यानिकी विभाग के द्वारा सब्जी बीज नि:शुल्क प्रदान किया गया है जिसमें प्रमुख रुप से भिंडी, बरबटी, करेला, चौराई, बैगन, मिर्च, गोभी, भाजी, टमाटर एवं अन्य सब्जी का उत्पादन शुरू किया गया हैं। महिला स्व सहायता समूह के अध्यक्ष ने बताया कि गौठान में उत्पादित सब्जी का बाजार में विक्रय कर अपने आय में बढ़ोतरी की जाएगी साथ ही समूह के सभी सदस्यों के भागीदारी से यह काम किया जा रहा है, जिससे हमारे समूह का आय का स्रोत बना हुआ है।

उद्यान अधीक्षक सेंगर ने बताया कि गोठान ग्राम डांगरा में उद्यान विभाग द्वारा नि:शुल्क सब्जी बीज प्रदान किया गया है, साथ ही सब्जी उत्पादन के बारे में तकनीकी जानकारी भी दी गई, खाद, बीज, दवाई समय पर लगाने की विधि, दवाई छिडक़ाव एवं अन्य जानकारी समूह के सदस्यों को दिए गये।

ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ने भी समूह के सदस्यों को फसल उत्पादन के संबंध में जानकारी दी, जिससे उत्पादित फसलों को बेचकर आय अर्जित हो सके, साथ ही फसल उत्पादन के लिए विस्तृत तकनीकी जानकारी दी गई। गोठान मे उजाला महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों के द्वारा अपनी सहभागिता निरंतर बनाये रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिसे समूह को लाभ होगा। इसके अलावा विकासखंड के अन्य गौठान ग्रामों में भी समूह के द्वारा सब्जी उत्पादन का कार्य किया जा रहा है।

 

 


24-Sep-2020 8:57 PM

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 24 सितंबर। छत्तीसगढ़ में हजारों साल पहले की मूर्ति बनाने की कला आज भी जीवित है। यहाँ के शिल्पकार धातुओं में बारीक दस्तकारी कर अनोखी कलाकृतियाँ तैयार करते हैं। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान मूर्ति बनाने की ये कला प्रचलित थी। छत्तीसगढ़ में मूर्ति बनाने की इस विधि को घड़वा और ढोकरा शिल्प के नाम से जाना जाता है।

प्रदेश की जनजातियों के द्वारा तैयार की गयी कलाकृतियां देश के साथ ही विदेशों में भी प्रसिद्ध है, और यहाँ के कलाकारों को इसके लिए कई राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं। ऐसे ही एक युवा कलाकार हैं पूरण झोरका जो की रायगढ़ जिले के शिल्पग्राम एकताल के निवासी हैं। पूरण अपनी ढोकरा शिल्प के पुश्तैनी हुनर को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पूरण की तारीफ की है। पूरण बताते हैं कि ढोकरा शिल्प मनमोहक कलाकृतियाँ बनाने में बहुत मेहनत लगती है। एक मूर्ति बनाने की प्रक्रिया काफी लंबी होती है। मिट्टी का ढांचा तैयार कर उस पर मोम का लेप लगाया जाता है। जिसके बाद मोम पर बारीक कलाकृतियाँ उकेरी जाती है। इसे भट्टी में तपाया जाता है और धातु पिघला कर डाली जाती है। मोम के पिघलने के बाद धातु उसका स्थान ले लेता है, जिसे काफी देर ठंडा होने दिया जाता है और इस तरह कोई कलाकृति तैयार होती है।

छत्तीसगढ़ में बस्तर और रायगढ़ जिले के जनजाति इस शिल्प कला में पारंगत हैं। ढोकरा शिल्प कला में अधिकतर जनजाति संस्कृति पर आधारित कलाकृतियाँ बनाते हैं, जो देवी देवताओं की मूर्तियों के अलावा लोक जीवन से जुड़ी वस्तुओं पर केन्द्रित होते हैं।


24-Sep-2020 6:46 PM

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 24 सितंबर। केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि बिल को लेकर किसानों का कहना है कि कृषि बिल आम किसान के लिए छलावा है। उससे न बिचौलिए ही खत्म होंगे और न ही छोटे किसानों को कोई फायदा होगा। बेहतर होता है कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मूल्य पर खरीदी को गैरकानूनी बना देती इससे किसानों को कुछ हद तक राहत मिल जाती।

दुर्ग जिले के बरोदा गांव के किसान महेन्द्र सिंह का कहना है कि किसान बिल किसानों के लिए छलावा है। छोटे किसान अपने जिले से दूसरे जिले में जाकर अनाज बेचने संसाधन नहीं जुटा पाता हैं ऐसे किसान दूसरे प्रदेश जाकर अनाज कहां बेचेंगे? महेन्द्र सिंह कहते हैं सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मूल्य पर खरीदी को अगर गैरकानूनी बना देती तो बेहतर होता। 3 सौ एकड़ में हम धान, सोयाबीन, सब्जी, चना की उपज लेते हैं।

समर्थन मूल्य पर बिक्री से बचत अनाज हमें बाजार में ही बेचना पड़ता है। बिचौलियों की लंबी चेन है और उनकी रोजी रोटी भी उससे जुड़ी है। सरकार लागत मूल्य से मुनाफे की दर निश्चित कर हम किसानों से खरीदी करती तो सही होता। हकीकत तो ये है कि सब्सिडी के नाम पर सरकारी तंत्र हमारे हिस्से का मुनाफा भी खुद कमा लेता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य को खत्म न करने की घोषणा पर भी हम विश्वास नहीं करते हैं।

कुरूद सिलयारी के किसान गुंजन चंद्रवंशी इंजीनियर हैं लेकिन पुश्तैनी खेती बाड़ी से उन्होंने जुड़ाव बनाए रखा है। फिलहाल 40 एकड़ में धान की खेती करने के अलावा वह बिल्डिंग मटेरियल का व्यवसाय भी कर रहे हैं। गुंजन चंद्रवंशी कहते हैं कृषि बिल को समझना कठिन है। सरकार का कहना है कि इस बिल से बिचौलिए की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। और किसान कंपनी या मिल को सीधे अपना अनाज बेच सकेगा, लेकिन हकीकत इससे अलग है। छोटा किसान जिसके पास 5, 7 एकड़ खेत  है वह मिल तक जाने की व्यवस्था कैसे जुटा पाएगा? इसके लिए टे्रक्टर, बोरी तमाम साधन चाहिए जो उसके पास नहीं है। कई ऐसे किसान हैं जो धरसींवा से रायपुर मंडी नहीं पहुंच पाते हैं। उनके लिए बिचौलिए ही माध्यम होते हैं। सरकार ने खरीफ फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है लेकिन रबी फसल की बिक्री के लिए तो किसानों को बिलौलियों का सहारा लेना पड़ता है।

महासमुंद जिले के गांव मालीडीह के किसान हेमंत चंद्राकर कहते हैं हम छोटे किसान हैं। 6 एकड़ खेत है। सरकारी मंडी में अनाज बेचने के बाद बचत अनाज बाजार में ही बेचते हैं। कृषि बिल से हमें कोई फायदा नहीं है। कुल मिलाकर हम कोचियों पर ही आश्रित हैं। कृषि उपज मंडी में रसीद जिस दाम पर काटते हैं उससे कम पर खरीदी करते हैं। विरोध जताने पर अनाज वापस ले जाने की धमकी देते हैं। कुल मिलाकर इसका हम किसानों से कोई लेना-देना नहीं है। सारा खेल राजनीति का है।

खुड़मुड़ा के किसान बसंत नायक कहते हैं सरकार सौ नियम बनाने की जगह न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मूल्य पर अनाज की खरीदी को अगर गैरकानूनी कर देती तो बेहतर होता। किसान से कम दाम पर व्यापारी अनाज खरीदकर उसकी कालाबाजारी करेंगे। हम जैसे किसान संसाधन जुटाकर अनाज किसी तरह बेच लेते हैं लेकिन छोटे किसानों को तो बिचौलियों का सहारा लेना पड़ता है जिसके लिए 5 से 6 प्रतिशत कमीशन उसे देना पड़ता है।


24-Sep-2020 6:27 PM

रायपुर, 24 सितंबर। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और छत्तीसगढ़ के किसान संगठनों द्वारा कॉर्पोरेटपरस्त और  किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ आहूत ‘भारत बंद -छत्तीसगढ़ बंद’ का प्रदेश की पांच वामपंथी पार्टियों - माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा, भाकपा (माले)-लिबरेशन, भाकपा (माले)-रेड स्टार और एसयूसीआई (सी) ने समर्थन किया है। 

आज जारी एक बयान में संजय पराते, आरडीसीपी राव, सौरा यादव, बृजेन्द्र तिवारी और विश्वजीत हारोड़े ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की छह साल की किसान विरोधी नीतियों के चलते कृषि और किसानों का संकट और विकराल हुआ है। कोरोना काल में जब किसान और गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं, तब नरेंद्र मोदी सरकार ने इन किसान विरोधी बिलों को लाकर और राज्य सभा में बिना मतविभाजन के अलोकतांत्रिक तरीके से पारित करवा कर यह साबित कर दिया है कि  कारपोरेट कंपनियों के मुनाफों की खातिर हमारे कृषि क्षेत्र से किसानों को बेदखल कर यह सरकार खेती और खेत भी कारपोरेट को सौंप देना चाहती है। सरकार के इस आचरण से साबित हो गया है कि यह सरकार किसानों की नहीं, कोरपोरेट घरानों की सरकार है।

अपने बयान में वाम नेताओं ने कहा है कि ये कानून भारतीय खेती और हमारे देश के किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर देगी, क्योंकि खेती-किसानी पूरी तरह कृषि व्यापार करने वाली कंपनियों के हाथों में चले जाएगी और इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था और सार्वजनिक वितरण प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि ये कानून हमारे देश की खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरा है, क्योंकि आवश्यक वस्तु की श्रेणी से अनाज, दलहन, तिलहन, आलू-प्याज को बाहर करने से इनकी जमाखोरी बढ़ेगी, कृत्रिम संकट पैदा होगा और वायदा व्यापार इन खाद्यान्नों की महंगाई में और तेजी लाएगा।

वाम पार्टियों ने कहा कि जिस अलोकतांत्रिक तरीके से इन कानूनों को पारित कराया गया है,उसके कारण देश की जनता की नजरों में इन कानूनों की कोई वैधता नहीं है और देश के किसान और नागरिक इन कानूनों का जमीनी अमल रोकेंगे। इन काले कानूनों के तुरंत बाद खरीफ फसलों का जो न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है, उससे स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और किसानों की आय दुगुनी करने की लफ्फाजी की भी कलई खुल गई है। वास्तव में घोषित समर्थन मूल्य किसानों की लागत की भी भरपाई नहीं करते और सरकारी मंडियों के संरक्षण के अभाव में इन फसलों की कीमतों में काफी गिरावट आएगी और कॉर्पोरेट कंपनियों के मुनाफे में उछाल लाएगी। 

सरकार के तानाशाही आचरण और किसान विरोधी बिलों के विरोध में देश भर में चल रहे आंदोलनों का समर्थन करते हुए वाम पार्टियों ने अपनी सभी ईकाईयों को इस आंदोलन में सक्रिय हिस्सेदारी और सहयोग करने का आह्वान किया है। वाम पार्टियों ने प्रदेश की आम जनता और संविधान की रक्षा के लिए चिंतित सभी ताकतों से भी अपील की है कि वे किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए उठ खड़े हों, क्योंकि किसानी बचाने के साथ ही यह संघर्ष लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करने का भी है।


24-Sep-2020 6:26 PM

छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 24 सितंबर।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर के राजभाषा पखवाड़े के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही है जिनमें चिकित्सकों, छात्रों, अधिकारियों और कर्मचारियों का हिंदी संबंधी ज्ञान परखा जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में एम्स परिवार के सदस्य ऑन लाइन और ऑफ लाइन दोनों प्रकार की प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं। पखवाड़े का समापन 28 सितंबर को होगा।

राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित की जा रही विभिन्न प्रतियोगिताओं में आशु भाषण, प्रशासनिक शब्दावली, श्रुत लेख, क्विज, निबंध लेखन और चिकित्सा शब्दावली प्रतियोगिताएं आयोजित की जा चुकी हैं। इसमें सभी का हिंदी संबंधी ज्ञान परखा गया और कोविड-19 के खिलाफ संघर्ष में उनके विचार जाने गए। कैंपस में उपलब्ध छात्रों, चिकित्सकों, कर्मचारियों के लिए प्रतियोगिताएं ऑफ लाइन और गृह प्रदेश में रह रहे छात्रों के लिए प्रतियोगिताएं ऑन लाइन गूगल मीट के माध्यम से आयोजित की जा रही हैं। इन सभी छात्र उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और सेनेटाइजेशन का पूर्ण पालन भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

प्रतियोगिताओं के निर्णायकों में प्रो. सरिता अग्रवाल, सुरक्षा अधिकारी उपासना सिंह और अंजन रॉय शामिल हैं। प्रतियोगिताओं के आयोजन में राजभाषा प्रकोष्ठ के मधुरागी श्रीवास्तव, शाहरूख खान, किशन दास, सैयद शादाब, उमेश पांडेय और आदित्य कुमार शुक्ला का योगदान रहा।  25 सितंबर को स्वरचित काव्य पाठ और 28 सितंबर को वाद-विवाद प्रतियोगिता होगी। सभी विजेताओं को 30 सितंबर को निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।
 


24-Sep-2020 6:25 PM

छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 24 सितम्बर।
प्रदेश में  23 सितम्बर से राष्ट्रीय कृमि-मुक्ति दिवस कार्यक्रम का आयोजन शुरू हो गया। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गृह भ्रमण कर, आंगनबाड़ी केंद्रों और पंचायतों में एक से 19 वर्ष तक के कई बच्चों को कृमि-मुक्ति की दवा (एल्बेंडाजॉल) खिलाई गई। इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा महिलाओं को कुपोषण से संबंधित जानकारी के साथ-साथ पोषण वाटिका निर्माण कृमि नाशक दवाइयां, टीकाकरण एवं अन्य जानकारियां भी दी जा रही है। यह कार्यक्रम 30 सितम्बर तक चलेगा।

कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम के तहत इस साल प्रदेश के कुल 1 करोड़ 14 लाख बच्चों और किशोरों को कृमि नाशक गोली खिलाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस दौरान सरगुजा और सूरजपुर जिले के 3 ब्लॉक-रामानुजगंज, सूरजपुर एवं प्रेमनगर में फाइलेरिया कार्यक्रम के अंतर्गत भी सभी बच्चों को एल्बेण्डाजॉल की दवा का सेवन कराया जावेगा।

कृमि मुक्ति के लिए एक से दो वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को एल्बेण्डाजॉल की आधी गोली तथा 3 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को एक पूरी गोली दी जाती है। कोविड-19 संकमण की व्यापकता को देखते हुए स्कूल, कई आंगनबाड़ी केंद्रों अन्य शैक्षणिक सस्थान का संचालन नहीं किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम का क्रियान्वयन स्वास्थ्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सामुदायिक स्तर पर किया जा रहा है।
 


24-Sep-2020 6:25 PM

हाथकरघा संघ और हस्तशिल्प विकास बोर्ड ने ट्रायफेड के साथ किया एमओयू

छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर  24 सितम्बर।
ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार के मार्गदर्शन में अब ग्रामोद्योग के उत्पाद राष्ट्रीय स्तर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने विभागीय कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप ग्रामोद्योग की सामग्रियों को राष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध कराने हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। 

इसी कड़ी में ग्रामोद्योग विभाग  के छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा  संघ और  छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा  ट्रायबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (ट्रायफेड) के साथ एमओयू किया गया है।  उन्होंने कहा कि इससे छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक उत्पाद को राष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध होगा और प्रदेश के अनुसूचित जाति एवं जनजाति  के बुनकरों तथा हस्तशिल्पियों को नियमित रोजगार भी मिलेगा।

ग्रामोदय संचालक श्री सुधाकर खलखो ने बताया कि भारत सरकार के उपक्रम ट्रायफेड द्वारा देश के अनुसूचित जाति एवं जनजाति बुनकरों तथा हस्तशिल्पियों  द्वारा उत्पादित सामग्रियों की बिक्री राष्ट्रीय स्तर पर देश के सभी प्रमुख शहरों में स्थित  ‘ट्राइब्स ऑफ इंडिया’ शो रूम में की जाती है। 

उन्होंने बताया कि ट्रायफेड के इन शो रूम में अन्य राज्यों से संग्रहित सामग्री का विक्रय किया जाता है  साथ ही उक्त शो रूमों के माध्यम से छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उत्पाद जैसे कोसा एवं काटन वस्त्र (साड़ी, सलवार सूट, जैकेट, चादर, टावेल, रेडीमेड गारमेंट्स इत्यादि) एवं हस्तशिल्प उत्पाद (बेलमेटल, टेराकोटा,लौह शिल्प, बैंबू क्राफ्ट, नैसर्गिक खाद, जड़ी-बूटियों से निर्मित काढ़ा, हल्दी, मिर्च, मसाला इत्यादि) के लिए नया बाजार उपलब्ध होगा।

श्री खलखो ने बताया कि छत्तीसगढ़ के हस्तकला उत्पाद पूर्णत: प्राकृतिक है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम भी है।  छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक उत्पाद को ट्रायफेड के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर बाजार मिलने से जहां छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति और उत्पाद देश के कोने-कोने तक पहुंचेगीं, वहीं इनके विक्रय होने से अनुसूचित जाति एवं जनजाति बुनकरों व हस्तशिल्पियों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी।
 


24-Sep-2020 6:24 PM

छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 24 सितंबर।
राष्ट्रीय सेवा योजना की 51वॉ स्थापना दिवस के अवसर पर गुरुवार को दुर्गा महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी प्रो.सुनिता चंसोरिया द्वारा चौक चौराहों (पचपेड़ी नाका, पुरानी बस्ती, महोबाबाजार, कालीबाड़ी, बूढ़ातालाब, शीतला चौक, नगर निगम, कचहरी चौक ) पर पुलिस कर्मियों  व नगरनिगम कर्मचारियों को चाय-बिस्कुट का वितरण किया गया।
 


24-Sep-2020 6:23 PM

छत्तीसगढ़ से दो श्रेष्ठ स्वयंसेवकों को सम्मानित होने पर दी शुभकामनाएं

छत्तीसगढ़’ संवाददाता

रायपुर, 24 सितंबर। नई दिल्ली में आज राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार 2018-19 समारोह का वर्चुअली आयोजन हुआ, इसका आयोजन खेल एवं युवा मंत्रालय द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद थे। 

राज्यपाल अनुसुईया उइके वर्चुअल रूप से इस कार्यक्रम में शामिल हुई। उन्होंने पुरस्कार प्राप्त सभी राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। 

इस अवसर पर केन्द्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू भी उपस्थित थे। राज्यपाल ने इस समारोह में सम्मानित छत्तीसगढ़ के बीसीएस शासकीय महाविद्यालय धमतरी के छात्र सत्येन्द्र साहू एवं शंकराचार्य इंजीनियरिंग महाविद्यालय भिलाई के छात्र राकेश कुमार को भी शुभकामनाएं दी है। 

राज्यपाल ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा है कि यह गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ के दो छात्र राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुए हैं। एन.एस.एस. युवाओं में राष्ट्रप्रेम तथा नेतृत्व की भावना का विकास करता है। उनके कार्यों से पूरे समाज को प्रेरणा मिलती है। 

उल्लेखनीय है कि सत्येन्द्र शर्मा तथा राकेश कुमार को श्रेष्ठ स्वयंसेवक के रूप में राष्ट्रीय सेवा योजना का राष्ट्रीय पुरस्कार (स्वयंसेवक श्रेणी के अंतर्गत) प्राप्त हुआ है, जिसके अंतर्गत राशि रू. 50 हजार व प्रशस्ति पत्र वर्चुअली प्रदान किया गया।
 


24-Sep-2020 6:22 PM

रायपुर, 24 सितंबर। कोरोनो महामारी से हर कोई परेशान हैं और साथ ही धीर-धीरे ये सब को अपनी चपेट में लेते जा रहा है। रायपुर राजधानी में भी आए दिन कोरोना के मरीज बढ़ते जा रहे हैं जिसको लेकर निगम प्रशासन ने भी कमर कस ली है। 

कोरोना बीमारी से वार्ड मे काम करने वाले सफाई मित्र भी संक्रमित हो रहे है। ऐसी स्थिति में  वार्ड मे मरीजों कि संख्या बढने पर काली माता वार्ड के पार्षद अमितेष भारद्वाज ने अपने साथियों के साथ सैनिटाइजिंग करने की बात कही साथ ही वार्ड की जनता को भरोसा दिलाया कि यदि कोई कर्मचारी सैनिटाइजिंग करने नही पहुंचता तो वह स्वयं अपनी टीम के साथ उस एरिया में सैनिटाइजिंग करेंगे। आज उनके साथ बिजजू बंजारे, विमल वर्मा, मो अब्बास, श्रवण देवांगन, मंगल जाल, बल्लू साहू, शिवलाल देवांगन, चिनटू, किमत दीप, गोपाल राव, बंटी आदी उपस्थित रहे।
 


24-Sep-2020 6:21 PM

छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 24 सितंबर। 
पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से  ग्रीन आर्मी आफ रायपुर के संस्थापक अमिताभ दुबे की परिकल्पना पर केंद्रित आनलाइन बेस्ट ग्रीन हाउस प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।

ग्रीन विंग के चेयरमैन  मोहन वर्लयानी  ने बताया कि इस प्रतियोगिता में भाग लेते हैं हेतु  सर्वप्रथम घर के गार्डन में  कम से कम 25 पौधे जमीन या गमले में लगे होने चाहिए तथा  एक फार्म भरना जरूरी होगा। जिसमें प्रतिभागी का नाम, पौधों की संख्या,मोबाइल नंबर,घर का पूरा पता,एवं प्रवेश द्वार बाहर का एलिवेशन की  एक फोटो नंबर 9827140470 पर 30 सितंबर तक भेजी जा सकती है। पूर्व में ये तिथि 20 सितम्बर तय की गई थी। 

प्रथम चरण में ग्रीन विंग कमेटी द्वारा फार्म के आधार पर कुछ ग्रीन हाउस का चयन किया जाएगा। द्वितीय चरण  मे चयनित प्रतिभागियों द्वारा गार्डन के 5 फोटो मंगवाए जाएंगे।
तृतीय चरण में  चयनित प्रतिभागियों के घर जाकर ग्रीन विंग के विशेषज्ञों द्वारा स्थल निरीक्षण करके सर्वश्रेष्ठ तीन ग्रीन हाउस को प्रथम द्वितीय तृतीय अवार्ड दिया जाएगा।
 


23-Sep-2020 7:37 PM

रायपुर, 22 सितंबर। छत्तीसगढ़ युवा विकास संगठन द्वारा संचालित विप्र महाविद्यालय मे बुधवार को ऑनलाइन परीक्षा समस्या और निदान क्व विषय पर वेबीनार का आयोजन किया गया द्य वेबीनार में प्रमुख वक्ता प्रो. गिरीश कांत पांडेय कुलसचिव पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय  ने  कोरोना महामारी के कारण ऑनलाइन आयोजित परीक्षा के संदर्भ में विद्यार्थियों के जिज्ञासा और समस्याओ का समाधान प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि परीक्षा के लिए मानसिक दबाव होना निश्चित है। परंतु सम्पूर्ण व्यवस्था के उपरांत भी कोई छात्र परीक्षा से वंचित हो जाता है तो उसके लिए परिस्थितियों के अनुकूल होने पर विशेष परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. मेघेश तिवारी ने बताया कि विप्र महाविद्यालय के रजत जयंती वर्ष में महामारी ने हमें एक अवसर दिया है ,कि अपने शिक्षा पद्धति और परीक्षा के पद्धति में क्रांतिकारी बदलाव लाएं। आने वाले समय में ऑनलाइन शिक्षा और परीक्षा के लिए खुद को अपडेट कर सकें, इसी उद्देश्य से प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के समस्याओं के समाधान हेतु वेबीनार का आयोजन किया गया।

वेबीनार में छात्रों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए प्रो गिरिशकान्त पाण्डेय ने कहा कि परीक्षा समाप्ति के पांच दिवस उपरांत सभी उत्तर पुस्तिकाओं को पोस्ट,कूरियर से महाविद्यालय भेजना होगा  महाविद्यालय के नजदीक रहने वाले छात्रों के लिए महाविद्यालय में ड्राप बॉक्स लगाने पर विचार किया जा रहा है।साथ ही परीक्षा शुल्क वापसी पर उन्होंने कहा कि इस पर भी विचार किया जावेगा। वेबिनार का संचालन डॉ. दिव्या शर्मा ने किया।आभार प्रदर्शन विवेक शर्मा ने किया। प्राध्यापकों सहित ऑनलाइन परीक्षा दिलाने वाले बड़ी संख्या में सभी विद्यार्थी यू ट्यूब लिंक के माध्यम से वेबिनार में शामिल हुए।

 


23-Sep-2020 7:36 PM

आदेश का उल्लंघन दंडनीय

रायपुर, 23 सितम्बर। राज्य शासन ने कोविड संदिग्ध मरीजों के उपचार के दौरान हाई रिजाल्यूशन एच आर सीटी इन्वेस्टिगेशन की आवश्यकता होने पर निजी चिकित्सालयों एवं डायग्नोस्टिक केन्द्रों के लिए भी दरें निर्धारित की हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज जारी आदेश के अनुसार कोविड  संदिग्ध मरीजों के लिए दरें भी कोविड पाजिटिव मरीजों के लिए ली जाने वाली दरों जैसी ही लागू होंगी।

दरें इस प्रकार हैं-सी टी चेस्ट विदाउट कान्ट्रास्ट फार लंग्स के लिए 1870 रूपये, सी टी चेस्ट विद कान्ट्रास्ट फार लंग्स के लिए 2354 रूपये निर्धारित शुल्क रखा गया है। आदेश में कहा गया है कि उपरोक्त निर्देश का उल्लंघन एपिडेमिक डिसीज एक्ट 1897,छत्तीसगढ़ पब्लिक एक्ट1949तथा छत्तीसगढ़़ एपिडेमिक डिसीज कोविड 19 रेगुलेशन एक्ट 2020 के तहत दंडनीय होगा।
 


23-Sep-2020 7:35 PM

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 23 सितंबर।
मोदी सरकार द्वारा बनाये गए कॉर्पोरेटपरस्त कृषि विरोधी तीन कानूनों के खिलाफ छत्तीसगढ़ के बीस से ज्यादा किसान संगठनों ने 25 सितम्बर को ‘छत्तीसगढ़ बंद’ का आह्वान किया है और जनता के सभी तबकों, राजनैतिक दलों और संगठनों से खेती-किसानी, खाद्यान्न आत्मनिर्भरता और देश की संप्रभुता को बचाने के लिए इस आह्वान का पुरजोर समर्थन करने की अपील की है। 

उल्लेखनीय है कि 300 से ज्यादा किसान संगठनों से मिलकर बनी अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने इन कृषि विरोधी कानूनों को पारित किए जाने के खिलाफ 25 सितम्बर को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। किसान संघर्ष समन्वय समिति के अनुसार इन कानूनों से भारतीय किसान देशी-विदेशी कॉरपोरेटों के गुलाम बनकर रह जाएंगे। उनका माल सस्ते में लूटा जाएगा और महंगा-से-महंगा बेचा जाएगा। कुल नतीजा यह होगा कि किसान बर्बाद हो जाएंगे और उनके हाथों से जमीन निकल जायेगी। आम जनता भी अभूतपूर्व महंगाई की मार का शिकार होगी।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा कि जिस तरीके से राज्यसभा में विपक्ष के बहुमत को कुचलते हुए इस कानून को पारित किया गया है, उससे स्पष्ट है कि अपने कॉर्पोरेट मालिकों की चाकरी करते हुए इस सरकार को संसदीय जनतंत्र को कुचलने में भी शर्म नहीं आ रही है। ये कानून कॉरपोरेटों के मुनाफों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की वर्तमान व्यवस्था को ध्वस्त करते है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से अनाज को बाहर करने से जमाखोरी, कालाबाजारी, मुनाफाखोरी और महंगाई बढ़ेगी। वास्तव में इन कानूनों के जरिये सरकार कृषि के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों से छुटकारा पाना चाहती है। किसान सभा नेता ने बताया कि किसानों के व्यापक हित में प्रदेश के किसानों और आदिवासियों के 20 से ज्यादा संगठन फिर एकजुट हुए हैं और 25 सितम्बर को ‘छत्तीसगढ़ बंद’ के आह्वान के साथ ही पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला लिया गया है। 

एक संयुक्त बयान में इन किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि उत्पादन के क्षेत्र में ठेका कृषि लाने से किसान अपनी ही जमीन पर गुलाम हो जाएगा और देश की आवश्यकता के अनुसार और अपनी मर्जी से फसल लगाने के अधिकार से वंचित हो जाएगा। इसी प्रकार कृषि व्यापार के क्षेत्र में मंडी कानून के निष्प्रभावी होने और निजी मंडियों के खुलने से वह समर्थन मूल्य से वंचित हो जाएगा। इस बात का भी इन कानूनों में प्रावधान किया गया है कि कॉर्पोरेट कंपनियां जिस मूल्य को देने का किसान को वादा कर रही है, बाजार में भाव गिरने पर वह उस मूल्य को देने या किसान की फसल खरीदने को बाध्य नहीं होगी -- यानी जोखिम किसान का और मुनाफा कार्पोरेटों का! कुल मिलाकर ये तीनों कानून किसान विरोधी है। इससे किसान आत्महत्याओं में और ज्यादा वृद्धि होगी। उन्होंने कहा है कि देश की जनता इन कानूनों पर अमल नहीं होने देगी और अब संसद के अंदर लड़ी जाने वाली लड़ाई सडक़ों पर लड़ी जाएगी। 
 


23-Sep-2020 7:35 PM

आरटीपीसीआर की भी दरें निर्धारित

रायपुर, 23 सितम्बर। राज्य शासन ने निजी पैथोलॉजी लैबों और अस्पतालों में कोविड-19 की जांच के लिए आरटीपीसीआर तथा एंटीजन रैपिड टेस्ट की दरें तय र्की हैं। निजी लैबों और अस्पतालों में रैपिड एंटीजन टेस्ट के लिए 900 रूपए का शुल्क तय किया गया है। इसमें जांच, कन्जुमेबल्स, पीपीई किट इत्यादि शुल्क शामिल हैं। प्रदेश के लैबों, अस्पतालों  में आर टी पी सी आर जांच के लिए 1600 रूपए की दर निर्धारित की गई है। जांच के लिए संभावित मरीज के घर से सैंपल संकलित किए जाने पर 1800 रूपए लिए जाएंगे।

राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग द्वारा 16 सितंबर को इस संबंध में आदेश  में कहा गया है कि  प्रदेश के बाहर स्थित लैबों के लिए आरटीपीसीआर जांच की दर दो हजार रूपए निर्धारित की गई है। घर से सैंपल कलेक्शन किए जाने पर 2200 रूपए लिए जाएंगे। इन शुल्कों में सैंपल कलेक्शन, परिवहन, जांच, कन्जुमेबल्स, पीपीई किट इत्यादि सभी शुल्क शामिल हैं। 
 


23-Sep-2020 7:34 PM

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 23 सितम्बर।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की वर्चुअल मौजूदगी में मंगलवार को छत्तीसगढ़ जकात फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए कलेक्टर डॉ. एस .भारतीदासन एवं सीएमएचओ रायपुर डॉक्टर मीरा बघेल को 5 नग ऑक्सीजन कंसट्रेटर मशीन भेंट की। जिसमें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

 छत्तीसगढ़ जकात फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने छत्तीसगढ़ राज्य में कोरोना आपदा काल में जरूरतमंदों की मदद और कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दिशा -निर्देशन में किए जा रहे कार्यों एवं उपायों की सराहना की। पदाधिकारियों ने कहा कि संकट की इस घड़ी में जरूरतमंदों को सहायता पहुंचाने के मामले में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य है। उन्होंने मुख्यमंत्री को उनके प्रयासों एवं कार्यों के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। 

जकात फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि उनकी संस्था द्वारा गरीब प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को शिक्षा के लिए सहायता दी जाती है, ताकि वह अपनी आगे की शिक्षा जारी रख सकें। राज्य में अब तक संस्था द्वारा 4 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा के लिए एक करोड़ 20 लाख रुपए की सहायता राशि स्कॉलरशिप के रूप में प्रदान की गई है। कोरोना संकटकाल में जकात फाउंडेशन ने 3 हजार गरीब एवं असहाय परिवारों को अपनी ओर से एक माह का सूखा राशन पैकेट बतौर मदद के रूप में वितरित किया है। श्री बघेल ने इस मौके पर छत्तीसगढ़ जकात फाउंडेशन के पदाधिकारियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में कोरोना पीडि़तों की मदद के लिए सभी समाज एवं वर्ग के लोगों ने आगे बढक़र मदद दी है। सभी समाज और लोगों के सहयोग से छत्तीसगढ़ राज्य जरूरतमंदों की मदद करने में आगे रहा है। 

उन्होंने कहा कि कोरोना से लड़ाई अभी बाकी है।इसके लिए सभी समाज वर्ग और लोगों की मदद की जरूरत है। कोरोना से लडऩे और जीतने के लिए उन्होंने इस मौके पर समाज के सभी वर्गों, संगठनों, दानदाताओं और स्वयंसेवी संस्थाओं से भागीदारी और सहयोग की अपील की।
 


23-Sep-2020 7:33 PM

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 23 सितंबर।
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय द्वारा हाल में संगीत एमए कोर्स बंद किए जाने के आदेश को लेकर कमला देवी संगीत महाविद्यालय रायपुर एवं भातखंडे संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों एवं प्राचार्य डॉ. विप्लव कुमार चक्रवर्ती के विरोध के बाद इं.क.सं विवि खैरागढ़ द्वारा संगीत एम.ए पाठ्यक्रम को यथावत जारी रखने के आदेश दिया गया है। 

कुलपति ममता चंद्राकर ने बताया कि विद्यार्थी की ओर से एम ए संगीत को बंद न किए जाने के संदर्भ में प्राप्त आवेदन को लेकर मंगलवार को मीटिंग की गई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि इस सत्र में एमए को जारी रखा जाएगा। एमए को पाठ्यक्रम पूरा होने पर एमपीए शुरू किया जाएगा। 

भातखंडे महाविद्यालय बिलासपुर के प्राचार्य डॉ. विप्लव कुमार चक्रवर्ती ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें दोपहर को इं.क.सं विवि परीक्षा प्रभारी काशीनाथ तिवारी द्वारा संगीत में एमए को यथावत जारी रखे जाने की सूचना प्राप्त हुई है। 

संगीत में एमए बंद किए जाने के आदेश के बाद उन्होंने इं.क.सं.वि.खैरागढ़ कुलपति को आवेदन किया था। जिसमें उन्होंने वस्तुस्थिति से उन्हें अवगत कराया था। 

डॉ. चक्रवर्ती कहते हैं विश्वविद्यालय के निदे्रशानुसार 1 से 31 अगस्त तक महाविद्यालय में प्राचार्य की अनुमति से तथा 1 से 15 सितंबर तक कुलपति की अनुमति से संगीत एमए में प्रवेश दिया जाना नियत किया गया था। लेकिन दाखिले के बाद 12 सितंबर को विवि की ओर से एमए बंद किए जाने का आदेश हमें प्राप्त हुआ। आदेशानुसार इस सत्र से एमए की जगह एमपीए शुरू करने की हमें सूचना प्राप्त हुई। एमपीए में दाखिले के लिए ब्रिज कोर्स की बाध्यता भी रखी गई।

हमने इस आदेश को मान्य कर अपनी ओर से एमए बंद किए जाने का विरोध दर्ज किया और इस संबंध में विचार विमर्श किया गया और अंतत: हमे संगीत में एमए को जारी करने की अनुमति दे दी गई है। संगीत एमए को जारी रखने के विश्व विद्यालय के आदेश को लेकर विजय लक्ष्मी चंद्राकर मीनाक्षी अवधिया, रूपांस पवार आदि विद्यार्थियों ने हर्ष व्यक्त किया है तथा कुलपति के प्रति आभार व्यक्त किया है। 
 


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