‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 1 मार्च। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर शासकीय गुंडाधुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोण्डागांव में दो दिवसीय प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन रसायन शास्त्र विभाग की रसायन सोसायटी द्वारा प्राचार्या सरला आत्राम के संरक्षण और मार्गदर्शन में किया गया। इस वर्ष की राष्ट्रीय थीम ‘विज्ञान में महिलाएँ: विकसित भारत के निर्माण की उत्प्रेरक’ रही, जिसके माध्यम से विज्ञान में महिलाओं की भूमिका और विकसित राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महान वैज्ञानिक सीवी रमन के चित्र पर पुष्प अर्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। वक्ताओं ने बताया कि 28 फरवरी 1928 को खोजा गया रमन प्रभाव आधुनिक विज्ञान की क्रांतिकारी उपलब्धि है, जिसके माध्यम से प्रकाश के प्रकीर्णन में सूक्ष्म परिवर्तन के आधार पर पदार्थों की आणविक संरचना का विश्लेषण किया जाता है। रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी का उपयोग आज औषधि निर्माण, अपराध विज्ञान जांच, सूक्ष्म प्रौद्योगिकी, पर्यावरण विश्लेषण तथा जैव-अणु अनुसंधान में व्यापक रूप से किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक खोज के लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सरला आत्राम ने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित विषय नहीं बल्कि जीवन को समझने और जीने की तार्किक पद्धति है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक वर्ग, विशेषकर महिलाएँ, विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी निभाएँ। उन्होंने छात्राओं से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने, नवाचार करने और शोध के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया।
रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष अलका शुक्ला ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की महत्ता बताते हुए कहा कि वैज्ञानिक सोच अंधविश्वासों को समाप्त कर समाज को प्रगतिशील बनाती है और रसायन सोसायटी विद्यार्थियों द्वारा संचालित एक सक्रिय मंच है, जो वर्ष भर विज्ञान प्रसार की गतिविधियाँ आयोजित करता है। वाणिज्य विभागाध्यक्ष आकाश वासनीकर ने अंतर्विषयक अनुसंधान की आवश्यकता पर बल देते हुए रसायन विज्ञान, जीवविज्ञान और पर्यावरण विज्ञान के समन्वय को सतत विकास के लिए आवश्यक बताया।
भूगोल विभागाध्यक्ष शोभाराम यादव ने वैज्ञानिक नैतिकता और अनुसंधान संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को तथ्यपरक और प्रयोग आधारित सोच विकसित करने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस में विज्ञान विषयक रंगोली, पोस्टर निर्माण, भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं तथा विज्ञान आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से प्रतिभागियों की बौद्धिक क्षमता का परीक्षण किया गया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
द्वितीय दिवस में भूपेंद्र कोर्राम द्वारा पर्यावरण संरक्षण विषय पर एक जागरूकतापरक वृत्तचित्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें ठोस अपशिष्ट के दुष्प्रभाव और उसके वैज्ञानिक प्रबंधन के उपायों को सरल भाषा में समझाया गया। कार्यक्रम के दौरान रसायन सोसायटी के सदस्यों ने विज्ञान आधारित प्रयोग और रोचक वैज्ञानिक करामात प्रस्तुत कर उनके पीछे छिपे सिद्धांतों की व्याख्या भी की। अतिथि व्याख्याता नीता नेताम ने आयोजन के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा विद्यार्थियों द्वारा तैयार विज्ञान विषयक सेल्फी स्टैंड को भी सराहा गया।
कार्यक्रम के अंत में रसायन सोसायटी के प्रभारी नसीर अहमद ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक चेतना, तार्किक सोच और नवाचार की भावना को मजबूत करते हैं तथा भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।
दो दिवसीय आयोजन ने महाविद्यालय परिसर में विज्ञानमय वातावरण का सृजन किया और विज्ञान में महिलाओं की भूमिका तथा विकसित भारत की परिकल्पना को प्रभावी रूप से अभिव्यक्त किया।