कोण्डागांव

पश्चिम बोरगांव में चरक पूजा की धूम, श्रद्धालु उमड़े
15-Apr-2026 10:00 PM
पश्चिम बोरगांव में चरक पूजा की धूम, श्रद्धालु उमड़े

शिव भक्तों ने दिया त्याग, तपस्या और आत्मसंयम का संदेश

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

कोण्डागांव, 15 अप्रैल। जिले के पश्चिम बोरगांव में मंगलवार को बंग समाज द्वारा चरक पूजा का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। बंग पंचांग अनुसार चैत्र माह के अंतिम दिन आयोजित इस विशेष अनुष्ठान में भगवान शिव के भक्तों ने कठोर तप, त्याग और आत्मसंयम का प्रदर्शन कर आस्था का परिचय दिया।

परंपरा के अनुसार, पूरे एक माह तक ब्रह्मचर्य और कठोर व्रत का पालन करने वाले संन्यासियों ने इस दिन अपनी साधना की परीक्षा देते हुए चरक अनुष्ठान में भाग लिया। इस दौरान संन्यासियों की पीठ में हुक डालकर उन्हें लगभग 20 फीट ऊंचे चरक झूले में घुमाया गया, जिसे आस्था, समर्पण और आध्यात्मिक शक्ति की परीक्षा का प्रतीक माना जाता है।

गांव के अमित दास ने बताया कि, चरक पूजा अत्यंत प्राचीन परंपरा है, जिसे मुख्य रूप से बंग समाज द्वारा मनाया जाता है। यह पूजा आध्यात्मिक शक्ति को परखने का माध्यम है, जिसमें साधक चैत्र मास के पूरे एक महीने तक व्रत-नियम का पालन करते हुए ब्रह्मचर्य धारण करते हैं, एक समय भोजन करते हैं तथा गांव-गांव नंगे पांव घूमकर भगवान शिव और माता पार्वती की महिमा का प्रचार-प्रसार करते हैं।

उन्होंने बताया कि एक माह की साधना के पश्चात संन्यासी खजूर भांगा और चरक जैसे कठोर अनुष्ठानों के माध्यम से अपनी भक्ति की परीक्षा देते हैं। मान्यता है कि सच्ची भक्ति और तपस्या के प्रभाव से इन कठिन परीक्षाओं के दौरान उन्हें पीड़ा का अनुभव नहीं होता और न ही रक्त निकलता है। यह भगवान शिव के प्रति समर्पण और श्रद्धा की पराकाष्ठा मानी जाती है। चरक पूजा भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से जुड़ी परंपरा है, जो जीवन में त्याग, तपस्या और आत्मसंयम का संदेश देती है। पूजा के दौरान विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

स्थानीय मान्यता है कि इस पूजा के माध्यम से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

वहीं बुधवार को चरक पूजा महोत्सव के अंतर्गत भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न कराया जाएगा। विवाह उपरांत बंग समाज द्वारा नववर्ष उत्सव भी मनाया जाएगा, जो वैशाख कृष्ण प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होगा।


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