ताजा खबर

14-Apr-2021 4:10 PM 9

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 14 अप्रैल।
राज्य शासन द्वारा राज्य प्रशासनिक सेवा के चार अधिकारियों के नवीन पदस्थापना आदेश जारी किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव डीडी सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार  हरिकृष्ण शर्मा अपर कलेक्टर राजनांदगांव को विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, रविराज ठाकुर डिप्टी कलेक्टर दुर्ग को विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, कुमारी पूनम सोनी सहायक संचालक, भू-अभिलेख कार्यालय रायपुर को विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और जागेश्वर कौशल संचालक संपदा, गृह विभाग को डिप्टी कलेक्टर दुर्ग के पद पर पदस्थ किया गया है।


14-Apr-2021 3:56 PM 22

-कीर्ति दुबे

भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर साल 1918 में आए स्पैनिश फ़्लू की कहानी दोहराती हुई दिख रही है.

साल 1918 के अप्रैल-मई महीने में स्पैनिश फ़्लू की पहली लहर आई, जो यूरोप के कई देशों में फैली. लेकिन धीरे-धीरे से फ़्लू कम होता गया, लगा मामला ख़त्म होने वाला है, लेकिन ये 'तूफ़ान आने से पहले की ख़ामोशी' जैसी थी.

अगस्त, 1918 में स्पैनिश फ़्लू का एक नया म्यूटेंट आया और ये इतना ख़तरनाक साबित हुआ कि किसी ने इसकी कल्पना तक नहीं की थी. यूरोप में ये ऐसे फैला, जैसे जंगल में आग फैल रही हो. ये तो बात थी साल 1918 की. अब ज़रा वर्तमान में आते है और बात भारत की करते हैं.

भारत में कोरोना की दूसरी लहर इतनी ख़तरनाक हो चुकी है कि हर दिन औसतन डेढ़ लाख से ज़्यादा मामले सामने आ रहे हैं. मरने वालों का आँकड़ा प्रतिदिन 1000 से ज़्यादा हो चुका है. मरीज़ अस्पताल में अपने इलाज का इंतज़ार कर रहे हैं और तो और दाह संस्कार के लिए मृतकों के परिजनों को लंबा इंतज़ार करना पड़ रहा है.

ऐसे में बीबीसी ने देश के सबसे ज़्यादा कोरोना संक्रमण वाले राज्य के शवगृहों में काम करने वाले कर्मचारियों और दाह संस्कार के लिए घंटों इंतज़ार करने वाले परिजनों से बात करके ये समझने की कोशिश की कि हालात कैसे हैं.

'एक दिन में 50 से 60 दाह संस्कार कर रहे हैं’
‘’अभी दोपहर के एक बजकर 10 मिनट हुए हैं और 22 शव अब तक जला चुके हैं, हर दिन 50 से 60 बॉडी जलाना पड़ता है. खाने का तो समझ लीजिए मैडम कि अगर किसी का शव जलने में वक़्त लगा और समय मिल गया तो उसी बीच में खा पाते हैं. छह फ़्रीज़ तो है, लेकिन लोग ज़्यादा आते हैं तो कहाँ फ़्रीज़ में जगह मिलेगी, शव के साथ बाहर लोग खड़े रहते हैं.’’

पुणे के एक सरकारी शवगृह में काम करने वाले वरुण जनगम फ़ोन पर अपनी बात जल्दी-जल्दी बोलते हैं, जैसे कम वक़्त में कितना कुछ बता देना चाहते हों. फिर कहते हैं- मैडम थोड़ा काम है, हम आपको फ़्री होकर कॉल करते हैं.

वरुण देश के उन तमाम शवगृह कर्मियों की झलक अपनी बातों से पेश कर जाते हैं, जो हर दिन, हर मिनट कोरोना से मारे गए लोगों के शव जला रहे हैं.

महाराष्ट्र में मंगलवार को कोरोना के 60,212 नए मामले सामने आए हैं और 281 लोगों की मौत हुई है.

महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, यूपी, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु केरल और कर्नाटक राज्यों में कोरोना तेज़ी से फैल रहा है और कुल कोरोना केस का 80% मामला इन राज्यों से सामने आ रहा है, इनमें भी महाराष्ट्र सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य है, जहाँ अब एक मई तक कई पाबंदियाँ लगा दी गई हैं.

वरुण बताते हैं कि यूँ तो उनकी शिफ़्ट आठ घंटे रहती है, लेकिन इसके बावजूद काम इतना है कि उन्हें घंटों ओवरटाइम काम करना ही पड़ता है. हालाँकि वह उन कर्मचारियों में से हैं, जिनके पास अपना काम करने के लिए पीपीई किट उपलब्ध है.

लेकिन गुजरात के राजकोट में कोविड 19 के शवों के लिए अधिकृत श्मशान पर काम करने वाले दिनेशभाई और धीरुभाई संक्रमण से मरने वाले लोगों को बिना किसी पीपीई किट या दस्तानों के जला रहे हैं.

बीबीसी गुजराती के सहयोगी बिपिन टंकारिया को उन्होंने बताया कि कोविड से पहले यहाँ औसतन एक दिन में 12 शव आया करते थे, लेकिन अब 25 शव आते हैं.

दिनेशभाई और धीरुभाई कोरोना से मरने वालों के शव जलाते हैं, लेकिन उन्हें किसी तरह की पीपीई किट नहीं दी गई है, कभी कभी एंबुलेंस के साथ आने वाले अस्पताल के लोग उन्हें दस्ताने दे देते हैं, वरना उनके पास ऐसी कोई सुविधा नहीं दी गई है, जो नियमों के तहत संक्रमित शवों को जलाते वक़्त पहनना ज़रूरी है.

12 घंटों से अपनों के शवों का इंतज़ार करते लोग
श्मशान पर काम करने वाले कर्मचारी ही केवल परेशान और हताश नहीं हैं, बल्कि वो लोग, जिन्होंने महामारी में अपनों को खोया है, उनके इंतज़ार और दुख भी अंतहीन हैं, ये लोग पहले अपनों के इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाते हैं और फिर मौत हो जाने की स्थिति में उन्हें शव के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ रहा है.

दरअसल, अस्पताल भी श्मशान की स्थिति देखते हुए शवों को देरी से सौंप रहे हैं.

बीबीसी ने ऐसे ही एक परिवार से बात की. गुजरात में राजकोट के पास स्थित मोरबी से आए हुए हेमंत जादव ने बीबीसी गुजराती को बताया कि उनके रिश्तेदार के शव के लिए उन्हें 12 घंटे तक ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ा.

सोमवार को सुबह पाँच बजे वे राजकोट के सिविल अस्पताल आए और शाम के सात बजे जब वे बीबीसी से बात कर रहे थे, तब तक उन्हें अपने भाई का शव नहीं मिल सका था.

हेमंत के भाई कोरोना वायरस से संक्रमित थे और एक अप्रैल से राजकोट सिविल हॉस्पिटल में भर्ती थे. हेमंत ने बताया, ‘’फोन पर बात हुई थी तब मेरे भाई की तबीयत में सुधार आ रहा है, ऐसा हमें लग रहा था कि वो अब ठीक होकर घर आएँगे, पर उसके बाद हॉस्पिटल से फ़ोन आया कि उनका निधन हो गया है.’'

सरकारी आँकड़ों की मानें, तो बीते 24 घटों में गुजरात में 6690 नए कोरोना केस सामने आए हैं और 67 लोगों की मौत हुई है. राज्य में कुल 33,000 सक्रिय मामले हैं.

ख़ासकर अहमदाबाद, सूरत और राजकोट सबसे बुरी तरह प्रभावित शहर हैं. सूरत के शवगृहों में लंबी क़तारों में खड़े लोग अपनों की आख़िरी यात्रा का इंतज़ार कर रहे हैं, लोगों को टोकन दे कर घंटों लंबा इंतज़ार करवाया जा रहा है.

बीबीसी हिंदी के सहयोगी समीरात्मज मिश्र ने लखनऊ से जानकारी दी है कि यूपी में कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में कोरोना के केस सामने आ रहे हैं.

राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं.

ख़ासकर यूपी की राजधानी लखनऊ में कोरोना वायरस का संक्रमण जहाँ लोगों पर क़हर बनकर टूटा है, वहीं संक्रमण से मरने वालों के अंतिम संस्कार के लिए भी जगह और सुविधाओं की कमी पड़ गई है. लखनऊ के दो घाटों के अलावा कई अन्य शहरों में भी लोगों को अपने मृत परिजनों के दाह संस्कार के लिए घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है.

लखनऊ के बैकुंठ धाम शवदाहगृह का आलम यह है कि दाह संस्कार के लिए लकड़ियाँ कम पड़ रही हैं और घाटों पर शवों को जलाने के लिए भी कर्मचारी नहीं मिल रहे हैं. मंगलवार को अपने एक रिश्तेदार का दाह संस्कार करने गए देवेश सिंह ने बताया कि उन लोगों को ख़ुद ही हर चीज़ की व्यवस्था करते हुए दाह संस्कार करना पड़ा.

लखनऊ में कोरोना संक्रमण से मृत लोगों के दाह संस्कार के लिए बैकुंठ धाम और गुलाला घाट पर कोविड प्रोटोकॉल के तहत इंतज़ाम किया गया है, लेकिन इन घाटों पर सामान्य मौत वाले शवों का भी अंतिम संस्कार हो रहा है. ऐसी स्थिति में इन लोगों को अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतज़ार करना पड़ रहा है.

बैकुंठ धाम के बाहर एंबुलेंस और गाड़ियों की भले ही लाइन लगी हो और लोग घंटों इंतज़ार कर रहे हों लेकिन नगर निगम के मुख्य अभियंता विद्युत यांत्रिक राम नगीना त्रिपाठी इस बात से इनकार करते हैं.

वो कहते हैं, “विद्युत शवदाह गृह के अंतिम संस्कार पर एक से डेढ़ घंटे का समय सामान्य तौर पर लगता है. इसमें 45 मिनट मशीन में लगते हैं और उतना ही वक़्त सैनिटाइजेशन और तैयारी में लगते हैं. इस समय बैकुंठधाम पर दो और गुलाला घाट पर एक विद्युत शवदाह गृह हैं. इसके अलावा संक्रमित शवों को जलाने के लिए आठ-आठ अतिरिक्त लकड़ी वाले स्थल भी शुरू किए गए हैं.”

दो दिन पहले अपने एक परिजन का अंतिम संस्कार करके लौटे शक्तिलाल त्रिवेदी बताते हैं कि टोकन लेने के बावजूद उनका नंबर क़रीब छह घंटे के बाद आया और अंतिम संस्कार पूरा होते-होते दस घंटे लग गए.

लखनऊ के विद्युत शवदाह गृह में काम करने वाले एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि आँकड़े चाहे जो हों, लेकिन लखनऊ के दोनों घाटों पर कोरोना संक्रमण से मरने वालों के शव उससे कहीं ज़्यादा आ रहे हैं.

उन्होंने दावा किया कि सोमवार को इस तरह के 100 से भी ज़्यादा शवों का दाह संस्कार किया गया.

हालांकि क्रिमोटोरियम में दर्ज सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़, लखनऊ में सोमवार को कोरोना से जान गँवाने वाले 77 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें बैकुंठ धाम पर 40 और गुलाला घाट पर 37 लोगों का दाह संस्कार हुआ.

वहीं यूपी सरकार के सोमवार के आँकड़े कहते हैं कि इस दिन 72 लोगों की संक्रमण से मौत हुई और 13,685 नए कोरोना के मामले सामने आए थे. (bbc.com)


14-Apr-2021 2:46 PM 69

रायपुर, 14 अप्रैल। स्काई ऑटो एवं अविनाश समूह के संचालक  अशोक सिंघानिया (69) का निधन 13 अप्रैल को हो गया है । वे नरेश सिंघानिया, अरुण सिंघानिया के भाई, अविनाश एवं प्रियंक सिंघानिया के पिता व आनंद, मुकेश, आदित्य सिंघानिया के चाचा थे। उनका अंतिम संस्कार कोविड नियमानुसार किया जाएगा।


14-Apr-2021 2:39 PM 56

 

नई दिल्‍ली. दुनिया का सबसे बड़ा खरगोश चोरी हो गया है. यह पढ़कर आप सोच में पड़ गए होंगे कि आखिर दुनिया का सबसे बड़ा खरगोश होगा कितना बड़ा? तो इसका जवाब है कि यह खरगोश 4 फीट और 4 इंच बड़ा है. इस कारण उसके नाम गिनीज रिकॉर्ड भी दर्ज है. अब वह चोरी हो गया है तो उसकी मालकिन बेहद परेशान हैं. मालकिन ने उसे घर पहुंचाने वाले को 1 हजार पाउंड यानी करीब 1.03 लाख रुपये देने का ऐलान किया है.

दुनिया के इस सबसे बड़े खरगोश का नाम डैरियस है. वह अपनी मालकिन एनेट एडवर्ड्स के साथ वर्सेस्‍टरशायर के स्‍टूलटन में रहता था. इस शनिवार को वह घर से चोरी हो गया है. उसे कौन और किसलिए ले गया है, यह साफ नहीं हो पाया है. उसकी मालकिन पूर्व मॉडल हैं. अब डैरियस के चोरी हो जाने से वह बेहद दुखी हैं.

एनेट कई साल से खरगोश की ब्रीडिंग भी करती आ रही हैं. उनके पास कई रिकॉर्डधारी खरगोश हैं. उन्‍होंने डैरियस के चोरी होने की जानकारी ट्विटर पर दी. उन्‍होंने यह भी लिखा कि डैरियस काफी बुजुर्ग है. अब वह ब्रीडिंग नहीं कर सकता. इसलिए कृपया जो भी उसे ले गया है वह उसे वापस कर जाए.


एनेट ने यह भी जानकारी दी है कि पुलिस भी अपनी ओर से डैरियस को खोजने और घर वापस लाने की पुरजोर कोशिश कर रही है. डैरियस लोगों के बीच भी काफी लोकप्रिय है. वह टीवी शो और अन्‍य आयोजनों में देखा जाता था. लेकिन अब एनेट ने उसके शांत और बेहतर जीवन के लिए शो और आयोजनों में भेजना बंद कर दिया था. (news18.com)


14-Apr-2021 2:38 PM 43

 

नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र द्वारा विदेशी वैक्सीन्स को अनुमति देने के फैसले को लेकर एक बार फिर तंज कसा है. दरअसल, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि दूसरे देशों के टीकों को भी मंजूरी दी जाए. इसके बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने उन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेता विदेशी कंपनियों के लिए लॉबिंग कर रहे हैं.

विदेशी वैक्सीन्स को अनुमति देने की खबर की कतरन शेयर करते हुए वायनाड के सांसद ने ट्वीट किया, 'पहले वे आपको अनदेखा करेंगे, फिर वह आप पर हंसेंगे, फिर वह आप से लड़ेंगे, फिर आप जीत जाएंगे.' इसको लेकर राहुल गांधी ने सोमवार को ट्वीट किया था, ‘एक सीधा-सा लैटर,उसमें जन की बात...विपक्ष के सुझाव अच्छे हैं! ’
 
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया, ‘अयोग्य सरकार ने देर से सही, कुछ तो सीख ली. जब दो दिन पहले सभी टीकों को अनुमति देने के लिए राहुल गांधी ने कहा तो रवि शंकर प्रसाद बेतुकी बयानबाज़ी कर रहे थे. उम्मीद है अब रविशंकर प्रसाद विशेषज्ञ समिति के बारे में तो बग़ैर सिर पैर की बात करने से बाज़ आएंगे.’
सरकार ने विदेश निर्मित कोविड-19 टीकों के लिए मंजूरी की प्रक्रिया तेज की
भारत ने देश में कोविड-19 के मामले ‘सबसे अधिक’ बढ़ने के बीच कोरोना वायरस टीकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए विदेश निर्मित टीकों को आपात इस्तेमाल मंजूरी देने की प्रक्रिया तेज कर दी है. इसी संदर्भ में देश में तीसरे टीके के तौर पर रूसी टीके ‘स्पूतनिक वी’ को मंजूरी दे दी गई और इससे टीकाकरण अभियान तेज करने में मदद मिलेगी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार विदेशी टीके के पात्र निर्माताओं को भारत में स्थानीय क्लीनिकल ​​परीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी. मंत्रालय की इस घोषणा से कुछ शर्तों के साथ फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन शॉट्स के टीकों के आयात का मार्ग प्रशस्त हो सकता है.

मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि सरकार ने फैसला किया है कि कोविड-19 के ऐसे टीकों को भारत में आपात इस्तेमाल की मंजूरी प्रदान की जा सकती है जो विदेश में विकसित और निर्मित हैं और जिन्हें अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन या जापान में नियामकों द्वारा सीमित इस्तेमाल के लिए आपात मंजूरी मिल चुकी है अथवा जिन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन आपात इस्तेमाल सूची में सूचीबद्ध किया गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि सुरक्षा कारणों से इस प्रकार के विदेश निर्मित टीकों के पहले 100 लाभार्थियों के स्वास्थ्य पर सात दिन नजर रखी जाएगी, जिसके बाद देश में टीकाकरण कार्यक्रम में इन टीकों का इस्तेमाल किया जाएगा.
 
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी के पॉल ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘हम आशा करते हैं और हम टीका निर्माताओं जैसे कि फाइजर, मॉडर्ना, जॉनसन एंड जॉनसन और अन्य को आमंत्रित करते हैं...कि जल्द से जल्द भारत आने की तैयारी करें.’ (news18.com)


14-Apr-2021 2:35 PM 28

 

-ललित सिंह

जोधपुर. सूर्यनगरी जोधपुर में कोरोना संक्रमण रोज अपना नया रिकॉर्ड बना रहा है. वहीं, अब इसके इलाज में अन्य दूसरी मुश्किलों का सामना भी करना पड़ रहा है. मंगलवार को जोधपुर में 770 नए कोरोना पॉजिटिव केस सामने आने के साथ ही 4 मरीजों की इस महामारी से मौत हो गई. संक्रमण की इस स्पीड से आम आदमी सहम सा गया है. बाजारों में भी कोरोना का खौफ नजर आने लग गया है.

दूसरी तरफ शहर में वैक्सीन के टोटे के बाद अब इस महामारी के इलाज के लिए रामबाण माने जाने वाले इंजेक्शन रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी होने लगी है. बाजार में यह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है. सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही यह इंजेक्शन मिल रहा है, लेकिन वहां भी धीरे-धीरे इंजेक्शन की कमी होने लगी है.

शिक्षण संस्थान और हॉस्टल आ रहे हैं चपेट में
जोधपुर में शिक्षण संस्थान और हॉस्टल भी लगातार इसकी चपेट में आ रहे हैं. मंगलवार को राजपुरोहित समाज के हॉस्टल में भी कोरोना विस्फोट हो गया है. राजपुरोहित समाज के हॉस्टल में रहने वाले 22 स्टूडेंट में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है. हॉस्टल में कोरोना विस्फोट होने के बाद उसे कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया है. इससे पहले आईआईटी 74 स्टूडेंट्स कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं.
संक्रमण की दर 26.27 फीसदी तक जा पहुंची

उल्लेखनीय है कि जोधपुर संक्रमण की दर 26.27 फीसदी तक जा पहुंची है. 14 दिन पहले इसकी दर महज 4 फीसदी थी. सोमवार को भी जोधपुर में 628 नए कोरोना पॉजिटिव केस सामने आये थे और इससे 3 पीड़ितों की मौत हो गई थी. गत दो सप्ताह के दौरान जोधपुर में कोरोना से डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं. उल्लेखनीय है कि कोरोना की पहली लहर में भी जोधपुर शहर सबसे ज्यादा संक्रमित शहरों में शामिल था. (news18.com)


14-Apr-2021 2:35 PM 103

 

-ललित सिंह

राजस्‍थान के जोधपुर में कोरोना संक्रमण रोज अपना नया रिकॉर्ड बना रहा है. शहर में सीएमएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 770 कोरोना संकमण के नए मामले सामने आए, साथ ही 4 मरीजो की ओर कोरोना संक्रमण से मौत हो गई. हालात यहां तक पहुंच गए है कि शहर में हर दो मिनट में एक व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव होने लगा है.

आईआईटी के बाद एक हॉस्टल में 22 स्टूडेंट्स पॉजिटिव
जोधपुर आईआईटी में एक के बाद एक 74 कोरोना पॉजिटिव स्टूडेंट्स की संख्या आने के बाद अब शहर के राजपुरोहित समाज के हॉस्टल में भी कोरोना विस्फोट सामने आया है. राजपुरोहित समाज के हॉस्टल में रहने वाले 22 स्टूडेंट में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है. हॉस्टल में कोरोना विस्फोट होने के बाद हॉस्टल को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया है. साथ ही सभी 22 स्टूडेंट को हॉस्टल में ही आइसोलेट किया गया है.

पिछले साल से तेज हुई संक्रमण की रफ्तार
इस वर्ष जो कोरोना की लहर चल रही है उस में संक्रमण की रफ्तार काफी तेज है यदि परिवार में कोई एक व्यक्ति संक्रमित होता है और समय पर आइसोलेट नहीं होता है तो वह पूरे परिवार के संपर्क में आए लोगों को काफी तेजी से संक्रमित कर रहा है. प्रतिदिन संक्रमित का आंकड़ा बढ़ने के पीछे कारण भी यही है छात्रावास में एक साथ इतने लोगों का संक्रमित आना और इससे पहले आईआईटी में भी छात्रों का संक्रमित होना इसी का उदाहरण है.

कोविड वैक्सीन के बाद रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी
जोधपुर शहर में जहां कोरोना वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो होने का मामला अभी खत्म ही नहीं हुआ कि कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए रामबाण दवा साबित हुए इंजेक्शन रेमडेसिविर की कमी होने लगी है. बाजार में यह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है. सिर्फ सरकारी अस्पतालों में ही यह इंजेक्शन मिल रहा है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में भी धीरे धीरे इंजेक्शन की कमी होने लगी है. (news18.com)


14-Apr-2021 2:34 PM 45

-प्रदीप धनखड़

झज्जर. प्रेमिका के साथ अवैध संबंधों के चलते साथी हाकम की हत्या करने वाले पंजाब के किसान कुलवंत ने मंगलवार को झज्जर की दुलीना जेल के बाथरूम में आत्महत्या कर ली. कुलवंत द्वारा जेल के बाथरूम में चादर से फांसी का फंदा बनाकर आत्महत्या किए जाने की बात सामने आई है. पुलिस ने भी इसकी पुष्टि की है. घटना के बाद जेल प्रबन्धन व लोकल पुलिस की ओर से कुलवंत के परिजनों को इस मामले की जानकारी दी गई है. कुलवंत के परिजनों ने फिलहाल उसका शव लेने से इनकार किया है.

पुलिस की माने तो फोन पर हीं कुलवंत के परिजनों ने बताया है कि वहकुलवंत द्वारा हत्या किए जाने व जेल जाने के बाद से ही उसे बेदखल कर चुके है और फिलहाल उनका कुलवंत से कोई वास्ता नहीं है. पुलिस के अनुसार मंगलवार की सुबह उन्हें जेल अधीक्षक से सूचना मिली थी कि पंजाब के मोगा जिले के रहने वाले कुलवन्त नामक एक हवालाती ने जेल के बाथरूम में कपड़े की चादर से फांसी का फंदा बनाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली.

सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मौका मुआयना किए जाने के बाद मृतक कुलवंत के शव को पोस्टमार्टम कराने के लिए नागरिक अस्पताल झज्जर भेजे जाने के साथ-साथ कुलवंत के परिजनों से उनके पंजाब स्थित घर में फोन पर बातचीत की और पूरे की मामले की जानकारी दी. पुलिस का कहना है कि कुलवंत के परिजनों ने फिलहाल शव लेने से इनकार किया है. पुलिस का यह भी कहना है कि वह इस मामले में कुलवंत के परिजनों को उनके गांव, सरपंच और वहां की लोकल पुलिस को भी सूचना भेजेगी. उसके बाद ही इस बारे में कोई फैसला लिया जाएगा.

बता दें कि दुलीना जेल में फांसी का फंदा लगाकर जीवनलीला समाप्त करने वाला हवालाती कुलवंत को इसी माह की पांच तारीख को अदालत के आदेश पर जेल भेजा गया था. उस पर आरोप है कि उसने किसान आंदोलन के दौरान ही अपने साथी हाकम की धारदार हथियार से हत्या इसलिए कर दी थी. बताया जाता है कि हाकम की भाभी से कुलवंत के अवैध सम्बन्ध थे और हाकम उसमें रोड़ा बना हुआ था.

मामले का पर्दाफाश किए जाने के बाद पुलिस ने कुलवंत के साथ-साथ उसकी प्रेमिका को भी पंजाब से गिरफ्तार कर लिया था. वह भी दुलीना जेल में इन दिनों बंद है. फिलहाल पुलिस मृतक कुलवंत के परिजनों के आने का इंतजार कर रही है. समाचार लिखे जाने तक पुलिस ने मृतक कुलवंत के शव को झज्जर नागरिक अस्पताल के शवगृ़ह में रखवाया हुआ था.(news18.com)
 


14-Apr-2021 2:22 PM 22

 

तनाव का शरीर पर पड़ने वाले बहुत से प्रभावों का अध्ययन हो चुका है. लेकिन क्या तनाव कि इंसान के लिंग निर्धारण में भी किसी तरह की कोई भूमिका हो सकती है. लेकिन स्पेन में हुए एक अध्ययन इसी ओर इशारा कर रहा है. इसके मुताबिक गर्भ धारण से पहले और उसके दौरान तनाव रहने वाली महिलाओं  में इस बात की दोगुनी संभावना रहती है कि वे लड़के के बजाए लड़की को जन्म दें.

तनाव के प्रति भ्रूण की संवेदनशीलता
ग्रांडा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के इस अध्ययन के नतीजे इस बात की पुष्टि करते हैं कि गर्भ में मौजूद भ्रूण माता को हुए तनाव के प्रति संवेदनशील होते हैं यानि उन पर माता के तनाव का ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है. और उनके विकास में इनकी अहम भूमिका होती है. शोध में माना गया है कि तनाव का सबसे ज्यादा प्रभाव गर्भाधान के समय होता है.

कैसे किया गया था अध्ययन
क्लीनिकल एंडोक्राइनोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन में 108 महिलाओं को शामिल किया. उन पर गर्भाधान के बाद के पहले कुछ हफ्तों से प्रसव के समय तक निगरानी रखी गई. अपने अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने इन महिलाओं के गर्भाधान के पहले से बाद तक तनावों के स्तरों को रिकॉर्ड किया. इसके लिए उन्होंने कई मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के साथ ही उन्होंने उनके बालों में कोर्टिसोल की मात्रा की जांच की.

ये गणनाएं की
हर मापन में पिछले तीन महीनों के कोर्टिसोल स्तरों को शामिल किया गया जिसमें हर महीने बालों की एक सेंटीमीटर की वृद्धि की दर से गणना की गई. पहली जांच में महिलाओं के तनावों का स्तर गर्भाधान और उसके पहले के समय दर्शाने वाला था. इसके बाद वैज्ञानिकों ने भ्रूण की स्थिति का अवलोकन कर उसके विभिन्न मानों की गणना की.

वैज्ञानिक प्रमाणों का मिलना
यूजीआर के पर्सनालिटी, इवेल्यूशन एंड साइकोलॉजिकल ट्रीटमेंट की शोधकर्ता और इस अध्ययन की प्रमुख लेखिका मारिया इसाबेल पेराल्टा रैमीरेज का कहना है कि यह अध्ययन और उसके नतीजे गर्भवती महिलाओं, उनके प्रसव और शिशु के मस्तिष्क विकास पर तनाव के प्रभावों के बहुत सारे वैज्ञानिक प्रमाण प्रदर्शित करता है.

चौंकाने वाले नतीजे
रैमीरेज बताती हैं, “इस अध्ययन के नतीजे चौंकाने वाले रहे क्योंकि उन्होंने बताया कि जिन महिलाओं ने लड़की को जन्म दिया उनमें बालों को कार्टिसोल की मात्रा गर्भाधान के पहले दौरान और उसके बाद ज्यादा थी. वहीं लड़कों को पैदा करने वाली महिलाओं में ऐसा तलुनात्मक रूप कम था. शोध में आश्चर्यजनक रूप से पाया गया कि बालो में कोर्टिसॉल की मात्रा उन महिलाओं में दो गुनी ज्यादा थी जिन्होंने लड़की को जन्म दिया.

दो संभावनाएं
शोध में इसकी व्याख्या के लिए दो संभावनाएं सुझाई गईं.  पहली संभावना के अनुसार इसकी वजह कोर्टिसोल के रिसाव को नियंत्रित करने वाला तनाव तंत्र यानि हायपोथोलेमस- पिट्यूटरी-एड्रेनल ग्लैंड सिस्टम होता है. यह तंत्र गर्भाधान के समय सेक्स होर्मोन्स की मात्रा को नियंत्रित करता है. वैसे इस बारे में ज्यादा कुछ स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन हो सकता है कि टेस्टोस्टेरोन बच्चे के लिंग को निर्धारित करने में भूमिका निभाता है.

दूसरी संभावना
दूसरी संभावना के अनुसार इस बात के वैज्ञानिक प्रमाण है कि एक्स क्रोमोजोम वाला शुक्राणु जिससे बच्चे को लड़की होना तय होता है, वह मुश्किल  हालात में सर्वाइकल म्यूकस से आसानी से गुजर जाता है और वाय क्रोमोजोम के तुलना में अंडाणु तक पहुंचने में सफल हो जाता है.

इस मामले में और शोध की जरूरत तो है, लेकिन यह पहले भी पता लगा है कि भ्रूण के शुरुआती विकास में तनाव का बच्चे पर बहुत प्रभाव पड़ता है. और इसका असर बच्चे के बर्ताव और मानसिक विकास में स्पष्ट दिखाई भी देता है. इस तरह के शोध जानवरों में हो चुके हैं और उनमें कुछ ऐसा ही देखने को मिला था. (news18.com)


14-Apr-2021 2:21 PM 19

रमज़ान के दौरान नमाज़ियों को दिल्ली स्थित निज़ामुद्दीन मरकज़ में जाने की अनुमति देने के एक ही दिन बाद केंद्र सरकार ने रुख से पलटते हुए दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि राजधानी में लागू नए आपदा प्रबंधन नियमों के तहत सभी प्रकार के धार्मिक जमावड़ों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

यह मामला पिछले साल देश में जिस वक्त कोरोनावायरस की शुरुआत हो रही थी, तबलीगी जमात के जमावड़े को लेकर दर्ज किए गए मामले के बाद उसी वक्त से बंद पड़ी दक्षिण दिल्ली के निज़ामुद्दीन स्थित बंगले वाली मस्जिद से जुड़ा है.

हाईकोर्ट दिल्ली वक्फ बोर्ड की अर्ज़ी पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें मरकज़ के भीतर जाकर नमाज़ अदा करने पर लगाई गई पाबंदी में ढील दिए जाने की मांग की गई है. सोमवार को, अदालत ने केंद्र के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलिस द्वारा वेरिफाइड की गई 200 लोगों की सूची में से एक वक्त में सिर्फ 20 लोगों को मरकज़ के भीतर जाकर नमाज़ अदा करने की अनुमति होगी.

हरिद्वार में जारी महाकुंभ के दौरान जुट रही हज़ारों लोगों की भीड़ को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया था, "आपकी अधिसूचनाओं में क्या आपने धार्मिक स्थलों पर 20 से ज़्यादा लोगों के एकत्र होने पर पाबंदी लगाई है...?"

कोर्ट ने केंद्र सरकार से सभी धार्मिक, राजनैतिक, शैक्षिक, सामाजिक तथा खेल-संबंधी जमावड़ों पर रोक लगाने के अपने नए रुख को लेकर एफिडेविट दाखिल करने के लिए भी कहा.

दिल्ली वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से कहा है कि सिर्फ 200 लोगों की सूची तैयार करना मुश्किल काम होगा. कोर्ट ने कहा कि मस्जिद को भी निश्चित संख्या तय करने की ज़रूरत नहीं है, अगर कोई भी अन्य धार्मिक पूजास्थल ऐसा नहीं करते हैं. कोर्ट ने कहा, "200 लोगों की सूची स्वीकार्य नहीं है... नहीं हो सकती..."

कल, केंद्र सरकार ने अपना तर्क बदला था और दिल्ली आपदा प्रबंधन एक्ट के दिशानिर्देशों का ज़िक्र किया था, जिसमें सभी धार्मिक जमावड़ों पर पाबंदी लगाई गई है. यह नियम सिर्फ दिल्ली में लागू होता है. (ndtv.in)
 

 


14-Apr-2021 2:20 PM 21

 

-शाहनवाज राणा

शामली. उत्तर प्रदेश के शामली जनपद में पति की हैवानियत की तस्वीरें सामने आई है. आरोप है कि पति ने अपनी पत्नी की हत्या करने का प्रयास किया है. आरोपी ने पहले तो पीड़िता को फांसी देकर मारने की कोशिश की. इसमें विफल रहा तो पीड़िता को गर्म प्रेस से जला दिया. इससे पीड़िता गंभीर रूप से झुलस गई. सूचना पर पहुंचे परिजनों ने पीड़ितों को कांधला सीएचसी में भर्ती कराया है और इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी है. आरोप है कि पति विवाहिता से दहेज में 1 लाख रुपए नकद और एक मोटरसाइकिल की मांग कर रहा था. दहेज न ला पाने की कीमत पीड़िता को कुछ इस तरह से चुकानी पड़ी है.

दरअसल, मामला कांधला थाना क्षेत्र के गांव इस्सोपुरटील का है, यहां पर इस्सोपुरटील निवासी इरशाद पुत्र उमरदीन की शादी शबनम पुत्री आशिक अली निवासी जमालपुर थाना झिंझाना जनपद शामली से हुई है. शादी को करीब 3 साल हो चुके हैं. इसी बीच पीड़िता शबनम ने एक बच्ची को भी जन्म दिया है.

मुख्यमंत्री सामूहिक कार्यक्रम में हुई थी शादी
बताया जा रहा है पीड़िता शबनम की शादी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम के अंतर्गत हुई थी. शबनम के पिता मेहनत मजदूरी का काम करते हैं. इरशाद के परिजनों की रजामंदी से यह शादी कराई गई थी, लेकिन जैसे-जैसे शादी का समय बीतता गया, वैसे-वैसे आरोपी इरशाद की हैवानियत बढ़ती चली गई. इरशाद आए दिन पीड़िता पर जुल्म करता रहा और उसको यातनाएं देता रहा. शबनम लोक लिहाज के कारण सब सहन करती रही और मायके वालों से इसका जिक्र तक नहीं किया. शबनम पर दहेज की मांग को लेकर रोज यातनाएं मिलतीं, लेकिन शबनम सब सह जाती क्योंकि उसको अपने पिता की माली हालत का पता था.
अमानवीयता की हद तक दीं यातनाएं

आखिरकार शबनम ने दहेज की मांग पूरी करने से मना कर दिया, जिसके बाद इरशाद ने उनकी हत्या करने की कोशिश की. आरोपी ने पहले तो विवाहिता की गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया, जिसमें वह विफल हो गया. इसके बाद आरोपी ने विवाहिता को बिजली की प्रेस से जला दिय. सूचना पर पिता आशिक अली व मां पहुंचे तो शबनम को देखकर उनके पैरों के तले की जमीन खिसक गई. आरोपी की बर्बरता की दलील शबनम के शरीर पर पड़े निशान दे रहे थे. शबनम के पूरे शरीर पर चोट के निशान हैं. फिलहाल परिजनों ने शबनम को कांधला सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया है और पुलिस को लिखित शिकायत देकर कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है. (news18.com)


14-Apr-2021 2:20 PM 27

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
 दंतेवाड़ा, 14 अप्रैल।
दंतेवाड़ा में नक्सली उन्मूलन अभियान में पुलिस को फिर से कामयाबी मिली है। सीआरपीएफ 231वी बटालियन और दंतेवाड़ा पुलिस के संयुक्त प्रयासों से एनएमडीसी परियोजना अस्पताल किरंदुल से मंगलवार को महिला नक्सली लीडर को हिरासत में लेने में कामयाबी मिली। 

पुलिस अधीक्षक डॉ.अभिषेक पल्लव ने जानकारी में बताया कि पुलिस को गोपनीय सूचना प्राप्त हुई थी कि किरंदुल स्थित एनएमडीसी परियोजना अस्पताल में नक्सली लीडर द्वारा इलाज कराया जा रहा है। इस खबर की पुष्टि हेतु अनुविभागीय अधिकारी, किरंदुल देवांश राठौर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में वार्डों की जांच के दौरान एक महिला पुलिस को देखकर भागने लगी। 

उक्त महिला की घेराबंदी कर पूछताछ की गई, जिसमें उसकी शिनाख्त नंदे ताती, उम्र 25 वर्ष, पति हरीश ताती के रूप में हुई। नंदे अरनपुर थाना अंतर्गत  ककाड़ी गांव की निवासी है। वह नक्सली संगठन मलांंगीर एरिया कमेटी में केएएमएस सदस्य के रूप में सक्रिय थी। नंदे विभिन्न नक्सली वारदातों में भागीदार थी। इनमें अरबे गांव निवासी हड़मा मरकाम की हत्या में शामिल होना, अचेली व तनेली के जंगलों में पुलिस दल पर हमला करना और पोटाली में पुलिस दल पर हमला करना आदि घटनाओं में भागीदार थी। पुलिस अधीक्षक, दंतेवाड़ा द्वारा उक्त नक्सली की गिरफ्तारी पर 10 हजार का पुरस्कार घोषित किया गया था। सफलता में सीआरपीएफ उपकमांडेंट राजीव कुमार, सुरेंद्र,थाना प्रभारी अरनपुर, पुरूषोत्तम धु्रव व टीम का सराहनीय योगदान रहा।


14-Apr-2021 2:20 PM 25

नई दिल्ली, 14 अप्रैल : देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने बुधवार को कोरोना वैक्सीन की कमी और बोर्ड परीक्षाओं के मुद्दों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि मोदी सरकार अब वही काम कर रही है, जो पार्टी के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पहले कह चुके हैं.

सुरजेवाला ने सीबीएसई परीक्षाओं पर चल रही बहस को लेकर हमला किया. उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी ने परीक्षाओं को निरस्त करने को लेकर चिट्ठी लिखी थी और राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी अपील की थी, लेकिन बीजेपी नेताओं ने इसका मजाक उड़ाया था और अब वो इसपर यही काम करने जा रहे हैं. बता दें कि पीएम मोदी परीक्षाओं को लेकर आज शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं.

उन्होंने वैक्सीन की कमी वाले मुद्दे पर पार्टी के नेताओं के रुख को लेकर कहा कि 'जब राहुल गांधी ने पत्र लिख कर विदेशी वैक्सीनों की इजाज़त की मांग की तो मोदी सरकार के मंत्रियों ने राहुल गांधी पर हमला बोल दिया. 24 घंटे बाद सरकार को वही काम करना पड़ा. ये सरकार है या तू तू मैं मैं की दुकान है.'

उन्होंने कोरोना के मैनेजमेंट को लेकर सरकार पर हमला करते हुए कहा कि कोरोना की दूसरी लहर ने देश को बुरी तरह से प्रभावित किया है और हर रोज भयावह आंकड़े सामने आ रहे हैं. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. लेकिन मोदी सरकार ने लोगों को उनके खुद के भरोसे छोड़ दिया है. 

कांग्रेस नेता ने कहा, 'देश के कई राज्यों में वैक्सीन की कमी है. लेकिन जब राहुल गांधी पीएम को इसे लेकर चिट्ठी लिखते हैं, तो पीएम इस बात को स्वीकार करने की बजाय अपने मंत्रियों स्मृति ईरानी और रविशंकर प्रसाद को उनके पीछे छोड़ देते हैं. और फिर 48 घंटे बाद उसी सुझाव पर अमल करते हैं.'

दरअसल, कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी की शिकायत की थी और सप्लाई बढ़ाने को कहा था. सोनिया गांधी ने पिछले हफ्ते कांग्रेस शासिता राज्यों के साथ एक मीटिंग की थी, जिसमें उन्होंने स्थिति का जायजा लिया था और कहा था कि सरकार ने दूसरे देशों को वैक्सीन सप्लाई करने की हुज्जत में देश में वैक्सीन की कमी होने दी है.

राहुल गांधी ने सुझाव दिया था कि सरकार विदेशों में जिन वैक्सीन को मंजूरी मिल चुकी है, उनका आयात करे ताकि वैक्सीन की पूर्ति हो पाए. मंगलवार को सरकार ने घोषणा की थी कि वो अब ऐसे वैक्सीन का आयात करने वाली है. वहीं, रूस की की कोविड वैक्सीन स्पूतनिक-V को भी ड्रग्स नियामक संस्था की ओर से मंजूरी मिल चुकी है.

इसके इतर बता दें कि कांग्रेस ने अपना एक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म- INC_Television लॉन्च किया है. पार्टी की ओर से कहा गया है कि 'कांग्रेस हमेशा वंचित-शोषित तबके के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित रही है. वर्तमान समय में भी हमें बाबा साहेब के संविधान और अभिव्यक्ति जैसे मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करनी होगी. @INC_Television इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है.' पार्टी ने कहा है कि वो इसकी औपचारिक शुरुआत 24, 2021 अप्रैल से करेगी. (ndtv.in)
 


14-Apr-2021 2:19 PM 18

-विनय देशपांडे

मुंबई. महाराष्ट्र के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कड़ी पाबंदियों की घोषणा की है. ऐसे में मुंबई में रहने वाले लोगों के लिए घरेलू कर्मियों का संकट गहरा गया है. रहवासियों को चिंता है कि उनके घर पर काम करने वाले पहुंच पाएंगे या नहीं. इस बात की जानकारी बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन यानि बीएमसी के आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने दी है. हालांकि, उन्होंने घरेलू कर्मियों को काम करने के लिए हरी झंडी दे दी है. साथ ही बताया कि इसके संबंध में गाइडलाइंस बुधवार को जारी की जाएंगी.

चहल ने कहा 'क्या मेरे घर में काम करने वाले आएंगे, जब से जनता कर्फ्यू की घोषणा हुई है, तब से ही मुंबईकर मुझसे यह सवाल कर रहे हैं. मुझे इसके संबंध में कई कॉल मिले.' उन्होंने जानकारी दी 'बीएमसी इसके संबंध में कल गाइडलाइंस जारी करेगी.' साल 2016 में हुई एक स्टडी 'फीमेल माइग्रेंट्स इन इंडिया' के आंकड़े बताते हैं कि 54.9 फीसदी प्रवासी महिलाएं घरेलू कर्मचारी के तौर पर काम कर रही हैं.

मंगलवार शाम सोशल मीडिया के जरिए राज्य के सामने आए सीएम ठाकरे ने जानकारी दी है कि कर्फ्यू में जरूरी सेवाओं को छूट रहेगी. उन्होंने बताया था कि पाबंदियां 14 अप्रैल को रात 8 बजे से शुरू होकर 1 मई को सुबह 7 बजे तक जारी रहेंगी. हालांकि, वे इस दौरान नई पाबंदियों को लॉकडाउन कहने से बचते रहे. आबादी के बड़े तबके पर पाबंदियों के प्रभाव को कम करने के लिए सीएम ने राहत पैकेज की भी घोषणा की है.

सीएम ठाकरे ने कहा कि सरकार अगले एक महीने तक गरीब और जरूरतमंदों को 3 किलो गेंहूं और 2 किलो चावल देगी. सीएम बुधवार को कोविड स्थिति की समीक्षा करने के लिए जिला कलेक्टर्स के साथ बैठक करने जा रहे हैं. राज्य में कोरोना वायरस का कहर जारी है. बीते कई दिनों से रोज मिलने वाले कोविड-19 मरीजों की संख्या 50 हजार के ऊपर बनी हुई है.(news18.com)


14-Apr-2021 2:18 PM 37

 

अक्सर शादी-ब्याह या ऐसे उत्सवों में कहीं से किन्नर आ धमकते हैं और तालियां बजाते हुए दुआएं देते हैं. वे एक खास अंदाज में ताली बजाते हैं, जो स्कूल-कॉलेजों या दूसरे मौकों पर बजने वाली तालियों से एकदम अलग होती है. किन्नर बिना मतलब ताली नहीं बजाते, बल्कि ताली का ये खास अंदाज उनकी पहचान से जुड़ा हुआ है. तालियों का खास मतलब भी होता है. जानिए, क्या है ये किन्नर ताली.

ताली की खास आवाज और बजाने के तरीके से एक किन्नर, दूसरे की पहचान कर लेता है. अक्सर किन्नर स्त्रियों के कपड़ों में होते हैं लेकिन कई बार वे पुरुषों की पोशाक में भी होते हैं. ऐसे में अपनी बिरादरी के लोगों से घुलने-मिलने के लिए उन्हें ताली बजाकर अपने असल होने का सबूत देना होता है. वैसे तो किन्नर शादी-ब्याह या जन्मोत्सव जैसे मौकों पर ही अचानक घर पहुंच जाते हैं और ताली बजाकर खुशी का इजहार करते हैं लेकिन अपने समुदाय में वे ताली के जरिए भी भावनाएं जाहिर करते हैं. गुस्सा होने या खुशी में वे बात करते हुए ताली बजाते जाते हैं.


किन्नरों के ताली बजाने का अपना तरीका होता है. आम ताली में दोनों हाथ वर्टिकल या हॉरिजॉन्टल होते हैं और उंगलियां आपस में लगभग जुड़ी होती हैं. वहीं किन्नर जब ताली बजाते हैं तो एक हाथ वर्टिकल और एक हॉरिजॉन्टल तरीके से आपस में जुड़ता है और उंगलियां एकदम दूर-दूर होती हैं. इस ताली से खास तरह की आवाज निकलती है जो काफी ऊंची होती है.

कुछ सालों पहले समाजवादी पार्टी के नेता विशंभर प्रसाद निषाद का एक बयान काफी विवादों में रहा था. उन्होंने कहा था कि किन्नर कभी बीमार नहीं पड़ते क्योंकि वे ताली बजाते हैं. मैंने कभी किसी किन्नर को अस्पताल में इलाज कराते नहीं देखा. ताली उनके लिए एक्युप्रेशर थैरेपी है जो बाकी लोगों को भी अपनानी चाहिए.

किन्नर समुदाय के बारे में काफी सारी बातें हैं, जो दूसरों से अलग हैं. जैसे यहां किसी नए किन्नर को समाज में शामिल करने के लिए काफी रीति-रिवाज होते हैं. नए किन्नर की शारीरिक और मानसिक अवस्था जांचकर पक्का किया जाता है कि वो किन्नर समुदाय से जुड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है. उसके बाद शामिल होने पर बाकायदा भोज और नाच-गाना भी होता है.

ज्यादातर किन्नर उत्सवों में जाकर और दुआएं देकर कमाई करते हैं. हालांकि अब समाज की मुख्यधारा में स्वीकार्यता बढ़ी है और वे नौकरी भी करने लगे हैं लेकिन ऐसे लोग बहुत कम हैं. किन्नर मिल-जुलकर परिवार की तरह रहते हैं और अपने सबसे अनुभवी किन्नर को गुरु मानते हैं. यही गुरु परिवार की व्यवस्था बनाए रखता है. पैसों का लेनदेन और खर्च जैसे काम भी इसी गुरु के कहने पर होते हैं. (news18.com)


14-Apr-2021 2:18 PM 15

मुंबई, 14 अप्रैल : देश में कोरोना केसों में बढोतरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट परिसर में दाखिल होने के लिए नई गाइडलाइन जाकी है. नई गाइ़डलाइन के मुताबिक, यदि अदालत परिसर में आने वाले किसी भी व्यक्ति को COIVD के लक्षण हैं तो RT-PCR टेस्ट जरूरी है. सभी आने वालों को, सुप्रीम कोर्ट  कर्मचारियों, वकीलों, उनके कर्मचारियों को लक्षण होने पर RT-PCR टेस्ट कराना होगा और रिपोर्ट दिखानी होगी.

शरीर में दर्द, बुखार, गंध की कमी जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों को अदालत में नहीं आना चाहिए और खुद को आइसोलेट करे. अधिकारी ये तय करेंगे कि सभी कर्मचारी मास्क, सेनेटाइजर का प्रयोग करें और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें. कोर्ट परिसर में कोई भीड़भाड़ या जमावड़ा ना करें. लिफ्ट का इस्तेमाल एक बार में सिर्फ तीन लोग करेंगे और इसका इस्तेमाल सिर्फ ऊपर जाने के लिए होगा. काम खत्म होते ही तुरंत परिसर को खाली किया जाए.

बता दें, देश में कोरोना के मामलों में तेजी के साथ इजाफा देखने को मिल रहा है. लगातार चार दिन से देश में मामले 1.5 लाख से ऊपर आ रहे हैं और आठ दिन से एक लाख से ज्यादा कोविड मामले सामने आ रहे हैं. पिछले 24 घंटे में पूरे देश में  कोरोना वायरस के 1,84,372  नए केस दर्ज किए गए हैं, वहीं इस दौरान 1,027 लोगों की मौत कोविड की वजह से हुई है.  (ndtv.in)
 


14-Apr-2021 2:18 PM 41

 

वॉशिंगटन. कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच एक चिंतित करने वाली खबर आई है. हाल ही में हुई एक स्टडी में पता चला है कि ऐसा कोविड-19 मरीज जो महामारी से पहले एक्सरसाइज नहीं करता है, तो उसके गंभीर रूप से बीमार होने की आशंकाएं ज्यादा हैं. साथ ही ऐसे मामले में मौत का जोखिम भी बढ़ जाता है. एक्सरसाइज की कमी के अलावा बढ़ती उम्र और ऑर्गन ट्रांसप्लांट ही बड़े कारण हैं.

ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन में मंगलवार को प्रकाशित स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग महामारी आने से पहले कम से कम 2 साल तक निष्क्रिय थे, उनके अस्परताल में भर्ती होने, ICU और मौत की आशंकाएं ज्यादा हैं. एक्सपर्ट्स ने बताया धूम्रपान, मोटापा और हाईपरटेंशन की तुलना में 'शारीरिक तौर पर निष्क्रिय होना सबसे ज्यादा बड़ा जोखिम है.'

कोविड-19 के गंभीर संक्रमण का कारण बढ़ती उम्र, पुरुष होना, डायबिटीज, मोटापा या कार्डिवैस्क्युलर बीमारी थी. लेकिन अब तक निष्क्रिय जीवनशैली इस सूची में शामिल नहीं थी. इस बात का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने अमेरिका में 48 हजार 440 कोविड संक्रमित व्यस्कों पर शोध किया. ये स्टडी जनवरी से अक्टूबर 2020 के बीच की गई थी.

इस दौरान मरीज की औसत उम्र 47 थी. वहीं, 5 में से तीन मरीज महिलाएं थी. उनका औसतन BMI 31 था. स्टडी में शामिल करीब आधे मरीजों को डायबिटीज, क्रोनिक लंग कंडीशन, दिल या किडनी की बीमारी नहीं थी. करीब 20 फीसदी मरीजों के एक बीमारी थी. जबकि, 30 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों को दो या उससे ज्यादा बीमारियां थीं.

दुनिया में कोरोना वायरस के अब तक 13 करोड़ 80 लाख 44 हजार 204 मरीज मिल चुके हैं. इनमें से 29 लाख 72 हजार 576 मरीजों की मौत हो चुकी है. फिलहाल सबसे प्रभावित राष्ट्र अमेरिका है. यहां मिले 3 करोड़ 20 लाख 70 हजार 784 मरीजों में से 5 लाख 77 हजार 179 अपनी जान गंवा चुके हैं. आंकड़ों के लिहाज से भारत दूसरा सबसे प्रभावित देश है. ये आंकड़े वर्ल्डोमीटर से लिए गए हैं. (news18.com)


14-Apr-2021 2:18 PM 36

रायपुर, 14 अप्रैल। शहर के प्रतिष्ठित नागरिक अनिल लखोटिया की पत्नी श्रीमती ममता (भगवती) लखोटिया का सोमवार 12  तारीख को बैकुण्ठ लोक गमन हो गया। विधि के विधान के आगे हम सभी नतमस्तक हैं। वे अंशुल एवं अंकुश की माताजी, एवं धमतरी-रायपुर निवासी सत्यनारायण, द्वारकादास, नंदकिशोर, रमेश, दिनेश, सुरेश राठी की बहन थीं। परिजनों ने निवेदन किया है कि कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में प्रशासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए आप सभी अपने-अपने घरों से ही श्रद्धांजलि अर्पित कर शोक संवेदना प्रेषित करें।


14-Apr-2021 2:17 PM 18

नई दिल्‍ली. कोरोना संकट के बीच ज्‍यादातर कंपनियां अपने ग्राहकों को संक्रमण की चपेट में आने से बचाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही हैं. कई कंपनियों ने कॉन्‍टैक्‍टलेस होम डिलिवरी सुविधा शुरू की. अब इसी कड़ी में न्यूरो रोबोटिक्स की मदद से डॉमिनोज ने आपके दरवाजे तक पिज्जा पहुंचाने का नया तरीका खोज निकाला है. आर-2 न्यूरो रोबोटिक्‍स का कस्टम ऑटोनॉमस व्हिकल ऑन-रोड डिलिवरी रोबोट है. इसे अमेरिकी परिवहन विभाग से मंजूरी मिल गई है. ये सुविधा फिलहाल अमेरिका के ह्यूस्टन और टेक्सास में शुरू की गई है.

आपके ऑर्डर पर ऐसे काम करेगा पिज्‍जा डिलिवरी रोबोट
अमेरिका के इन दोनों शहरों के चुनिंदा ग्राहक निश्चित समय और दिन प्रीपेड ऑर्डर दे सकते हैं. वे अपना ऑर्डर आर-2 रोबोट द्वारा डिलिवर कराने की मांग कर सकते हैं. ग्राहकों को डॉमिनोज स्टोर की ओर से चुना जाएगा और उन्हें आर-2 के वर्तमान स्थान और एक यूनिक पिन नंबर के साथ एक टैक्टस नोटिफिकेशन मिलेगा. आर-2 रोबोट की लोकेशन को ऑर्डर कंफर्मेशन पेज पर जीपीएस की मदद से ट्रैक किया जा सकता है. ग्राहक को आर-2 की टचस्क्रीन पर यूनिक पिन नंबर दर्ज करना होगा. इसके बाद उसके दरवाजे खुलेंगे और वो आपको ऑर्डर दे देगा. डॉमिनोज के डेनिस मालोनी कहते हैं कि ऑटोनॉमस डिलिवरी स्पेस के बारे में जानने के लिए अभी भी बहुत कुछ बाकी है.

'देखना है, ग्राहक ऐसी डिलिवरी पर क्‍या प्रतिक्रिया देते हैं'

मालोनी ने कहा, 'इस प्रोग्राम के जरिये हमें बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी कि ग्राहक इस तरह की डिलिवरी पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं. कैसे वे रोबोट के साथ बातचीत करते हैं और ये स्टोर ऑपरेशन को कैसे प्रभावित करता है.' वहीं, न्यूरो रोबोटिक्‍स के डेव फर्ग्यूसन ने कहा कि पहली बार हम वास्तविक दुनिया में आर-2 और डॉमिनोज के साथ ऑटोनॉमस डिलिवरी शुरू कर रहे हैं. हम ह्यूस्टन में डॉमिनोज के चुनिंदा ग्राहकों के लिए अपनी ऑटोनॉमस डिलिवरी बॉट शुरू करने को लेकर काफी उत्साहित हैं. हम देखने के लिए बेताब हैं कि वे क्या सोचते हैं. (news18.com)


14-Apr-2021 2:14 PM 33

 

बारासात (कोलकाता.) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा लगाई गई पाबंदी के बाद बारासात में एक चुनावी रैली की. इस दौरान टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि 'मोदी झूठे हैं... प्रधानमंत्री झूठे हैं...'. हालांकि तुरंत ममता ने कहा कि 'झूठा असंसदीय शब्द है... प्रधानमंत्री लोगों को गुमराह कर रहे हैं...'

ममता ने कहा 'नरेंद्र मोदी (पीएम) ने कृष्णानगर में एक रैली में कहा कि ममता दीदी ने मतुआ समुदाय के लिए कुछ नहीं किया. मैं सार्वजनिक रूप से उन्हें चुनौती स्वीकार करने के लिए कह रहीं हूं, अगर मैंने उनके लिए कुछ नहीं किया तो मैं राजनीति छोड़ दूंगी, अगर आप झूठ बोल रहे हैं तो आप कान पकड़ कर उठक बैठक करिएगा.'

बारासात में टीएमसी नेता ने कहा कि  'ममता बनर्जी ने सभी से एकजुट होकर वोट देने की क्या गलती की? मुझे हिंदू, मुस्लिम, सिख, क्रिश्चियन, माताओं, बहनों, छात्रों और युवाओं से वोट चाहिए.' सीएम ने कहा कि 'बीजेपी जानती है कि वे चुनाव हार जाएंगे, इसलिए वे मुझे प्रचार करने से रोकने के लिए सभी केंद्रीय एजेंसियों की मदद ले रहे हैं.'

चुनाव प्रचार से मुझे रोकने की कोशिशें की गयी- ममता
बनर्जी ने बारासात में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘भाजपा प्रचार कर सकती है और मुझे अनुमति नहीं दी गयी. मैं कुछ नहीं कहूंगी, बंगाल के लोग इस पर निर्णय करेंगे. वे हर चीज देख रहे हैं. खुद को जमीन से जुड़ी योद्धा बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ‘भाजपा के डराने-धमकाने के हथकंडे’ के आगे नहीं झुकेंगी. उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा और उसकी एजेंसियों द्वारा मुझे प्रचार से रोकने के लिए कोशिशें की जा रही हैं.’

बनर्जी ने कहा, ‘भाजपा मुझे चुनाव प्रचार से रोकना चाहती है क्योंकि उन्हें आसन्न हार का अंदाजा हो गया है.’ निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के खिलाफ टिप्पणी और धार्मिक लहजे वाले बयान के लिए बनर्जी के प्रचार करने पर सोमवार रात आठ बजे से 24 घंटे के लिए पाबंदी लगा दी थी. (भाषा इनपुट के साथ) (news18.com)