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05-Aug-2020 1:07 PM

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)| राम मंदिर के भूमि पूजन के खास मौके पर रामलला के लंबे समय से वकील रहे केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को संविधान की मूल प्रति में मौजूद भगवान राम की एक तस्वीर साझा की। उन्होंने कहा, "भारत के संविधान की मूल प्रति में मौलिक अधिकारों से जुड़े अध्याय के आरम्भ में एक स्केच है जो मयार्दा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या वापसी का है। आज संविधान की इस मूल भावना को आप सभी से शेयर करने का मन हुआ।" 

केंद्रीय मंत्री ने इस दिन को भारत के स्वाभिमान का दिन भी कहा।

प्रसाद ने अयोध्या भूमि विवाद मामले से संबंधित मुकदमे में याचिकाकर्ता राम लला का प्रतिनिधित्व किया था, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2010 में फैसला सुनाया था। न्यायालय ने विवादित स्थल को दावेदारों के बीच समान रूप से वितरित करने का आदेश दिया था।

न्यूज टेलीविजन पर सार्थक डिबेट करने वाले प्रसाद को भगवान राम के वकील के रूप में जाना जाने लगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले, जहां वकील के. परासरन ने राम लला की पैरवी की थी, को प्रसाद ने 'ऐतिहासिक फैसला' बताया था।


05-Aug-2020 1:03 PM

छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक हैरान करने वाले नेता की अनोखी जगह है जिसके बारे में हर चुनाव के पहले एक किस्म का नारा जुमला बनकर सामने आता है। कभी अटल बिहारी जरूरी है, रमेश बैस मजबूरी है कहा जाता है, तो कभी नरेन्द्र मोदी जरूरी है, रमेश बैस मजबूरी है। खासा वक्त हो गया छत्तीसगढ़ की राजधानी में लोकसभा के चुनाव में रमेश बैस को वोट देकर जिताना जारी रखा है, अब बहुत से चुनाव ऐसे रहे जिसमें लोग यह मानते रहे कि लोगों ने रमेश बैस को जिताने के लिए वोट नहीं दिया, कांग्रेस को हराने के लिए वोट दिया। लेकिन यह तो दुनिया के किसी भी चुनाव के बारे में कहा जा सकता है, और कोई भी वोट-मशीन या मतपत्र यह नहीं बता सकते कि किसके खिलाफ वोट दिया गया है, या किसके पक्ष में दिया गया है। 

रमेश बैस सात बार के सांसद रहे, और नौ बार उन्होंने रायपुर संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था। उसके पहले वे मंदिर हसौद से भाजपा के विधायक थे, और उसके भी पहले उनकी राजनीति की शुरूआत राजधानी रायपुर के ब्राम्हणपारा से पार्षद बनकर हुई थी। विधायक रहते हुए वे लोकसभा के उम्मीदवार बने थे, और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद की लहर में वे पहला संसदीय चुनाव हार गए थे। इसके बाद वे जीते, लेकिन एक चुनाव विद्याचरण शुक्ल से भी हारे। उसके बाद वे लगातार रायपुर के सांसद रहे, भाजपा के भीतर वे लालकृष्ण अडवानी और सुषमा स्वराज के साथ रहे, एनडीए-1 में वे अटल मंत्रिमंडल में वे सुषमा के सूचना प्रसारण मंत्रालय में राज्यमंत्री रहे, बाद में एक और विभाग देखा, लेकिन वे कैबिनेट मंत्री नहीं बने। रमेश बैस के लिए मोदी सरकार का पहला कार्यकाल एक सदमे का रहा जब देश के सबसे वरिष्ठ भाजपा सांसदों में से एक होने के बावजूद उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया। और अभी ताजा लोकसभा चुनाव में चूंकि भाजपा ने प्रदेश के हर भाजपा सांसद की टिकट काट दी थी, रमेश बैस की भी टिकट कट गई, लेकिन इससे भी उनकी इज्जत रह गई। लोगों का अंदाज भाजपा के इस अघोषित पैमाने के सामने आने के पहले से यह था कि रमेश बैस को इस बार शायद भाजपा टिकट न दे क्योंकि मोशा (मोदी-शाह) ने उन्हें मंत्रिमंडल के लायक नहीं समझा था, और उनकी उम्र भी 75 बरस के करीब पहुंचने को थी। लेकिन जब मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह के सांसद बेटे की टिकट भी कट गई, हर सांसद की टिकट कट गई, तो रमेश बैस की इज्जत रह गई। टिकट तो गई, लेकिन अकेले नहीं कटी, एक पैमाने के तहत कटी। 

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रमेश बैस का सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक मिजाज बड़ा ही बदलता रहा। वे रायपुर म्युनिसिपल के एक पार्षद के रूप में बहुत सक्रिय रहे, और मंदिर हसौद से विधायक के रूप में भी। राजधानी रायपुर से लगी हुई उनकी सीट थी, और रमेश बैस को हर शाम सरकारी काम के घंटों के वक्त रायपुर के कलेक्ट्रेट में देखा जाता था। वहां के कर्मचारी संघ के चलाए हुए चाय-नाश्ते के छोटे से रेस्त्रां और बाहर के पानठेले पर रमेश बैस का डेरा रहता था, लोग अपने कागज लेकर उनके पास वहीं पहुंचते थे, वे अधिकतर कागजों पर लिखकर उन्हें रवाना करते थे, और जरूरत पडऩे पर वे लोगों के साथ एक-एक सरकारी दफ्तर में जाकर उनका काम करवाते थे। रमेश बैस के अलावा एक भी और विधायक कलेक्ट्रेट में इस तरह रोजाना का डेरा डालकर लोगों के काम करवाने वाले नहीं हुए थे।

रमेश बैस से उन्हीं दिनों का मेरा परिचय रहा, और उनकी उम्र मुझसे खासी अधिक होने के बाद भी उसी वक्त से रमेश कहकर बातचीत जो शुरू हुई, तो वह अब तक उसी तरह जारी है, जब वे सांसद बनते रहते थे, तब भी, और जब वे केन्द्रीय मंत्री थे, तब भी। रायपुर से लेकर भोपाल तक, और दिल्ली तक, रमेश बैस के भीतर का छत्तीसगढ़ी कभी इधर-उधर टहलने भी नहीं गया, और हमेशा ही साथ रहा। लेकिन जनता के साथ उनका गहरा संपर्क विधायक होने के बाद से कम होता चले गया, और लंबे संसदीय जीवन में वे संसदीय सीट की अधिक परवाह करते कभी दिखे नहीं। जो रायपुर में उनके घर पहुंच जाए, उसके लिए चि_ी लिख देना, या फोन कर देना तो वे करते रहे, लेकिन इससे परे वे लोगों के लिए बहुत अधिक करने के शायद गैरजरूरी मानने लगे थे। 

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वैसे एक आदर्श स्थिति भी यही होना चाहिए कि लोग अपने नाली-पानी जैसे कामों के लिए पार्षद के पास जाएं, उससे बड़े कामों के लिए मेयर के पास जाएं, राज्य सरकार से जुड़े कामों के लिए विधायक के पास जाएं जो कि काम न होने पर विधानसभा में सवाल उठा भी सकते हैं। और सांसद का तो कोई अधिक काम पहले रहता नहीं था, जब तक सांसद निधि शुरू नहीं हुई, और उसके बाद फिर लोग सांसद के पास किसी सार्वजनिक काम के लिए आर्थिक मदद के लिए भी जाने लगे। जब छत्तीसगढ़ में एक भाजपा सांसद प्रदीप गांधी सवाल पूछने के लिए रिश्वत मांगते कैमरे में कैद हुए, और उनकी सदस्यता गई, जब एक और भाजपा सांसद फंसते-फंसते इसलिए रह गए कि दिल्ली में स्टिंग ऑपरेटरों  की गाड़ी पंक्चर हो गई, और वे अपने सांसद-निवास पर रास्ता देखते-देखते उनकी ट्रेन का समय हो गया, और वे स्टेशन रवाना हो गए, और स्टिंग का शिकार होने से बच गए, तब रमेश बैस ऐसे किसी विवाद से बचकर बहुत लंबा संसदीय जीवन गुजार रहे थे। 

छत्तीसगढ़ की राजनीति में रमेश बैस उन दो लोगों में से एक रहे जिनके खिलाफ दोनों शुक्ल बंधु कोई न कोई चुनाव लड़े। रायपुर संसदीय सीट से एक बार विद्याचरण शुक्ल रमेश बैस के खिलाफ लड़े, और एक बार श्यामाचरण शुक्ल। ये दोनों ही भाई महासमुंद संसदीय सीट, और राजिम विधानसभा से पवन दीवान के खिलाफ भी लड़े थे। 

रमेश बैस ने रायपुर संसदीय सीट से जब-जब चुनाव लड़ा, अधिकतर मौकों पर उनके खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव शुरू होने के पहले से ही हारे हुए मान लिए जाते थे। और रमेश बैस नामांकन के साथ ही जीते हुए समझ लिए जाते थे। यही वजह थी कि दिल्ली में भाजपा की सरकार बनाने के नाम पर, या कांग्रेस-यूपीए सरकारें हटाने के नाम पर जो लहर चलती थी, जो नारे लगते थे, उनके तहत दिल्ली में फलां जरूरी है, रमेश बैस मजबूरी है, जैसा नारा लगता था। 

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राजनीति में रमेश बैस के अधिक ताकतवर होने का एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक मौका आया था। जब छत्तीसगढ़ राज्य बन गया, और पहली जोगी सरकार के कार्यकाल में राज्य के पहले विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही थी, तब भाजपा को इस राज्य में एक मजबूत प्रदेश अध्यक्ष तय करना था। उस वक्त केन्द्र में अटलजी की सरकार में रमेश बैस, और पार्टी के भीतर की वरिष्ठता में उनसे खासे जूनियर डॉ. रमन सिंह दोनों ही राज्यमंत्री थे, दोनों ही बिना किसी काम बंगलों में खाली रहते थे। ऐसी चर्चा रही कि भाजपा संगठन ने दोनों के सामने यह प्रस्ताव रखा कि छत्तीसगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष बनकर कौन जाना चाहेंगे? इस पर रमेश बैस ने तकरीबन भडक़ते हुए कहा था कि वे क्यों जाएंगे? उन्हें दिल्ली में मंत्री पद सुहा रहा था, और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री अजीत जोगी का अपनी पार्टी को दुबारा सत्ता में लाना तय सा लग रहा था। फिर रमेश बैस के अजीत जोगी से व्यक्तिगत संबंध भी थे, और विधायक रहते हुए भी वे भोपाल से इंदौर कलेक्टर रहे जोगी से मिलते रहते थे। जोगी के खिलाफ भाजपा को लीड करने की उनकी कोई सोच नहीं थी, और उन्होंने पार्टी को छत्तीसगढ़ लौटने के लिए साफ मना कर दिया। नतीजा यह हुआ कि भाजपा ने रमन सिंह को प्रदेश संगठन सम्हालने, और चुनाव की तैयारी करने के लिए कहा, और अपने सरल-विनम्र मिजाज के मुताबिक डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ आ गए, चुनाव की तैयारी की, और प्रदेश की जनता ने उन्हें जिताया, या जोगी को हराया, यह एक अलग बहस है, लेकिन डॉ. रमन विधानसभा चुनाव में जीत के बाद जो मुख्यमंत्री बने, तो 15 बरस तक बने ही रहे। उन्होंने देश के मुख्यमंत्रियों के बीच, और भाजपा के भीतर लगातार सीएम रहने का एक रिकॉर्ड कायम किया जिसे आगे भी लोगों के लिए तोडऩा कुछ मुश्किल रहेगा। रमेश बैस मुख्यमंत्री बनने की राह पर दिल्ली से रायपुर की बस जो चूके  तो चूक ही गए। भाजपा की सरकार बनने के वक्त उन्होंने कोशिश बहुत की कि मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी वरिष्ठता पर गौर किया जाए, लेकिन उस वक्त के एक-दो दूसरे दावेदारों के साथ-साथ रमेश बैस का नाम भी दिल्ली में मंजूर नहीं हुआ, और भाजपा संगठन ने डॉ. रमन को एक बेहतर पसंद माना। 

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रमेश बैस खालिस छत्तिसगढिय़ा हैं, ओबीसी के हैं, किसान परिवार के हैं, और रायपुर के आसपास बहुत सी विधानसभा सीटों पर उनकी रिश्तेदारी भी है। लेकिन इतनी लंबी राजनीति में उनका सारा फोकस परिवार के एक-दो लोगों को बढ़ाने में रहा, और सात बार का सांसद अपने सात विधायक भी खड़े नहीं कर पाया। छत्तीसगढ़ी राजनीति में भी रमेश बैस महज ओबीसी की राजनीति करते रहे, और ओबीसी के भीतर महज कुर्मी समाज की राजनीति करते रहे, और कुर्मी समाज के भीतर महज अपने एक भाई और एक-दो भतीजों से परे किसी को आगे बढ़ाने का कोई श्रेय रमेश बैस के नाम नहीं लिखा है। यह बड़ी अजीब बात रही कि जो लगातार छत्तीसगढ़ की पहले अघोषित, और बाद में घोषित राजधानी से राजनीति करते रहा, उसके नाम अपने मातहत एक को भी नेता बनाने का योगदान दर्ज नहीं है। जब रमन सरकार में रमेश बैस के कोटे से किसी निगम-मंडल में मनोनयन की बारी आई थी, तो उस वक्त भी रमेश बैस ने अपने भाई श्याम बैस को ही बीज निगम का अध्यक्ष बनवाया था। इसके पहले के कार्यकाल में डॉ. रमन सिंह से रमेश बैस ने श्याम बैस को ही आरडीए का अध्यक्ष बनवाया था। भाजपा की राजनीति में लोगों को बढ़ाने के मामले में रमेश बैस का योगदान परिवार के तीन लोगों से परे किसी ने न सुना, न किसी को याद है। 

रमेश बैस सांसद बनने के बाद यह बात शायद अच्छी तरह समझ गए थे कि वे अपने दम पर चुनाव नहीं जीतते हैं, या तो पार्टी जीतती है, या कांग्रेस हारती है। ऐसी बाईडिफाल्ट  जीत की अधिक फिक्र करना उन्होंने छोड़ दिया था, और जिस तरह राजधानी रायपुर में कांग्रेस बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ लगातार हारने की काबिलीयत की अनिवार्य शर्त के साथ हर चुनाव में अलग-अलग लोगों को टिकट देते आई है, कुछ उसी अंदाज में रमेश बैस के खिलाफ भी हारने वाले लोग कांग्रेस ने खड़े किए, या फिर देश का माहौल कुछ ऐसा रहा कि कांग्रेस को हारना था, या भाजपा को जीतना था। इन सबका नतीजा यह निकला कि रमेश बैस ने लोगों से संपर्क एकदम सीमित रखा, और दिल्ली में उनके साथ बैठे हुए लोगों का यह तजुर्बा रहा कि छत्तीसगढ़ से किसी का फोन आने पर बहुत बार वे हाथ के इशारे से ही फोन उठाने वाले को कह देते थे कि अभी नहीं। 

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लेकिन पन्द्रह बरस की भाजपा सरकार के दौरान रमेश बैस की सीएम बनने की हसरत बनी ही रही, और वे अपने आपको डॉ. रमन सिंह के मुकाबले बेहतर मानते रहे। यह एक अलग बात रही कि एक भी भाजपा विधायक रमेश बैस के साथ नहीं थे जो कि डॉ. रमन सिंह के मुकाबले उनके लिए खड़े रहते। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि छत्तीसगढ़ के पिछले विधानसभा चुनाव में तीन बार के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की लीडरशिप में लडऩे के बाद अगर भाजपा 15 सीटों पर नहीं आ गई होती, तो रमेश बैस को आज मिला  महत्व भी शायद न मिला होता। वे सबसे सीनियर गिने-चुने सांसदों में से एक होने के बाद भी मोदी-मंत्रिमंडल से बाहर रखे गए थे, इस बार सांसद भी नहीं बने थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें छोटे सही, लेकिन एक राज्य, त्रिपुरा, का राज्यपाल बनाकर पांच बरस का एक महत्व दे दिया, जिसके बिना वे महज भूतपूर्व सांसद रह गए होते।

 
त्रिपुरा में रहते हुए रमेश बैस छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपने परिवार के दो-चार लोगों को संगठन में या म्युनिसिपल में कुछ बनवा देने में लगे रहते हैं, सात बार के सांसद रहे एक नेता के लिए राजनीति के इस आखिरी दौर में यह बहुत ही सोचनीय बात है कि उसके पास सोचने के लिए महज परिवार के दो-चार हैं। 

रमेश बैस की राजनीतिक पराकाष्ठा में कांग्रेस के उल्लेखनीय योगदान के बिना उनकी चर्चा अधूरी ही रह जाएगी जिसने हर बार छांट-छांटकर ऐसे उम्मीदवार खड़े किए जो कि हारते ही रहें। बृजमोहन अग्रवाल के बारे में तो यह माना जाता है कि वे कांग्रेस पार्टी के भीतर अपने खिलाफ उम्मीदवार तय करने में खासी मेहनत करते हैं, लेकिन रमेश बैस के साथ तो ऐसी भी कोई ताकत नहीं रही। 

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रमेश बैस केन्द्रीय मंत्री और वरिष्ठ सांसद रहते हुए संसद में अपनी पार्टी की दूसरी-तीसरी कतार में ही बैठते थे, वहां लालकृष्ण अडवानी और सुषमा स्वराज के ठीक पीछे रमेश बैस का मौन मुस्कुराता चेहरा देखते हुए छत्तीसगढ़ इसी बात की राह देखते रह गया कि उसके इतने वरिष्ठ सांसद देश और दुनिया के मुद्दों पर कुछ महत्वपूर्ण बात बोलेंगे। लेकिन महत्वपूर्ण बातें उनके सामने की कतार से कही जाती थीं, और रमेश बैस के चेहरे पर उन्हें लेकर कामयाबी भरी एक खुशी जरूर झलकते रहती थी। छत्तीसगढ़ को संसद में रमेश बैस के सात कार्यकाल की यही याद सबसे अधिक रहेगी कि अडवानी-सुषमा के पीछे उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा बने रहता था। 

लिखने के लिए रमेश बैस की और भी बहुत सी बातें हैं, लेकिन लिखने के लिए आज वक्त बस इतना ही है, उनके बारे में कुछ और बातें अगली किसी किस्त में। यहां लिखी बातें मामूली याददाश्त के आधार पर हैं, और तथ्य या आंकड़े की किसी गलती के लिए भूल-चूक लेना-देना।
-सुनील कुमार

 


05-Aug-2020 12:45 PM

मौतें-69, एक्टिव-2520, डिस्चार्ज-7613

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 5 अगस्त।
प्रदेश में कोरोना मरीज 10 हजार पार हो चुके हैं। बीती रात मिले 373 नए पॉजिटिव के साथ प्रदेश में इनकी संख्या 10 हजार 202 हो गई है। इसमें  69 की मौत हो चुकी है। 25 सौ 20 एक्टिव हैं और 76 सौ 13 ठीक होकर अपने घर लौट गए हैं। बाकी सैंपलों की जांच जारी है। 

प्रदेश में कोरोना मरीज फिर तेजी से बढऩे लगे हैं। दो-तीन दिन आंकड़े थोड़े कम होने के बाद बीती रात 9 बजे 280 कोरोना मरीज सामने आए। बुलेटिन के मुताबिक इसमें रायपुर जिले से 106, दुर्ग से 42, बस्तर से 37, बलरामपुर व कोण्डागांव से 25-25, सूरजपुर से 9, रायगढ़ से 6, राजनांदगांव व महासमुंद से 5-5, बिलासपुर व कांकेर से 4-4, कबीरधाम, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा व कोरिया से 2-2 एवं धमतरी, जशपुर, नारायणपुर व बीजापुर से 1-1 मरीज शामिल रहे।
 
इसके बाद रात करीब 11 बजे 93 और नए पॉजिटिव मिले। इसमें रायपुर जिले से 50, दुर्ग से 13, राजनांदगांव से 10, महासमुंद से 8, कबीरधाम से 5, बिलासपुर से 3, सूरजपुर से 2 एवं बलरामपुर व बलौदाबाजार से 1-1 मरीज शामिल रहे। ये सभी मरीज एम्स समेत आसपास के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ, इनके संपर्क में आने वालों की पहचान की जा रही है।

स्वास्थ्य अफसरों का कहना है कि प्रदेश में कोरोना जांच बढ़ाने पर मरीजों के आंकड़े  बढऩे लगे हैं। मरीजों के ये आंकड़े आगे और बढ़ सकता है। उनका कहना है कि प्रदेश में बीती रात तक करीब 3 लाख 40 हजार सैंपलों की जांच पूरी कर ली गई है। राजधानी रायपुर समेत अलग-अलग जगहों से आए सैंपलों के जांच जारी है। उनका कहना है कि बीती रात में 357 मरीज ठीक होकर अपने घर लौटे हैं और उनका मानना है कि आगे भी बाकी मरीज जल्द ठीक होकर अपने घर लौट जाएंगे। भर्ती मरीजों का नियमित इलाज जारी है। 


05-Aug-2020 12:36 PM

नई दिल्ली, 5 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अयोध्या में आज राम मंदिर का भूमिपूजन करेंगे। इस समारोह में भाग लेने के लिए सैकड़ों अतिथि अयोध्या पहुंच गए हैं। योग गुरू बाबा रामदेव भी अयोध्या पहुंचे चुके हैं। भूमिपूजन से पहले बुधवार को बाबा रामदेव ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के साथ ही भारत में राम राज्य की स्थापना होगी।
 
योगगुरु बाबा रामदेव ने सुबह हनुमान गढ़ी पहुंचकर दर्शन किए। इस दौरान रामदेव ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा आज का दिन एक ऐतिहासिक दिन है। इस दिन को लंबे समय तक याद रखा जाएगा। मुझे विश्वास है कि राम मंदिर के निर्माण के साथ, भारत में राम राज्य की स्थापना होगी। इससे पहले मंगलवार सुबह अयोध्या रवाना होने से पूर्व पत्रकारों से बातचीत में बाबा रामदेव ने कहा था कि दुनिया भर में सभी अपने महापुरुषों, अवतारी पुरुषों के प्रतीक स्थानों को सहेज कर रखते हैं। इसलिए मथुरा में श्री कृष्ण जन्मस्थान और बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर पर भी जल्द फैसला हो जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उनका परम सौभाग्य है कि उनकी आंखों के सामने राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। वहीं भूमिपूजन को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का कहना है कि यह भूमिपूजन सिर्फ राम के भव्य मंदिर का आधारशिला नहीं धार्मिक गुलामी का अंत भी है। गिरिराज ने ट्वीट कर लिखा प्रभु श्रीराम अपनी ही जन्मभूमि पर अब काल्पनिक नहीं रहेंगे। यह केवल प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का आधारशिला नहीं है, बल्कि भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक गुलामी का अंत भी है। जय श्रीराम। (jansatta.com)


05-Aug-2020 12:25 PM

अयोध्या, 5 अगस्त (वार्ता)। भाजपा की फायर ब्रांड नेता एवं अयोध्या में राममंदिर निर्माण आंदोलन की अगुआ नेताओं में एक उमा भारती ने बुधवार को कहा कि भगवान राम की नगरी ने सभी को एक कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर कमलों से आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर के भूमिपूजन में भाग लेने पहुंची मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा, अयोध्या ने सभी को एक कर दिया है, अब भारत पूरे विश्व में अपना माथा ऊंचा कर कहेगा कि यहां किसी तरह का भेदभाव नहीं होता है।

सुश्री भारती ने अयोध्या आने पर ट्वीट कर कहा, मैं मर्यादा पुरुषोत्तम राम की मर्यादा से बंधी हूं । मुझे राम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ अधिकारी ने शिलान्यास स्थल पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है इसलिए मैं इस कार्यक्रम में उपस्थित रहूंगी।

अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहाये जाने के मुख्य आरोपियों में एक सुश्री भारती ने हाल ही में इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया था। इस मामले में अन्य मुख्य आरोपियों भाजपा के वरिष्ठतम नेता एवं पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी ब्यूरो के समक्ष अपना बयान दर्ज करा चुके हैं। उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार 31 अगस्त तक इस मुकदमे का निपटारा किया जाना है।


05-Aug-2020 12:11 PM

अयोध्या, 5 अगस्त। राम की नगरी अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में मंदिर निर्माण की आधारशिला रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या दौरे पर हैं। कुछ देर में पीएम भूमि पूजन के बाद राम मंदिर की पहली ईंट रखेंगे। इस अनुष्ठान के लिए पीएम मोदी ने पारंपरिक वेशभूषा को चुना है। आम तौर पर पीएम चूड़ीदार पायजामा और कुर्ता पहनते हैं, लेकिन आज के दिन उन्होंने धोती और सुनहरा कुर्ता पहना है।

पीतांबरी धोती और सुनहरा कुर्ता पहने पीएम मोदी अपने विशेष विमान से लखनऊ पहुंचे। यहां चॉपर से वह अयोध्या के लिए रवाना हो चुके हैं। हिंदू धर्म में सुनहरे और पीतांबर रंग को बहुत शुभ माना जाता है। ऐसे में पीएम के ड्रेस को भी इससे जोडक़र देखा जा रहा है। साढ़े 11 बजे पीएम मोदी अयोध्या पहुंचेंगे और साढ़े 12 बजे भूमि पूजन में शामिल होंगे। इसके बाद मंदिर का शिलान्यास किया जाएगा। चांदी के फावड़े और चांदी की कन्नी से राम मंदिर की नींव रखी जाएगी।

दरअसल, पीएम मोदी आखिरी बार 29 साल पहले अयोध्या गए थे, तब उनसे एक पत्रकार ने पूछा था कि आप दोबारा अयोध्या कब आएंगे। जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि मंदिर बनने के बाद वह यहां आएंगे। ऐसे में 29 साल बाद पीएम दोबारा अयोध्या आ रहे हैं।


राम मंदिर के भूमि पूजन का शुभ मुहूर्त 12.44 बजे है। इसके लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। राम जन्मभूमि परिसर और आसपास के इलाके को रेड जोन घोषित कर दिया गया है। राम जन्मभूमि परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की कमान एसपीजी ने संभाल ली है। सुरक्षा के लिहाज से सिक्योरिटी कोड से एंट्री का प्रबंध किया गया है। मंदिर के शिलान्यास के लिए आज चांदी के फावड़े और कन्नी का इस्तेमाल किया जाएगा।

श्री रामजन्मभूमि ट्रस्ट के मुताबिक, भूमि पूजा अनुष्ठान में शामिल होने वाले हर मेहमान को बॉक्स में रघुपति लड्डू और चांदी का एक सिक्का दिया जाएगा। चांदी के सिक्के के एक तरफ राम दरबार की छवि है, जिसमें भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान हैं। दूसरी तरफ ट्रस्ट का प्रतीक चिह्न है। (hindi.news18.com)


05-Aug-2020 11:59 AM

मानस मिश्रा

नई दिल्ली, 5 अगस्त। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आज भूमिपूजन सहित कई कार्यक्रम हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा तमाम बड़े राजनेता और साधु संतों सहित 175 आमंत्रित लोग इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनेंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो अयोध्या शहर पता नहीं कितने सालों तक विवाद का केंद्र बना रहा आज उसे पहली बार इतनी खूबसूरती सजाया गया है। अयोध्या सालों तक विवाद का केंद्र रही है। करीब 100 साल से ज्यादा तक कानूनी और राजनीतिक लड़ाई के बाद आखिरकार रामलला के लिए आज राम मंदिर निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा। बीते साल 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने इसका फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड इस विवादित जमीन पर अपना मालिकान हक साबित नहीं कर पाया है। वहीं पुरातत्व विभाग की ओर से दी गई रिपोर्ट में भी वहां मंदिर होने के प्रमाण पेश किए गए हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने भी यह कहा कि पुरातत्व विभाग ये बात नहीं बता पाया है कि क्या वहां पर किसी मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा मुस्लिम पक्ष को विवादित स्थल से दूर 5 एकड़ जमीन मस्जिद बनाने के लिए देने का भी आदेश दिया।
अयोध्या में विवाद का पूरा इतिहास
1528 : अयोध्या में एक ऐसी जगह पर मस्जिद बनाई गई। जिसे हिन्दू समुदाय के लोग मानते हैं कि वहां भगवान राम का जन्म हुआ था।  कहा जाता है कि मुगल सम्राट बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी जिसे बाबरी मस्जिद कहा जाता है। 
1853 : इस मुद्दे पर पहली बार दो समुदायों के बीच विवाद हुआ। 
1885 : में महंत रघुबर दास ने अदालत से मांग की कि चबूतरे पर मंदिर बनाने की इजाजत दी जाए। यह मांग खारिज हो गई।
1946 : बाबरी मस्जिद को लेकर शियाओं और सुन्नियों में विवाद। बाबर सुन्नी था इसलिए फैसला शियाओं के खिलाफ गया।
1949 : जुलाई में राज्य सरकार ने मस्जिद के बाहर राम चबूतरे पर राम मंदिर बनाने की कवायद शुरू की। लेकिन यह भी नाकाम रही।
1949 : 22-23 दिसंबर को मस्जिद में राम सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां रखी गईं।
1949 : 29 दिसंबर को मंदिरर की संपत्ति कुर्क कर ली और वहां रिसीवर बिठा दिया गया।
1950 : इस जमीन के लिए अदालती लड़ाई का एक नया दौर शुरू  होता है। इस तारीखी मुकदमे में जमीन के सारे दावेदार 1950 के बाद के थे। 
1950 : 16 जनवरी को गोपाल दास विशारद कोर्ट और कहा कि मूर्तियां वहां से न हटाई जाएं और पूजा बिना रुकावट के जारी रखी जाए।  अदालत ने कहा कि मूर्तियां नहीं हटेंगी, लेकिन ताला बंद रहेगा और पूजा सिर्फ पुजारी करेगा। जनता बाहर से दर्शन करेगी।
1959 : निर्मोही अखाड़े ने कोर्ट में पहुंच कर दावा पेश किया। 
1961 : सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड भी कोर्ट पहुंचा और मस्जिद का दावा पेश किया।
1986 : 1 फरवरी को फैजाबाद के जिला जज ने जन्मभूमि का ताला खुलवा के पूजा की इजाजत दे दी।
1986 : कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाने का फैसला हुआ।
1989 : वीएचपी नेता देवकीनंदन अग्रवाल ने रामलला की तरफ से मंदिर के दावे का मुकदमा दायर किया। 
1989 : नवंबर में मस्जिद से थोड़ी दूर पर राम मंदिर का शिलान्यास किया गया।
1990 : 25 सितंबर को बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से एक रथ यात्रा शुरू की। इस यात्रा को अयोध्या तक जाना था। इस रथयात्रा से पूरे मुल्क में एक जुनून पैदा किया गया। इसके नतीजे में गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में दंगे भडक़ गए। ढेरों इलाके कर्फ्यू की चपेट में आ गए। 
 1990 : लेकिन आडवाणी को 23 अक्टूबर को बिहार में लालू यादव ने गिरफ्तार करवा लिया।
1990 : कारसेवक मस्जिद के गुम्बद पर चढ़ गए और गुम्बद तोड़ा। वहां भगवा फहराया। इसके बाद दंगे भडक़ गए।
1991 : जून में आम, चुनाव हुए और यूपी में  बीजेपी की सरकार बन गई।
1992 : 30-31 अक्टूबर को धर्म संसद में कारसेवा की घोषणा हुई।
1992 : नवंबर में कल्याण सिंह ने अदालत में मस्जिद की हिफाजत करने का हलफनामा दिया।
1992 : 6 दिसंबर को लाखों कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद गिरा दी। कारसेवक 11 बजकर 50 मिनट पर मस्जिद के गुम्बद पर चढ़े। करीब 4।30 बजे मस्जिद का तीसरा गुम्बद भी गिर गया।
2003 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झगड़े वाली जगह पर खुदाई करवाई ताकि पता चल सके कि क्या वहां पर कोई राम मंदिर था।
2005 : यहां आतंकवादी हमला हुआ। लेकिन आतंकवादी वहां कुछ नुकसान नहीं कर सके और मारे गए।
2010 : 30 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आदेश पारित कर अयोध्या में विवादित जमीन को राम लला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर बांटने का फैसला किया जिसे सबने सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया है।
2019 : 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बातचीत से सुलझाने का फैसला किया और इसके लिए तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति का गठन कर दिया। इस समिति के अध्यक्ष जस्टिस खलीफुल्ला, श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू शामिल हैं।
2019 : 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने हिंदुओं को पक्ष में फैसला सुनाया और पूरी विवादित जमीन सौंप दी। मुस्लिम पक्ष को भी इस जगह से दूर मस्जिद देने का आदेश सुनाया गया।
2020 :  5 अगस्त को राम मंदिर के लिए भूमि पूजन का कार्यक्रम रखा गया। जिसमें मुख्य अतिथि तौर पर पीएम मोदी, महंत नृत्यगोपाल दास, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ को मंच पर बैठने की इजाजत दी गई है। (khabar.ndtv.com)


05-Aug-2020 11:42 AM

भोपाल 5 अगस्त (आईएएनएस)| मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बुधवार को अस्पताल से छुटटी दे दी गई है। वे कोरोना पॉजिटिव होने के बाद कोविड सेंटर अस्पताल में थे, स्थिति में सुधार होने और कोरोना के तय दिशानिर्देशों के मुताबिक उनके स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुटटी दे दी गई। भाजपा के मीडिया विभाग के प्रमुख लोकेंद्र पाराशर ने बताया है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चिकित्सालय से छुट्टी दे दी गई है। वे पूर्णत: स्वस्थ हैं। कोविड-19 गाइडलाइन के मुताबिक अगले सात दिन तक सावधानीपूर्वक अपने निवास में रहेंगे और स्वयं के स्वास्थ्य का परीक्षण भी करेंगे।

ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री चौहान 25 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे और उसके बाद कोविड सेंटर चिरायु अस्पताल में भर्ती हुए थे। चिकित्सालय के मुताबिक चौहान के सभी क्लीनिकल पैरामीटर सामान्य है और उन्हें बीते तीन दिन से बुखार नहीं आया है। 


05-Aug-2020 11:27 AM

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। देश में पिछले 24 घंटों में कोविड-19 के 52,509 नए मामले सामने आए हैं और महामारी से इस दौरान 857 लोगों की मौत हो गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से बुधवार को पेश किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि देश में अब तक संक्रमण के कुल 19,08,254 मामले हैं और 39,795 लागों की मौत हो चुकी है। 

देश ने सोमवार को 18 लाख का आंकड़ा पार कर लिया था और उसके दो दिन में ही ये आंकड़ा एक लाख और बढ़ गया। देश में अभी 5,86,244 सक्रिय मामले हैं और 12,82,215 लोग बीमारी से उबर चुके हैं। देश में अब रिकवरी दर 67.19 फीसदी हो गई है। 

वैश्विक औसत की तुलना में भारत में सबसे कम केस फैटिलिटी रेट (सीएफआर) 2.08 प्रतिशत है।

महाराष्ट्र 4,50,196 मामलों और 15,842 मौतों के साथ अब भी सबसे अधिक प्रभावित राज्य है। इसके बाद तमिलनाडु 2,63,222 मामलों और 4,241 मौतों के साथ दूसरे स्थान पर है।

वहीं दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा और उत्तराखंड में सक्रिय मामलों में गिरावट देखी गई।


05-Aug-2020 10:30 AM

गौतम बुद्ध नगर (यूपी), 5 अगस्त (आईएएनएस)| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार दोपहर को जब अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे, तो राक्षसराज रावण का मंदिर भी 'जय श्री राम' के जयकारों से गूंज उठेगा। बिसरख क्षेत्र में बना मंदिर लंका के राजा रावण को समर्पित है, जिसका भगवान राम ने वध किया था।

रावण मंदिर के पुजारी महंत रामदास ने कहा, "हम अयोध्या में 'भूमि पूजन' समारोह संपन्न होने के बाद मिठाई भी वितरित करेंगे।"

उन्होंने आगे कहा, "यदि रावण नहीं होता, तो कोई राम नहीं होता और भगवान राम ने अवतार न लिया होता तो किसी को भी रावण के बारे में कुछ पता नहीं चलता। ये दोनों अस्तित्व एक तरह से आपस में जुड़े हुए हैं।"

इसे भी देखें :- राम से अयोध्यावासियों को रोजगार की संभावना

स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, बिसरख रावण का जन्म स्थान है। बिसरख के इस मंदिर में भगवान शिव, पार्वती और कुबेर की मूर्तियां भी हैं।

महंत रामदास ने बताया, "रात में भी यह मंदिर बंद नहीं होता है। यहां आने वाले भक्त भगवान शिव, कुबेर और यहां तक कि रावण की पूजा भी करते हैं। यहां आने वाले लगभग 20 फीसदी भक्त रावण की पूजा करते हैं।"


05-Aug-2020 10:26 AM

लेबनान की राजधानी बेरुत में जिस शक्तिशाली धमाके में कम-से-कम 70 लोगों की जान गई और 4,000 से ज़्यादा लोग घायल हो गए, उस धमाके के केंद्र में एक वेयरहाउस है.

बताया जा रहा है कि इस वेयरहाउस में पिछले छह साल से ज़ब्त किया हुआ अमोनियम नाइट्रेट का भंडार जमा था जिसमें धमाका हो गया.

लेबनान के प्रधानमंत्री हसन दियाब ने इसे एक ख़तरनाक वेयरहाउस बताया है जो वहाँ 2014 से बना हुआ था. उन्होंने इसे प्रलयंकारी घटना बताया और कहा कि ज़िम्मेदार लोगों को नहीं बख़्शा जाएगा.

वहीं लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल आउन ने कहा है कि इस बात को किसी भी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि आख़िर कैसे 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट वहाँ असुरक्षित तरीक़े से रखा हुआ था.

धमाका इतना ज़बरदस्त था कि उसकी आवाज़ 240 किलोमीटर दूर साइप्रस तक में सुनाई दी.

अमोनियम नाइट्रेट क्या है?

अमोनियम नाइट्रेट एक गंधहीन केमिकल पदार्थ है जिसका कई कामों में इस्तेमाल होता है.

मगर सामान्यतः इसका सबसे ज़्यादा प्रयोग दो कामों में होता है - खेती के लिए उर्वरक के तौर पर और निर्माण या खनन कार्यों में विस्फोटक के तौर पर.

ये अत्यंत विस्फोटक केमिकल होता है. आग लगने पर इसमें धमाका होता है और उसके बाद ख़तरनाक गैस निकलने लगती हैं जिनमें नाइट्रोजन ऑक्साइड और अमोनिया गैस शामिल हैं.

चूँकि ये अत्यंत ज्वलनशील केमिकल होता है, इसलिए इसके रख-रखाव के लिए कड़े नियम बने हैं.

इनमें ये सब प्रबंध ज़रूरी हैं - जैसे वो स्टोर पूरी तरह से फ़ायरप्रूफ़ होना चाहिए. साथ ही वहाँ कोई भी नाला, पाइप या गटर नहीं होना चाहिए जिसमें अमोनियम नाइट्रेट जमा हो सके.

लेबनान में धमाके के बाद अब जाँच हो रही है कि आख़िर वेयरहाउस में रखे अमोनियम नाइट्रेट में आग कैसे लगी.

अमोनियम नाइट्रेट की वजह से पहले भी कई दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं.

2013 में अमरीका के टेक्सस राज्य में एक फ़र्टिलाइज़र प्लांट में धमाका हुआ था जिसमें 15 लोगों की मौत हुई थी.

2001 में फ़्रांस के टुलूज़ में भी एक केमिकल प्लांट में धमाका हुआ था जिसमें 31 लोग मारे गए थे.

1995 में अमरीका के ओकलाहोमा में हुए धमाके में इस्तेमाल हुए बम में भी अमोनियम नाइट्रेट पाया गया था.

धमाके के बाद का मंज़र

धमाका मंगलवार को बेरुत के तटीय इलाक़े में हुआ. इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर हुआ है जिसमें दिखता है कि उस जगह आग की लपटों के साथ धुएं के गुबार उठ रहे हैं. कई किलोमीटर तक तबाही के मंज़र भी हैं.

धमाके के बाद वहाँ मौजूद एक चश्मदीद ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा कि आसपास की सभी इमारतें ध्वस्त हो गई हैं. चारों तरफ़ शीशे और मलबे बिखरे पड़े हैं.

हादी नसरुल्लाह नाम के एक चश्मदीद ने बीबीसी से कहा- "मैंने आग की लपटें देखीं लेकिन मुझे ये नहीं पता था कि धमाका होने जा रहा है. मैं भीतर चला गया. अचानक मुझे सुनाई पड़ना बंद हो गया क्योंकि मैं घटनास्थल के बहुत क़रीब था. कुछ सेकंड तक मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दिया. मुझे लगने लगा था कि कुछ गड़बड़ है.

तभी अचानक गाड़ियों, दुकानों और इमारतों पर शीशे टूटकर गिरने लगे. पूरे बेरुत में अलग-अलग इलाक़ों से लोग एक दूसरे को फ़ोन कर रहे थे. हर किसी ने धमाके की आवाज़ सुनी. हम बिल्कुल अवाक थे क्योंकि पहले कोई धमाका होता था तो कोई एक इलाक़ा ही प्रभावित होता था लेकिन यह ऐसा धमाका था जिसे बेरुत के बाहर भी महसूस किया गया."(bbc)


05-Aug-2020 10:21 AM

वाशिंगटन 05 अगस्त (स्पूतनिक)।  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए भीषण विस्फोट को भयानक हमला करार देते हुए हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। 

श्री ट्रम्प ने मंगलवार शाम को पत्रकारों से कहा, “ यह एक भयानक हमला प्रतीत होता है।” 

उन्होंने कहा कि अमेरिका लेबनान के साथ खड़ा हुआ है और हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। 

इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि बेरूत में हुए भीषण धमाके की जांच के निष्कर्ष का अमेरिका इंतजार कर रहा है। श्री पोम्पियो ने एक वक्तव्य में कहा, “ हम समझते हैं कि लेबनान की सरकार इस धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच में जुटी हुई है। हम जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और हर तरह से लेबनान की मदद करने के लिए तैयार है।”

अमेरिका ने इस विस्फोट के बाद जहरीली गैसों का रिसाव होने की बात कही है और हादसे के आस-पास रहने वाले लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। 

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक परामर्श जारी करते हुए कहा, “ हम लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए धमाके की रिपोर्ट पर नजर बनाए हुए हैं। इस विस्फोट के बाद जहरीली गैसों का रिसाव होने की रिपोर्ट सामने आ रही है इसलिए हादसे के आस-पास रहने वाले लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है।” 

लेबनान की राजधानी बेरूत के पोत पर मंगलवार शाम को हुए एक भीषण विस्फोट में कम से कम 78 लोगों की मौत हो गयी जबकि 4000 से अधिक अन्य लोग घायल हो गये।


05-Aug-2020 10:17 AM

नयी दिल्ली,05 अगस्त (वार्ता)।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अयोध्या में बनने वाले भव्य राममंदिर का भूमिपूजन करेंगे, लेकिन  ''अशुभ'' मुहूर्त में मंदिर के शिलान्यास को लेकर कांग्रेस महासचिव और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने फिर निशाना साधा और कहा कि यह वेद द्वारा स्थापित ज्योतिष शास्त्र की स्थापित मान्यताओं के विपरीत हो रहा है, हे प्रभु हमें क्षमा करना। 

 श्री सिंह राममंदिर भूमिपूजन की तिथि को लेकर बराबर बयान देते रहे हैं और इसे ''अशुभ'' मुहूर्त करार दिया है।

 राज्यसभा सांसद ने आज फिर हैशटैग #राम_मंदिर_निर्माण_मुहूर्त के साथ ट्वीट कर कहा, "आज अयोध्या जी में भगवान रामलला के मंदिर का ''शिलान्यास'' वेद द्वारा स्थापित ज्योतिष शास्त्र की स्थापित मान्यताओं के विपरीत हो रहा है, हे प्रभु हमें क्षमा करना। यह निर्माण निर्विघ्न रूप से पूरा हो, यही हमारी आप से प्रार्थना है। जय सिया राम।"

 उन्होंने आगे लिखा, 2014 में मोदी जी ने नारा दिया था “सब का साथ सब का विकास” जो 2019 में हो गया “सब का साथ सब का विकास और सब का विश्वास” मोदी जी ज़रा आत्मचिंतन करें। डॉ मनमोहन सिंह जी का लेख पढ़ें और गरीब, मज़दूर, किसान, व्यापारी, उद्योगपति का विश्वास हासिल कर, अर्थ व्यवस्था को सुदृढ़ करने की पहल करें।"

  श्री सिंह ने एक अन्य ट्वीट में लिखा," अयोध्या में भगवान राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास के अशुभ मुहूर्त में कराये जाने पर हमारे हिंदू (सनातन) धर्म के द्वारका व जोशीमठ के सबसे वरिष्ठ शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज का संदेश व शास्त्रों के आधार पर प्रमाणित तथ्यों पर वक्तव्य अवश्य देखें।"


05-Aug-2020 10:01 AM

अयोध्या, 5 अगस्त (आईएएनएस)| अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का फैसला आए करीब नौ महीने बीत गए हैं। वहीं आज यहां श्रीराममंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम भी है। इसे लेकर बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद अब 9 माह बीत गए हैं अब मंदिर-मस्जिद का कोई विवाद नहीं बचा है। इकबाल अंसारी आज भूमिपूजन की तैयारियों में लगे हुए हैं। उन्होंने आईएनएस से विशेष बातचीत में कहा कि 9 नवम्बर 2019 से सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद अब मंदिर और मस्जिद का कोई विवाद बचा नहीं है। जिसे जो कहना वो कहता रहे।

उन्होंने कहा कि उनको आमंत्रण मिला है अब वह जाएंगे। इसी तैयारी में लगे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को भेंट करने के लिए रामचरित मानस और रामनामी विशेष गमछा मंगाया है।

इकबाल अंसारी ने कहा, "फैसला आने के बाद अब आपसी विवाद खत्म हो गया है। अगर हम लड़ते रहे तो कभी चीन आंख दिखाएगा, कभी नेपाल घूरता है, तो कभी पाकिस्तान सीमा विवाद में उलझता है।"

उनका कहना है कि अयोध्या में वह हिंदू-मुस्लिम विवाद देखना नहीं चाहते हैं।

उन्होंने कहा "भगवान राम का सम्मान हर धर्म में है। हमारे मजहब में सभी देवी देवताओं का सम्मान है। अयोध्या में सारे धर्म-जाति के लोग सदियों से साथ रह रहे हैं। जाति धर्म का भेद तो नेता करवाते हैं। चुनाव के दौरान वह गिनती करते हैं। धर्म और मजहब की राजनीति लोगों को पीछे धकेलने का काम करती है। वर्तमान में महामारी का दौर चल रहा है, ऐसे में सबको को मिलकर रहना होगा। कोरोना में सच्चा ईमान वाला ही बचेगा।"

इकबाल अंसारी ने कहा कि मेरे मंदिर जाने पर प्रश्न उठाने वालों को अपने गिरेबां में झांकने की जरूरत है। ओवैसी के ऊपर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमारा बुलावा है हम जा रहे हैं। मंदिर बनने से अयोध्या का विकास होगा। लोगों के लिए रोजी-रोजगार की संभावना बढ़ेगी।


05-Aug-2020 9:58 AM

अयोध्या, 5 अगस्त (आईएएनएस)| अयोध्या में राममंदिर के लिए आज भूमि पूजन होने जा रहा है। इसे लेकर अयोध्यावासी बहुत हर्षित हो रहे हैं। उनकी पूरी सम्भवना है कि राम ही उन्हें रोजगार दिलाएंगे। अयोध्या में बड़ी कुटिया के दुकानदार इश्तियाक का कहना है, "सुप्रीम कोर्ट से फैसला आने के बाद विवाद खत्म हो गया। अब यहां के लोगों को राम से आस है कि वही इन्हें रोजगार दिलाएंगे। वर्षो का विवाद था अब वह खत्म हो गया है। अभी तक यहां पर राजनीतिक दलों ने मंदिर-मस्जिद के नाम फर फूट डालने का काम किया लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाए, यहां पर आपस मे भाईचारा है। अब बस राम मंदिर बनने से पर्यटन बढ़ेगा। लोगों को रोजी मिलेगी। प्रधानमंत्री के आने से अयोध्यावासी बहुत खुश हैं।"

अयोध्या की रहने वाली लीलावती कहती हैं कि कोरोना महामारी ने थोड़ा उत्सव का रंग फीका कर दिया है। लेकिन फिर भी जितना हो रहा है वो सब अयोध्या के विकास के लिए हो रहा है। राममंदिर बनने की बहुत खुशी है। कम से कम इतने सालों से चल रहा विवाद का अंत हो गया।

वहीं कृष्णकुमार ने कहा, "अयोध्या में हमारी आंखों के सामने मंदिर बनने जा रहा है। एक बड़े विवाद का अंत हो गया। जिसके कारण पूरे विश्व पटल पर अयोध्या के लोगों का नाम खराब होता था, कम से कम वह खत्म हो गया। प्रधानमंत्री आ रहे हैं । यहां के लिए बहुत कुछ दे जाएंगे। अब यहां कोई विवाद बचा नहीं है।"

वहीं यहां के एक निवासी सुग्गु ने कहा कि अयोध्या पुराना विवाद निपट गया। राम जी का भव्य मंदिर बनने जा रहा है। हम लोगो को राम जी आशा है कि वो सभी को रोजगार दिलवाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर को फैसले से राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया था, जिसके बाद यहां लोग मंदिर निर्माण शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे थे और अब वह घड़ी आ जाने अयोध्यावासियों काफी हर्षित हैं।


05-Aug-2020 9:42 AM

बेरुत, अगस्त 5 (आईएएनएस)| लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए दो बड़े विस्फोटों में अब तक 50 से अधिक लोग के मारे जाने और करीब ढाई हजार लोगों के घायल होने की सूचना मिली है। स्वास्थ्य मंत्री हमद हसन ने ये जानकारी दी है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि विस्फोट मंगलवार शाम (लगभग 6.10 बजे - स्थानीय समय) पर हुए। ये विस्फोट इतने शक्तिशाली थे कि इससे पूरे शहर की इमारतें थर्रा गईं, जो इतने बड़े इंसानी नुकसान का कारण बनीं।

अल-जेडेड टीवी ने हसन हवाले से कहा विस्फोटों में 50 से अधिक लोग मारे गए हैं और करीब 2,500 लोग घायल हो हुए।

मरने वालों की गिनती अभी जारी है, लिहाजा हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

लेबनान के प्रधानमंत्री हसन दीब ने अपने सहयोगी देशों से आग्रह किया है कि वे लेबनान को विनाशकारी विस्फोटों के नतीजों से उबरने में मदद करें।

इस बीच डायब ने विस्फोटों में मारे गए लोगों के शोक में बुधवार को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है।

लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल एउन ने विस्फोटों के कारणों और नतीजों पर चर्चा करने के लिए उच्च रक्षा परिषद की एक आपात बैठक बुलाई है। अब तक धमाकों के पीछे के कारणों का पता नहीं चला था। लेकिन लेबनान के आंतरिक मंत्री मोहम्मद फहमी ने आशंका जताई कि पोर्ट ऑफ बेरूत में संग्रहीत विस्फोटक रसायन इन धमाकों के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

फहमी ने कहा, "सीमा शुल्क अधिकारियों से पोर्ट ऑफ बेरूत में ऐसी रासायनिक सामग्री के भंडारण के पीछे के कारणों के बारे में पूछा जाना चाहिए।"

विस्फोट से हुए नुकसान को लेकर इस क्षेत्र के कई देशों ने लेबनान के साथ सहानुभूति जताई है। कोविड-19 महामारी और उसके कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे लेबनान के लिए ये विस्फोट एक और बड़ा झटका हैं।

 

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने मंगलवार को कहा कि वह लेबनान को मदद देने के लिए तैयार है। जरीफ ने ट्वीट किया, "हमारी प्रार्थनाएं लेबनान के लोगों के साथ हैं। हमेशा की तरह ईरान हर आवश्यक सहायता देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।"

 

इसके अलावा तुर्की, मिस्त्र और फिलीस्तीन ने भी इस विस्फोट में मारे गए लोगों और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवदेनाएं जताईं हैं। साथ ही लेबनान के साथ एकजुटता दिखाते हुए मदद का भरोसा दिलाया है।


05-Aug-2020 9:34 AM

अमेरिका के वाशिंगटन में भारतीय समुदाय के लोग कैपिटल हिल पर इकट्ठा होकर रामजन्मभूमि भूमिपूजन की ख़ुशी मना रहे हैं.. (ANI)

 


05-Aug-2020 9:28 AM

अयोध्या में 05 अगस्त को राम मंदिर का भूमि पूजन है. ये एक बड़ा आयोजन होगा. इसके बाद भव्य राम मंदिर निर्माण का काम शुरू हो जाएगा. लंबे समय से इस मामले में अदालत में केस चला फिर पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला सुना दिया.

आइए अब हम 10 प्वाइंट्स में जानते हैं उस फैसले के बारे में, जिससे हमें इस पूरे मामले को समझने में मदद मिल सकती है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया. ये मंदिर-मस्जिद विवाद 134 साल पुराना था. 40 दिनों तक चली सुनवाई के बाद शनिवार को इस दशकों पुराने मामले में पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से अपना फ़ैसला दिया.

इसे भी देखें :-राम जन्मभूमि समारोह की तैयारी, देखें तस्वीरें-1

राम जन्मभूमि स्थान न्यायिक व्यक्ति नहीं है, जबकि भगवान राम न्यायिक व्यक्ति हो सकते हैं. ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है, हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है. विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को दी जाए. इसका स्वामित्व केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगा. 3 महीने के भीतर ट्रस्ट का गठन कर मंदिर निर्माण की योजना बनाई जाए.


05-Aug-2020 9:25 AM

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन प्रधानमंत्री पांच अगस्त को करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर पूरे देश में खुशियों का माहौल है। मंगलवार को रोशनी में नहाया शहर बुधवार रात तक जगमग रहेगा। अयोध्या धाम में 3,51000 दिए जलाए गए हैं। यह जानकारी जिला प्रशासन ने दी है। राम की पैड़ी समेत अयोध्या धाम के 50 स्थानों पर दिए जलाए गए। अयोध्या धाम के सभी मंदिरों में दिये जलाए गए हैं।

इसे भी देखें :-राम जन्मभूमि समारोह की तैयारी, देखें तस्वीरें-2

प्रशासन के अनुसार 1 लाख 25 हजार दीपक सरयू घाट (राम की पैड़ी) पर इसके अलावा 25 हजार भरतकूप, छोटी चौक में 11 हजार, बड़ी चौक में 12 हजार हनुमान गढ़ी में 11000, जन्मभूमि में 101, इसके अन्य कई जगह भी दीपक जलाए गए।


05-Aug-2020 9:20 AM

व्हाट्सएप काफी समय से फेक न्यूज़ को पकड़ने के लिए लगातार काम कर रही है। व्हाट्सएप ने फेक न्यूज़ को रोकने के लिए पहले फॉरवर्डिंग मैसेजिस फीचर को सीमित किया और अब कंपनी ने फर्जी खबरों को रोकने के लिए एक नया टूल पेश कर दिया है जिसका नाम "सर्च टूल" है। इस फीचर को लाने के लिए व्हाट्सएप ने गूगल के साथ साझेदारी की है।

 जैसे कि आपके पास लिंक के साथ कोई खबर आती है तो उस लिंक के राइट साइड में एक नया सर्च आइकन वाला बटन दिखेगा जिस पर क्लिक करते ही गूगल सर्च उस खबर से मिलते जुलते सारे लिंक्स आपको शो कर देगी। इससे आपको पता चल जाएगा कि खबर फर्जी है या नहीं।

फिलहाल व्हाट्सएप के इस फीचर को ब्राजील, इटली, आयरलैंड, मैक्सिको, स्पैन, ब्रिटेन और अमेरिका में लाइव किया गया है। भारत में कब अपडेट के जरिए इस नए फीचर को उपलब्ध किया जाएगा इसकी जानकारी मिलते ही हम आप तक पहुंचा देंगे। यह फीचर एंड्रॉयड, iOS और वेब तीनों प्लेटफोर्म्स पर काम करेगा।(punjabkeshari)


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