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31-Oct-2020 9:49 PM 1

  जनता कांग्रेस का भाजपा को खुला समर्थन असर डालेगा नतीजे पर  

राजेश अग्रवाल
बिलासपुर, 31 अक्टूबर (‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता)।
भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने की जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की घोषणा से मरवाही विधानसभा उप-चुनाव की तस्वीर में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। अब जब चुनाव अभियान खत्म होने में 24 घंटे से भी कम समय रह गया है, कांग्रेस ने अपनी अब तक की मेहनत को बचाये रखने के लिये एड़ी-चोटी की जोर लगा दी है वहीं जोगी पर आस्था रखने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की भीड़ जोगी निवास में बढ़ गई है। मतदाताओं में इसका मिला-जुला असर होने वाला है जिसका असर सीधे चुनाव परिणाम पर पड़ेगा।

अमित जोगी, डॉ. ऋचा जोगी व छजकां के अन्य दो वैकल्पिक प्रत्याशियों के नामांकन निरस्त होने के बाद जोगी निवास सूनसान हो चुका था। यह स्थिति कल शाम तक बनी हुई थी, जब तक लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह ठाकुर ने पार्टी की तरफ से भाजपा को समर्थन देने का ऐलान नहीं किया। आज सुबह से जोगी निवास खुल गया। उनकी पार्टी के प्रवक्ता विक्रांत तिवारी से जब पूछा गया कि पार्टी के सारे नामचीन लोग तो कांग्रेस में आ गये हैं अब कौन आपको साथ दे रहा है, उन्होंने कहा कि जिन्हें जोगी के साथ रहते लाभ मिला अब किसी लालच में उनके साथ चले गये पर एक भी समर्पित किसी भी कार्यकर्ता ने जोगी परिवार का साथ नहीं छोड़ा है। वे अब गांव-गांव घूम रहे हैं।

कांग्रेस की पृष्ठभूमि से निकले जोगी समर्थक आम मतदाता को भाजपा को वोट देने के लिये तैयार करना काफी मुश्किल है। इसीलिये छजकां ने जोगी के ‘अपमान’ का मुद्दा सामने रखा है और लक्ष्य भाजपा को समर्थन नहीं, कांग्रेस को हराना बताया है। 

भाजपा के रणनीतिकारों ने अपने चुनावी अभियान में शुरूआती दौर से ही जोगी परिवार के प्रति कांग्रेस के रुख को मुद्दा बना रखा है। उनकी जनसभाओं की शुरूआत ही जोगी को याद करने और उनकी ओर से किसी को चुनाव नहीं लडऩे देने से होती है। भाजपा ने अपने सभी प्रमुख आदिवासी चेहरों को मैदान में उतार रखा है। इनमें केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. रेणुका सिंह और राज्यसभा सदस्य रामविचार नेताम शामिल हैं। नंदकुमार साय और ननकीराम कंवर जैसे नेता इन मंचों से गायब हैं जो जोगी की जाति पर आये फैसले को सही बताते हैं। 

भाजपा नेता इस पर बात नहीं कर रहे हैं कि लगातार जोगी के रहते उन्हें किस तरह दहशत और तानाशाही का प्रतीक बताते थे और उन्हें इसके चलते सरकार दुबारा, तीसरी बार बनाने में मदद मिलती रही। अब वे यह कह रहे हैं कि कांग्रेस, जोगी को ऊपर जाने के बाद भी नहीं छोड़ रही है। चुनाव संचालन जरूर पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल के हाथों में दिया गया लेकिन अभ ये दोनों आदिवासी नेता और डॉ. रमन सिंह खुद सामने हैं। 

डॉ. सिंह, धर्मजीत से मुलाकात कर एक बड़ी कामयाबी हाथ ले गये। यदि इस चुनाव में भाजपा अच्छी स्थिति में रही तो केन्द्रीय नेतृत्व तक उनके वजन को सराहा जायेगा। बीते चुनाव में हुई भाजपा की बुरी पराजय की बड़ी लकीर को छोटा करने में उन्हें मदद मिलेगी।   

कांग्रेस ने पिछले तीन-चार दिनों से जोगी के खिलाफ कुछ नहीं बोलने की रणनीति पर काम कर रखा है। कांग्रेस की यहां बड़ी भीड़ बहुत दिनों से काम कर रही है। इनमें से बहुत लोग मरवाही की तासीर नहीं जानते। उन्हें लगता था कि जोगी की जाति को सवालों में घेरकर वे यहां के मतदाताओं को अपनी ओर खींच सकते हैं पर इस तथ्य पर गौर नहीं किया कि सरकार और अदालतों में जाति मुद्दे पर केस चलने के बावजूद स्व. अजीत जोगी और अमित जोगी के लिये एकतरफा वोट गिरते रहे हैं।

कल के घटनाक्रम से पहले तक, बीते दो माह से ज्यादा समय से बिलासपुर, रायपुर, कोरबा से आकर मेहनत कर रहे कांग्रेस नेता अपनी मेहनत पर संतुष्ट थे। इस बात से कि जोगी पर आस्था रखने वाले मतदाता, जो वास्तव में कांग्रेस की ओर झुकाव रखते आये हैं उन्हें स्वतंत्रता मिली हुई है कि वे अपना वोट किसे देंगे, खुद तय करें। वे यह बताते आ रहे थे कि आप वास्तव में कांग्रेसी हैं और अब जोगी जी के नहीं होने पर आपको कांग्रेस का साथ देना है। पर अब जोगी परिवार और जकांछ के विधायक धर्मजीत सिंह की ओर से आह्वान हो गया है उनके वोट भाजपा को जायें।

कोई दावा नहीं कर सकता कि खुलकर सामने आने के बाद अब तक संभाले गये वोटों को भाजपा की ओर झुकाने में जनता कांग्रेस के नेता कितने कामयाब होते हैं पर हलचल तो मची हुई है। भाजपा उत्साहित है और अब तक संजीदगी से चुनाव लड़ रही कांग्रेस बचे हुए समय में अपने साधे हुए वोटों को और अधिक मजबूती से बचाये रखने की कोशिश में हैं।

 प्रतीत होता है कि इस चुनाव के बाद छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के पास भाजपा के खिलाफ बोलने के लिये कुछ नहीं रहेगा। पहले ही कयास थे कि विधायक धर्मजीत सिंह कांग्रेस में नहीं जाना चाहते और कांग्रेस के रणनीतिकार उन्हें लेने से भी बच रहे हैं। 

डॉ. रेणु जोगी कोटा से चुनाव लडऩे के पहले तक कांग्रेस के साथ रहीं और स्व. जोगी की किताब छपने के बाद तक दिल्ली रुककर वहां हाईकमान से जुड़े रहने का संकेत देती रहीं। पार्टी के दो विधायक देवव्रत सिंह और प्रमोद शर्मा कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। यानि सबका रास्ता अलग-अलग है। चुनाव के बाद इस छोटे कुनबे में एक बड़ा बिखराब तय है।

मरवाही चुनाव दिलचस्प है क्योंकि सन् 2018 में पहले स्थान पर रही छजकां और दूसरे स्थान पर रही भाजपा अब कांग्रेस के खिलाफ एक हो गई है। कांग्रेस ने प्रदेश में मिली ऐतिहासिक जीत का सिलसिला दोहराने की ठान रखी है जहां पिछली बार उसके प्रत्याशी को तीसरे स्थान पर रहना पड़ा।   


31-Oct-2020 8:06 PM 279

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 31 अक्टूबर।
छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान और कामयाबी के लिए प्रदान किया जाता है। जिसमें 2 लाख की राशि और प्रशस्ति चिन्ह प्रदान किया जाता है। इस वर्ष राज्य अलंकरण पुरस्कार- 2020  1 नवम्बर 2020 को राज्योत्सव समारोह के दौरान दिया जाएगा।
 इस वर्ष कुल 23 नागरिक और संस्थाओं को राज्य अलंकरण प्रदान किया जाएगा। इसकी घोषणा संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत द्वारा किया गया। ये अलंकरण कोरोना की वजह से मुख्यमंत्री निवास पर ही दिया जायेगा।
वीरनारायण सिंह सम्मान- रूपराय नेताम नगरी जिला धमतरी
(आदिम जाति कल्याण) 
बिसाहू दास महंत पुरस्कार-राजेश देवांगन जांजगीर-चांपा
मधुसुदन देवांगन जांजगीर-चांपा संयुक्त रूप से
राजेश देवांगन रायगढ़, वीरेन्द्र देवांगन जांजगीर-चांपा
(बुनकर)
डॉ. भवर सिंह पोर्ते सम्मान-शंभु शक्ति सामाजिक सेवा संस्थान, दुगली धमतरी
(आदिवासी सेवा-उत्थान)
यतियतन लाल सम्मान - बढ़ते कदम रायपुर
(अहिंसा एवं गौ रक्षा के लिए)
महाराज अग्रसेन पुरस्कार - रामअवतार अग्रवाल बिलासपुर
(सामाजिक समरास्ता के लिए) 
पं.माधव राव सप्रे सम्मान-श्री राजेन्द्र धोड़परकर
(पत्रकारिता के लिए) 
गुण्डाधुर सम्मान-आकर्षी कश्यप दुर्ग
(खेल के लिए) 
मिनीमाता सम्मान- श्रीमती शाहना कुरैशी दुर्ग
(महिला उत्थान के लिए)
पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान -आचार्य रमेन्द्रनाथ मिश्रा रायपुर
(सामाजिक आर्थिक व शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव प्रयत्नों के लिए) 
पंडित सुन्दर लाल शर्मा सम्मान - डॉ. सुशील त्रिवेदी रायपुर
जीवननाथ मिश्र अंबिकापुर (संयुक्त रूप से)
(साहित्य के क्षेत्र में) 
चक्रधर सम्मान -डॉ. भारती बंधु (स्वामी जीसीडी भारती) रायपुर
(कला एवं संगीत के लिए)
दाऊ मंदराजी सम्मान - शिवकुमार दीपक दुर्ग
रूपसाय सलाम नारायणपुर (संयुक्त रूप से)
(लोक कला के लिए) 
डॉ खूबचंद बघेल - एनेश्वर वर्मा राजनांदगांव
(कृषि में उत्कृष्ट कार्य के लिए) 
चंदूलाल चंद्राकर सम्मान - ब्रम्हवीर सिंह 
सुश्री ममता लांजेवार
(प्रिंट मिडिया और इलेक्ट्रॉनिक मिडिया के लिए )
ठा. प्यारेलाल सिंह सम्मान -बैजनाथ चंद्राकर
(सहकारिता के लिए) 
हाजी हसन अली सम्मान- हनीत नजिनी धमतरी
(उर्दू भाषा सेवा के लिए) 
प्रवीर चंद्र भंजदेव सम्मान -सर्वज्ञ सिंह मरकाम बिलासपुर
(तीरंदाजी के लिए)
धन्वंतरि सम्मान - डॉ. गौतमचंद जैन रायपुर
(आयुर्वेद चिकित्सा के लिए)   
बिलासा बाई केवटिन सम्मान -गौरव सलूजा रायगढ़
(मछली पालन के लिए) 
संस्कृत भाषा सम्मान - डॉ. कुसुम कान्हे रायपुर
(संस्कृत भाषा के लिए) 
लखन लाल मिश्र सम्मान- श्रीमती दिव्या शर्मा रायपुर
(अपराध अनुसंधान के लिए) 
महाराजा रामानुज प्रताप सिंहदेव -अंबुजा सिमेंट यूनिट भाटापारा-बलौदाबाजार
हरीश मित्तल रायगढ़
(श्रम कल्याण के क्षेत्र में) 
बैरिस्टर छेदीलाल सम्मान- डॉ. निर्मल शुक्ला और विनोद चावड़ा
(विधि के लिए)
राजराजेश्वरी करूणामाता हाथकरघा प्रोत्साहन-कृष्णकुमार देवांगन बलौदाबाजार, मनहरण देवांगन जांजगीर-चांपा (संयुक्त रूप से)


31-Oct-2020 7:42 PM 230

बालोद किया गया था तबादला, अगली सुनवाई तक बिलासपुर में ही

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 31 अक्टूबर।
आबकारी विभाग के निरीक्षक रविन्द्र पांडेय को बालोद तबादले के खिलाफ हाईकोर्ट से अगली सुनवाई तक स्थगन मिल गया है।
तबादले के खिलाफ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव के माध्यम से लगाई गई याचिका में उन्होंने हवाला दिया था कि जुलाई 2016 में उन्हें रायगढ़ से बिलासपुर, 10 अगस्त 2017 को मुंगेली, फिर वापस बिलासपुर, फिर 2 मार्च 2019 को गौरेला भेज दिया गया। 28 अगस्त को ज्वाइन करने के बाद 9 सितम्बर को फिर बिलासपुर भेजा गया। अब उन्हें 21 अक्टूबर को बालोद स्थानांतरित कर दिया गया है। थोड़े समय में बार-बार किया जा रहा स्थानांतरण रोका जाये।

हाईकोर्ट में जस्टिस गौतम भादुड़ी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई तक तबादले पर रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 14 दिसम्बर को तय की गई है।

उल्लेखनीय है कि निरीक्षक रविन्द्र पांडेय के विरुद्ध बिलासपुर में रहते हुए कुछ शिकायतें अवैध वसूली व धमकाने की हो चुकी है। सूत्र बताते हैं कि वे लगातार बिलासपुर में ही रहने की कोशिश करते हैं। फिलहाल उन्हें बिलासपुर से बालोद स्थानांतरण आदेश के पालन से राहत मिल गई है।  


31-Oct-2020 7:42 PM 32

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर | अलीबाबा की मालिकाना कंपनी Ant Group की IPO के लिए निवेशकों ने 3 लाख करोड़ डॉलर ($3 Trillion) की बिडिंग की है. 3 ट्रिलियन डॉलर की यह रकम भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से भी अधिक है. Ant Group की लिस्टिंग हॉन्ग कॉन्ग और शंघाई एक्सचेंज पर होगी. आगामी 5 नवंबर 2020 से जैक मा (Jack Ma) की कंपनी Ant Group Co. Ltd. के ​शेयरों की ट्रेडिंग शुरू हो जाएगी. इसके ठीक दो दिन पहले अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव  होना है. एंट फाइनेंशियल (Ant Financial) ने इस IPO के जरिए 34.4 अरब डॉलर यानी 2.54 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था. आइये जानते है Ant Group की इस आईपीओ के बारे में...

मिल सकता है दुनिया के सबसे बड़े IPO का तमगा

Ant Group Co Ltd की मार्केट वैल्यूएशन करीब 315 अरब डॉलर आंकी गई है. इस कंपनी की वैल्यूएशन ​इजिप्ट (303 अरब डॉलर) और फिनलैंड (269 अरब डॉलर) की जीडीपी से भी ज्यादा है. माना जा रहा है कि एंट ग्रुप का यह आईपीओ दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ साबित होगा. फिलहाल, यह रिकॉर्ड सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) के पास है, जिसने पिछले साल ही आईपीओ के जरिये 29.4 अरब डॉलर जुटाया था. इसके पहले 2014 में अलीबाबा सबसे बड़ी आईपीओ वाली कंपनी बनी थी. 2014 में अलीबाबा ग्रुप ने आईपीओ के जरिये 25 अरब डॉलर जुटाया था.

कितनी बड़ी है जैक मा की यह कंपनी?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एंट ग्रुप की मार्केट वैल्यूएशन JPMorgan Chase & Company और बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) से भी ज्यादा है. यही नहीं यह कंपनी Paypal Holdings Inc (238 अरब डॉलर) और Walt Disney (238 अरब डॉलर) कंपनी से भी बड़ी कंपनी है. IBM Corp से यह कंपनी तीन गुना और Goldman Sachs Group ग्रुप से चार गुना बड़ी कंपनी है.

दुनिया के 11वें अमीर शख्स बन जाएंगे जैक मा

करीब 60,000 डॉलर में अलीबाबा को शुरू करने वाले जैक मा Ant Financial की पब्लि​क लिस्टिंग के बाद दुनिया के 11वें सबसे अमीर शख्स बन सकते हैं. जैक मा के पास इस कंपनी में कुल 8.8 फीसदी हिस्सेदारी है. Ant Financial Group में वो सबसे बड़ी व्यक्तिगत शेयरधारक हैं. हॉन्ग कॉन्ग और शंघाई में लिस्टिंग के बाद जैक मा की​ हिस्सेदारी की वैल्यू करीब 27.4 अरब डॉलर होगी. इसके बाद ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स में वो 71.6 अरब डॉलर की संपत्ति के मालिक हो जाएंगे.

Ant Financial की आईपीओ में संस्थागत निवेशकों ने 76 अरब शेयर्स के ऑर्डर दिए हैं. शंघाई फाइलिंग के मुताबिक, यह सार्वजनिक प्रस्ताव का 284 गुना है. ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रोकर्स इस कंपनी की आईपीओ के लिए व्यक्गित निवेशकों को उनके निवेश से 20 गुना तक ज्यादा रकम उधार देने के इच्छुक हैं.

क्या है शेयर प्राइस और क्यों इसे ही तय किया गया?

आपको बता दें कि कभी एशिया के सबसे अमीर शख्स की कुर्सी पर काबिज रहे जैक मा नंबर 8 के बहुत बड़े फैन हैं. चीन में इस नंबर को समृद्धि से जोड़ा जाता है. चीन में नंबर 6 को भी लकी नंबर माना जाता है. शंघाई एक्सचेंज पर Ant Financial के शेयरों का भाव 68.8 युआन और हॉन्ग कॉन्ग में HK$80 तय किया गया है. (news18)


31-Oct-2020 7:36 PM 34

लॉस एंजेलिस, 31 अक्टूबर | हॉलीवुड के महानतम अभिनेताओं में से एक सीन कोनेरी का शनिवार को निधन हो गया। ब्रिटिश एम्पायर द्वारा सर की उपाधि से नवाजे जा चुके कोनेरी 90 साल के थे।

कोनेरी के परिवार ने उनके निधन की पुष्टि की है।

--आईएएनएस


31-Oct-2020 7:33 PM 33

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर | कांग्रेस की तत्कालीन सरकार की ओर से वर्ष 1991 में बनाए गए पूजा स्थल कानून को भेदभावपूर्ण और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने कानून की धारा 2, 3 और 4 को संविधान का उल्लंघन बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कानून बनाकर हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख समुदाय के लिए कोर्ट का दरवाजा बंद नहीं कर सकती है। उपाध्याय ने दलील दी है कि पब्लिक ऑर्डर तीर्थ स्थल केंद्र का नहीं, बल्कि राज्य का विषय है और यह संविधान की सातवीं अनुसूची की दूसरी सूची में शामिल है। इसलिए केंद्र को यह कानून बनाने का अधिकार ही नहीं है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता अश्विनी उपाध्याय ने आईएएनएस से कहा, " पूजास्थल कानून, 1991 में अयोध्या में श्री रामजन्म स्थान को छोड़ दिया गया, जबकि मथुरा में कृष्ण जन्म स्थान को नहीं छोड़ा गया। जबकि दोनों ही भगवान विष्णु के अवतार हैं। इस प्रकार कांग्रेस की तत्कालीन सरकार की ओर से बनाया गया यह कानून भगवाम राम और कृष्ण में भेद पैदा करने वाला है।"

भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने कहा, "केंद्र सरकार को यह कानून बनाने का अधिकार ही नहीं है। क्योंकि संविधान में तीर्थ स्थल राज्य का विषय है और इतना ही नहीं, पब्लिक ऑर्डर भी राज्य का विषय है, इसलिए केंद्र सरकार ने इस विषय पर कानून बनाकर अपने क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण किया है।"

जनहित याचिका में उपाध्याय ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ऐतिहासिक तथ्यों, अंतराष्ट्रीय संधियों, संवैधानिक प्रावधानों तथा हिंदू, जैन बौद्ध और सिखों के मौलिक अधिकारों को संरक्षित करते हुए उनके धार्मिक स्थलों को पुनस्र्थापित करें।

उपाध्याय ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट पूजा स्थल कानून की धारा 2, 3 व 4 को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26 व 29 का उल्लंघन घोषित करते हुए रद्द करें, क्योंकि इन प्रावधानों में क्रूर आक्रमणकारियों की ओर से गैरकानूनी रूप से स्थापित किए गए पूजा स्थलों को कानूनी मान्यता दी गई है।

याचिका में कहा गया है कि केंद्र ने 11 जुलाई 1991 को इस कानून को लागू किया तथा मनमाने और अतार्किक ढंग से पूर्ववर्ती तारीख से कट ऑफ डेट तय करते हुए घोषित कर दिया कि पूजा स्थलों व तीर्थ स्थलों की जो स्थिति 15 अगस्त 1947 को थी, वही रहेगी। याचिकाकर्ता उपाध्याय का कहना है कि केंद्र न तो कानून को पूर्व तारीख से लागू कर सकता है और न ही लोगों को जुडिशल रेमेडी से वंचित कर सकता है।

 

(आईएएनएस)


31-Oct-2020 7:12 PM 50

-Dayanidhi

संयुक्त राष्ट्र के जैव विविधता पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में महामारियां और अधिक बार आएंगी। इन महामारियों से और अधिक लोगों को जान से हाथ धोना पड़ेगा। ये दुनिया की अर्थव्यवस्था को कोरोनावायरस के मुकाबले और अधिक नुकसान पहुंचाएंगे।

चेतावनी दी गई कि 540,000 से लेकर 850,000 तक ऐसे वायरस हैं, जो नोवल कोरोनवायरस की तरह जानवरों में मौजूद हैं और लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। यह महामारियां मानवता के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

जैव विविधता और महामारी पर विशेष रिपोर्ट में कहा गया है कि जानवरों के रहने के आवासों की तबाही और जरूरत से ज्यादा खपत से भविष्य में पशु-जनित रोगों के और अधिक बढ़ने के आसार हैं।

जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं पर अंतरसरकारी विज्ञान-नीति मंच (आईपीबीईएस) कार्यशाला के अध्यक्ष पीटर दासजक ने कहा कि कोविड-19 महामारी या कोई भी आधुनिक महामारी के पीछे कोई बड़ा रहस्य नहीं है।

वही मानव गतिविधियां जिनकी वजह से जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता की हानि होती है, हमारे कृषि पर भी इनके प्रभावों से महामारी के खतरों को बढ़ाती हैं।

पैनल ने कहा कि 1918 के इन्फ्लूएंजा के प्रकोप के बाद कोविड-19 छठी महामारी है, जिसके लिए पूरी तरह से मानवीय गतिविधियां जिम्मेदार हैं। इनमें वनों की कटाई, कृषि विस्तार, जंगली जानवरों का व्यापार और खपत के माध्यम से पर्यावरण का निरंतर शोषण शामिल है। ये सभी लोगों को जंगली और खेती में उपयोग होने वाले जानवरों के साथ संपर्क में रखते हैं और बीमारियों को शरण देते हैं।

उभरती बीमारियों के 70 फीसदी जैसे कि- इबोला, जीका और एचआईवी / एड्स, मूल रूप से जूनोटिक हैं, जिसका अर्थ है कि वे मनुष्यों में फैलने से पहले जानवरों में फैलते हैं। पैनल ने चेतावनी देते हुए बताया कि हर पांच साल में इंसानों में लगभग पांच नई बीमारियां फैलती हैं, जिनमें से किसी एक की महामारी बनने के आसार होते हैं।

कोविड-19 महामारी के लिए अब तक लगभग 8 ट्रिलियन डॉलर से 16 ट्रिलियन डॉलर तक की कीमत चुकानी पड़ी, जिसमें 5.8 ट्रिलियन से 8.8 ट्रिलियन डॉलर 3 से 6 महीने की सामाजिक दूरी और यात्रा प्रतिबंध की वजह से नुकसान हुआ (जो कि वैश्विक जीडीपी का 6.4 से 9.7 फीसदी है)

खराब तरीके से भूमि उपयोग

आईपीबीईएस ने पिछले साल प्रकृति की स्थिति पर अपने सामयिक मूल्यांकन में कहा था कि पृथ्वी पर तीन-चौथाई से अधिक भूमि पहले से ही मानव गतिविधि के कारण गंभीर रूप से खराब (डीग्रेड) हो चुकी है। जमीन की सतह का एक तिहाई और पृथ्वी पर ताजे पानी का तीन-चौथाई हिस्सा वर्तमान में खेती में उपयोग हो रहा है, लोगों के द्वारा संसाधनों का उपयोग केवल तीन दशकों में 80 प्रतिशत तक बढ़ गया है।

आईपीबीईएस ने 22 प्रमुख विशेषज्ञों के साथ एक वर्चुअल कार्यशाला आयोजित की, जिसमें महामारी के खतरों को कम करने तथा निपटने  के लिए उपायों की सूची बनाई गई है। अब दुनिया भर की सरकारों से अपेक्षा है कि वे इन्हें लागू करें।

विशेषज्ञों ने कहा हम अभी भी टीके और चिकित्सीय माध्यम से रोगों से उभरने और उन्हें नियंत्रित करने के प्रयासों पर भरोसा करते हैं।

आईपीबीईएस ने जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के समान एक अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत जैव विविधता के नुकसान को रोकने के लिए, लक्ष्यों पर सहमति के लिए, देशों को एक वैश्विक समन्वय महामारी प्रतिक्रिया (कोऑर्डिनेटेड पान्डेमिक रिस्पांस) का सुझाव दिया है।

नीति-निर्माताओं के लिए भविष्य में कोविड-19 जैसी बीमारियां न हो इसके लिए मांस की खपत, पशुधन उत्पादन आदि जो महामारी के खतरों को बढ़ाने वाली गतिविधियां हैं उन पर अधिक कर लगाने जैसी विकल्प शामिल करने का सुझाव दिया है।

रिपोर्ट  के मूल्यांकन में अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार के बेहतर नियम और स्वदेशी समुदायों को इस काबिल बनाना कि वे जंगली आवासों को संरक्षित कर सकें आदि का सुझाव भी दिया गया है।

इस शोध में शामिल ओस्ले ने कहा कि हमारा स्वास्थ्य, धन, संपत्ति और भलाई हमारे स्वास्थ्य और हमारे पर्यावरण की भलाई पर निर्भर करती है। इस महामारी की चुनौतियों ने विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण और साझा पर्यावरणीय जीवन-प्रणाली को बचाने और बहाल करने के महत्व को उभारा है। (downtoerth)


31-Oct-2020 7:00 PM 32

हॉन्ग कॉन्ग ने कहा है कि वो अपने यहां बनने वाले सामानों पर 'मेड इन चाइना' लेबल लगाने की अमरीका की कोशिश के विरोध में कदम उठाएगा.

हॉन्ग कॉन्ग के अधिकारियों का कहना है कि ये व्यापार के नियमों का उल्लंघन है और इस मुद्दे को लेकर वो विश्व व्यापार संगठन के दरवाज़े पर दस्तक देंगे.

हॉन्ग कॉन्ग को चीन अपना हिस्सा मानता है. इसी साल जून में चीन ने यहां नया सुरक्षा क़ानून लागू कर दिया था. इस नए क़ानून के तहत यहां के बिज़नेस किसी दूसरे चीनी व्यवसायों की तरह ही होंगे और उन्हें वैश्विक स्तर पर अलग से कोई ख़ास व्यापार सुविधाएं नहीं मिलेंगी.

इसके बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉन्ग कॉन्ग को दिया गया स्पेशल इकोनॉमिक ट्रीटमेन्ट ख़त्म कर दिया.

उन्होंने हॉन्ग कॉन्ग से अमरीका आयात हो रही चीज़ों पर 'मेड इन हांग कांग' की बजाय 'मेड इन चाइना' का लेबल लगाने के लिए कहा.

ट्रंप का कहना था कि हॉन्ग कॉन्ग अब किसी और चीनी शहर की तरह बन गया है.

'मेड इन चाइना' की मांग

इसी साल जुलाई में डोनाल्ड ट्रंप ने एक एक्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर पास कर कहा कि हॉन्ग कॉन्ग अब स्वायत्त राष्ट्र नहीं रहा, वो चीन का हिस्सा है.

इस ऑर्डर में अमरीका ने कहा, "हॉन्ग कॉन्ग के लिए अमरीका की नीति के अनुसार, हॉन्ग कॉन्ग अब ऐसा स्वायत्त क्षेत्र नहीं रहा कि उसके साथ चीन से अलग तरह के संबंध रखे जाएं."

इससे पहले चीन ने जो सुरक्षा क़ानून हॉन्ग कॉन्ग पर लगाया था उसके अनुसार यहां पर बनने वाले सामान पर 'मेड इन चाइना' का लेबल लगाया जाना चाहिए और यहां के सामान को दुनिया के और देशों में इसी लेबल के साथ बेचा जाना चाहिए.

शुक्रवार को हॉन्ग कॉन्ग के अधिकारियों ने पुष्टि की कि वो विश्व व्यापार संगठन सेटलमेन्ट मेकनिज़्म में ये मामला ले कर जाएंगे और अमरीका से द्विपक्षीय चर्चा करने की कोशिश करेंगे.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार हॉन्ग कॉन्ग के व्यापार सचिव एडवर्ड याउ ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "अमरीका एकतरफा और ग़ैरज़िम्मेदाराना तरीके से अलग कस्टम टेरिटरी के तौर पर हॉन्ग कॉन्ग की रुतबे को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहा है."

"इस तरह के कदम से बाज़ार में भ्रम पैदा होता है और ये नियमों के आधार पर होने वाले बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का उल्लंघन है."

विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार हॉन्ग कॉन्ग की गुज़ारिश पर अमरीका को दस दिनों के भीतर ही अपना जवाब देना होगा. इसके बाद अगर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाती है तो मामले का निपटारा करने के लिए हॉन्ग कॉन्ग एक पैनल बनाने की गुज़ारिश कर सकता है.

एडवर्ड याउ ने कहा, "अंतराराष्ट्रीय व्यापार संगठन में हॉन्ग कॉन्ग अपना अलग प्रतिनिधित्व करता है और चीन की मख्यभूमि से अलग इसके अपने व्यापार नियम हैं."

याउ का कहना है कि सितंबर में इस बारे में उन्होंने अमरीका को पत्र लिखा था लेकिन अमरीका के निराशाजनक रवैय्ये का कारण उन्हें अब विश्व व्यापार संगठन का रुख़ करना होगा.

चीन और हॉन्ग कॉन्ग तनाव

व्यापार के लिए इस्तेमाल होने वाले दुनिया के सबसे बड़े बंदरगाहों में हॉन्ग कॉन्ग शुमार है.

चीन का हिस्सा होते हुए भी हॉन्ग कॉन्ग अलग से विश्व व्यापार संगठन का सदस्य है. हॉन्ग कॉन्ग 1 जनवरी 1995 से संगठन का सदस्य है जबकि चीन 11 दिसंबर 2001 को संगठन में शामिल हुआ था.

हॉन्ग कॉन्ग 1841 से 1997 तक ब्रिटेन की कॉलोनी था. ब्रिटेन ने उसे 'वन कंट्री टू सिस्टम' यानी एक देश और दो प्रणाली समझौते के तहत चीन को सुपुर्द किया. ये क़रार हॉन्ग कॉन्ग को वो आज़ादी और लोकतांत्रिक अधिकार देता है, जो चीन के लोगों को हासिल नहीं है. इसमें हांग कांग के अपने व्यापार और इमिग्रेशन नियम शामिल थे.

लेकिन चीन ने इस साल जब यहां नए सुरक्षा क़ानून लागू किए तो यहां के व्यवसायों को मिलने वाली ख़ास व्यापार सुविधाओं को भी ख़त्म कर दिया. इस क़ानून में कुछ बातों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

क्या है अपराध की श्रेणी में?

(1) संबंध तोड़ना यानी चीन से अलग होना

(2) केंद्रीय सरकार के शासन को न मानना या उसकी ताकत को कमज़ोर करना

(3) आतंकवाद, लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा करना या फिर उन्हें डराना धमकाना

(4) विदेशी ताकतों से सांठगांठ करना.

हॉन्ग कॉन्ग में इन सुरक्षा क़ानूनों का कड़ा विरोध हुआ था. उस वक्त चीन और हॉन्ग कॉन्ग के स्थानीय अधिकारियों ने कहा था कि नए सुरक्षा क़ानूनों का असर व्यवसायों पर नहीं पड़ेगा.

लेकिन यहां राजनीतिक हलचल और लंबे चले विरोध प्रदर्शनों का असर पहले ही व्यापार पर पड़ा है. बाद में कोरोना महामारी का भी यहां के व्यापार पर असर पड़ा.

इसी आधार पर अब अमरीका ने हॉन्ग कॉन्ग को नए लेबल के साथ उसे अपना सामान बेचने के लिए कहा है.

ये क़ानून इसी साल नवंबर की नौ तारीख़ से लागू होने वाला है. इसके एक हफ़्ते पहले अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं जिसमें डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन के बीच मुक़ाबला है. (bbc)


31-Oct-2020 6:45 PM 29

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर | प्रवर्तन निदेशालय (ईडी ) ने 750 करोड़ के आर्थिक अपराध मामले में मुख्य आरोपी साईं चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया है। विशेष मनी लॉन्ड्रिंग अदालत ने चंद्रशेखर को जांच एजेंसी की सात दिन की हिरासत में भेजा है। केंद्रीय एजेंसी ने शनिवार को आरोपी साईं चंद्रशेखर को साकेत जिला और सत्र अदालत में पेश किया और हिरासत में पूछताछ के लिए रिमांड हासिल की।

एजेंसी ने 23 अक्टूबर को साईं चंद्रशेखर के आवासीय और कार्यालय परिसर में तलाशी अभियान चलाया था।

प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली से कंपनी के पूर्व कर्मचारी साईं चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, नीदरलैंड की फूड कंपनी हसद नीदरलैंड्स बीवी ने दिल्ली पुलिस में वीरकरण अवस्थी, विनोद सिरोही और अन्य आरोपियों के खिलाफ ठगी का मामला दर्ज कराया।

वीरकरण अवस्थी और रितिका अवस्थी ने खुद को बुश फूड्स ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक बताकर संपर्क साधा था और कंपनी को करोड़ों रुपये के टर्नओवर का विश्वास दिलाया।

ईडी ने बताया कि रितिका अवस्थी ने ऑफर दिया कि यदि हसद कंपनी उन्हें बैंक से 750 करोड़ रुपये की कॉरपोरेट गारंटी दिलवा दे तो वह अपनी कंपनी में उसे हिस्सेदारी दे देगी।

रितिका अवस्थी का भरोसा कर हसद नीदरलैंड्स बीवी ने अपने अधिकारी साई चंद्रशेखर को बुश फूड्स ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड का आर्थिक रिकॉर्ड चेक करने के लिए भेज दिया। इसके बाद चंद्रशेखर ने रितिका अवस्थी के साथ मिलकर फर्जी रिपोर्ट बना कंपनी को सौंप दी। इसके बाद हसद कंपनी ने अवस्थी को 750 करोड़ रुपये दिलवा दिए। रकम लेकर रितिका अपने पार्टनर के साथ फरार हो गई।

--आईएएनएस


31-Oct-2020 6:43 PM 62

भोपाल, 31 अक्टूबर | मध्यप्रदेश की कमल नाथ सरकार के पूर्व मंत्री उमंग सिंघार ने पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला बोला है और कहा है कि उन्हें भी दल-बदल करने के एवज में 50 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया था। पूर्व मंत्री सिंघार ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए शनिवार को कहा, "जिस समय कांग्रेस के विधायकों को बेंगलुरू ले जाया गया था, उस समय उन्हें भी सिंधिया का फोन आया था और 50 करोड़ रुपये का ऑफर दिया था। मुझसे कहा गया था कि मेरी हैसियसत के अनुसार रकम मिल जाएगी।"

सिंघार ने दल-बदल करने वालों पर बड़ा हमला बोला और कहा, "जिन्होंने दल-बदल किया है, वे गद्दार हैं और मैं गद्दारी नहीं कर सकता।"

सिंघार आदिवासी नेता और प्रदेश की पूर्व उप-मुख्यमंत्री जमुना देवी के भतीजे हैं। उन्होंने इस मौके पर अपनी बुआ को भी याद किया।

--आईएएनएस


31-Oct-2020 6:40 PM 35

मुंबई, 31 अक्टूबर | अक्षय कुमार  इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म लक्ष्मी  के चलते खासे सुर्खियों में हैं. पहले इस फिल्म को लक्ष्मी बॉम्ब  के टाइटल के सात रिलीज किया जाना था, लेकिन फिल्म के टाइटल को लेकर भारी विरोध देखने को मिला. जिसके बाद फिल्म के टाइटल से बॉम्ब शब्द हटा दिया गया और इसे लक्ष्मी बॉम्ब से लक्ष्मी कर दिया गया. फिल्म के टाइटल को हिंदु धर्म के खिलाफ बताया जा रहा था. हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब फिल्मों के टाइटल पर विवाद छिड़ा हो. इससे पहले भी कई फिल्मों के टाइटल विवाद के बाद बदलने पड़े. बताते हैं आपको कुछ ऐसी ही फिल्मों के बारे में-

जजमेंटल है क्या

कंगना रनौत और राजकुमार राव की जजमेंटल है क्या फिल्म का टाइटल पहले मेंटल है क्या था, लेकिन इंडियन साइकैट्रिक सासोयटी के फिल्म के टाइटल पर आपत्ति जताने के बाद फिल्म का टाइटल बदलकर ​जजमेंटल है क्या कर दिया गया.

पद्मावत

संजय लीला भंसाली की रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और शाहिद कपूर स्टारर पद्मावत भी विवादों में घिरी थी. करणी सेना ने इस फिल्म के टाइटल का विरोध किया था, जिसके बाद पद्मावती से बदलकर पद्मावत कर दिया.

गोलियों की रासलीला राम-लीला

रणवीर सिंह-दीपिका पादुकोण स्टारर गोलियों की रासलीला राम-लीला का टाइटल पहले रामलीला रखा गया था. लेकिन, विवाद के बाद फिल्म का टाइटल बदल दिया गया.

लव यात्री

सलमान खान की बहन अर्पिता के पति आयुष शर्मा की फिल्म लवयात्री का टाइटल भी बदला गया है. पहले फिल्म का टाइटल लवरात्रि रखा गया था, लेकिन विवाद के बाद इसे लवयात्री कर दिया गया.

सिंह साब द ग्रेट

सनी देओल की फिल्म सिंह साब द ग्रेट का टाइटल पहले सिंह साहिब द ग्रेट रखा गया था. लेकिन, अकाल तख्त ने इस पर नाराजगी जाहिर की थी. जिसके बाद फिल्म का टाइटल बदल दिया गया.

लक्ष्मी

अक्षय कुमार की फिल्म लक्ष्मी का टाइटल तीन बार बदला जा चुका है. पहले फिल्म का टाइटल लक्ष्मी बॉम्ब था. लेकिन, विवाद बढ़ने पर इसे लक्ष्मी कर दिया गया.  (news18)

 


31-Oct-2020 6:35 PM 134

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 31 अक्टूबर।
राज्य में आज शाम 6.00 तक 1917 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इनमें सर्वाधिक 217 अकेले रायगढ़जिले के हैं। केन्द्र सरकार के संगठन आईसीएमआर के इन आंकड़ों के मुताबिक आज शाम तक 5 जिलों में सौ-सौ से अधिक कोरोना पॉजिटिव मिले हैं।

आईसीएमआर के मुताबिक आज बालोद 88, बलौदाबाजार 75, बलरामपुर 8, बस्तर 35, बेमेतरा 31, बीजापुर 22, बिलासपुर 104, दंतेवाड़ा 21, धमतरी 58, दुर्ग 88, गरियाबंद 43, जीपीएम 6, जांजगीर-चांपा 189, जशपुर 39, कबीरधाम 65, कांकेर 51, कोंडागांव 69, कोरबा 200, कोरिया 56, महासमुंद 34, मुंगेली 51, नारायणपुर 3, रायगढ़ 217, रायपुर 134, राजनांदगांव 115, सुकमा 52, सूरजपुर 28, और सरगुजा 35 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। 

केन्द्र सरकार के संगठन आईसीएमआर के इन आंकड़ों में रात तक राज्य शासन के जारी किए जाने वाले आंकड़ों से कुछ फेरबदल हो सकता है क्योंकि ये आंकड़े कोरोना पॉजिटिव जांच के हैं, और राज्य शासन इनमें से कोई पुराने मरीज का रिपीट टेस्ट हो, तो उसे हटा देता है। लेकिन हर दिन यह देखने में आ रहा है कि राज्य शासन के आंकड़े रात तक खासे बढ़ते हैं, और इन आंकड़ों के आसपास पहुंच जाते हैं, कभी-कभी इनसे पीछे भी रह जाते हैं। 

 


31-Oct-2020 6:28 PM 513

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 31 अक्टूबर।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के 8 अफसरों को  इधर से उधर किया गया है। इस कड़ी में निलेश क्षीरसागर को गरियाबंद कलेक्टर बनाया गया है। चंदन अग्रवाल कांकेर और विनीत नंदनवार सुकमा के कलेक्टर होंगे।
 
गरियाबंद कलेक्टर छतर सिंह डेहरे आज रिटायर हो गए। उनकी जगह संचालक कृषि निलेश क्षीरसागर को कलेक्टर बनाया गया है। कांकेर कलेक्टर केएल चौहान को वन विभाग का संयुक्त सचिव बनाया गया है। चंदन अग्रवाल को कांकेर कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। 

जीएसटी कमिश्नर रानू साहू को पर्यटन मंडल के एमडी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। मोहम्मद केसर हक को संचालक पंचायत विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। अभिनव अग्रवाल को एमडी वेयर हाऊसिंग कार्पोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। 


31-Oct-2020 6:21 PM 39

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर | पब्लिक अफेयर सेंटर (PAC) द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए पब्लिक अफेयर इंडेक्स (PAI)-2020 के मुताबिक बड़े राज्यों की श्रेणी में केरल देश का सबसे सुशासित राज्य है, जबकि उत्तर प्रदेश सबसे निचले पायदान पर है. बता दें कि बेंगलुरु से संचालित गैर लाभकारी संगठन ने शुक्रवार को वार्षिक रिपोर्ट जारी की. इस संगठन के अध्यक्ष भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन हैं. पीएसी ने कहा कि राज्यों की रैंकिंग स्थायी विकास के संदर्भ में एकीकृत सूचकांक पर आधारित है.

रिपोर्ट के मुताबिक शासन के संदर्भ में बड़े राज्यों की श्रेणी में शीर्ष चार रैंकों पर दक्षिणी राज्य- केरल (1.388पीएआई सूचकांक अंक), तमिलनाडु (0.912), आंध्र प्रदेश (0.531) और कर्नाटक (0.468)- काबिज हैं. संगठन के मुताबिक, इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश, ओडिशा और बिहार आखिरी पायदान पर हैं. इन राज्यों की पीएआई अंक नकारात्मक है. रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश को रिणात्मक1.461, ओडिशा को रिणात्मक1.201 और बिहार को रिणात्मक1.158 पीएआई मिला है.

ये है छोटे राज्यों की रैंकिंग

छोटे राज्यों की श्रेणी में गोवा को 1.745 पीएआई के साथ शीर्ष रैंकिंग मिली है. इसके बाद मेघालय (0.797), और हिमाचल प्रदेश (0.725) का स्थान है. इस श्रेणी में सबसे खराब प्रदर्शन मणिपुर (रिणात्मक 0.363), दिल्ली (रिणात्मक 0.289) और उत्तराखंड(रिणात्मक0.277) का है. पीएसी के मुताबिक 1.05 पीएआई के साथ चंड़ीगढ़ देश का सबसे बेहतरीन केंद्र शासित प्रदेश है. इसके बाद पुडुचेरी (0.52), लक्षद्वीप (0.003), दादरा और नगर हवेली (रिणात्मक 0.69) का स्थान है.

पीएसी के मुताबिक, सुशासन का आकलन स्थायी विकास के संदर्भ में तीन आधारों समानता, विकास और निरंतरता के आधार पर किया गया. इस मौके पर कस्तूरीरंगन ने कहा, ‘‘ पीएआई- 2020 से जो साक्ष्य और अंतरदृष्टि मिलती है वह हमें भारत के भीतर चल रहे आर्थिक और सामाजिक बदलाव पर विचार करने के लिए विवश करती है.’ (news18)


31-Oct-2020 5:58 PM 39

मुंबई, 31 अक्टूबर । अभिनेता अमिताभ बच्चन को लगता है कि पूरी दुनिया को खुश करने की जरूरत नहीं है, हालांकि किसी को भी कम उम्र में ऐसा करने की इच्छा महसूस हो सकती है। दिग्गज अभिनेता ने शनिवार को अपने सत्यापित इंस्टाग्राम अकाउंट पर तस्वीरों के एक कोलाज को साझा किया। तस्वीरों में वह एक दर्पण में अपने चेहरे को बारीकी से देख रहे हैं।

बिग बी ने लिखा, "एकमात्र व्यक्ति जिसका सामना आपको सुबह करना पड़ता है वह आप खुद हैं। जब युवा होते हैं, तो लगता है कि आपको पूरी दुनिया को खुश करना है। नहीं। वह करें जो आपको खुश करता है, वह जीवन बनाएं जिसे आप जीना चाहते हैं। अगर आप ऐसा कर सकते हैं, तो आप हर सुबह किसी को प्यार करते हुए देखेंगे।"

अभिनेता ने अपने ब्लॉग पर भी इन तस्वीरों को साझा किया, जिसे उन्होंने अपने क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' के सेट पर क्लिक किया था।

बच्चन ने अपने ब्लॉग पोस्ट में लिखा, "काम अपना काम कर रहा है. स्टैप्ड पिन की स्थिति में क्रू टीम को रखने का प्रयास और एक साथ अपनी भागीदारी निभाना।"

उन्होंने आगे लिखा, "लेकिन 'कर्मवीर' अपने भावनात्मक धागों को तोड़ देता है और कहानियों में ऐसी गहरी भावनाएं होती हैं और वे उनके लिए काम करती हैं . यह हमारी आंखों से पानी प्रवाह के साथ बह आता है।"

--आईएएनएस


31-Oct-2020 5:53 PM 13

नोम पेन्ह, 31 अक्टूबर । कंबोडियाई नागरिकों ने चल रही कोरोनावायरस महामारी के बीच वार्षिक जल उत्सव मनाया, जिसे बॉन ओम टक के रूप में भी जाना जाता है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ कि रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक मनाए जाने वाला यह कार्यक्रम देश के सबसे महत्वपूर्ण समारोहों में से एक है और आमतौर पर नाव दौड़ देखने के लिए देशभर में दस लाख से अधिक कंबोडियाई यहां राजधानी नोम पेन्ह में आते हैं।

इससे पहले, सरकार ने कोविड-19 के प्रसार को रोकने के प्रयास के तहत नोम पेन्ह में पारंपरिक उत्सव समारोहों को रद्द कर दिया था।

हालांकि देश के कुछ प्रांतों को उत्सव आयोजित करने की अनुमति दी गई, क्योंकि अतीत से चले आ रही परंपरा को वे जारी रखना चाहते थे।

यह त्योहार टोनले सैप नदी के प्रवाह के उलटने का संकेत देता है और इसे ड्रैगन बोट रेस द्वारा चिह्न्ति किया जाता है।

नौका दौड़ के अलाव यहां शाम में आतिशबाजी और संगीत कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

--आईएएनएस


31-Oct-2020 5:52 PM 27

लंदन, 31 अक्टूबर | ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन कोविड -19 महामारी की दूसरी लहर के मद्देनजर इंग्लैंड में अगले हफ्ते से एक महीने का लॉकडाउन घोषित कर सकते हैं। यह जानकारी अधिकारिक दस्तावेजों के जरिए मिली है।

बीबीसी द्वारा देखे गए दस्तावेज के मुताबिक सोमवार को 'स्टे एट होम' के नए आदेश की घोषणा की जा सकती है, लेकिन इससे स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को छूट दी जाएगी। इसमें कहा गया है कि यदि अतिरिक्त प्रतिबंध नहीं लगाए गए होते तो ब्रिटेन में पहली लहर के दौरान मरने वाले लोगों की संख्या और अधिक होती।

बीबीसी ने कहा कि यह दस्तावेज सरकार के महामारी मॉडलिंग समूह एसपीआई-एम द्वारा जॉनसन को दिखाए जाने के लिए बनाए गए प्रजेंटेशन का हिस्सा हैं। यह दस्तावेज सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार समूह फॉर इमर्जेंसी (सेज) के आधिकारिक बयानों के बाद सामने आए हैं। जिनमें यह भविष्यवाणी की गई थी कि वायरस बहुत तेजी से फैल रहा है और इसके कारण सर्दियों में 85 हजार मौतें होने का अनुमान लगाया गया था।

सेग सदस्य प्रोफेसर गेब्रियल स्कली ने बीबीसी को बताया कि एक राष्ट्रीय लॉकडाउन बेहद जरूरी है। बता दें कि शनिवार तक ब्रिटेन में कुल 9,92,874 मामले और 46,319 मौतें दर्ज हो चुकी थीं।

--आईएएनएस


31-Oct-2020 5:46 PM 13

गुवाहाटी, 31 अक्टूबर | असम में अगले हफ्ते से कोविड-19 के सख्त दिशा-निर्देशों के बीच स्कूल खोले जा रहे हैं। कोरोनावायरस महामारी के चलते बीते सात महीनों से इन्हें बंद रखा गया था। अब सोमवार से इन्हें पुन: खोला जा रहा है।

राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कक्षा छह से बारह तक के विद्यार्थियों को स्कूल जाने की इजाजत दी गई है और इस संबंध में एक मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि कक्षा 6, 8 और 12 के विद्यार्थी सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को स्कूल जाएंगे और बाकी के तीन दिन कक्षा 7, 9 और 11 के विद्यार्थियों की पढ़ाई होगी।

एक अधिकारी ने कहा, "सभी विद्यार्थियों को एक साथ स्कूल नहीं बुलाया जाएगा। इनके स्कूल में आने के समय को सुबह और दोपहर की शिफ्ट में बांट दिया जाएगा। पहले और दूसरे बैच में विद्यार्थियों को शामिल करने का काम विद्यालय प्रमुख का होगा।"

उन्होंने आगे कहा, "पहले बैच के स्टूडेंट्स सुबह आठ बजे आएंगे और बारह बजे तक रहेंगे और इसके बाद दूसरा बैच साढ़े बारह बजे से शुरू होकर साढ़े तीन बजे तक चलेगा।"

--आईएएनएस


31-Oct-2020 5:45 PM 369

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 31 अक्टूबर।
जनता कांग्रेस के विधायक देवव्रत सिंह ने अमित जोगी के भाजपा को समर्थन देने के फैसले पर हैरानी जताई है, और कहा कि रेणु जोगी ने एक तरफ सोनिया गांधी से अमित जोगी के  बच्चे का नामकरण करने के लिए पत्र लिखा था। दूसरी तरफ, जोगी परिवार मरवाही में भाजपा का समर्थन कर रहे हैं। उनका यह कैरेक्टर समझ से परे है।

देवव्रत सिंह ने मीडिया से चर्चा में खुलासा किया कि डॉ. रेणु जोगी ने कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को बकायदा पत्र लिखकर अमित जोगी के बच्चे का नामकरण करने का आग्रह किया था। उन्होंने बताया कि पत्र में बेबी को सोनियाजी ने अमित की संतान को बेटी समझा और चार नाम सुझाए भी हैं। बाद में उन्हें बताया कि अमित को बेटी नहीं, बेटा हुआ है, यह जानकारी भेजी गई है। सोनियाजी ने बेटे के लिए नाम सुझाए हैं या नहीं, यह जानकारी उन्हें नहीं है। इसके बाद भी जोगी परिवार का ऐसा कैरेक्टर समझ से परे है।
 
देवव्रत सिंह ने इस्तीफा देकर चुनाव लडऩे के अमित जोगी की टिप्पणी पर कहा कि जनता कांग्रेस का गठन 2016 में हो गया था। अमित जोगी 2018 तक विधायक थे। उन्होंने इस्तीफा देकर जनता कांग्रेस से चुनाव क्यों नहीं लड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि वे कांग्रेस विचारधारा के हैं। भाजपा से भी उन्हें ऑफर आया था, लेकिन वे भाजपा में नहीं गए। उनका पूरा परिवार कांग्रेसी हैं। देवव्रत ने कहा कि मैंने निजी कारणों से पार्टी छोड़ी थी। अजीत जोगी ने भी निजी कारणों से पार्टी छोड़ी थी। 


31-Oct-2020 5:43 PM 26

पटना, 31 अक्टूबर | बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर नेताओं के बीच आरोप -प्रत्यारोप चरम पर पहुंच गया है। इस बीच, शनिवार को जदयू ने राजद के शासनकाल में फिरौती के लिए अपहरण को लेकर तेजस्वी यादव और कांग्रेस को घेरा और इसके लिए श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। पटना में राजग के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बिहार के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार ने कहा, "वर्ष 1990 से 2005 के बीच तीन नवंबर को होने वाले चुनाव के विधानसभा क्षेत्रों में 3091 लोगों का अपहरण हुआ था, उसका गुनहगार कौन है? उसके हिस्सेदार कौन हैं?"

जदयू नेता नीरज कुमार ने सवालिया लहजे में पूछा, "उस दौर में फिरौती के लिए जो अपहरण होता था, वह उद्योग के रूप में कैसे आया था? उसमें कौन-कौन भागीदार था, यह बिहार की जनता को बताना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने तब मुख्यमंत्री से कार्रवाई के लिए 'ऑपरेशन ब्लैक पैंथर' चलाने को कहा था। कांग्रेस के लोगों को बताना चाहिए कि उसका परिणाम क्या निकला?

उन्होंने उस शासनकाल में कितने अपराधियों को सजा हुई थी, यह भी विरोधियों से पूछा है।

बिहार के मंत्री ने कहा, "तेजस्वी यादव विपक्ष के साथ मिलकर जनता को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लोगों के बीच भ्रमजाल पैदा कर रहे हैं। तेजस्वी की राजनीति का जो डीएनए हैं वो 420 का है, इनके पिता इसी के लिए सजा काट रहे हैं। तेजस्वी पर भी 420 का आरोप है।"

--आईएएनएस


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