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डा गुप्ता ने सीएम, सीएस को भी भेजा पत्र
रायपुर, 12 जून। राज्यपाल रमेन डेका को पत्र लिखकर अंचल के वरिष्ठ चिकित्सक डा राकेश गुप्ता ने इज़राइल में होम-केयरगिवर भर्ती हेतु नर्सिंग योग्यताधारी अभ्यर्थियों से घरेलू कार्य करवाने एवं उनकी सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने, श्री डेका से हस्तक्षेप करने कहा है। पत्र सीएम साय,सीएस विकासशील को भी भेजा है।
डा गुप्ता ने कहा कि कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, द्वारा इज़राइल में "होम-केयरगिवर" के पदों पर भर्ती हेतु जारी विज्ञापन का अवलोकन करने पर अत्यंत चिंता एवं व्यथा का अनुभव हुआ।
इस विज्ञापन में जीएनएम, बी.एससी. नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बी.एससी. नर्सिंग, नर्स असिस्टेंट तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी योग्यताओं वाले अभ्यर्थियों को आवेदन हेतु पात्र बताया गया है। किंतु विज्ञापन में वर्णित कार्य-दायित्वों में रोगी देखभाल के अतिरिक्त खाना बनाना, घर की सफाई (Housekeeping), कपड़े धोना (Laundry), खरीदारी करना, घरेलू कार्य करना तथा अन्य विशेष कार्य भी सम्मिलित हैं। नर्सिंग एक सम्मानित, वैज्ञानिक एवं पेशेवर स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय है। एक नर्स का कार्य रोगियों की शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक देखभाल करना, उपचार में सहयोग देना, स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करना तथा रोगी की चिकित्सा आवश्यकताओं का प्रबंधन करना है। नर्सों को वर्षों तक कठिन प्रशिक्षण देकर स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञ बनाया जाता है। ऐसे में उनसे घरेलू सहायक जैसे कार्य करवाना न केवल अनुचित है, बल्कि नर्सिंग व्यवसाय की गरिमा एवं प्रतिष्ठा को भी गंभीर आघात पहुंचाने वाला है।
निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान अपेक्षित है:
1. नर्सिंग पेशे की गरिमा का हनन:
नर्सों को घरेलू कार्यों के लिए नियोजित करना उनके पेशेवर कौशल और योग्यता का अवमूल्यन है। इससे समाज में नर्सिंग पेशे की छवि प्रभावित होगी।
2. व्यावसायिक शोषण की संभावना:
प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों को स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय घरेलू कार्यों में लगाना उनके पेशेवर अधिकारों का उल्लंघन है।
3. राष्ट्रीय नर्सिंग संसाधनों का दुरुपयोग:
भारत में पहले से ही प्रशिक्षित नर्सों की आवश्यकता है। ऐसे में उन्हें घरेलू सेवाओं के लिए विदेश भेजना देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
4. कार्य की स्पष्टता का अभाव:
विज्ञापन में "Special Duties" एवं "Employer की आवश्यकता अनुसार कार्य" जैसे अस्पष्ट शब्दों का प्रयोग किया गया है, जिससे कार्य के दायरे के असीमित विस्तार और शोषण की आशंका बढ़ती है।
5. सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएँ:
वर्तमान में इज़राइल क्षेत्र निरंतर सुरक्षा चुनौतियों, युद्ध एवं सैन्य तनाव की परिस्थितियों से प्रभावित रहा है। ऐसी स्थिति में भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों, विशेषकर महिलाओं को भेजना उनकी शारीरिक एवं मानसिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील विषय है।
6. मानवाधिकार एवं श्रम अधिकारों की सुरक्षा:
क्या इन अभ्यर्थियों के लिए पर्याप्त कानूनी सुरक्षा, बीमा, आपातकालीन निकासी योजना, कार्यस्थल सुरक्षा, शिकायत निवारण तंत्र तथा भारतीय दूतावास द्वारा संरक्षण की स्पष्ट व्यवस्था की गई है? इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
7. महिला अभ्यर्थियों की सुरक्षा:
विज्ञापन में 90% पद महिलाओं हेतु दर्शाए गए हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, सम्मान एवं कार्यस्थल पर उत्पीड़न से संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान अनिवार्य होने चाहिए।
8. भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) की भावना के विपरीत:
नर्सिंग शिक्षा का उद्देश्य रोगी देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना है, न कि प्रशिक्षित नर्सों को घरेलू सहायिका के रूप में कार्य करने के लिए तैयार करना।
महोदय, छत्तीसगढ़ की बेटियाँ एवं स्वास्थ्यकर्मी राज्य और राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति हैं। उन्हें सम्मानजनक एवं सुरक्षित रोजगार उपलब्ध कराना शासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी रोजगार अवसर में उनकी योग्यता के अनुरूप कार्य, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है, तो उस पर पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है।


