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उच्चतम न्यायालय ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज की
12-Jun-2026 7:36 PM
उच्चतम न्यायालय ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज की

नयी दिल्ली, 12 जून उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए उनका नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी। हालांकि, न्यायालय ने उन्हें चुनाव याचिका के माध्यम से इस मामले को उठाने की छूट प्रदान कर दी।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उनका नामांकन खारिज करने में हुईं ‘‘प्रत्यक्ष और स्पष्ट’’ गलतियों को ठीक करने के लिए अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल किया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि जब भी चुनाव प्रक्रिया के दौरान अनुच्छेद 32 के तहत इस न्यायालय या अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के अधिकारक्षेत्र का इस्तेमाल करने की कोशिश की गई है, तो अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 329(बी) में दिए गए संवैधानिक प्रावधान के कारण बार-बार दखल देने से इनकार किया है।

पीठ ने कहा, ‘‘यदि अदालत यह तय करने लगे कि किन मामलों में नामांकन रद्द किया जाना इतना गलत है कि वह सीधे अनुच्छेद 32 या 226 के तहत हस्तक्षेप कर सकती है, और किन मामलों में उम्मीदवार को चुनाव याचिका का रास्ता अपनाना चाहिए, तो अदालत संविधान के अनुच्छेद 329 में ऐसी व्यवस्था जोड़ रही होगी जो वहां लिखी ही नहीं गई है।’’

उसने कहा, ‘‘हमें डर है कि ऐसी किसी भी व्याख्या को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता, जिसके तहत कुछ मामलों में यह अदालत हस्तक्षेप करे और कुछ अन्य मामलों में पक्षकारों को चुनाव न्यायाधिकरण का सहारा लेने के लिए छोड़ दे।’’

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 329 चुनाव संबंधी मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप पर रोक लगाता है, ताकि न्यायिक देरी के कारण चुनाव प्रक्रिया प्रभावित न हो।

सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि किसी उम्मीदवार का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त किए जाने के बाद उसके पास राहत पाने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं होता।

न्यायालय ने नटराजन से यह भी पूछा कि क्या वह ऐसा कोई फैसला दिखा सकती हैं, जिसमें अदालत ने इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप किया हो।

पीठ ने कहा, ‘‘निर्णय कितना भी त्रुटिपूर्ण क्यों न हो, एक बार नामांकन खारिज हो जाने के बाद सामान्यतः इसका उपाय कहीं और उपलब्ध होता है। क्या इस न्यायालय का ऐसा कोई निर्णय है, जिसमें हमने इस चरण में हस्तक्षेप किया हो?’’

नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि किसी उम्मीदवार को केवल वही आपराधिक मामला घोषित करना होता है, जिसमें न्यूनतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में केवल समन जारी हुए थे।

सिंघवी ने कहा कि मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए नटराजन का नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक आपराधिक मामले का खुलासा न करने के आरोप में गलत तरीके से खारिज कर दिया।

निर्वाचित उम्मीदवार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस न्यायालय ने लगातार यह माना है कि चुनाव लड़ने का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है, न कि मौलिक अधिकार।

 

रोहतगी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया और कहा कि अनुच्छेद 329 एक संवैधानिक रोक लगाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘अनुच्छेद 329 का असर यह है कि चुनाव से जुड़े मामलों में अनुच्छेद 32 और 226 के तहत मिलने वाले उपाय लागू नहीं होते।’’

रोहतगी ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, किसी भी चुनौती के लिए आम तौर पर चुनाव प्रक्रिया पूरी होने का इंतज़ार किया जाना चाहिए और उसे चुनाव कानून की प्रक्रिया के ज़रिए ही उठाया जाना चाहिए।

मध्यप्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकार दूसरे उम्मीदवार का समर्थन कर रही थी।

निर्वाचन आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 100 का ज़िक्र करते हुए कहा कि चुनावी विवादों को सुलझाने का विशेष अधिकार चुनाव प्राधिकरण के पास है।

राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा के आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल फॉर्म-26 में एक न्यायालयीन शिकायत का उल्लेख नहीं किया और इस प्रकार अधूरा शपथपत्र प्रस्तुत किया।

मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, सत्तारूढ़ भाजपा के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की थी कि नटराजन ने अपने शपथपत्र में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले का उल्लेख नहीं किया है।

कागजों की जांच के बाद, निर्वाचन अधिकारी ने बृहस्पतिवार को भाजपा के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया।  (भाषा)


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