ठेकेदार बोले काम करना मुश्किल
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
राजनांदगांव, 7 अप्रैल। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मध्य-पूर्व में जारी सशस्त्र संघर्ष का असर अब सीधे छत्तीसगढ़ के निर्माण कार्यों पर दिखने लगा है। पेट्रोलियम उत्पादों की कमी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं ने राज्य के ठेकेदारों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
इसी परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने विभाग को औपचारिक रूप से अप्रत्याशित घटना की सूचना दी है। प्रदेश अध्यक्ष वीरेश शुक्ला, जिला अध्यक्ष संजय सिंघी और जिला कांट्रेक्टर एसोसिएशन के सचिव आलोक बिंदल व अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से यह ज्ञापन जारी किया है। यह पत्र प्रमुख अभियंता पीडब्ल्यूडी नया रायपुर सहित सभी विभागों के मुख्य अभियंताओं, मंत्रियों और सचिवों को भेजा जा रहा है।
ज्ञापन में बताया गया है कि मध्य-पूर्व क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने की बात कही गई है। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और परिवहन बाधित हुआ है।
ठेकेदारों के अनुसार बिटुमेन, स्टील, इमल्शन, डीजल, पेट्रोल और एलपीजी जैसी जरूरी सामग्री की आपूर्ति बाधित हो गई है। हॉट मिक्स प्लांट, बैचिंग प्लांट, मशीनरी और ट्रांसपोर्ट संचालन प्रभावित हो रहे हैं। कई उपकरण और संसाधन निष्क्रिय हो रहे हैं। जिससे उत्पादकता में गिरावट आई है। एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण श्रमिक शिविरों में भोजन और दैनिक संचालन प्रभावित हो रहे हैं। साइट पर काम करने वाले श्रमिकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति ठेकेदारों के नियंत्रण से बाहर है। इसे अप्रत्याशित घटना के रूप में माना जाए, परियोजनाओं की समय सीमा बढ़ाई जाए।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि देरी के लिए ठेकेदारों को जिम्मेदार न ठहराया जाए। किसी भी प्रकार के जुर्माना, पेनल्टी या नुकसान की भरपाई से छूट दी जाए, भविष्य में लागत वृद्धि और नुकसान के लिए दावा करने का अधिकार सुरक्षित रखा जाए। संघ ने अपने सभी सदस्य ठेकेदारों से अपील की है कि यदि इस विषय से संबंधित अन्य समस्याएं हैं तो वे व्यक्तिगत रूप से या समूह के माध्यम से जानकारी दें, ताकि उन्हें भी ज्ञापन में शामिल किया जा सके। अंतर्राष्ट्रीय हालात का असर अब स्थानीय स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ के ठेकेदारों द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल उनकी समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि सरकार के सामने भी एक बड़ी चुनौती पेश करता है कि वह समय रहते उचित निर्णय लेकर निर्माण कार्यों को पटरी पर बनाए रखे।