अंतरराष्ट्रीय

पिछले साल आत्मघाती हमले में मारा गया था हैबतुल्लाह अखुंदजादा, पाकिस्तान ने रची थी साजिश
16-Oct-2021 9:56 AM (52)

-मनोज गुप्ता

नई दिल्ली. कई महीने तक चले रहस्यमयी माहौल के बाद अब तालिबान ने कंफर्म कर दिया है कि उसका सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा मारा जा चुका है. सीएनएन-न्यूज़18 को सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि 2016 से तालिबान का मुखिया रहा अखुंदजादा 2020 में पाकिस्तान में एक आत्मघाती हमले में मारा गया था.

एक सीनियर तालिबान नेता आमिर-अल-मुमिनिन ने कहा है कि हैबतुल्लाह अखुंदजादा पाकिस्तानी सेनाओं द्वारा समर्थित आत्मघाती हमले में ‘शहीद’ हो गया था. बता दें कि सीएनएन-न्यूज़18 ने पहले भी रिपोर्ट की थी कि या तो अखुंदजादा पाकिस्तान के कब्जे में है या फिर उसकी सेनाओं द्वारा मार दिया गया है.

तालिबान का शासन आने के बाद से ही कयासबाजी जारी
दरअसल अगस्त महीने में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही अखुंदजादा को लेकर कयासबाजी की जा रही है. लेकिन तालिबान की तरफ से लगातार कहा गया है कि अखुदंजादा जिंदा है और जल्द ही सार्वजनिक रूप से सामने आएगा. वास्तविकता में हैबतुल्लाह अखुंदजादा आज तक कभी भी लोगों के सामने नहीं आया. वह पर्दे के पीछे रहकर ही ऑपरेट करता रहा है. न्यू यॉर्क पोस्ट के होली मैक काय के मुताबिक अखुंदजादा की जो तस्वीर इंटरनेट पर है वो भी वर्षों पुरानी है.

तालिबान नेताओं के बीच भी थी अफवाहें
अब जबकि अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आ चुका है तो लोग उसकी सार्वजनिक मौजूदगी का इंतजार कर रहे थे. लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ था अफवाहों का दौर शुरू हो गया. अफवाहें तालिबान नेताओं के बीच भी चलने लगीं कि क्या अखुंदजादा जिंदा नहीं है?

साल 2016 में अमेरिका ने एक ड्रोन हमले में तालिबान के प्रमुख अख्तर मंसूर को मार गिराया था. इसके बाद अखुंदज़ादा को मंसूर का उत्तराधिकारी बनाने का ऐलान किया गया. अखुंदज़ादा कंधार का एक कट्टर धार्मिक नेता था. उसे एक सैन्य कमांडर से ज्यादा एक धार्मिक नेता के तौर पर लोग जानते थे. कहा जाता है कि अखुंदज़ादा ने ही इस्लामी सज़ा की शुरुआत की थी. जिसके तहत वो खुलेआम मर्डर या चोरी करने वालों को मौत की सजा सुनाता था. इसके अलावा वो फतवा जारी करता था. (news18.com)

कोरोना पॉजिटिव होकर अस्पताल पहुंचे पति-पत्नी, सरकार ने मार दिए उनके 12 पालतू कुत्ते
16-Oct-2021 9:51 AM (238)

दुनिया में कोरोना वायरस का ऐसा प्रकोप छाया कि लोग घरों में बंद हो गए. कई देशों में लॉकडाउन लग गया. बीते दो साल से इस वायरस ने सभी की जिंदगी बर्बाद कर दी. अब धीरे-धीरे लोग वैक्सीनेट हो रहे हैं, इससे वायरस का प्रकोप कम होता नजर आ रहा है. ऐसे में कई देश अब वायरस का प्रकोप बढ़ाने वाला कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है. विएतनाम सरकार भी कोविड इन्फेक्शन को फैलने से रोकने के लिए कुछ भी करने को तैयार है. इसी कड़ी में विएतनाम में रहने वाली फम मिन्ह हंग और उसकी 35 साल की बीवी न्गुयेन थी ची एम को जब कोरोना पॉजिटिव होने पर अस्पताल में एडमिट किया गया, तो सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया, जो हैरान करने वाला है.

कपल अस्पताल में कोरोना से जंग लड़ रहा है. दोनों अपने 12 कुत्तों के साथ रहता था. लेकिन जब दोनों को पता चला कि वो कोरोना पॉजिटिव हैं, तो दोनों अस्पताल में एडमिट हो गए. इसके बाद प्रसाशन ने दोनों के 12 कुत्तों को जान से मार दिया. ऐसा किया गया ताकि ये वायरस कुत्तों के जरिये किसी और में ना फैले. इस बेहद क्रूर घटना की भनक जब पति-पत्नी को लगी, तो उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया. कपल ने इन कुत्तों को अपने बच्चों की तरह पाला था. अस्पताल में दोनों की तबियत रोने के कारण और खराब हो गई है.

अपने कुत्तों को बच्चे सा पालता था कपल
BBC से बातचीत में कपल ने कहा कि उन्हें इन्साफ चाहिए. अभी तक ये कहीं भी नहीं क्लियर हुआ है कि कोरोना कुत्तों को होता है या उनसे फैलता है. ऐसे में आखिर किस आधार पर बिना उनकी जानकारी के उनके 12 कुत्तों को मार डाला गया. सोशल मीडिया पर इस केस ने बहस छेड़ दी है. लोगों ने इंसाफ के लिए पिटीशन साइन करना शुरू किया है. अभी तक इसे लेकर डेढ़ लाख लोगों ने सिग्नेचर किया है.

बताया जा रहा है कि कपल काम की तलाश में गाड़ी से अपने रिश्तेदार के घर जा रहा था. ऐसे में जब वो खानह हंग पहुंचे, तो वहां एंट्री के लिए उन्हें कोरोना टेस्ट करवाना पड़ा, जिसमें कपल पॉजिटिव आया. इसके बाद उन्हें अस्पताल भेजा गया और उनके कुत्तों को क्वारेंटाइन सेंटर. यहां प्रशासन ने उनके 12 कुत्तों को जिंदा जलाकर मार दिया ताकि इनसे कोरोना किसी और को ना फैले. मामले के तूल पकड़ने के बाद सरकार ने इसे लेकर सफाई देते हुए कहा कि वो किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते. हालांकि, लोग इस घटना को बेहद क्रूर बता रहे हैं. (news18.com)

एयरपोर्ट पर बिना कपड़ों के महिला को टहलते देख खुली रह गई लोगों की आंखें, पुलिस ने कंबल से ढका और फिर...
16-Oct-2021 9:50 AM (146)

सोशल मीडिया अजीबोगरीब खबरों का भंडार होता है. इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसी ही एक विचित्र खबर खूब चर्चा में है. अमेरिका के डेनवर एयरपोर्ट पर हाल ही में लोगों को एक ऐसा दृष्य देखने को मिला जिसे देखते ही उनकी आंखों खुली की खुली रह गईं. एयरपोर्ट पर जहां लोग फ्लाइट पकड़ने जाते हैं उन्हें वहां एक महिला दिख गई जिसके शरीर पर एक भी कपड़े नहीं थे. वो न्यूड होकर फ्लाइड पकड़ने आई थी.

ये पूरा मामला है अमेरिका के डेनवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का. डेनवर सीबीएस 4 वेबसाइट के मुताबिक ये घटना पिछले महीने की है मगर इस घटना से जुड़ा वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुआ है. वीडियो में नजर आ रहा है कि एक महिला बिना कपड़ों के एयरपोर्ट के अंदर घूम रही है. उसके पास कोई सामान भी नहीं है. उसने सिर्फ एक बोतल ली हुई है और अन्य यात्रियों के पास जाकर उनसे हालचाल पूछ रही है. सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें देखा जा सकता है कि महिला यात्रियों के पास जाकर पूछ रही है- “कैसे हैं, कहां रहते हैं आप?” इस बीच वहां मौजूद कई लोगों ने महिला को रिकॉर्ड करना भी शुरू कर दिया था.

मानसिक रूप से अस्थिर थी महिला
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक वहां मौजूद लोगों ने बताया कि एयरपोर्ट सिक्योरिटी स्टाफ महिला को पकड़ने के लिए उसके पीछे भागा. कथित तौर पर महिला ने शराब पी हुई थी. इसके अलावा वो मानसिक रूप से अस्थिर थी. एयरपोर्ट पर मौजूद पुलिस ने महिला को पहले कंबल से ढका और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया. वहां मौजूद लोगों ने बताया कि महिला हंसी जा रही थी और जब पुलिस उसे पकड़ने आयी तो वो वहां से भागने लगी. पहली बार जब उन्होंने उसे कंबल से ढकने की कोशिश की तो वो चकमा देकर भाग गई. पुलिस ने बताया कि उसे गिरफ्तार करने के बाद तुरंत ही यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल भेज दिया गया. डेनवर पुलिस के अनुसार ये मामला 19 सितंबर के दिन हुआ था. पुलिस और एयरपोर्ट स्टाफ ने महिला की पहचान को गोपनीय रखने के लिए उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं पब्लिक की है. (news18.com)

तालिबान की हिमाकत! काबुल के गुरुद्वारे में घुसे भारी हथियारों से लैस इस्लामिक अमीरात के अधिकारी
16-Oct-2021 9:48 AM (116)

नई दिल्ली. तालिबान के कब्जे वाले अफ़ग़ानिस्तान के इस्लामिक अमीरात की विशेष इकाई से होने का दावा करने वाले भारी हथियारों से लैस अधिकारी शुक्रवार को काबुल के कारते परवान स्थित गुरुद्वारे दशमेश पिता में जबरन घुस गए. इतना ही उन्होंने गुरुद्वारे में समुदाय विशेष को ना सिर्फ धमकाया, बल्कि पवित्र स्थान की शुचिता को अपमानित भी किया. भारतीय विश्व मंच के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने यह जानकारी दी.

उन्होंने आगे कहा, “हथियारों से लैस लोग गुरुद्वारे के साथ ही उससे जुड़े सामुदायिक स्कूल के पूरे परिसर में भी छापेमारी कर रहे हैं. गुरुद्वारे के प्राइवेट सुरक्षा गार्डों ने शुरू में उन्हें प्रवेश करने से रोका, लेकिन उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई और उनके साथ मारपीट भी की गई.”

फोरम के अध्यक्ष चंडोक ने बताया कि इस्लामिक अमीरात की स्पेशल यूनिट से जुड़े होने का दावा करने वाले अधिकारियों ने गुरुद्वारे से सटे सांसद नरिंदर सिंह खालसा के पूर्व आवास और कार्यालय पर भी छापेमारी की है. उन्होंने कहा कि समुदाय के लगभग 20 सदस्य गुरुद्वारे के अंदर मौजूद हैं.

चंडोक ने भारत सरकार से अपील की है कि वे इस मुद्दे को तुरंत उच्च स्तर पर अपने समकक्षों के साथ उठाएं. उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार से निवेदन करता हूं कि वे अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख समुदायों की चिंताओं को तुरंत ही उनके समकक्षों के साथ उच्चतम स्तर पर उठाएं. अफगानिस्तान में मौजूदा शासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और वहां रहने वाले अल्पसंख्यकों की भलाई के लिए कदम उठाया जाए.” (news18.com)

ब्रिटेन में एक लैब की भयानक गलती पड़ी भारी, जांच में 43 हजार लोगों को बताया संक्रमित
16-Oct-2021 9:47 AM (50)

लंदन. ब्रिटेन में एक प्राइवेट लैब की भयानक गलती की वजह से 43 हजार लोगों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव बता दी गई है. ब्रिटिश स्वास्थ्य अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि शायद हजारों लोगों को गलत रिपोर्ट दी गई, वह संक्रमित नहीं थे.

ब्रिटिश स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने कहा कि गलत निगेटिव रिपोर्ट की वजह से मध्य इंग्लैंड के वोल्वरहैम्पटन स्थित इम्मेंसा हेल्थ क्लीनिक लिमिटेड नामक प्रयोगशाला ने नमूनों की जांच करने की प्रक्रिया स्थगित कर दी है. जन स्वास्थ्य एजेंसी के निदेशक ने कहा कि वह प्रयोगशाला की जांच में गलत रिपोर्ट आने की तकनीकी खामी का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

प्रयोगशाला की यह खामी उस समय आई, जब कुछ लोग रैपिड एंटीजन जांच में संक्रमित पाए गए, जबकि अपेक्षाकृत अधिक सटीक मानी जाने वाली आरटी-पीसीआर जांच में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई.

स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया, ‘प्रयोगशाला के जरिए करीब चार लाख नमूनों की जांच की गई, जिनमें से अधिकतर की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन अनुमान है कि 43 हजार लोगों की गलत निगेटिव रिपोर्ट आई.’ इनमें से अधिकतर दक्षिण पश्चिम इंग्लैंड के रहने वाले हैं.

एजेंसी ने बताया कि गलत रिपोर्ट आठ सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच हुई जांचों की दी गई. एजेंसी ने कहा कि यह एक लैब की गलती है और प्रभावित लोगों से संपर्क कर उन्हें दूसरी जांच कराने की सलाह दी जा रही है.

गौरतलब है कि ब्रिटिश सरकार ने इम्मेंसा को 16.3 करोड़ डॉलर का ठेका कोविड-19 जांच के लिए पिछले साल अक्टूबर में दिया था. कंपनी की मुख्य कार्यकारी एंड्रिया रिपोसाती ने बताया कि कंपनी ब्रिटिश स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है. (news18.com)

रूस की Sputnik V वैक्सीन के वजह से आधी दुनिया में मचा हड़कंप, क्या है इसकी वजह
16-Oct-2021 9:47 AM (135)

काराकस. लैटीन अमेरिका से लेकर पश्चिम एशिया तक विकासशील देशों में लाखों लोग स्पूतनिक-वी कोरोना वैक्सीन की खुराक लेने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन टीकाकरण अभियान में पहली खुराक और दूसरी खुराक के बीच अंतर बढ़ता ही जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक, रूस ने कोविड-19 रोधी टीके की एक अरब खुराक देने का वादा किया था, लेकिन उसने केवल 4.8% खुराकों का ही निर्यात किया है.

टीके में निवेश करने वाले रूस के सरकार नियंत्रित राजकोष के प्रमुख ने बुधवार को कहा था कि टीके की आपूर्ति की समस्या हल कर ली गई है. एस्पेरिता गार्शिया द पेरेज (88) ने मई में कोविड-19 रोधी टीके की पहली खुराक ली थी. वह अब स्पूतनिक वी टीके की दूसरी खुराक का इंतजार कर रही हैं. वह पिछले महीने कोरोना वायरस से संक्रमित हुई. उनके जीवित रहने की उम्मीद कई दवाओं और घर पर हो रही देखभाल पर टिकी हुई है.

वेनेजुएला ने दिसंबर 2020 में स्पूतनिक की एक करोड़ खुराक का ऑर्डर दिया था, लेकिन उसे 40 लाख से भी कम खुराकें मिली. अर्जेंटीना को 25 दिसंबर को स्पूतनिक की पहली खेप मिली थी, लेकिन वह अब भी दो करोड़ खुराकों का इंतजार कर रहा है.

स्पूतनिक वी का प्रयोग सबसे पहले अगस्त 2020 में किया गया और करीब 70 देशों में इसे मान्यता मिली। कोविड-19 के अन्य टीकों के बजाय स्पूतनिक की पहली और दूसरी खुराक अलग हैं। उत्पादन में मुश्किलों खासतौर से दूसरी खुराक के अवयवों को बनाने में दिक्कतों से इस टीके के निर्माण में देरी हुई है. विशेषज्ञों ने इसके लिए उत्पादन की सीमित क्षमता के साथ ही इस प्रक्रिया की जटिलता को जिम्मेदार ठहराया है. (news18.com)

चीन-भूटान बॉर्डर एमओयू पर अपना रुख न जताए भारत : चीनी मुखपत्र
16-Oct-2021 8:24 AM (50)

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर | चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा कि भारत ने भूटान पर दीर्घकालिक व्यापक नियंत्रण और प्रभाव का प्रयोग किया है, जिसने भूटान को विदेशी संबंधों को विकसित करने से प्रतिबंधित कर दिया है। चीन और भूटान के वरिष्ठ राजनयिक अधिकारियों ने गुरुवार को एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान भूटान-चीन सीमा वार्ता में तेजी लाने के लिए तीन-चरणीय रोडमैप पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

भूटान एकमात्र पड़ोसी देश है, जिसने चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं।

भूटान हिमालय के दक्षिणी ढलानों में स्थित है। 38,000 वर्ग किमी के क्षेत्रफल और 800,000 से कम आबादी के साथ, यह छोटा सा देश चीन और भारत के बीच स्थित है।

ग्लोबल टाइम्स ने कहा, "भूटान के चीन के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं, न ही उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के किसी अन्य स्थायी सदस्य के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं। यह असामान्य है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि भारत ने भूटान पर दीर्घकालिक व्यापक नियंत्रण और प्रभाव का प्रयोग किया है, जिसने इसे विदेशी संबंधों को विकसित करने से प्रतिबंधित कर दिया है।"

अखबार ने आगे कहा, "भूटान के साथ सीमा वार्ता को पूरा करना इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए था। समस्या भूटान के पीछे देश में है -भारत , जिसने एक जटिल कारक के रूप में काम किया है।"

चीनी मुखपत्र ने कहा, "हमें नहीं लगता कि नई दिल्ली को अपना रुख व्यक्त करना चाहिए। यह समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए दो संप्रभु देशों के बीच का मामला है। अगर भारत इस पर उंगली उठाता है, तो यह दुनिया को केवल यह साबित कर सकता है कि भारत एक कमजोर और छोटे देश की संप्रभुता को खत्म कर रहा है।"

ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक संपादकीय में कहा, "भारत को सार्वजनिक रूप से कुछ भी नहीं कहना चाहिए, न ही उसे भूटान पर दबाव डालना चाहिए या यह निर्देश देना चाहिए कि भूटान को चीन के साथ अपनी सीमा वार्ता में क्या करना चाहिए। चीन और भूटान के बीच एक सीमांकन रेखा दोनों देशों के क्षेत्रों का परिसीमन करेगी। यदि भारत यह मानता है कि सीमांकन कैसे तय किया गया है, तो यह भारत के राष्ट्रीय हित को प्रभावित करेगा, यह साबित करेगा कि भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को भूटान के क्षेत्र में अनुचित रूप से बढ़ाया है और भूटान को भारत की चीन नीति की आउटपोस्ट (चौकी) में बदलना चाहता है। ये अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मानदंडों का उल्लंघन भी है।"

इसमें आगे कहा गया है, "भारत दक्षिण एशिया में सबसे बड़ी और सबसे मजबूत शक्ति है। लेकिन यह भूटान पर अपने पुराने जमाने के नियंत्रण को समाप्त करने का समय है। भारत को नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों पर असामान्य प्रभाव डालने की अपनी इच्छा पर भी अंकुश लगाना चाहिए। दक्षिण एशियाई देश विकास के इच्छुक हैं। दक्षिण एशियाई देश चीन के साथ संबंध विकसित करने के इच्छुक हैं और उन्हें ऐसा करने का अधिकार है।"

ग्लोबल टाइम्स ने कहा, "चीन के साथ आर्थिक और अन्य संबंधों को मजबूत करने के इन देशों के कदमों को देखते हुए भारत को संकीर्ण सोच वाली भू-राजनीतिक सोच से पार पाना चाहिए और यह कल्पना नहीं करनी चाहिए कि चीन भारत को घेर रहा है। चीन का न तो कोई सैन्य गठबंधन है और न ही विशेष सहयोग, जो उन देशों में से किसी के साथ भारत को निशाना बनाए। भारत अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसके लिए, इसे पहले खुले विचारों वाला होना चाहिए और अति संवेदनशील नहीं होना चाहिए।"

ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि ऐसा लगता है कि चीन और भूटान जल्द या बाद में एक सीमा समझौते पर पहुंचेंगे और अंतत: राजनयिक संबंधों की स्थापना की ओर बढ़ेंगे।

इसमें कहा गया है, "यह प्रगति है, जो दोनों पड़ोसी देशों के बीच होनी चाहिए। अगर यह रुक जाती है, तो लोगों को आश्चर्य होगा कि क्या भारत ने फिर से भूटान पर दबाव डाला और उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया है।"(आईएएनएस)

भारत की तारीफ सुनकर जला पाकिस्तानी मीडिया, इमरान खान को जमकर कोसा
15-Oct-2021 5:47 PM (72)

इस्लामाबाद. दो दिन पहले अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी के 9.5% से बढ़ने की उम्मीद जताई है. आईएमएफ की रिपोर्ट के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान में बवाल मचा हुआ है. पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि भारत काेविड-19 महामारी में भी ग्रोथ कर रहा है. जबकि पाकिस्तान लगातार नीचे जा रहा है. हर दिन पाकिस्तानी रुपए के मुकाबले डॉलर की कीमत बढ़ रही है. इस दौरान पाक मीडिया की इमरान हुकूमत को कोसने से बाज नहीं आता. 

डिबेट में आए एक गेस्ट इमरान सरकार पर कमेंट करते हुए बताते, “इस वक्त मुल्क में इकानॉमी का बेड़ा गर्क हो चुका है. जब ये आए थे तो कहते थे लोगों को एक करोड़ नौकरियां देंगे, 50 लाख घर बनाएंगे. बाहर का पैसा यहां आएगा, लेकिन आज ही आईएमएफ की रिपोर्ट में भारत को ग्रोथ को लेकर बड़ी बातें कहीं गई हैं, इंडिया 9 फीसद तरक्की करेगा, हम तीन फीसद तरक्की करेंगे. हमारी कुल आमदनी 300 अरब डॉलर है, हम इंडिया से क्या मुकाबला करेंगे.” (news18.com)

अफगानिस्तान: कंधार की शिया मस्जिद में 3 सीरियल ब्लास्ट, नमाज में जुटे थे लोग, 32 के मारे जाने की खबर
15-Oct-2021 5:45 PM (34)

काबुल. अफगानिस्तान के कंधार की इमाम बारगाह मस्जिद में बम धमाके की खबर है. अफगान मीडिया टोलो न्यूज के मुताबिक, धमाके में अब तक 32 लोगों के मारे जाने की खबर है. वहीं, 45 लोग घायल हुए हैं. यह एक शिया मस्जिद है, जिसमें शुक्रवार की नमाज के लिए लोग जुटे थे. प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मस्जिद में एक के बाद एक तीन धमाके हुए थे.

वहीं, गृह मंत्रालय के प्रवक्ता सईद कोस्ती ने बताया कि दर्जनों के लोगों के इस धमाके में मारे जाने और घायल होने की सूचना है. तालिबान की स्पेशल फोर्सेस घटनास्थल पर पहुंच चुकी हैं. हम जांच कर रहे हैं कि आखिर यह किस तरह का धमाका था.

इससे पहले बीते शुक्रवार को उत्तरी अफगानिस्तान की एक शिया मस्जिद में धमाके में 100 से ज्यादा की मौत हो गई थी. धमाका ठीक उस वक्त हुआ था, जब सैकड़ों लोग नमाज अदा कर रहे थे. इस्लामिक स्टेट खुरासान ने बम धमाके की जिम्मेदारी ली थी. आईएस ने आत्मघाती हमलावर की पहचान एक उइगर मुस्लिम के तौर पर की और कहा कि हमले में शियाओं और तालिबान दोनों को निशाना बनाया गया जो चीन से उइगरों की मांगों को पूरा करने में बाधा बन रहे हैं.

शिया को क्यों बनाया निशाना?
इस्लामिक स्टेट समूह के आतंकवादियों का अफगानिस्तान के शिया मुस्लिम अल्संख्यकों पर हमला करने का लंबा इतिहास रहा है. जिन लोगों को निशाना बनाया गया, वे हजारा समुदाय से हैं, जो सुन्नी बहुल देश में लंबे समय से भेदभाव का शिकार बनते रहे हैं. यह हमला अमेरिका और नाटो सैनिकों की अगस्त के आखिर में अफगानिस्तान से वापसी और देश पर तालिबान के कब्जे के बाद एक भीषण हमला है. (news18.com)

अमेरिकी रियल एस्टेट टाइकून को बेस्ट फ्रेंड की हत्या के जुर्म में उम्रकैद, सामने आई शॉकिंग स्टोरी
15-Oct-2021 12:53 PM (45)

लॉस एंजिलिस. अमेरिका में रियल एस्टेट टाइकून रॉबर्ट डर्स्ट को अपनी ही बेस्ट फ्रेंड सूजन बर्मन की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. इसके साथ ही उन्हें पैरोल भी नहीं मिलेगी.

78 वर्षीय बिजनेसमैन ने बेवर्ली हिल वाले घर में दोस्त की हत्या साल में 2000 में की थी. वह उसे बीवी के गायब हो जाने के बाद पुलिस से बात करने से रोक रहा था. हालांकि डर्स्‍ट ने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है. रॉबर्ट डर्स्ट पर HBO की डॉक्युमेंट्री “The Jinx” भी बन चुकी है. हालांकि उसने हमेशा इस हत्या से इनकार किया.

क्यों की हत्या?
सरकारी वकील ने कहा कि उसने 2000 में क्राइम राइटर बर्मन का कत्ल किया था. क्योंकि न्यूयॉर्क पुलिस रॉबर्ट की पत्नी के गायब होने के बारे में सूजन से सवाल करना चाहती थी. उसकी पत्नी दो दशक से गायब थी. रॉबर्ट उसे पुलिस से बात नहीं करने देना चाहता था.

उसके बाद उसने दोस्त को गोली मार दी. दरअसल, पुलिस को शक था कि पत्नी के गायब होने के पीछे रॉबर्ट का हाथ है. सूजन की हत्या पर रॉबर्ट ने हमेशा इनकार किया, लेकिन उसने इस बात को माना कि पुलिस को उसने की एक अज्ञात खत भेजा था और बताया कि बेवर्ली हिल के उसके घर में सूजन की लाश है.

रॉबर्ट न्यूयॉर्क के सबसे अमीर और प्रभावशाली लोगों में शामिल है और उसे पत्नी के केस में कभी आरोपित नहीं किया गया. लेकिन मार्च 2015 में न्यू ओरलिएंस के एक होटल रूम से गिरफ्तार किया गया, ठीक कुछ देर बाद ही उसकी डॉक्युमेंट्री का The Jinx: The Life and Deaths of Robert Durst का आखिरी एपिसोड प्रसारित होने वाला था.

इस आखिरी एपिसोड में उसे खुद से बड़बड़ाते हुए सुना गया, जिसमें वह कह रहा था कि तुम पकड़े गए हो, तुमने निश्चित ही सबको मार डाला. दरअसल, रॉबर्ट भूल गया था कि रेस्टरूम में जाने के दौरान उसका माइक्राेफोन ऑन था. (news18.com)

दुनिया की सबसे लंबी महिला के ख्वाबों में आता है ये मर्द, 1 दिन करना चाहती है अकेले में मुलाकात
15-Oct-2021 12:49 PM (57)

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में ऐसे लोगों का नाम शामिल किया जाता है, जो किसी चीज में बेहद अलग होते हैं. ये खासियत जन्म से या अपने टैलेंट की वजह से लोगों के अंदर आता है. सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से रूमेसा का नाम छाया हुआ है. हो भी क्यों ना? रूमेसा का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दुनिया की सबसे लंबी महिला के रुप में दर्ज किया गया है. अब रूमेसा ने बताया कि उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सपना क्या है.

रूमेसा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उसका सपना है दुनिया के सबसे लंबे मर्द से मिलना वो उससे मिलने के लिए उत्साहित है. 24 साल की रूमेसा तुर्की के करबुक प्रांत में रहती है. उसकी लंबाई 7 फीट 0.7 इंच नापी गई है. गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड्स ने रूमेसा का नाम सबसे लंबी जिंदा महिला के तौर पर दर्ज किया है. दरअसल, रूमेसा को एक बेहद रेयर जेनेटिक डिसऑर्डर है. इसका नाम वीवर सिंड्रोम है. इसकी वजह से रूमेसा की हाइट आम महिला से काफी ज्यादा है. इस टाइटल से पहले 2014 में उसका नाम दुनिया की सबसे लंबी टीनएजर के तौर पर दर्ज किया गया था.

खड़े होने के लिए लेना पड़ता है सहारा
अपनी लाइफ से जुड़ी कई बातें रूमेसा ने शेयर की. उसने बताया कि अपनी हाइट के कारण उसे लोगों से काफी बातें सुनने को मिली. पब्लिक में लोग उसे घूरकर देखते हैं. बचपन में उसे काफी ताने सुनाए गए. लेकिन उसने अपनी इस कमी को अपनी खासियत बना ली. अब वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बाद रूमेसा ने बताया कि उसकी जिंदगी का एक ख़ास सपना क्या है? दरअसल, रूमेसा दुनिया के सबसे लंबे शख्स से मिलना चाहती है. ये शासक भी तुर्की का ही रहने वाला है. सुल्तान कोसेन की हाइट 8 फुट 2.8 इंच है. सुल्तान के नाम दुनिया के सबसे लम्बे मर्द का रिकॉर्ड दर्ज है.

रूमेसा ने बताया कि वो एक दिन सुल्तान से पर्सनली मिलना चाहती है. चूंकि, दोनों एक ही देश में रहते हैं, ऐसे में उम्मीद है दोनों की मुलाक़ात जल्द होगी. इस मीटिंग को लेकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स के एडिटर इन चीफ क्रैग ग्लेंडे ने कहा कि ये मीटिंग काफी ख़ास होगी. वो भी इसका इन्तजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे लंबी महिला का खिताब काफी कम ही बदलता है. ऐसे में उम्मीद है कि रूमेसा इस रिकॉर्ड बुक में लंबे समय तक रहेगी. (news18.com)

सिर पर सैकड़ों अंडे रखकर 3 दिन तक रहा शख्स, बना डाला अजीबोगरीब रिकॉर्ड
15-Oct-2021 12:47 PM (46)

दुनिया में एक से बढ़कर एक अजीबोगरीब रिकॉर्ड्स बनते हैं, जिनके बारे में सुनकर कोई भी हक्का-बक्का रह जाए. एक ऐसा ही रिकॉर्ड बनाया है पश्चिम अफ्रीका के ग्रेगरी द सिल्वा ने. उन्होंने अपने सिर पर रखी हैट के ऊपर कुल 734 अंडों को 3 दिन तक बैलेंस किया और अपने नाम कर लिया एक ऐसा रिकॉर्ड, जो किसी ने शायद ही पहले कभी सुना हो.

आमतौर पर अंडे बाज़ार से घर तक लाने में ही लोगों को काफी सावधानी बरतनी पड़ती है, ताकि वो कहीं फूट न जाएं. ऐसे में इस शख्स ने जिस तरह 700 से ज्यादा अंडे अपनी हैट पर रखकर इन्हें बैलेंस किया है, वो वाकई कमाल है. ग्रेगरी डा सिल्वा के इस रिकॉर्ड को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने खुद कंफर्म किया है और उनका एक वीडियो भी अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पेज से शेयर किया है.

Hat पर करीब 1 मीटर ऊंचाई तक रखे थे अंडे
इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से लिखा गया – ‘ग्रेगरी डा सिल्वा ने एक हैट पर सबसे ज्यादा 735 अंडे रखने का रिकॉर्ड बनाया.’ ग्रेगरी पश्चिम अफ्रीका के बेनिन में रहते हैं और उन्होंने चीन में सीसीटीवी चैनल पर GWR के एक खास शो में अपना टैलेंट दिखाया. वे 3 दिन तक अपनी हैट पर 735 अंडे रखे हुए थे. इनकी ऊंचाई करीब 1 मीटर थी. उन्होंने जिस तरह से इतने सारे अंडों को एक हैट पर बैलेंस कर रखा था, वो अविश्वसनीय था.

ग्रेगरी हैं अफ्रीका के Eggman
अपनी अद्भुत बैलेंसिंग टेक्निक की वजह से ग्रेगरी पूरे अफ्रीका में मशहूर हैं. उन्हें Eggman के नाम से भी जाना जाता है. वे सीसीटीवी के इस शो के अलावा भी कई टेलीविजन शो में दिखाई दे चुके हैं. उनका ताज़ा वीडियो न सिर्फ टीवी पर पॉपुलर हुआ, बल्कि इसकी क्लिप दुनिया भर में सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है. लोगों ने इस वीडियो को न सिर्फ पसंद किया है, बल्कि वो तरह-तरह के दिलचस्प कमेंट भी कर रहे हैं.त किसी ने कहा कि अगर इस दौरान ग्रेगरी को छींक आ जाती या खुजली होने लगती तो क्या होता? वहीं लोग ये जानने के भी उत्सुक थे, कि आखिर कुल 735 अंडों वज़न कितना रहा होगा? (news18.com)

बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा में 4 की मौत, 16 हिरासत में
15-Oct-2021 11:32 AM (39)

-सुमी खान

ढाका, 15 अक्टूबर| बांग्लादेश के चांदपुर के हाजीगंज उपजिला में बुधवार रात दुर्गा पूजा मंडपों पर हमले और पुलिस-भीड़ के बीच हुई झड़प के मामले में चांदपुर और चटगांव में कुल 16 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की।

पुलिसकर्मियों पर हमले के बाद स्थानीय प्रशासन ने हाजीगंज बाजार इलाके में धारा 144 लागू कर दी है।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यहां हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहार दुर्गा पूजा के दौरान कोमिला मंदिर में एक हिंदू देवता के चरणों में कुरान की नकली तस्वीरें फैलाकर सांप्रदायिक अशांति फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया है।

सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर पोस्ट की गई तस्वीरों ने पूरे देश में अशांति फैला दी। चांदपुर में पुलिस की गोलीबारी में चार दंगाइयों की मौत हो गई, जब वे मंदिरों पर हमला करने और दुर्गा पूजा पंडालों में तोड़फोड़ करने गए थे, और कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने दुर्गा पूजा उत्सव को रोकने की मांग करते हुए 'इस्लाम का अपमान' करने का आरोप लगाते हुए एक बड़ा शोर मचाया।

दो अलग-अलग जांच निकायों का गठन किया गया है, जबकि पुलिस ने चांदपुर में हुई घटना के संबंध में सात लोगों को हिरासत में लिया है, इसके अलावा कॉक्स बाजार में पूजा स्थलों और हिंदू घरों पर हमलों पर नौ लोगों को हिरासत में लिया है।

पुलिस ने आईएएनएस को बताया कि उन्होंने आयोजन स्थल के मुख्यद्वार को तोड़ा था, लेकिन कॉक्स बाजार के मुख्य पूजा स्थल को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सके। पुलिस ने बताया कि हमलावरों ने कॉक्स बाजार के कुछ अन्य हिस्सों में भी मार्च किया।

हसीना ने कहा, "कुछ लोग धार्मिक रूप से अंधे होते हैं और वे हमेशा सांप्रदायिक संघर्ष पैदा करना चाहते हैं। ये लोग न केवल मुस्लिम समुदाय के हैं, बल्कि अन्य सभी धर्मों के भी हैं। अगर हम सभी मिलकर काम करते हैं, तो वे कोई नुकसान नहीं कर सकते।"

बांग्लादेश के गृहमंत्री असदुज्जमां खान कमाल ने गुरुवार को आईएएनएस को बताया कि इस घटना की जांच के लिए दो अलग-अलग जांच निकायों का गठन किया गया है, एक स्थानीय प्रशासन द्वारा और दूसरी जिला पुलिस द्वारा।

उन्होंने कहा, "हमने कोमिला घटना के सिलसिले में कुछ लोगों की पहचान की है। हमारी जासूसी एजेंसियां उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लेंगी।"

हाजीगंज थाने के प्रभारी अधिकारी मोहम्मद हारुनूर राशिद ने पुलिस-भीड़ की झड़प में चार लोगों के मारे जाने की पुष्टि की, जिनकी पहचान अल अमीन (18), यासीन हुसैन (15), शमीम (19) और बुबुल के रूप में हुई है। (30)। शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा। (आईएएनएस)

अमेरिका में हिरासत केंद्रों में नाबालिगों से होते हैं घिनौने काम, अब सामने आएगा सच
15-Oct-2021 9:45 AM (48)

ऑस्टिन (अमेरिका). अमेरिका के न्याय विभाग ने टेक्सास के किशोर हिरासत केंद्रों में दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच बुधवार को आरंभ की, जहां कम से कम 11 कर्मियों को हाल के वर्षों में यौन उत्पीड़न के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है.

बायडन प्रशासन का यह कदम टेक्सास किशोर न्याय विभाग के लिए संकट का एक और संकेत है, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से घोटालों और उत्पीड़न के आरोपों से जूझ रहा है. पिछले सप्ताह ही वेस्ट टेक्सास के एक पूर्व प्रशिक्षक को हिरासत में बंद 18 वर्षीय किशोरी के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

संघीय न्याय विभाग की जांच संबंधी घोषणा से एक साल पहले टेक्सास में वकीलों ने संघीय जांचकर्ताओं से किशोरों के पांच हिरासत केंद्रों में ‘गंभीर समस्याओं’ की शिकायत की थी. सितंबर में प्रकाशित एक एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, टेक्सास ने 2019 में 800 से अधिक युवाओं को राज्य किशोर हिरासत केंद्र में रखा गया था. यह संख्या किसी भी अन्य राज्य से अधिक थी.

न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग के सहायक अटॉर्नी जनरल क्रिस्टन क्लार्क ने कहा, ‘हानिकारक परिस्थितियों में रखने से बच्चों का पुनर्वास नहीं होता. इससे जीवन में बेहद खराब परिणाम देखने को मिलते हैं. (news18.com)

नार्वे की सड़कों पर कत्लेआम करने वाले हमलावर ने अपनाया था मुस्लिम धर्म, पुलिस ने किए अहम खुलासे
15-Oct-2021 9:45 AM (59)

कोपेनहेगन. नार्वे के एक छोटे कस्बे में तीर कमान से हमला कर पांच लोगों की जान लेने एवं दो अन्य को घायल करने के आरोप में हिरासत में लिये गये डेनमार्क के एक निवासी को पूर्व में कट्टरपंथी के तौर चिह्नित किया गया था. वह धर्म परिवर्तित कर मुसलमान बना था. पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी.

पुलिस ने बताया कि संदिग्ध व्यक्ति ने कोंग्सबर्ग के विभिन्न इलाकों में बुधवार शाम को तीर कमान से हमला किया था, जिसमें पांच लोग मारे गये थे, जबकि दो अन्य घायल हो गये थे। इनमें से कई पीड़ित सुपर मार्केट में थे.

पुलिस प्रमुख ओले बी सावेरुड ने कहा, ‘पहले भी इस व्यक्ति के कट्टरपंथी होने को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी.’ उन्होंने बताया हमले में मारी गई चार महिलाओं और एक पुरुष की आयु 50 से 70 वर्ष के बीच थी. अधिकारियों का मानना है कि हमलावर ने मौके पर पुलिस के पहुंचने तक लोगों को मारना शुरू नहीं किया था.

सावेरुड ने कहा, ‘अब हम जानते हैं और तार्किक रूप से स्पष्ट है कि कुछ या संभवत: सभी पुलिस द्वारा हमलावर के संपर्क में आने के बाद मारे गए.’

जांच का नेतृत्व कर रही पुलिस अटॉर्नी एन इरेन स्वाने मैथिएसन ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद संदिग्ध शांत था और स्पष्ट जवाब दे रहा था. उसने कहा, ‘मैने यह किया. उन्होंने बताया, ‘वह शांति से बात कर रहा था और उसने घटना की पूरी जानकारी दी. उसने पांच लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की.’

अधिकारियों ने बताया कि हमले में घायल दो पीड़ितों को गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया है जिनमें से एक स्टोर में तैनात पुलिस अधिकारी है. उनकी स्थिति की तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी.

नवनियुक्त प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ने हमले को ‘भयावह’ करार दिया है. उन्होंने कहा, ‘यह अवास्तविक है लेकिन यह सच्चाई है कि पांच लोग मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं जबकि कई सदमे में हैं.’

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतेरम ने ट्वीट किया, ‘नर्वे से आ रही दर्दनाक खबर से स्तब्ध और दुखी हूूं.’ गौरतलब है कि नार्वे की राजधानी ओस्लो से 66 किलोमीटर दूर कोंग्सबर्ग एक छोटा कस्बा है जिसकी आबादी महज 26 हजार है. (news18.com)

अमेरिका में दो साल के बच्चे ने की मां की हत्या, एक गलती की वजह से पिता हुआ गिरफ्तार
15-Oct-2021 9:44 AM (83)

फ्लोरिडा. अमेरिका के मध्य फ्लोरिडा में पुलिस ने एक बच्चे के पिता को गिरफ्तार किया है. दरअसल, पिता की हैंडगन दाे साल के बेेटे के हाथ लग गई थी. उसने घर में जूम कॉल पर मीटिंग कर रही मां पर गोली चला दी. जिसमें उसकी मौत हाे गई. अल्टामोंटे स्प्रिंग्स पुलिस ने बताया कि 22 वर्षीय वोंड्रे एवरी को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया. उस पर हत्या और लापरवाही से बंदूक रखने के केस दर्ज किए हैं.

जांचकर्ताओं ने कहा कि 2 साल के बच्चे को 11 अगस्त को बैगपैक से बंदूक मिली थी. उसने उससे एक फायर किया. गोली उसकी मां शमाया लिन के सिर में लगी, जिससे उसकी मौत हो गई. शमाया उस दौरान पर घर पर ऑफिस की जूम मीटिंग में बैठी थी.

जांचकर्ताओं ने कहा कि 2 साल के बच्चे को 11 अगस्त को बैगपैक से बंदूक मिली थी.
जूम कॉल पर ही बैठी की साथी ने तुरंत इमरजंेसी सर्विस 911 को कॉल किया. उसने बताया कि उसने कैमरे से गोली की आवाज शोर सुनी और लिन को गिरते हुए देखा और पीछे उसका बच्चा रो रहा था. इस दौरान उसका पार्टनर भी घर पर नहीं था.

एवरी घर पहुंचा तो फर्श पर हर जगह खून पाया. उसने इमरजेंसी सर्विस को बताया कि उसकी पार्टनर कंम्यूटर पर काम कर रही थी, उस वक्त यह हादसा हुआ. लिन धड़कन उसी वक्त रुक गई थी, डॉक्टर्स ने भी उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने बताया कि घटना के वक्त एक और बच्चा घर में मौजूद था.

अमेरिका में बच्चों द्वारा बंदूक चलाने की घटना कोई नई बात नहीं है. सिंतबर में टेक्सास में दो साल के बच्चे गलती से खुद को गोली मार ली. उसने वह गन अपने रिश्तेदार के बैग से निकाल ली थी, जो लोड थी और सेफ्टी लॉक भी नहीं लगाया गया था. (news18.com)

शेख हसीना ने हिंदू समुदाय से कहा, खुद को अल्पसंख्यक न समझें
15-Oct-2021 8:33 AM (72)

-सुमी खान 

ढाका, 14 अक्टूबर| बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने गुरुवार को हिंदू समुदाय को भरोसा दिया कि वे समान अधिकारों का आनंद लेना जारी रखें और अपने त्योहार स्वतंत्र रूप से मनाएं। उन्होंने कोमिला और अन्य जगहों पर मंदिरों और दुर्गा पूजा पंडालों में हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया।

उन्होंने कहा, "आपको इस देश के नागरिक के रूप में माना जाता है। आप समान अधिकारों में रहते हैं। आप समान अधिकारों का आनंद लेंगे। आप अपने धर्म का पालन करेंगे और समान अधिकारों के साथ त्योहार मनाएंगे। हम यही चाहते हैं। यह हमारे बांग्लादेश और हमारे आदर्श की वास्तविक नीति है।"

ढाका के ढाकेश्वरी मंदिर में महानगर सर्वजन पूजा समिति द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा की महानवमी में शामिल होते हुए उन्होंने कहा, "मैं आपसे फिर कभी भी खुद को अल्पसंख्यक नहीं समझने का आग्रह करती हूं।"

"यहां अल्पसंख्यक-बहुमत को संख्या के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। आप स्वतंत्र बंगाल में एक स्वतंत्र नागरिक हैं। आपको वह आत्मविश्वास होना चाहिए, यही मैं चाहता हूं .. आप अपने आप को एक छोटा समुदाय क्यों समझते हैं?"

"कृपया याद रखें, आप सभी को बोलने की स्वतंत्रता है, आपको इस भूमि में जन्म लेकर अपने त्योहार का आनंद लेने का अधिकार है .. आप उन लोगों की अगली पीढ़ी हैं जो इस धरती पर पैदा हुए हैं। इसलिए, यहां हर कोई अपने में रहता है अपना हक.. मैं आपको अल्पसंख्यक नहीं मानता, हम आपको अपना रिश्तेदार मानते हैं।"

"हमें बहुत सारी जानकारी मिल रही है और निश्चित रूप से हम पता लगाएंगे कि सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करने के लिए उकसाने के पीछे कौन है .. उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी चाहे वे किसी भी धर्म के हों। मैं सभी को याद दिलाना चाहता हूं; बांग्लादेश सांप्रदायिक सद्भाव की भूमि है। यहां सभी धर्मों के लोग एक साथ रहेंगे और अपने धर्म का पालन करेंगे।"

हसीना ने हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहार के दौरान कोमिला मंदिर में एक हिंदू देवता के चरणों में कुरान की नकली तस्वीरें फैलाकर सांप्रदायिक अशांति भड़काने में शामिल लोगों के खिलाफ फिर से कड़ी कार्रवाई का वादा किया।

सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर पोस्ट की गई तस्वीरों ने पूरे देश में अशांति फैला दी। चांदपुर में पुलिस की गोलीबारी में चार दंगाइयों की मौत हो गई, जब वे मंदिरों पर हमला करने गए और दुर्गा पूजा पंडालों में तोड़फोड़ की और कट्टरपंथी इस्लामवादियों द्वारा दुर्गा पूजा उत्सव को रोकने की मांग करते हुए हंगामा किया था। (आईएएनएस)

पाकिस्तानी एयरलाइन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए काबुल की उड़ानें स्थगित कीं
15-Oct-2021 8:24 AM (39)

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)| पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) ने गुरुवार को 'सुरक्षा कारणों' का हवाला देते हुए काबुल में अपना परिचालन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पीआईए के प्रवक्ता अब्दुल्ला खान ने इस कदम की पुष्टि करते हुए कहा कि एयरलाइन का काबुल संचालन अगली सूचना तक निलंबित रहेगा।

प्रवक्ता ने इस तथ्य पर जोर दिया कि पीआईए ने 'कठिन परिस्थितियों' में काबुल के अंदर और बाहर उड़ान भरी, जबकि अन्य ने अपना ऑपरेशन बंद कर दिया था।

वह अगस्त में काबुल के तालिबान के तेजी से अधिग्रहण के बाद बड़े पैमाने पर निकासी में पीआईए द्वारा निभाई गई भूमिका का जिक्र कर रहे थे, जिसने उड़ानों की कमी के बीच अफगान राजधानी में फंसे लोगों के बीच भीड़ पैदा कर दी थी।

पीआईए के प्रवक्ता ने कहा, "अफगानिस्तान में तेजी से बदलती स्थिति के बाद पीआईए ने लगभग 3,000 लोगों को निकाला।"

काबुल से बाहर लाए गए लोगों में संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, आईएमएफ, अन्य वैश्विक संगठनों के अधिकारियों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार भी शामिल थे।

खान ने कहा कि पीआईए के कैप्टन और कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डाल दी लेकिन फिर भी निकासी की प्रक्रिया जारी रखी।

इस बीच, तालिबान की कार्यवाहक सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान की एयरलाइन ने काबुल से इस्लामाबाद की उड़ानों पर बढ़ाया गया किराया कम नहीं किया तो सरकार एयरलाइन पर प्रतिबंध लगा देगी।

खामा प्रेस की एक हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान नागरिक उड्डयन प्रशासन ने कहा है कि पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) और एक निजी अफगान एयरलाइन काम एयर अगर तालिबान के अधिग्रहण से पहले की कीमतों पर संचालन नहीं करती हैं तो उन पर काबुल से इस्लामाबाद के लिए उड़ानों के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।

खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने एक बयान में कहा कि दोनों एयरलाइनों पर जुर्माना लगाया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने पर उन्हें दंडित किया जाएगा।

इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान ने एयरलाइंस को चेतावनी दी कि पाकिस्तानी वाहक पीआईए ने काबुल से इस्लामाबाद के लिए प्रत्येक टिकट के लिए 2,500 डॉलर तक शुल्क लेना शुरू कर दिया है।

बयान में लोगों से नए नियमों के उल्लंघन की सूचना देने में प्रशासन का सहयोग करने को भी कहा गया है।

इसने लोगों से दस्तावेज उल्लंघन की रिपोर्ट करने को भी कहा है।

हवा में उड़ रहा था प्लेन, अचानक गिर पड़ा घरों पर ! नज़ारा देख सन्न रह गए लोग
14-Oct-2021 7:05 PM (102)

ज़रा सोचिए, हवा में उड़ता हुआ कोई प्लेन अचानक ही किसी रिहायशी इलाके में गिर जाए, तो क्या नज़ारा होगा. अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में लोगों ने ये नज़ारा अपनी आंखों से देखा. आसमान से उड़ते-उड़ते यहां एक प्लेन दुर्घटनाग्रस्त होकर मकानों के ऊपर जा गिरा.

देखने में ये नज़ारा डरावना तो था ही, हादसे में 2 लोगों की मौत भी हो गई. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये 2 इंजन वाला छोटा विमान था. जब ये हवा में उड़ रहा था, तभी इसमें कुछ खराबी आ गई और ये रिहायशी इलाके में जा गिरा. जब विमान गिरा, तो उसमें तेज़ धमाका हुआ और भीषण आग भी लग गई थी. जिसने भी प्लेन को गिरते देखा, वो हैरान रह गया.

Plane की चपेट में आए कई मकान
छोटा प्लेन हवा में ही कुछ खराबी की वजह से कंट्रोल नहीं कर पाया और रिहायशी इलाके में भी क्रैश हो गया. प्लेन में पायलट समेत कम से कम 2 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि 3-4 लोग बुरी तरह जख्मी हो गए. ये हादसा सैन डियागो में एक स्कूल के पास हुआ. फायरफाइटर्स को तुरंत ही मौके पर बुलाया गया और उन्होंने यहां की परिस्थितियों को काबू किया. प्लेन की चपेट में पहले एक मकान आया और फिर ये प्लेन जाकर ट्रक से टकरा गया.

10 घरों को हुआ प्लेन से नुकसान
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि छोटा प्लेन मकानों के ऊपर आ गिरा. बताया जा रहा है कि प्लेन पर से पायलट का नियंत्रण खो दिया था. जिस जगह ये विमान गिरा वो एक रिहायशी इलाका है, जहां सैकड़ों-हज़ारों लोग रहते हैं. जिन 10 घरों को प्लेन से नुकसान हुआ है, वो दुर्घटना के वक्त सुलग रहे थे. रेस्क्यू टीम ने जल्दी-जल्दी लोगों को बाहर निकालना शुरू कर दिया, फिर भी आस-पास के लोग इस दृश्य को देखकर सदमे में आ गए. (news18.com)

ताइवान में एक इमारत में भीषण आग, 46 लोग जिंदा जले, जोरदार धमाके की आई आवाज
14-Oct-2021 6:48 PM (48)

ताइपे. दक्षिणी ताइवान में 13 मंजिला एक आवासीय इमारत में गुरुवार को आग लग जाने से 46 लोगों (46 dead) की मौत हो गई. करीब 41 अन्य झुलस गए. काऊशुंग शहर के दमकल विभाग के अधिकारियों ने एक बयान में बताया कि आग तड़के करीब तीन बजे लगी. आग बेहद ‘भीषण’ थी, जिससे इमारत की कई मंजिलें जलकर खाक हो गईं. ताइवान के अधिकारियों ने भी आग लगने की घटना में 46 लोगों की मौत पुष्टि की है.

लोगों ने तड़के तीन बजे एक विस्फोट की आवाज सुनी थी.
वहीं, दमकल विभाग के प्रमुख ली चिंग-सिउ ने बताया कि 11 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी. उनके शव मुर्दाघर भेज दिए गए हैं. वहीं, 55 लोगों को अस्पताल ले जाया गया था, जिनमें से 14 लोगों ने दम तोड़ दिया. ताइवान में मौत की आधिकारिक पुष्टि सिर्फ अस्पताल में ही होती है.

दमकलकर्मी तलाश एवं बचाव अभियान में जुटे हैं. आग लगने के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है. चश्मदीदों ने स्थानीय मीडिया को बताया कि उन्होंने तड़के तीन बजे एक विस्फोट की आवाज सुनी थी.

आधिकारिक बयान के अनुसार, इमारत 40 साल पुरानी थी, जिसकी निचली मंजिल पर दुकानें थी और ऊपर अपार्टमेंट थे. (news18.com)

तालिबान की धमकी के बाद पाकिस्तान एयरलाइन ने बंद की काबुल के लिए फ्लाइट, जानें क्या था पूरा मामला
14-Oct-2021 6:47 PM (46)

काबुल. पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस ने गुरुवार को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के लिए उड़ानों को निलंबित कर दी. यह फैसला तब लिया गया है, जब तालिबान ने पीआईए से काबुल के लिए उड़ान का टिकट किराये में कटौती करने की अपील की थी और मांग न मानने पर उड़ान रद्द करने की धमकी दी थी. पीआईए ने कहा है कि तालिबानी अधिकारियों की सख्ती के कारण हम आज से काबुल के लिए अपने उड़ान संचालन को निलंबित कर रहे हैं.

तालिबान ने दी थी पीआईए को धमकी
दरअसल, तालिबान ने पााकिस्तान की सरकारी एयरलाइन पीआईए को इस्लामाबाद से काबुल के बीच उड़ानों को रोक देने की धमकी दे डाली थी. ACAA का कहना है कि पीआईए ने काबुल के लिए उड़ानों के टिकट महंगे कर दिए हैं.

किराये के नाम पर लूट रही थी पीआईए
टोलो न्यूज के मुताबिक, अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे से पहले उड़ान का टिकट 200 से 300 डॉलर की बीच था. अब इसका किराया 2500 डॉलर हो चुका है. अथॉरिटी ने पीआई को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर टिकट की कीमत 15 अगस्त से पहले वाली कीमतों पर नहीं आईं तो वह उसकी उड़ानें बैन कर देगा. ठीक इसी तरह की चेतावनी अफगानिस्तान की ‘काम एयरवेज’ को भी दी गई हैं.

अथॉरिटी की यह चेतावनी दूसरी तरीके से भी देखी जा रही हैं. दो दिन पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की काम एयरवेज को अपने देश में उड़ान भरने से बैन कर दिया था. जिससे तालिबान प्रशासन नाराज है. कहा जा रहा है कि यह ताजा धमकी इस कार्रवाई को देखकर भी दी गई है.

बता दें कि तालिबान के सामने इस वक्त देश में कई चुनौतियां हैं जिसमें अर्थव्यवस्था एक बड़ा पहलू है। देश की अर्थव्यवस्था रुक गई है और बैंकिंग सिस्टम बदहाली से जूझ रहा है.(news18.com)

आखिर चीन और ताइवान के बीच क्यों मचा हुआ है घमासान, यहां जानें टकराव के कारण
14-Oct-2021 5:41 PM (41)

नई दिल्ली: चीन और ताइवान के बीच तनाव की शुरुआत चीन के जन्म दिवस यानि 1 अक्टूबर से शुरू हुई. ये दिन चीन पीपुल्स ऑफ रिपब्लिक चाइना के जन्म के नाम पर राष्ट्र दिवस के तौर पर मनाता है. चीन खुद को पीपुल्स ऑफ रिपब्लिक चाइना और ताइवान खुद को रिपब्लिक ऑफ चाइना के नाम से संबोधित करता है

72वीं वर्षगांठ के मौके पर चीन ने ताइवान के हवाई सुरक्षा क्षेत्र में 100 फाइटर जेट उड़ाए. इस तरह से वो जहां ताइवान को डराना चाहता है वहीं वो दुनिया के सामने ये तस्वीर भी पेश करना चाहता था कि वो इस आइलैंड पर कब्जा करने की तैयारी कर रहा है. हालांकि अन्य कई देशों से पहचान नहीं मिलने के बावजूद ताइवान खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र की तरह ही देखता है. और उसके नेता जिसमें स्वतंत्रता के कट्टर समर्थन राष्ट्रपति सांइंग वेन भी शामिल थे, उन्होंने चीन की संप्रभुता की रक्षा की कसम खाई.

लेकिन ताइवान चीन से अपनी रक्षा को लेकर पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर है. इसलिए ताइवान और चीन के बीच में किसी भी तरह की सैन्य खींचतान, अमेरिका और चीन के बीच पहले से चल रहे तनाव को और हवा दे देते हैं.

1949- पीआरसी की स्थापना
ताइवान पहले फोरमोसा के नाम से जाना जाता था, जो चीन के पूर्वी तट का एक छोटा सा आइलैंड था. 1949 में चीन में हुए गृहयुद्ध में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्टों की चीन पर जीत के बाद चाइनीज रिपब्लिकन की कुमिनटैंग सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए थे और वो ताइवान तक सिमट कर रह गए. हालांकि चीन के पास नौसेना की कमी थी इसलिए वो समुद्र पार करके ताइवान पर हमला नहीं कर सके थे.

इसके पहले 1644 में सत्ता में आए चिंग वंश ने चीन का एकीकरण किया था. आगे चलकर 1895 को चिंग ने ताइवान द्वीप को जापानी साम्राज्य को सौंप दिया था. मगर जब चिन्हाय क्रांति हुई तो उसने चिंग साम्राज्य को उखाड़ फेंका. इस तरह से 29 दिसंबर 1911 को जब मांचू सेना ने विद्रोह करके चिंग रियासत की समाप्ति की तब रिपब्लिक ऑफ चाइना अस्तित्व में आया. 1920 को डॉ. सन येतजेन जिन्होंने कुमिन्तोंग पार्टी की नींव रखी थी उनके नेतृत्व में रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार बनी. सन ने जनरल चियांग काइ शेक की बदौलत जीत हासिल की थी, जिन्होंने चीनी कम्युनिस्टों के खिलाफ कार्रवाई की थी. जो कभी केएमटी का हिस्सा थे. इसी बात ने गृहयुद्ध को हवा दी, जिसका अंत कम्युनिस्टों की चीन पर जीत और केएमटी के ताइवान तक सिमट जाने के साथ हुआ.

1949 में जब पीआरसी यानी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई तभी से उसका मानना है कि ताइवान को मेनलेंड चाइना के साथ जुड़ना चाहिए. वहीं आरओसी यानी रिपब्लिक ऑफ चाइना खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र मानता है. आरओसी एकमात्र चीन था जिसे 1971 तक संयुक्त राष्ट्र से मान्यता मिली थी. लेकिन ताइवान के लिए चीजें तब से बदलना शुरू हुईं जब राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंगर की गुप्त कूटनीति के चलते अमेरिका और चीन के संबंध बनना शुरू हुए.
कहने को अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन करता है, उसने ताइपेई के साथ अपने रिश्ते कायम रखे और उन्हें हथियार बेचते रहे. लेकिन आधिकारिक तौर पर वो पीआरसी की एक चीन की नीति को मान्यता देता, जिसका अर्थ यही निकलता है कि केवल एक ही वैध चीनी सरकार है. महज 15 बहुत छोटे देश हैं जो ताइवान को राष्ट्र के तौर पर पहचान देते हैं.

हालांकि यह आइलैंड पूर्वी चीन समुद्र तट पर स्थित है, इसके उत्तरपूर्व में हांगकांग, उत्तर में फिलीपींस, दक्षिण में दक्षिण कोरिया और दक्षिण पश्चिम में जापान मौजूद है. ऐसे में ताइवान में होने वाली कोई भी घटना सीधे तौर पर पूर्वी एशिया से जुड़ी हुई है.

चीन- ताइवान तनाव
1954-55 और 1958 में पीआरसी ने ताइवान के नियंत्रण वाले जिनमेन, माज़ू और डेशेन आइलैंड पर बम गिराए. अमेरिका में इसे लेकर कांग्रेस ने फॉर्मोसा रिजोल्यूशन पास किया गया जिसके तहत राष्ट्रपति ड्वाइट डी आइसनहावर को आरओसी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अधिकृत किया गया.

1955 में प्रधानमंत्री जो एनलाई ने बांडुंग कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि वो अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहते थे. पर 1958 में लेबनान में गृहयुद्ध छिड़ने के बाद चीन को बमबारी शुरू करनी पड़ी. जिसने अमेरिका को आइलैंड पर ताइवानी चौकियों पर आपूर्ति के लिए उकसाया. पीआरसी और आरओसी इसके बाद से एक दिन छोड़ कर एक दूसरे की चौकियों पर बमबारी करते रहे, ये 1971 तक जारी रहा.

सबसे गंभीर मामला 1995-96 का था जब चीन ने ताइवान के इर्द गिर्द के समुद्र में मिसाइल परीक्षण शुरू किया जिसने वियतनाम युद्ध के बाद एक बाऱ फिर अमेरिका को हरकत में ला दिया. इसी परीक्षण की बदौलत 1996 में दोबारा चुनाव होने पर ली तेंग हुई को फिर से राष्ट्रपति चुना गया और उन्हें स्वतंत्रता समर्थक नेता के रूप में देखा गया.

स्वतंत्रता की राजनीति
1975 में, चियांग काइ शेक की मृत्यु हो गई, मार्शल लॉ हटा दिया गया और ताइवान में पहली मर्तबा लोकतांत्रिक स्तर पर सुधार हुआ. 1990 की शुरुआत से, मिसाइल संकट के बावजूद पीआरसी और आरओसी के बीच संबंधों में सुधार हुआ और व्यापारिक रिश्ते भी स्थापित हुए. 1999 में जब ब्रिटिश सरकार ने समझौते के मुताबिक हांगकांस से रुखसत ली तो उस दौरान ताइवान को एक चीन, दो तंत्र (वन चाइना, टू सिस्टम) का समाधान भी सुझाया गया जिसे उन्होंने ठुकरा दिया.

2000 में ताइवान में पहली गैर-केएमटी सरकार बनी जब ताइवानीज नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) ने राष्ट्रपति का चुनाव जीत लिया. 2004 में चीन ने ताइवान को ध्यान में रखते हुए एक फूट डालने की नीति पर काम करना शुरू किया, हालांकि ताइवान के साथ व्यापार और संपर्क से जुड़े कामों में सुधार जारी रहा.

आज ताइवान की राजनीति में दो बड़े खिलाड़ी हैं. डीपीपी और केएमटी. 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में साई ने ताइवान में स्वतंत्रता समर्थन का बीज बोया है और चीन के साथ चल रहे तनाव के साथ 2020 में फिर से चुनाव होना है.

ताइवान की रुचि अब व्यापक आर्थिक विकास में है जिसमें चीन में निवेश भी शामिल हैं. इस बात को लेकर स्वतंत्रता के समर्थकों को चिंता है कि ये विचार उनके इरादों के रास्ते में आ सकता है. वहीं चीन के साथ राजनीति के एकीकरण के समर्थकों का मानना है कि आर्थिक निर्भरता और लोगों के लोगों से संपर्क बढ़ने से स्वतंत्रता समर्थक जो लॉबी है वो समाप्त हो जाएगी.

तनाव जो अभी तक दोनों देशों के बीच बरकरार है
पिछले साल, कोविड को लेकर और व्यापार में अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते खराब होने के बीच, अमेरिका के विदेश विभाग ने एक उच्च रैंक का प्रतिनिधिमंडल ताइपे भेजा, इस मुलाकात के दौरान चीन ने ताइवान के उस संकरे मार्ग (जलडमरूमध्य) में जो ताइवान को मेनलैंड चाइना से अलग करता है, सैन्य अभ्यास किया.

अक्टूबर 2020 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएलए से युद्ध के लिए तैयार रहने को कहने से ताइवान को उकसा दिया और इसे खुली धमकी के तौर पर देखा गया. हाल में बाइडन प्रशासन ने ताइवान के साथ ठोस समर्पण का भाव रखने की घोषणा की, अप्रैल में ताइवान ने बताया कि चीनी जेट उनके सुरक्षित वायु क्षेत्र में घुसे थे. शी जिनपिंग ने चेताया था कि कोई भी ताइवानी अगर स्वतंत्रता का समर्थन दिखाता है तो उसे समाप्त कर दिया जाएगा.

इस महीने की शुरुआत में जब चीनी जेट वापस लौटे, ताइवानी रक्षा मंत्री चियु कुओ चेंग ने संसद में बताया कि चीन के पास पहले ही ताइवान पर हमला करने की क्षमता है पर वो 2025 तक इसकी लागत और दुर्घटना को को कम करने की स्थिति में होगा.

10 अक्टूबर को अपने भाषण में शी जिनपिंग ने कहा की एकीकरण शांतिपूर्वक होना चाहिए, लेकिन साथ ही उन्होंने ये बात भी जोड़ी कि मातृभूमि का संपूर्ण एकीकरण एक ऐतिहासिक काम है और वो पूरा होकर रहेगा. उसी दिन ताइवान के राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार किसी तरह के उतावलेपन से काम नहीं करना चाहती है लेकिन साथ ही ये बात भी सही है कि ताइवान के लोग किसी के दबाव के आगे नहीं झुकने वाले हैं.

अमेरिका के लिए चुनौती
तनाव के बढ़ने के साथ ही दुनिया की निगाह अमेरिका पर है और अफगानिस्तान से निकलने को लेकर उसके सर्वशक्तिमान होने के ठप्पे पर प्रश्नचिह्न लग गया है. पूर्व और दक्षिण एशिया में कई देश जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस अमेरिका की छत्रछाया में हैं. अपने भविष्य को ताक रहे हैं. राष्ट्रपति जो बाइडन ताइवान का समर्थन करने की शपथ और चीन के साथ तनाव को कम करने के बीच एक पतली रस्सी पर झूल रहे हैं. इस महीने की शुरुआत में शी जिनपिंग के साथ हुई बातचीत के बाद उन्होंने कहा कि अमेरिका वन चाइना पॉलिसी का समर्थन चीन के ताइवान पर हमला नहीं करने की शर्त पर करता है.

वहीं ऑकस करार जो अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ है, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया परमाणु सबमरीन की आपूर्ति करेगा, इसने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा के नए आयाम खोल दिये हैं. ताइवान ने इस करार का खुलकर समर्थन किया है वहीं चीन इससे खुश नहीं है.

भारत के लिए क्या मायने हैं
भारत जहां खुद चीन के साथ एलएसी की समस्या से जूझ रहा है , ऐसे में उसे तिब्बत कार्ड का इस्तेमाल करना चाहिए साथ ही चीन को संदेश देने के लिए ताइवान के साथ रिश्ते मजबूत करना चाहिए.

वैसे तो भारत और ताइवान में एक दूसरे देश की राजधानी में व्यापार और सांस्कृतिक आदान प्रदान के लिए कार्यालय बनाए गए है. मई 2020 में साई के शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी (अब विदेश राज्यमंत्री) और राहुल कास्वां वर्चुअली शामिल हुए थे. 2016 में भारत ने अंतिम समय में साई के पहले शपथ ग्रहण समारोह में दो प्रतिनिधियों को भेजने के फैसले को टाल दिया था.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक भारत में 7.5 अरब डॉलर का सेमीकंडक्टर या चिप निर्माण संयंत्र लाने के लिए ताइपे के साथ बातचीत जारी है. ये चिप कंप्यूटर से लेकर 5जी स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक कार, चिकित्सकीय उपकरणों में इस्तेमाल होती है. इस सौदे की सूचना क्वाड के शिखर सम्मेलन में दी गई थी. अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के समूह से तैयार क्वाड के शिखर सम्मेलन में इस बात पर भी चर्चा हुई थी कि सेमीकंडक्टर की आपूर्ति के लिए एक सुरक्षित आपूर्ति श्रंखला तैयार करने की ज़रूरत है. इस तरह से दुनियाभर के देशों की चीन पर निर्भरता भी खत्म होगी. (news18.com)

डच प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रचने वाला शख्स गिरफ्तार
14-Oct-2021 2:05 PM (130)

हेग, 14 अक्टूबर | डच अभियोजकों ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री मार्क रूटे की हत्या की साजिश् करने की योजना बनाने के आरोप में जुलाई में एम्स्टर्डम से एक 22 वर्षीय व्यक्ति की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को यह पुष्टि न्यूजपेपर डी वोक्सक्रांट में गिरफ्तारी का खुलासा करने वाली एक रिपोर्ट के बाद हुई।

यह कहा जा रहा है कि यवुज ओ नाम के व्यक्ति ने सार्वजनिक टेलीग्राम ग्रुप में भड़काऊ संदेश पोस्ट किए थे।

अभियोग के अनुसार, उन्होंने 'संसद में तूफान', 'उस गिरोह का खून बहने देना' और 'जब वह अपनी साइकिल पर बाहर जाए तो रूटे को गोली मारने' के बारे में बात की।

यह बताया जा रहा है कि आरोपी हथियार की भी तलाश कर रहा था।

उन्होंने 9 दिसंबर, 2020 और 15 जुलाई, 2021 के बीच संदेश पोस्ट किए, जब एक दिन बाद उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

हेग की अदालत में अगले सप्ताह संदिग्ध की सुनवाई होनी है।

उस पर तीन मामलों का आरोप लगाया गया, जिसमें एक आतंकवादी अपराध के लिए उकसाना, इस तरह के अपराध की तैयारी में खुफिया जानकारी जुटाना और एक आतंकवादी अपराध की धमकी देना शामिल है।

यह माना जा रहा है कि जुलाई में उस व्यक्ति की गिरफ्तारी का 23 सितंबर को आइंडहोवन में 9 आतंकी संदिग्धों की गिरफ्तारी से कोई संबंध नहीं है।

9 लोगों को आतंकवादी हमले की तैयारी और प्रशिक्षण के संदेह में गिरफ्तार किया गया था।

डच अखबार डी टेलीग्राफ के अनुसार, उन्होंने रूटे और दक्षिणपंथी राजनेताओं गीर्ट वाइल्डर्स और थियरी बॉडेट पर हमले की साजिश रची होगी।

अखबार ने बताया कि सितंबर में गिरफ्तारी के बाद रूटे को अतिरिक्त सुरक्षा मिली थी। (आईएएनएस)
 

अफगान बच्चों के लिए अमेरिकी सैन्य बेस पर खोला स्कूल
14-Oct-2021 1:37 PM (41)

विस्कॉन्सिन में अस्थायी रूप से रहने वाले सैकड़ों बच्चे 53,000 अफगानों में से हैं, तीन महिलाओं को जब यह अहसास हुआ कि बच्चे नियमित शिक्षा से दूर हो रहे हैं तो उन्होंने सैन्य अड्डे पर ही कैंप स्कूल खोलने का फैसला किया.

  (dw.com)  

अफगानिस्तान से अमेरिका आए दर्जनों शरणार्थी बच्चे रंग भरने वाली किताब के साथ बैठे हैं. मेज पर पेंसिल भी फैले हुए हैं. वे बड़े ही ध्यान के साथ अंग्रेजी और गणित पढ़ रहे हैं. साथ ही उन्हें अमेरिकी जीवन के बारे में बताया जा रहा है.

विस्कॉन्सिन में फोर्ट मैककॉय बेस में अस्थायी रूप से रहने वाले सैकड़ों बच्चे 53,000 अफगानों में से हैं, जिन्होंने अगस्त में तालिबान के सत्ता में आने के बाद अपना देश छोड़ दिया था. उन्हें अमेरिका भर के सैन्य ठिकानों में रखा गया है.

तीन महिलाओं को जब यह अहसास हुआ कि बच्चे नियमित शिक्षा से दूर हो रहे हैं तो उन्होंने सैन्य अड्डे पर ही कैंप स्कूल खोलने का फैसला किया. इस अस्थायी स्कूल का नाम "राइज अगेन" रखा गया है.

स्कूल की तीन संस्थापकों में से एक नीलाब इब्राहिमी कहती हैं, "शिविर में पहुंचने के बाद हमने बच्चों को इधर-उधर घूमते देखा. वे कुछ नहीं कर रहे थे. तभी हमने एक स्कूल के बारे में सोचा उसके बाद हमने पहले ही दिन 130 बच्चों को स्कूल में दाखिल करा लिया."

एशियन यूनिवर्सिटी फॉर वुमन से 23 वर्षीय स्नातक कहती हैं, "हम उन्हें पढ़ा रहे हैं ताकि वे नए माहौल के साथ तालमेल बिठा सकें. शरणार्थी कैंपों के बाहर स्कूलों में वे परेशान ना हो."

बिल और मेलिंडा गेट्स समेत दानदाताओं द्वारा वित्त पोषित फाउंडेशन बांग्लादेश स्थित एयूडब्लू छात्रवृत्ति मुहैया कराता है. ऐसे छात्र जो कमजोर समूह से आते हैं.

जब इब्राहिमी और उनकी दो साथी एयूडब्लू छात्र बातूल बेहनामी और सेफारा आजमी ने फोर्ट मैककॉय में कक्षाएं शुरू कीं तो किताबें और पेंसिंल कम पड़ गए. उनकी अपील के बाद स्थानीय एनजीओ ने आपूर्ति पर तेजी से जवाब दिया. बच्चों को किताबें और पेंसिल दिए गए.

बेहनामी कहती हैं, "बच्चों के साथ-साथ हम उनके माता-पिता को भी गहन जानकारी देते हैं."

यह स्पष्ट नहीं है कि कितने अफगान नागरिक अमेरिका में बसेंगे लेकिन पेंटागन ने कहा है कि कुल संख्या एक लाख के अधिक होने की उम्मीद है.

एए/सीके (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)

पुतिन ने कहा इराक और सीरिया के आतंकवादी अफगानिस्तान में दाखिल हो रहे हैं
14-Oct-2021 1:36 PM (58)

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने कहा है कि इराक और सीरिया के आतंकी "सक्रिय रूप से" अफगानिस्तान में दाखिल हो रहे हैं.

   (dw.com)  

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को कहा "अफगानिस्तान में स्थिति आसान नहीं है." उन्होंने यह बात पूर्व सोवियत राज्यों के सुरक्षा सेवा प्रमुखों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कही. पुतिन ने कहा, "सैन्य अभियानों में अनुभव के साथ इराक और सीरिया के आतंकवादी वहां सक्रिय रूप से खिंचे चले जा रहे हैं."

पुतिन ने आगे कहा, "यह संभव है कि आतंकवादी पड़ोसी देशों में स्थिति को अस्थिर करने की कोशिश कर सकते हैं." उन्होंने चेतावनी दी कि वे "प्रत्यक्ष विस्तार" की कोशिश भी कर सकते हैं.

पुतिन बार-बार आतंकवादी समूहों के सदस्यों को अफगानिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल का फायदा उठाकर बतौर शरणार्थी पूर्व सोवियत देशों में आने की चेतावनी दे चुके हैं, जबकि मॉस्को काबुल में नए तालिबान नेतृत्व के बारे में सतर्क रूप से आशावादी रहा है. क्रेमलिन मध्य एशिया में फैली अस्थिरता के बारे में चिंतित है जहां उसके सैन्य ठिकाने हैं.

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के मद्देनजर रूस ने ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के साथ सैन्य अभ्यास किया, जहां वह सैन्य अड्डा संचालित करता है. दोनों देश अफगानिस्तान के साथ सीमा साझा करते हैं.

इसी वीडियो कॉन्फ्रेंस में ताजिकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख साइमुमिन यतिमोव ने बताया कि उन्होंने अफगानिस्तान से अपने देश में "ड्रग्स, हथियार, गोला-बारूद की तस्करी" के प्रयासों में "तेजी" दर्ज की है.

अफगानिस्तान लंबे समय से अफीम और हेरोइन का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक रहा है. इसी के कारोबार से तालिबान को फंडिंग के भी आरोप लगते रहे हैं.

तालिबान का कहना है कि वह मध्य एशियाई देशों के लिए खतरा नहीं है. इस क्षेत्र में पूर्व सोवियत गणराज्यों को पहले अफगानी आतंकियों के सहयोगियों के हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया जा चुका है.

पिछले हफ्ते अफगानिस्तान में क्रेमलिन के दूत जमीर काबुलोव ने कहा था कि रूस 20 अक्टूबर को होने वाली अफगानिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय वार्ता के लिए तालिबान को मॉस्को आमंत्रित करेगा.

इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अफगानिस्तान के मुद्दे पर जी 20 में हिस्सा लेते हुए कहा था कि अफगानिस्तान आतंकवाद का अड्डा न बने. उन्होंने कट्टरपंथ, आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के गठजोड़ के खिलाफ संयुक्त लड़ाई का आह्वान किया, साथ ही अफगान नागरिकों के लिये तत्काल और निर्बाध मानवीय सहायता का आह्वान किया.

मोदी ने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया कि अफगान क्षेत्र क्षेत्रीय या वैश्विक स्तर पर कट्टरपंथ और आतंकवाद का अड्डा नहीं बनना चाहिए.

एए/वीके (एएफपी, एपी, रॉयटर्स)