न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियां रोकथाम क़ानून यानी यूएपीए की धाराओं में 2020 से जेल में बंद छात्र नेता उमर ख़ालिद के साथ एकजुटता दिखाई है.
ममदानी ने उमर ख़ालिद को अपने हाथ से लिखा एक नोट भेजा है. इसमें उन्होंने लिखा है, ''हम सब आपके साथ हैं.''
ममदानी के न्यूयॉर्क सिटी के मेयर के तौर पर शपथ लेने के बाद गुरुवार को उमर ख़ालिद की पार्टनर बनज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर इस नोट को शेयर किया है.
दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में जेल में बंद उमर ख़ालिद को पिछले साल सितंबर में दिल्ली हाई कोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार कर दिया था.
हालांकि दिसंबर में उन्हें अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए अनुमति मिली थी.
ज़ोहरान ममदानी ने क्या लिखा
उमर ख़ालिद की पार्टनर बनज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर ममदानी के नोट को शेयर किया है.
ममदानी के इस नोट में लिखा है, ''प्रिय उमर, मैं अक्सर कड़वाहट पर कही आपकी बातों और इस बात के महत्व के बारे में सोचता हूं कि उसे अपने भीतर हावी न होने दिया जाए. आपके माता-पिता से मिलकर मुझे ख़ुशी हुई. हम सब आपके साथ हैं."
बनज्योत्सना लाहिड़ी ने 'हिन्दुस्तान टाइम्स' से बात करते हुए कहा कि इस हस्तलिखित नोट ने 11,700 किलोमीटर की दूरी के बावजूद जेल में बंद उमर ख़ालिद और न्यूयॉर्क सिटी के भारतीय मूल के मेयर ज़ोहरान ममदानी के बीच एक भावनात्मक रिश्ता जोड़ दिया है.
उन्होंने कहा, "उमर के माता-पिता अमेरिका में ममदानी और कुछ अन्य लोगों से मिले थे. उनके साथ काफी समय बिताया. उसी दौरान ममदानी ने यह नोट लिखा."
उमर ख़ालिद तीन सप्ताह पहले बहन की शादी में शामिल होने के लिए घर आए थे.
लाहिड़ी ने बताया कि ज़मानत की शर्तों के कारण उमर घर से बाहर नहीं जा सके और उन्होंने पूरा समय घर पर ही बिताया.
बनज्योत्सना के मुताबिक़ उमर के माता-पिता पिछले साल दिसंबर में अमेरिका गए थे. वहां उनकी मुलाक़ात कई लोगों से हुई, जिनमें ममदानी भी शामिल थे.
उनके मुताबिक़ साहिबा ख़ानम और सैयद क़ासिम रसूल इलियास (उमर ख़ालिद के माता-पिता) ने अपनी सबसे छोटी बेटी की शादी से कुछ समय पहले अमेरिका का दौरा किया था ताकि वे अपनी बड़ी बेटी से मिल सकें. वो वहां रहती हैं और शादी में शामिल नहीं हो पाई थीं.
उमर ख़ालिद कैसे सुर्खियों में आए?
जेएनयू के पूर्व पीएचडी छात्र उमर ख़ालिद को सितंबर 2020 में दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ी एक कथित साज़िश के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने एक एफ़आईआर में उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया है. लेकिन यूएपीए के तहत दर्ज एक अन्य मामले में वे अब भी न्यायिक हिरासत में हैं.
पिछले पांच वर्षों में उनकी ज़मानत याचिकाएं कई बार ख़ारिज की जा चुकी हैं. दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था.
ममदानी इससे पहले भी सार्वजनिक रूप से ख़ालिद के समर्थन में बोल चुके हैं.
जून 2023 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले न्यूयॉर्क में आयोजित 'हाउडी डेमोक्रेसी' कार्यक्रम में ममदानी ने ख़ालिद की जेल में लिखी गई रचनाओं के अंश पढ़े थे.
उस समय ममदानी (तब वो न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के सदस्य) ने दर्शकों से कहा था, "मैं उमर ख़ालिद का एक पत्र पढ़ने जा रहा हूं, जो दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के एक शोधार्थी और स्टूडेंट्स एक्टिविस्ट हैं, ने लिंचिंग और नफ़रत के ख़िलाफ़ एक अभियान चलाया. वे अनलॉफ़ुल एक्टिविटीज़ प्रिवेंशन एक्ट के तहत 1,000 दिनों से अधिक समय से जेल में हैं और अब तक उनका मुक़दमा शुरू नहीं हुआ है, जबकि उनकी ज़मानत याचिका बार-बार ख़ारिज की गई है."
उमर ख़ालिद का नाम पहली बार जेएनयू के छात्र नेता रहे कन्हैया कुमार के साथ फ़रवरी 2016 में सुर्ख़ियों में आया था.
लेकिन तब से कई मामलों में और अपने कुछ बयानों की वजह से ख़ालिद लगातार सुर्खि़यों में रहे हैं.
उमर ख़ालिद बार-बार कहते रहे हैं कि मीडिया ने उनकी इस तरह की छवि गढ़ी है, जिसके चलते वे कुछ लोगों की नफ़रत का शिकार बन रहे हैं.
जनवरी 2020 में उमर ख़ालिद ने गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती दी थी कि "अगर वे 'टुकड़े-टुकड़े' गैंग को दंडित करवाना चाहते हैं और अगर वे अपनी बात के पक्के हैं, तो 'टुकड़े-टुकड़े' स्पीच के लिए मेरे ख़िलाफ़ कोर्ट में केस करें. उसके बाद साफ़ हो जाएगा कि किसने हेट स्पीच दी और कौन देशद्रोही है."
जुलाई 2016 में हिज़्बुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर घाटी में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी और इस घटना ने विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था, जिनमें कई लोग मारे गए थे.
बुरहान की अंतिम-यात्रा में भी भारी भीड़ देखने को मिली थी, जिसके बाद उमर ख़ालिद ने फ़ेसबुक पर बुरहान वानी की 'तारीफ़' में पोस्ट लिखी थी, जिसे काफ़ी आलोचना हुई थी.
आलोचना को देखते हुए उमर ख़ालिद ने यह पोस्ट कुछ वक़्त बाद हटा ली थी. लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर उनका विरोध शुरू हो गया था. हालांकि, कई लोग उनके समर्थन में भी थे.
अगस्त 2018 में दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब के बाहर कुछ अज्ञात हमलावरों ने उमर ख़ालिद पर कथित तौर पर गोली चलाई थी.
ख़ालिद वहाँ 'टूवर्ड्स ए फ़्रीडम विदाउट फ़ियर' नामक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे.
तब प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया था कि सफ़ेद कमीज़ पहने एक शख़्स ने आकर उमर ख़ालिद को धक्का दिया और गोली चलाई. लेकिन ख़ालिद के गिर जाने की वजह से गोली उन्हें नहीं लगी.
इस घटना के बाद उमर ख़ालिद ने कहा, "जब उसने मेरी तरफ़ पिस्टल तानी, तो मैं डर गया था, पर मुझे गौरी लंकेश के साथ जो हुआ था, उसकी याद आ गई."
डेमोक्रेटिक सांसदों ने भी ख़ालिद के समर्थन में लिखी चिट्ठी
ममदानी के अलावा अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सांसदों ने भी उमर ख़ालिद से एकजुटता दिखाई है.
अमेरिकी सांसद जिम मैकगवर्न और जेमी रस्किन के नेतृत्व में भी उमर ख़ालिद के समर्थन में अपील की गई है.
अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को लिखे पत्र में इन सांसदों ने भारतीय अधिकारियों से ख़ालिद को ज़मानत देने की अपील की गई है.