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पैक्स सिलिका में इंडिया की एंट्री का बेसब्री से इंतजार, अमेरिकी अधिकारी बोले- केंद्रीय भूमिका निभाएगा भारत
05-Feb-2026 12:48 PM
पैक्स सिलिका में इंडिया की एंट्री का बेसब्री से इंतजार, अमेरिकी अधिकारी बोले- केंद्रीय भूमिका निभाएगा भारत

 वॉशिंगटन, 5 फरवरी । अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत, अमेरिका के पैक्स सिलिका फ्रेमवर्क और उसकी बड़ी महत्वपूर्ण खनिज रणनीति में एक केंद्रीय भूमिका अदा करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका वैश्विक खनिज सप्लाई चेन को सुरक्षित और डायवर्सिफाई करने के लिए इंडो-पैसिफिक साझेदारों के साथ गहरा सहयोग चाहता है। अर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने एक सवाल के जवाब में आईएएनएस को बताया, “भारत असल में इस महीने के आखिर में (पैक्स सिलिका) में शामिल होने वाला है।” दरअसल, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अहम मिनरल्स को लेकर मंत्रिस्तरीय मीटिंग होस्ट की, जिसमें भारत समेत 50 देशों के नेता शामिल हो रहे थे। इसमें भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी शामिल हुए।

हेलबर्ग ने कहा कि वॉशिंगटन पैक्स सिलिका में भारत की एंट्री का बहुत इंतजार कर रहा है। इस पहल ने भारत में गहरी दिलचस्पी पैदा की है। उन्होंने भारत के तकनीकी प्रतिभा की गहराई की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह शायद चीन के अलावा अकेला ऐसा देश है जो चीन के ह्यूमन कैपिटल की चौड़ाई और गहराई दोनों में चीन को टक्कर दे सकता है। अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि भारत के शामिल होने से दोनों देशों के बीच संयुक्त योजनाओं पर करीबी सहयोग के लिए मोमेंटम बनेगा जो वास्तव में एक-दूसरे के लिए फायदेमंद और खुद को मजबूत करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह का सहयोग, भारत के तुलनात्मक फायदों का फायदा उठाते हुए अमेरिकी औद्योगीकरण को तेज करने में मदद कर सकता है। हेलबर्ग ने कहा, “आम अमेरिकियों की खुशहाली इंडो-पैसिफिक से जुड़ी है। इस इलाके में सहयोगियों और साझेदारों के साथ काम करके, अमेरिका अलग-अलग तरह की और भरोसेमंद सप्लाई चेन के साथ-साथ पारदर्शी और फेयर मार्केट के जरिए जरूरी मिनरल्स तक भरोसेमंद पहुंच पक्की कर रहा है।"

उन्होंने कहा कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक के देशों के साथ मिलकर ऐसी सप्लाई चेन बनाने के लिए काम कर रहा है जो किसी भरोसेमंद विफलता, कीमतों पर दबाव और अचानक आने वाली रुकावटों पर निर्भरता से मुक्त हों। उन्होंने कहा कि इस कोशिश का मकसद इंडस्ट्रियल शटडाउन और ज्यादा लागत को रोकना है, जो इलाके की सुरक्षा और खुशहाली के लिए खतरा बन सकते हैं। जरूरी मिनरल्स में भारत की खास भूमिका को लेकर हेलबर्ग ने कहा, “मेरी समझ से भारत के पास पहले से ही काफी ज्यादा प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग क्षमता है। इस मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल दोनों देशों के बीच गहरे सहयोग के हिस्से के तौर पर किया जा सकता है।” उन्होंने भारत की पहले से मौजूद क्षमताओं की तुलना अमेरिका में घरेलू प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग क्षमता बनाने के लिए चल रहे तेजी से किए जा रहे प्रयास से की। उन्होंने कहा कि यह कोशिश कई अमेरिकी एजेंसियों, जिनमें कॉमर्स और व्यापार से जुड़े विभाग शामिल हैं, के मिलकर किए जा रहे प्रयासों से हो रही है।

हेलबर्ग ने कहा कि यह मंत्रालय उन देशों को एक साथ लाता है जिन्होंने अमेरिका के साथ द्विपक्षीय रेयर मिनरल्स मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही पैक्स सिलिका और मिनरल सुरक्षा साझेदारी में हिस्सा लेने वाले देश भी साथ आएंगे। उन्होंने इस मीटिंग को अमेरिकी विभाग के इतिहास की सबसे बड़ी मंत्रिस्तरीय मीटिंग बताया, जो इस बात पर बढ़ती आम सहमति को दिखाता है कि आर्थिक सुरक्षा ही देश की सुरक्षा है। मौजूदा ग्लोबल सप्लाई चेन मॉडल अब मकसद के लायक नहीं रहा और मिनरल सुरक्षा तक सही, पारदर्शी और भरोसेमंद पहुंच पक्का करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। हेलबर्ग ने एआई क्रांति से बढ़ती ग्लोबल डिमांड की ओर भी इशारा किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह कोबाल्ट, कॉपर और निकल जैसे मिनरल्स के साथ-साथ स्मार्टफोन से लेकर डेटा सेंटर तक के प्रोडक्ट्स की रिकॉर्ड डिमांड को बढ़ा रही है।

उन्होंने कहा कि यह बढ़ती डिमांड साझेदार देशों के लिए आर्थिक बढ़ोतरी का अवसर देती है। बता दें, भारत और अमेरिका ने हाल के सालों में जरूरी और रणनीतिक मिनरल पर सहयोग बढ़ाया है। इससे सप्लाई चेन और मजबूत करने, क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन का समर्थन करने और एक जगह जमा ग्लोबल प्रोडक्शन से जुड़ी कमजोरियों को कम करने की बड़ी कोशिश की जाएगी। पैक्स सिलिका एक अमेरिकी पहल है जो विनिर्माण मैन्युफैक्चरिंग और फैब्रिकेशन इकोसिस्टम पर फोकस करती है, खासकर सेमीकंडक्टर जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में, जबकि जरूरी मिनरल्स मिनिस्टीरियल अपस्ट्रीम मिनरल सिक्योरिटी और ग्लोबल सप्लाई चेन में एक्सेस पर फोकस करता है। --(आईएएनएस)


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