अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका और भारत ने अंतरिम ट्रेड डील की औपचारिक घोषणा कर दी है. दोनों देशों की ओर से साझा बयान जारी किया गया है.
दो फ़रवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील पर सहमति होने की घोषणा की थी और इसके साथ ही भारत के ख़िलाफ़ 50 फ़ीसदी टैरिफ़ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का एलान किया था.
उस समय इस ट्रेड डील के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई थी लेकिन अब संयुक्त बयान जारी होने के बाद कई चीज़ें स्पष्टता से सामने आई हैं.
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा है कि यह डील भारतीय निर्यातकों, ख़ासकर एमएसएमई, किसानों और मछुआरों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का बाज़ार खोलेगी.
व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा, "भारत ने रूसी फ़ेडरेशन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है. भारत ने कहा है कि वह अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद ख़रीदेगा. इसके अलावा अगले 10 सालों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ एक समझौते पर सहमति जताई है."
अमेरिका ने कहा कि वह भारत से आने वाले उत्पादों पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ़ में कटौती करेगा. इस कटौती से भारतीय सामानों पर टैरिफ़ दर 18% रह जाएगी. 25% टैरिफ़ को हटाने का फ़ैसला सात फ़रवरी को वॉशिंगटन के समयानुसार रात 12:01 बजे से लागू होगा.
व्हाइट हाउस के बयान के अनुसार, अंतरिम ट्रेड डील का एक फ़्रेमवर्क तय हो गया है और कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं.
अंतरिम समझौते की अहम बातें
- व्हाइट हाउस के बयान के अनुसार, भारत सभी अमेरिकी टेक उत्पादों और कई अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ़ ख़त्म करेगा या कम करेगा. इनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स, पशु आहार के लिए रेड ज्वार, ट्री नट्स, ताज़े और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन, स्पिरिट्स और अन्य उत्पाद शामिल हैं.
- भारत की ख़रीद में अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान के साथ विमान के पुर्जे, क़ीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोयला शामिल होने की उम्मीद है. दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी उत्पादों में भी व्यापार में बढ़ोतरी की उम्मीद है. इसमें डेटा सेंटरों के लिए उन्नत चिप्स शामिल हैं.
- इसके बावजूद भारत का निवेश समझौता अब भी अस्पष्ट बना हुआ है. 500 अरब डॉलर की ख़रीद पांच वर्षों में होगी और इसमें डेटा केंद्रों और ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल होंगे, साथ ही कुछ मौजूदा परियोजनाओं को भी इसमें जोड़ा जाएगा.
- भारत के टेक्स्टाइल, लेदर, फ़ुटवियर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प उत्पादों पर अमेरिका में 18 फ़ीसदी टैरिफ़ लगेगा.
- अमेरिका आगे चलकर जेनेरिक दवाओं, रत्न, हीरे, और विमान के पुर्जे समेत कई वस्तुओं पर शुल्क हटाएगा.
- फ़ार्मा और उनके कच्चे माल को लेकर सेक्शन 232 जांच के नतीजों के आधार पर भारत को जेनेरिक दवाओं के लिए तय शर्तों पर लाभ मिलेगा.
- अमेरिका और भारत अपने-अपने हितों वाले क्षेत्रों में एक-दूसरे को स्थायी आधार पर प्राथमिक बाज़ार में पहुंच देने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
- दोनों देश ऐसे 'रूल्स ऑफ़ ओरिजिन तय करेंगे, जिससे समझौते के फ़ायदे मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिलें.
- अमेरिका और भारत उन नॉन टैरिफ़ बाधाओं को दूर करेंगे जो द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करते हैं. भारत अमेरिकी मेडिकल उपकरणों के व्यापार से जुड़ी पुरानी बाधाओं को दूर करने पर सहमत है. भारत सूचना और संचार प्रौद्योगिकी से जुड़े अमेरिकी उत्पादों के लिए बाज़ार में प्रवेश में देरी करने वाली या मात्रा सीमित करने वाली आयात लाइसेंस प्रक्रिया को ख़त्म करेगा.
बयान में ये भी कहा गया है कि अमेरिका और भारत बातचीत के ज़रिए बाज़ार पहुंच को और बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे.
अमेरिका ने कहा है कि बातचीत के दौरान वह भारतीय उत्पादों पर टैरिफ़ कम करने की मांग पर विचार करेगा.
दोनों देश आर्थिक सुरक्षा के तालमेल को मज़बूत करने पर सहमत हैं ताकि सप्लाई चेन मज़बूत हो और इनोवेशन को बढ़ावा मिले.
इसमें तीसरे पक्ष की ग़ैर-बाज़ार नीतियों से निपटने के लिए क़दम, निवेश समीक्षा में सहयोग और निर्यात नियंत्रण से जुड़ा तालमेल भी शामिल होगा.
दोनों देश मज़बूत, महत्वाकांक्षी और आपसी रूप से लाभकारी डिज़िटल व्यापार नियमों के लिए एक स्पष्ट रास्ता तय करेंगे.
अमेरिका और भारत इस फ्रेमवर्क को जल्द लागू करेंगे और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे, ताकि तय रोडमैप के अनुरूप एक आपसी रूप से लाभकारी द्विपक्षीय वार्ता को पूरा किया जा सके.
यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक एफ़टीए के बाद आया है. इसके तहत दोनों ने कई वर्षों में आयातित वस्तुओं पर टैरिफ़ को लगभग शून्य तक घटाने पर सहमति जताई थी.
भारत की विपक्षी पार्टियां अमेरिका के साथ ट्रेड डील को भारतीय किसानों के ख़िलाफ़ बता रही थीं. लेकिन पीयूष गोयल ने कहा है, '' "यह समझौता किसानों के हितों की रक्षा और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के भारत के संकल्प को भी दिखाता है. इसके तहत संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है. इनमें मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, चीज़, एथेनॉल ईंधन, तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे उत्पाद शामिल हैं."
दूसरी तरफ़ अमेरिकी ट्रेड रिप्रेज़ेंटेटिव के एक्स हैंडल पर जारी बयान में कहा गया है कि 'भारत ने कृषि उत्पादों पर टैरिफ़ ख़त्म करने या कम करने की प्रतिबद्धता जताई है और लंबे समय से चली आ रही नॉन टैरिफ़ बाधाओं को दूर करने का वादा किया है.' (bbc.com/hindi)


