‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 16 अप्रैल। गुरु घासीदास सेवा समिति द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न गणमान्य नागरिकों ने शिरकत की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त न्यायाधीश एम.डी. महिलकर थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष बी.एल. कुर्रे ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में हाईकोर्ट के अधिवक्ता टी.दास, डॉ.ए.डी.बनर्जी, डॉ. जीवनलाल घीडले और सेवा समिति की उपाध्यक्ष उर्मिला भास्कर उपस्थित रहीं।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहां की बाबा साहब डॉ. आंबेडकर केवल एक समुदाय के नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के निर्माता थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षित बनो संगठित रहो संघर्ष करो का नारा आज भी समाज के हर वर्ग के लिए उतना ही प्रासंगिक है। बी.एल. कुर्रे अध्यक्षीय भाषण में समाज में एकता और भाईचारे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास सेवा समिति मुख्य उद्देश्य बाबा साहब के सामानता के सिद्धांतों को धरातल पर उतारना है। विशिष्ट अतिथि अधिवक्ता टी. दास बाबा साहब के कानूनी योगदान और न्याय व्यवस्था में उनके विजन पर प्रकाश डाला। डॉ. एडी बनर्जी और डॉ.जीवन लाल घीडलेने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बाबा साहब के विचारों की प्रासंगिकता बताई जिससे वंचित वर्गों का उत्थान संभव है।
इस अवसर सचिव दिवाकर गायकवाड, टेकराम बंजारे, राजेन्द्र महिलांग, आर.सी. देशलहरा (कोषाध्यक्ष), एस.आर नौरंगे, रूपेश बारले त्रिलोचन डेहरे, सम्भू डहरिया, सतीश डेहरे, किशोर भारद्वाज, मनबोधी कुर्रे, श्रीमती सागर टंडन, नोहर सिंह कुर्रे, कैलाश चतुर्वेदी, बिसाहू राम बघेल, भामनी बंजारे, उषा देशलहरा, तथा समाज प्रमुख भागवत बंजारे, गैद लाल राय, जे.आर.सोनवानी, शांतिलाल मिर्चे, रामजी गायकवाड, टी.आर. कोसरिया, सरयू प्रसाद बारले, संत ज्ञानेश्वर गायकवाड, गजेंद्र साय, सी.एल. जोशी, आनंद बघेल, पवन कोशले, नंद कुमार खरे, महेश्वर टंडन, सुभाष कुर्रे, चैनु कुर्रे, राजकुमार टंडन, राजेंद्र बराहेन, जे पी देशलहरा, कृष्णा पात्रे, प्रियंका भार्गव, मीना टंडन, शीतल चेलक, भजन मंडली के सभी साथीगण व अन्य समाजिकजनो कि उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन महासचिव एन.आर. गिलहरे ने किया।