‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
उतई, 3 अप्रैल। महिला एवं बाल विकास विभाग जिला दुर्ग में 0 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए गुड पेरेंटिंग विषय पर संवाद कार्यशाला का विकासखंड वार आयोजन महिला एवं बाल विकास विभाग के सभी परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए की गई।
आयोजन का मुख्य उद्देश्य है कि आज सभी लोग अपने आप से, परिवार से, समाज से तालमेल नहीं बिठा पाते है। हमारी क्या जिम्मेदारी है? क्या भागीदारी है ? क्या ईमानदारी है? इसको समझ नहीं पाते है। हमेशा तनाव में रहते, घर के अंदर तनाव, बाहर तनाव, इसमें तालमेल नहीं बना पर रहे है, और दुखी हो रहे है। बच्चों क़ो कैसे हैंडल करें उनके साथ कैसा अभ्यास हो नहीं समझ पा रहे है। अभी हम सभी भूतकाल की पीड़ा, भविष्य की चिंता और वर्तमान मे विरोध पूर्वक जी रहे है इन्ही सब क़ो लेकर आज का इंसान समस्या ग्रस्त और दुखी है। इन सभी विषयों क़ो समझने का प्रयास इस वर्कशॉप मे किया गया है। अनीता शाह दीदी ने बताया कि मां का दायित्व है कि वह बच्चे के शरीर का पोषण, भाषा का पोषण, विचारों का पोषण और संस्कृति का पोषण करती है जब संस्कार का पोषण करते है तो वही ही संस्कृति बनती है यदि हम अपने महत्व क़ो समझते है तो नौकरी हमको बहुत छोटी लगती है।
हम सभी क़ो बहुत बड़ी जिम्मेदारी मिली हुई है शिशु अवस्था बहुत शुद्ध होती है उनका स्पर्श करना ही भाव से भर देता है महिलाओं क़ो अपने महत्त्व क़ो जानना जरुरी है मानव क़ो जन्म देने का सौभाग्य मिला है तो हमें सिर्फ जन्म नहीं देना है उसे मानव बनाना है आज हम मशीनों से या ईश्वर से जरूरतों के लिए भरोषा करते है लेकिन जो जिन्दा लोग हमारे आस पास रहते है उन पर भरोषा नहीं करते है उनसे शिकायत करते रहते है जबकि काम सिर्फ मानव ही आते है मानव आज आवेशित है जितनी अपेक्षा है उतना ही सम्मान नहीं मिल पाया इसलिए आज मानव दुखी और आवेशित है.
सुचित्रा श्रीवास्तव दीदी ने बताया कि आज शिक्षा का सिलेबस सम्बन्ध और व्यवहार की शिक्षा नहीं दे पा रहा है हमारी अपेक्षा बनी रहती है कि बच्चे का व्यवहार अच्छा हो. जैसे जैसे धन और सुविधाए बढ़ी है वैसे वैसे सम्बन्ध, व्यवहार और नैतिकता कम होते जा रहे है.
महावीर अग्रवाल भैय्या द्वारा बताया गया कि बच्चो मे सीखने और समझने की शुरुआत जन्म के साथ ही आरम्भ हो जाता है बच्चो मे आगामी 10 वर्ष तक अनुसरण, अनुकरण, आज्ञापालन, अनुशासन और स्वनुशासन के माध्यम से सबसे अधिक सीखना होता है बच्चा जब पैदा होता है तो अपने आस पास के वातावरण परिवार के लोगो क़ो देखकर उनके हाव भाव के अनुसार जैसा बड़े करते है वैसा ही नकल बच्चा भीं करता है बड़ो का कॉपी करता है यह क्रिया अनुसरण कहलाती है. जब बच्चा थोड़ा बड़ा होता है और अब अपना भीं दिमाग़ लगाकर किसी भीं कार्य क़ो करता है तो उस क्रिया क़ो अनुकरण कहते है. अब बच्चे क़ो छोटे छोटे कार्यों क़ो करने के लिए बोलते है या किसी कार्य क़ो करने के लिए मदद करने हेतु प्रेरित करते है तो वह क्रिया आज्ञापालन कहलाती है. जब बच्चा नियमों क़ो समझकर छोटे छोटे कार्यों क़ो करने लगता है या फिर कोई निर्देश का पालन करने लगता है तब होने वाली क्रिया क़ो अनुशासन कहते है. और जब बच्चा नियमों क़ो समझकर, बिना आदेश एवं निर्देश के ही कार्य क़ो व्यवस्थित करते जाता है और सुखी अनुभव करता है तब स्वानुशासन की क्रिया होती है.यदि इन 5 गुणों के आधार पर बच्चो के साथ परिवार, विद्यालय मे अभ्यास हो तो हम अपने बच्चे और अन्य बच्चो क़ो समझदार और अच्छा मानव बना सकते है.
पूनम दीदी और बसंत भैय्या ने बताया कि सत्य क़ो जाँचने का तरीका या क्या सही है? क्या गलत है? इसे हम निरीक्षण, परीक्षण और सर्वेक्षण द्वारा जाँचा सकते है धरती पर सभी मानव विश्वास पूर्वक जीना चाहता है, सम्मान पूर्वक जीना चाहता है, व्यवस्था के साथ ही जीना चाहता है, आज जितने भी अपराध या गलती हो रहे हैं इनका बड़ा कारण शिक्षा की कमी है. जहां-जहां हम समझते हैं सुखी होते हैं और जहां नहीं समझे हैं वहां दुखी होते हैं. प्रकृति मे व्यवस्था है यह समझने की आवश्यकता है यदि प्रकृति को समझते हैं तो पता चलता है कि पदार्थ अवस्था, प्राण अवस्था और जीव अवस्था का आचरण निश्चित है मनुष्य क़ो अपना आचरण निश्चित करना बाकी है आज मनुष्य का आचरण अनिश्चित होने से परिवार में टूटन, समाज मे विद्रोह देखने क़ो मिल रहा है आज मानव संबंध को पहचान नहीं पाया है. प्रकृति मे नियम है और नियम क़ो समझना ही शिक्षा है. प्रकृति के नियम क़ो समझना ही शिक्षा कि विषय वस्तु है. जीव चेतना से मानव चेतना मे गुणात्मक परिवर्तन का होना ही चेतना विकास मूल्य शिक्षा है प्रकृति की उपयोगिता क़ो समझ पाना अपनी उपयोगिता पूरकता क़ो समझकर सम्बन्धों क़ो पहचान कर निर्वाह कर पाना ही मूल्य शिक्षा है.
इस प्रकार पाटन, दुर्ग शहर, धमधा, भिलाई और अहिवारा मे कुल 5 अलग अलग स्थानों मे वर्कशॉप का आयोजन किया गया इस पुरे वर्कशॉप मे लगभग 1650 लोग लाभान्वित हुए है. वर्कशॉप का सफल आयोजन हेतु आदरणीय संकेत ठाकुर भैय्या का मार्गदर्शन और सहयोग अविस्मरणीय रहा है जिसके लिए भैया के प्रति बहुत बहुत कृतज्ञता.साथ ही पुरे वर्कशॉप के दौरान मीना दीदी , सपन भैय्या , धीरेन्द्र भैय्या , सपना दीदी , गायत्री दीदी जी, सभी परियोजना अधिकारी और पर्यंवेक्षकों का बहुत उल्लेखनीय योगदान रहा है.
आप सभी के प्रति बहुत बहुत कृतज्ञता और आभार