हल्बा-हल्बी समाज के सामाजिक मिलन व शक्ति दिवस समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री
शहीद गैंद सिंह नायक को बताया स्वाधीनता आंदोलन का प्रथम शहीद
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
दुर्ग, 28 दिसंबर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के साथ-साथ राष्ट्र व समाज के नवनिर्माण में आदिवासी नायकों एवं महापुरूषों का अनुपम एवं अद्वितीय योगदान है। उन्होंने कहा कि हल्बा, हल्बी एवं आदिवासी समाज सहित संपूर्ण भारतवर्ष के गौरव शहीद गैंद सिंह नायक ने हमारे देश में आजादी का आंदोलन का सर्वप्रथम शंखनाद किया था।
श्री साय ने कहा कि देश में स्वाधीनता आंदोलन की शुरूआत 1857 से मानी जाती है। लेकिन उससे पूर्व आदिवासी जननायकों को एवं वीर सपूतों ने देश में स्वाधीनता के आंदोलन का बिगुल फूंक दिया था। मुख्यमंत्री जिला मुख्यालय दुर्ग के गोकुल नगर स्थित हल्बा शक्ति स्थल में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी समाज द्वारा आयोजित 35वॉं मिलन समारोह एवं शक्ति दिवस पर्व के अवसर पर अपना उद्गार व्यक्त कर रहे थे। श्री साय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल, छत्तीसगढ़ प्रदेश राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष ललित चन्द्राकर, नगर निगम के महापौर अलका बाघमार, पूर्व मंत्री महेश गागड़ा, अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी समाज के प्रदेश अध्यक्ष मंथीर राम खलेन्द्र, महासभा अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र महला, केन्द्रीय अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आर.एस. नायक, जिला अध्यक्ष आई.आर. देहारी सहित अन्य अतिथि एवं समाज प्रमुखगण उपस्थित थे।
कार्यक्रम स्थल में पहुंचने के पश्चात सर्वप्रथम मुख्यमंत्री ने समाज की अधिष्ठात्री देवी माता दन्तेश्वरी की पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम स्थल में हल्बा-हल्बी समाज के नवनिर्मित कार्यालय का फीता काट कर लोकार्पण भी किया। श्री साय ने शक्ति स्थल में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हल्बा समाज के युवा-युवतियों को आवासीय कोचिंग सुविधा प्रदान करने हेतु 50 लाख रूपए तथा पुलगांव दुर्ग स्थित कंवर समाज के सामाजिक भवन में बाउण्ड्रीवॉल निर्माण हेतु 25 लाख रूपए की राशि प्रदान करने की घोषणा भी की। इस अवसर पर उन्होंने हल्बा-हल्बी समाज के सामाजिक पत्रिका ’समाज’ का भी विमोचन किया।
समारोह को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने माता दन्तेश्वरी, शीतला माता एवं अमर शहीर गैंद सिंह नायक को नमन करते हुए अपने उद्बोधन की शुरूआत की। इस अवसर पर उन्होंने सभी स्वजातीय जनों को शक्ति दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए माता दन्तेश्वरी से हल्बा-हल्बी समाज चहुमुंखी विकास एवं प्रगति की मंगल कामना की। श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य सहित पूरे देश में आजादी के आंदोलन का सूत्रपात सर्वप्रथम जनजातीय समाज के महापुरूषों ने किया था। उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गैंद सिंह नायक सहित जनजाति नायकों एवं देशभक्तों ने अंग्रेजों के खिलाफ कुल विभिन्न 14 क्रांतियों का शंखनाद किया था।
श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाले केन्द्र सरकार एवं छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा जनजाति नायकों एवं अमर शहीदों के योगदानों को इतिहास को विशिष्ट स्थान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर उन्होंने जनजाति समाज के हितों की रक्षा एवं उनके संरक्षण व संवर्धन हेतु पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्व. वाजपेयी द्वारा जनजाति बहुल में छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास हेतु वर्ष 2000 में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया गया था। इसके अलावा उनके कार्यकाल में सर्वप्रथम केन्द्रीय जनजाति कार्यालय मंत्रालय का गठन भी किया गया था।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में जनजाति समाज के हितों की रक्षा हेतु किये जा रहे कार्यों के संबंध में भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज देश के राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर आदिवासी समाज की महिला द्रौपदी मुर्मू विराजमान हैं। इसके अलावा मेरे जैसे गांव के एक साधारण आदिवासी कार्यकर्ता को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया है। इस अवसर पर श्री साय ने छत्तीसगढ़ सरकार के पिछले दो वर्षों के कार्यकाल में राज्य में हुए उल्लेखनीय विकास कार्यों के संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने दो वर्षों के कार्यकाल में मोदी के गारंटी के तहत किये गये सभी वायदों को पूरा किया। उन्होंने कहा कि हमारे सरकार द्वारा 13 दिसम्बर 2023 को शपथ लेने के एक दिन बाद 14 दिसम्बर को केबिनेट की बैठक आयोजित कर 18 लाख परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति देने के साथ-साथ प्रति क्विंटल 3100 रूपए की दर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का करने निर्णय लिया। इसके अलावा महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रति माह माता एवं बहनों के खाते में एक-एक हजार रूपए की राशि अंतरित कर उन्हें सशक्त आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा हैै। केन्द्र सरकार के सक्रिय सहयोग के फलस्वरूप अब तक राज्य के कुल 400 गांव नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। इन गांव में निवासरत् लोगों को मुख्य धारा से जोडऩे हेतु इन क्षेत्रों की विकास की गंगा बाहाई जा रही है। श्री साय ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के सभी सात जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक़, बिजली, पानी आदि बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करने हेतु सवा लाख करोड़ रूपए की राशि प्रदान करने की घोषणा की गई है। निश्चित रूप से इसके माध्यम से बस्तर संभाग के पूरे सात जिलों में विकास की नई गाथा लिखी जाएगी। इस दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा भी 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण कर पूरे देश में अग्रणी राज्य बनाने हेतु निरंतर कार्य किया जा रहा है। श्री साय ने राष्ट्र व समाज के विकास के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा अस्त्र बताते हुए सभी समाज प्रमुखों को आगामी पीढ़ी को शिक्षित एवं ज्ञानवान बनाने की दिशा में ठोस निर्णय लेकर इसे अमलीजामा पहनाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए दुर्ग लोकसभा क्षेत्र सांसद विजय बघेल ने हल्बा-हल्बी समाज के लोगों को शक्ति दिवस के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर उन्होंने माता दन्तेश्वरी से हल्बा-हल्बी समाज के उत्तरोत्तर प्रगति कामना भी की। श्री बघेल ने गोकुल नगर स्थित हल्बा शक्ति स्थल पर आवश्यक निर्माण कार्य हेतु हर संभव मदद उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। पूर्व मंत्री श्री महेश गागड़ा ने कार्यक्रम में अपनी बहुमूल्य उपस्थिति के लिए मुख्यमंत्री श्री साय एवं अतिथियों को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह में संभागायुक्त एस.एन. राठौर, आई.जी. आर.जी. गर्ग, कलेक्टर अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित समाज प्रमुखों के अलावा बड़ी संख्या में हल्बा-हल्बी समाज के लोग उपस्थित थे।