ईरान में बीते तीन दिनों से प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हो रही कार्रवाई बेअसर नज़र आ रही है. देश में शनिवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे.
बीबीसी ने जिन वीडियो की पुष्टि की है, उनके मुताबिक़ चश्मदीदों के बयानों से पता चलता है कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर अपनी कार्रवाई तेज़ कर दी है.
ईरानी सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कोशिश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं.
एक एक्सपर्ट ने बीबीसी फ़ारसी को बताया कि मौजूदा शटडाउन तीन साल पहले हुए विद्रोह के दौरान लगाए गए शटडाउन से ज़्यादा गंभीर है.
बीबीसी समेत ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठन ईरान के अंदर से रिपोर्ट नहीं कर पा रहे हैं, जिससे देश में हो रही घटनाओं की जानकारी हासिल करना और उन्हें वेरिफाई करना मुश्किल हो रहा है.
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार जारी हैं. 14 दिनों से चल रहे इन प्रदर्शनों में हिंसा लगातार बढ़ रही है और सौ से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें ज़्यादातर प्रदर्शनकारी शामिल हैं.
पूरे ईरान में सौ से ज़्यादा शहरों में ये प्रदर्शन फैल चुके हैं और सरकार ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई को तेज़ करने के निर्देश दिए हैं.
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि ईरान आज़ादी चाह रहा है.
वहीं ईरान के जनरल प्रॉसिक्यूटर मोहम्मद काज़ेम मोवाहेदी आज़ाद ने न्यायिक अधिकारियों को देश में चल रहे प्रदर्शनों में शामिल लोगों पर मुक़दमा चलाने में तेज़ी लाने का निर्देश दिया है.
उन्होंने कहा है कि "दंगों" में शामिल सभी लोगों पर एक ही आरोप है- ख़ुदा के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ना, जिसकी सज़ा मौत है."
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है, "इंशाअल्लाह, बहुत जल्द अल्लाह ईरान के सभी लोगों के दिलों में जीत का एहसास फैलाए."
ख़ामेनेई के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.
कुछ लोग कह रहे हैं कि ख़ामेनई को एहसास हो गया है कि प्रदर्शनकारी ईरान की सत्ता को बदलने में कामयाब होने वाले हैं, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ख़ामेनेई अपने समर्थकों को संदेश देना चाहते हैं कि वो ईरानी शासन के भविष्य को लेकर किसी तरह की आशंका न रखें.
वहीं आईआरआईबी न्यूज़ न्यूज़ टेलीग्राम चैनल के मुताबिक़ ने शनिवार को जनरल प्रॉसिक्यूटर मोहम्मद काज़ेम मोवाहेदी आज़ाद ने देश भर के प्रॉसिक्यूटर के दफ़्तरों से "सावधानी से और बिना किसी देरी के" आरोप पत्र जारी करने और मुक़दमे की तैयारी तेज़ी से करने की अपील की है.
इस बयान में कहा गया है, "सभी दंगाइयों के ख़िलाफ़ आरोप एक ही हैं - चाहे किसी ने दंगाइयों और आतंकवादियों को सार्वजनिक सुरक्षा और संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने में मदद की हो, या भाड़े के सैनिक, जिन्होंने हथियार उठाए और नागरिकों के बीच डर और दहशत फैलाई."
उन्होंने "उन लोगों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई" का आह्वान किया, जो देश के साथ विश्वासघात करके और असुरक्षा पैदा करके देश पर विदेशी प्रभुत्व चाहते हैं.
ट्रंप ने क्या कहा
ईरान में हो रहे इन प्रदर्शनों पर अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, "ईरान इस क़दर आज़ादी की तरफ़ देख रहा है, जैसा शायद पहले कभी नहीं देखा गया. अमेरिका उनकी मदद के लिए तैयार है."
यूरोपियन कमीशन ने भी ईरान में हो रहे इन प्रदर्शनों का समर्थन किया है.
यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, " तेहरान की सड़कों और दुनिया भर के शहरों में आज़ादी की मांग कर रही ईरानी महिलाओं और पुरुषों के कदमों की गूंज सुनाई दे रही है.
उन्होंने लिखा, "बोलने, इकट्ठा होने, यात्रा करने और सबसे बढ़कर आज़ादी से जीने की आज़ादी. यूरोप पूरी तरह से उनके साथ खड़ा है. हम इन जायज़ प्रदर्शनों के हिंसक दमन की कड़ी निंदा करते हैं. हम सभी जेल में बंद प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने की मांग करते हैं."
ईरान में हो रहे इन प्रदर्शनों पर अमेरिका में ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ ईरानियन अमेरिकन कम्यूनिटीज़ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है.
ओआईएसी ने लिखा, "आज व्हाइट हाउस के बाहर, हमने पॉलिसी बनाने वालों से अपील की कि वे ईरान में सरकार को जवाबदेह ठहराएं और तेहरान में ग़ैरक़ानूनी सरकार को हटाने के लिए ईरानी लोगों के उचित संघर्ष का समर्थन करें."
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान में हो रहे प्रदर्शनों पर अमेरिका पर टिप्पणी की है.
उन्होंने लिखा, "अमेरिकी सरकार के अनुसार, ईरान इस भ्रम में है कि इसराइल और अमेरिका हमारे देश में हिंसक दंगों को भड़का रहे हैं."
अराग़ची ने अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के दावे का ज़िक्र करते हुए लिखा, "बस एक ही समस्या है कि राष्ट्रपति ट्रंप के अपने पूर्व सीआईए (अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी) डायरेक्टर ने खुलेआम और बिना किसी शर्म के यह बताया है कि मोसाद और उसके अमेरिकी मददगार असल में क्या कर रहे हैं."
अराग़ची के मुताबिक़, "मौजूदा हालात में एकमात्र 'भ्रम' वाली बात यह मानना है कि आग लगाने वाले आख़िर में इसकी ज़द में नहीं आते हैं."
ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका और इसराइल के कई प्रमुख नेताओं का समर्थन भी मिला है.
अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 'सड़कों पर उतरे ईरानियों को बधाई दी थी और यह भी कहा कि उनके साथ 'मोसाद एजेंट भी चल रहे हैं'.
ईरान के मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायक आगा सैयद मुंतज़िर ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात की है.
उन्होंने कहा, "हमें ज़मीनी हक़ीकत और पश्चिमी प्रोपेगेंडा के बीच फर्क करना चाहिए. ईरान में हालात वैसे नहीं हैं जैसा पश्चिमी मीडिया दिखा रहा है कि देश में पूरी तरह से अंदरूनी अराजकता फैली हुई है और लोग सड़कों पर उतर आए हैं."
सैयद मुंतज़िर ने कहा, "लोगों को शिकायतें हो सकती हैं, जैसा कि हर देश में लोगों को होती हैं. ऐसी चिंताएं आमतौर पर लोकतांत्रिक तरीकों से उठाई जाती हैं. हालांकि, अमेरिका और उसके सहयोगियों का अस्थिरता पैदा करके सत्ता बदलने की कोशिश करने का इतिहास रहा है, जैसा कि वेनेजुएला जैसे देशों में देखा गया है."
सैयद मुंतज़िर के मुताबिक़ अब ईरान में भी ऐसा ही मॉडल थोपा जा रहा है क्योंकि ईरान के नेतृत्व, ख़ासकर इमाम ख़ामेनेई ने, पश्चिमी दबदबे को खुले तौर पर चुनौती दी है और ईरान अमेरिका और पश्चिमी देशों की मोनोपॉली के लिए एक रुकावट बना हुआ है.
ईरान में सरकार विरोधी विरोध प्रदर्शनों के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं, ऐसे में वहां रहने वाले भारतीय छात्रों के परिवार वालों पर भी इसका असर देखा जा रहा है.
जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने कहा, "बिगड़ते हालात के कारण, ईरान में मेडिकल कोर्स कर रहे भारतीय छात्रों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है."
उन्होंने पीटीआई से बातचीत में कहा, "ईरानी मेडिकल कॉलेजों में लगभग 3,000 भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं, जिनमें से 2,000 से ज़्यादा कश्मीर घाटी के हैं. उनके परिवार बहुत चिंतित हैं, क्योंकि इंटरनेट सेवाओं के बंद होने के कारण कई लोग पिछले 30 घंटों से अपने बच्चों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं."
ऐसे ही एक शख़्स शब्बीर अहमद की बेटी तेहरान यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं.
उनका कहना है, "पिछली बार जब हालात बिगड़े थे, तो सरकार उसे देश वापस ले आई थी और हम इसके लिए शुक्रगुजार हैं. इस बार, अभी तक कोई बड़ी समस्या नहीं है."
शब्बीर अहमद का कहना है, "मेरी बेटी ने कहा है कि ऐसे विरोध प्रदर्शन सामान्य हैं. ये अमेरिका और इसराइल में भी होते हैं. मुझे नहीं लगता कि कुछ बड़ा होने वाला है. मेरी बेटी वहां सुरक्षित है."
ईरान में 28 दिसंबर को रियाल की कीमत गिरने और कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सरकार के ख़िलाफ़ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे.
8 और 9 जनवरी को ईरान के आखिरी शाह के निर्वासित बेटे रज़ा पहलवी ने एक संदेश जारी किया था, उसके बाद से प्रदर्शन और तेज़ हो गए हैं.
उन्होंने प्रदर्शनकारियों से सड़कों पर उतरकर और अपने घरों से सरकार विरोधी नारे लगाने का आग्रह किया था.
रज़ा पहलवी ने अपनी ताज़ा पोस्ट में लिखा है, "मुझे भरोसेमंद रिपोर्ट मिली हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक को सड़कों पर लाखों लोगों का सामना करने के लिए भाड़े के सैनिकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, और अब तक कई सशस्त्र और सुरक्षा बलों ने अपनी नौकरी छोड़ दी है या लोगों को दबाने के आदेश मानने से इनकार कर दिया है."
उन्होंने अपनी लंबी पोस्ट में लिखा, "शाम 6:00 बजे के लिए अपनी दूसरी अपील दोहराते हुए, मैं आप सभी से कहता हूँ कि आप अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ समूहों में शहरों की मुख्य सड़कों पर जाएँ. रास्ते में एक-दूसरे से या लोगों की भीड़ से अलग न हों और ऐसी गलियों में न जाएँ जो आपकी जान को खतरे में डाल सकती हैं."
"जान लें कि आप अकेले नहीं हैं. दुनिया भर में आपके देशवासी गर्व से आपकी आवाज़ उठा रहे हैं. आज दुनिया आपकी राष्ट्रीय क्रांति के साथ खड़ी है और आपकी हिम्मत की तारीफ़ करती है. खासकर, राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि वह आपकी मदद करने के लिए तैयार हैं."
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन के समर्थन में दुनिया के कई देशों से तस्वीरें आ रही हैं.
ब्रिटेन, जर्मनी, अमेरिका, कनाडा, स्पेन, स्वीडन समेत कई देशों में लोग प्रदर्शनकारियों के झंडे के साथ सड़कों पर नज़र आए हैं. (bbc.com/hindi)