अंतरराष्ट्रीय

पाकिस्तान में एक ही परिवार के 7 लोगों की जिंदा जलकर हुई मौत, आग में मकान भी राख
17-Oct-2021 6:48 PM (37)

इस्लामाबाद. पाकिस्तान के पूर्वी हिस्से में शनिवार रात को आग लगने से एक ही परिवार के 7 सदस्यों की मौत हो गई. पुलिस इस घटना की तफ्तीश कर रही है. बचाव सेवा के प्रमुख डॉ. हुसैन मियां ने रविवार को बताया कि पंजाब प्रांत में मुजफ्फरगढ़ जिले के अलीपुर इलाके में स्थित एक मकान में आग लगी.

बचाव सेवा के प्रमुख डॉ. हुसैन मियां ने बताया कि फायर ब्रिगेड कर्मियों ने 65 वर्षीय व्यक्ति, 35 और 19 वर्ष की दो महिलाओं, तीन, 10 और 12 साल के तीन लड़कों और दो महीने के शिशु का शव बरामद किया. डॉ. हुसैन मियां ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है.

पुलिस ने बताया कि आग लगने की वजह का पता लगाया जा रहा है और जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि जब आग लगी तो परिवार का कोई भी सदस्य जगा क्यों नहीं.

इससे पहले, अगस्त महीने में कराची के मेहरान कस्बे में स्थित एक केमिकल फैक्ट्री में आग लग गई. इस हादसे में 15 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी. बताया गया था कि दमकलकर्मियों ने इमारत से जली हुई अवस्था में लाशों को बाहर निकाला था. आग इतनी भयानक थी कि इसे बुझाने के लिए पाकिस्तान रेंजर्स को लगाना पड़ा.

बताया गया कि इस हादसे में मृतकों की संख्या इसलिए बढ़ गई थी, क्योंकि दमकल विभाग के कर्मचारी लेट से पहुंचे. इसके अलावा, इमारत से निकलता काला धुआं भी एक मुसीबत बनकर उभरा, जिसकी वजह से दमकल कर्मियों को इमारत के अंदर प्रवेश करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा. इस हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्यों की भी मौत हो गई थी. आग बुझाने के दौरान दो दमकलकर्मी भी जख्मी हो गए थे. (एजेंसी इनपुट के साथ)(news18.com)

ज्वालामुखी विस्फोट के बीच स्पेन के द्वीप में 36 भूकंप के झटके लगे
17-Oct-2021 2:13 PM (34)

मैड्रिड, 17 अक्टूबर | ला पाल्मा का स्पेनिश द्वीप पिछले 24 घंटों में 36 भूकंपों की चपेट में आया क्योंकि कंब्रे विएजा ज्वालामुखी का विस्फोट 28वें दिन भी जारी रहा। इसकी जानकारी स्थानीय अधिकारियों ने दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेनिश भौगोलिक संस्थान (आईजीएन) ने कहा कि माजो नगर पालिका में शनिवार सुबह 4.41 बजे रिक्टर पैमाने पर 4.6 तीव्रता का भूकंप आया।

शुक्रवार की रात ज्वालामुखी ने अपने मुख्य शंकु के दक्षिण-पूर्वी हिस्से पर एक के बाद भूकंपों को मापा।

फिशर ने राख और पायरोक्लास्टिक मटेरियल को बाहर निकालना शुरू कर दिया है।

ज्वालामुखी उच्च विस्फोटक और अन्य सापेक्ष शांत की अवधि के साथ एक स्ट्रोमबोलिक तरीके से व्यवहार करता है, हालांकि टीवी की तस्वीरों से पता चलता है कि लावा की तेजी से चलती सुनामी के रूप में इसकी ढलानों को कैस्केडिंग के रूप में वर्णित किया गया है।

द्वीप के अधिकारियों ने गणना की है कि 732 हेक्टेयर भूमि लावा से प्रभावित हुई है, जिससे कॉपरनिकस उपग्रह के अनुसार 1,548 इमारतों को नष्ट कर दिया गया है और 19 सितंबर को विस्फोट की शुरूआत के बाद से 7,000 से अधिक लोगों की निकासी हुई है।

वर्तमान विस्फोट पहले से ही 1971 के विस्फोट से अधिक समय तक चला है, जो द्वीप को प्रभावित करने वाला अंतिम था।

इससे पहले गुरुवार को ला पाल्मा में एक बार फिर 50 से ज्यादा झटके महसूस किए गए। (आईएएनएस)

बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर हमले के विरोध में प्रदर्शन करने की घोषणा
17-Oct-2021 2:11 PM (40)

सुमी खान

ढाका, 17 अक्टूबर | बांग्लादेश के अल्पसंख्यक निकाय के प्रमुख ने हिंदू मंदिरों पर हमले सहित हिंसा की हालिया घटनाओं के विरोध में 23 अक्टूबर को एक दिन का प्रदर्शन का करने का आहवान किया है। पिछले तीन दिनों में हमलों में कम से कम चार लोग मारे गए हैं और 70 अन्य घायल हुए हैं।

जिन हिंदू नेताओं ने पहले दुर्गा पूजा स्थल पर चटगांव में पुलिस की मौजूदगी में हुए हमलों और तोड़फोड़ के खिलाफ आवाज उठाने के लिए देवी दुर्गा की मूर्तियों को विसर्जित करने से इनकार कर दिया था, उन्होंने आखिरकार शनिवार को मूर्तियों का विसर्जन कर दिया।

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (बीएचबीसीयूसी) के महासचिव एडवोकेट राणा दासगुप्ता, ने कहा कि बांग्लादेश के 20 जिलों में दुर्गा पूजा के दौरान धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा किए गए हमलों में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और 70 अन्य घायल हो गए।

दासगुप्ता ने शनिवार को चटगांव प्रेस क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कट्टरपंथी हमलावरों ने अल्पसंख्यकों के 70 से अधिक पूजा स्थलों, 30 घरों और 50 दुकानों में तोड़फोड़ की, आग लगा दी और लूटपाट की।

मानवाधिकार कार्यकर्ता नूरजहां खान, लीरहो के महासचिव अशोक साहा, प्रोफेसर जिनोबोधि भांते ने पूर्व नियोजित सांप्रदायिक हमले के खिलाफ न्याय के लिए लड़ने के लिए परिषद के नेताओं के साथ प्रतिबद्धता की कसम खाई है।

दासगुप्ता ने दावा किया कि चटगांव मेट्रोपॉलिटन पुलिस (सीएमपी) के आयुक्त सालेह मोहम्मद तनवीर अल्पसंख्यक लोगों की रक्षा करने में विफल रहे और चटगांव के मंदिरों और अल्पसंख्यक लोगों की रक्षा करने का उनका वादा नाकाम रहा।

उन्होंने कहा, "जब आयुक्त मेरे पास आए, तो मैंने कहा, मुझे आप लोगों पर भरोसा नहीं है.. आप मंदिरों की रक्षा करने में विफल रहे, आपके पुलिस बल भी जेएम सेन हॉल पूजा स्थल पर हमले से पहले गायब हो गए।"

शुक्रवार दोपहर हिंदू समुदाय के नेताओं ने जेएम सेन हॉल के पूजा स्थल में तोड़फोड़ के विरोध में देवी दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन नहीं करने की घोषणा की और कोतवाली थाने के प्रभारी अधिकारी (ओसी) नेजाम उद्दीन को हटाने की भी मांग की।

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रधानमंत्री शेख हसीना के मुख्य सचिव ने संबंधित पुलिस अधिकारी को वापस बुलाने का आदेश दिया था, लेकिन सीएमपी के आयुक्त तनवीर ने इससे इनकार किया है।

दासगुप्ता ने यह भी उल्लेख किया कि नेजम उद्दीन से उनकी लापरवाही के लिए पूछताछ की जानी बाकी है।

उन्होंने कुछ घटनाओं का विवरण देते हुए मंदिरों और हमले के शिकार लोगों की सूची की भी घोषणा की।

उन्होंने कहा कि एक हिंदू भक्त पार्थ दास का शव शनिवार सुबह नोआखली के चौमोहनी में इस्कान मंदिर के तालाब में देखा गया। बुधवार को चांदपुर के हाजीगंज में लक्ष्मी नारायण जीउ अखरा पर हुए हमले में माणिक साहा की मौत हो गई।

स्थानीय लोगों के अनुसार, शुक्रवार को नोआखली में, हमलावरों ने बिजॉय पूजा मंडप समिति के सदस्य जतन साहा और इस्कान के सदस्य मोलोय कृष्ण दास को उनके मंदिर में पीट-पीट कर मार डाला।

हालांकि, पुलिस ने दावा किया कि साहा की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।

दासगुप्ता ने कहा, "इन सांप्रदायिक हमलों को अब अलग-अलग घटनाओं के रूप में खारिज नहीं किया जा सकता है। हमारा मानना है कि ये सभी एक योजना का हिस्सा थे। मुख्य लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश की छवि को नष्ट करना है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि चटगांव के कर्णफुली थाना क्षेत्र के जॉय बांग्ला क्लब के लोगों ने गुरुवार को जेलेपारा पूजा स्थल पर हमला किया। दो भाई-बहन, जोयनल और मोनिर, बीएनपी के पूर्व कार्यकर्ता, जो बाद में अवामी लीग में शामिल हो गए, उन्होंने हमले का नेतृत्व किया।

बुधवार को, शेखरखिल, गोंडारा और नेपोरा के मोहम्मद सबर अहमद, मोहम्मद रिदवान और मोहम्मद शम्सुल इस्लाम ने चट्टोग्राम में शेखरखिल और बंशखली के नपोरा के हिंदुओं पर हमलों का नेतृत्व किया।

पुलिस ने बंदरगाह शहर के जेएम सेन हॉल में पूजा स्थल पर हमला करने के प्रयास को लेकर 83 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें ज्यादातर दुकानदार और निवासी और सुरक्षा कैमरे के फुटेज से पहचाने जाने वाले खलीफापोट्टी हैं।

साथ ही चांदपुर, चटगांव, कॉक्स बाजार, बंदरबन, मौलवीबाजार, गाजीपुर, चपैनवाबगंज और अन्य जिलों में भी ऐसी ही घटनाएं हुई हैं। बुधवार को चांदपुर के हाजीगंज में पूजा स्थलों पर हुए हमलों के दौरान पुलिस की गोलीबारी में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई।

हमलों और सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक नफरत फैलाने के आरोप में लगभग सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने दावा किया कि 24 जिलों में बीजीबी कर्मियों को तैनात किया गया है और पूजा स्थलों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। (आईएएनएस)

अफगानिस्तान मुद्दे पर अगले महीने दिल्ली में बैठक, पाकिस्तान को भी भेजा गया न्योता
17-Oct-2021 12:54 PM (42)

नई दिल्ली. भारत अगले महीने अफगानिस्तान के हालात पर एक बैठक करने वाला है जिसमें पाकिस्तान को भी आमंत्रित किया गया है. बताया गया कि रूस और चीन सरीखे देशों को भी बुलावा भेजा गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह बैठक 10 और 11 नवंबर को होगी. इस बैठक में अफगानिस्तान के सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा होगी.

इस बैठक की अध्यक्षता डोभाल करेंगे. संडे एक्सप्रेस के अनुसार बैठक के लिए अफगानिस्तान के पड़ोसियों जैसे पाकिस्तान, ईरान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और रूस, चीन सहित प्रमुख देशों को आमंत्रित किया जा रहा है. यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी और यूके, अमेरिका और   संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों को भी बुलावा भेजा गया है.  हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि तालिबान के प्रतिनिधि नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन का हिस्सा होंगे या नहीं.

पाकिस्तान के एनएसए मोईद यूसुफ को भी सम्मेलन के लिए आमंत्रित किए गए है. अगर वह बैठक में आते हैं तो तो साल 2016 के बाद से किसी पाकिस्तानी अधिकारी की पहली उच्च स्तरीय भारत यात्रा होगी.  इससे पहले डोभाल जून में ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य राष्ट्रों के उच्च सुरक्षा अधिकारियों की बैठक में शामिल हुए थे. इस दौरान पाकिस्तानी एनएसए भी मौजूद थे. हालांकि इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई

मई में भी होनी थी बैठक
बता दें ऐसी ही एक बैठक 20 अक्टूबर को रूस में भी आयोजित है हालांकि उसमें तालिबान और भारत, दोनों को आमंत्रित किया गया है. लेकिन भारत फिलहाल तालिबान को अपनी बैठक में आयोजित करने से बच रहा है क्योंकि अब तक वह वैश्विक अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सके हैं.

भारत ने इस साल मई में भी ऐसी ही एक बैठक का प्रस्ताव रखा था लेकिन कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर के चलते बैठक नहीं हो पाई थी. उस बैठक में भी पाकिस्तान के एनएसए को न्योता भेजा था. (news18.com)

महिला की असली उम्र का अंदाजा नहीं लगा पाते लोग, कम उम्र के मर्द करने लगते हैं फ्लर्ट!
17-Oct-2021 12:38 PM (54)

आपने कई ऐसे लोगों को देखा होगा जो अपनी असली उम्र से छोटे लगते होंगे. उन्हें देखकर लोग अक्सर धोखा खा जाते हैं. हाल ही में इंग्लैंड की एक महिला ने एक लाइफ सीक्रेट शेयर किया है. महिला ने बताया कि उसे लोग काफी कम उम्र का समझते हैं. और कई बार कम उम्र के मर्द उससे फ्लर्ट करने लगते हैं. महिला को देखकर बड़े और छोटे सभी हैरान हो जाते हैं.

इंग्लैंड के एसेक्स में रहने वाली लिजा लौरे 52 साल की हैं. मगर लोग उन्हें 30 साल की समझ लेते हैं. हाल ही में मिरर वेबसाइट से बात करते हुए लिजा ने अपनी लाइफ से जुड़े कई एक्सपीरियेंस को शेयर किया. लिजा ने कहा- “मुझे इस बात से कई बार गर्व मेहसूस होता है जबकि कई बार शर्मिंदगी होती है कि लोग मेरी असली उम्र का अंदाजा नहीं लगा पाते.” उन्होंने कहा कि जब मैं छोटी थी तब मुझे लोगों को इतने कॉम्प्लीमेंट नहीं मिलते थे जितने अब मिलने लगे हैं. लिजा ने बताया कि उन्होंने कभी एंटी रिंकल इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं किया है.

लिजा ने कहा- “जब मुझे कम उम्र के लड़के अप्रोच करते हैं तो मुझे हंसी आती है क्योंकि मुझे लगता है कि मैं उनके मां की उम्र की हूं. हालांकि मैं उनकी बातों को नजरअंदाज कर देती हूं. मुझे समझ आता है कि लोग मुझे मक्खन लगा रहे हैं मगर जब वो मेरी तारीफ करते हैं तो मैं सिर्फ थैंक्यू बोल देती हूं.” लिजा ने बताया कि वो महंगे सामानों को खरीदने में विश्वास नहीं करती हैं. वो ऑलिव ऑयल मेकअप रिमूवर का इस्तेमाल करती हैं जो सिर्फ 500 रुपये का मिलता है. उन्होंने बताया कि उनको कई कीमती सामानों से एलर्जी है जिसके कारण वो सस्ते सामान इस्तेमाल करती हैं. उन्होंने कभी बोटॉक्स का इस्तेमाल नहीं किया है. लिजा ने बताया कि वो कुछ-कुछ वक्त में अपने होंठ पर आलू काटकर लगाती हैं. उन्होंने कहा कि वो पहले काफी शर्मीली हुआ करती थीं. साल 2016 में उन्होंने एक ब्यूटी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था जिसके बाद से उनका कॉन्फिडेंस काफी बढ़ गया. अब वो मॉडलिंग करती हैं और कई ब्यूटी प्रतियोगिता में हिस्सा लेती हैं. (news18.com)

महिला ने 2017 में की थी एयरलाइन कंपनी से शिकायत, 4 साल बाद मिला जवाब, पूछा- 'अब चाहिए मदद?'
17-Oct-2021 12:37 PM (32)

कभी न कभी आपने किसी कंपनी की सेवाओं से नाखुश होकर उनसे शिकायत तो जरूर की होगी. शिकायत के बाद उन्होंने आपको जवाब दिया होगा और आपकी समस्या का हल ढूंढ निकाला होगा. मगर क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप किसी कंपनी से कोई शिकायत करें और उसका जवाब सालों बाद आपको मिले? ऐसा ही कुछ एक महिला के साथ हुआ जब एक एयरलाइन कंपनी ने उसके मैसेज का जवाब उसे सालों बाद दिया. ये देखकर महिला भी दंग रह गई.

ट्विटर पर मेगन नाम की एक महिला का एयरलाइन कंपनी जेट2 को किया गया मैसेज काफी वायरल हो रहा है. मेगन ने खुद अपनी और कंपनी की बातचीत का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया साइट पर शेयर किया है जिसे देखकर लोग दंग रह जा रहे हैं. दरअसल, मेगन ने साल 2017 में ब्रिटेन की एयरलाइन कंपनी जेट2 को एक संदेश ट्विटर पर भेजा था. जेट2 कंपनी अपनी सस्ती फ्लाइट्स के लिए जानी जाती है. मेगन ने कंपनी को अपनी एक यात्रा से जुड़ी शिकायत करने के लिए मैसेज भेजा था. मेगन ने 8 जून 2017 को किए मैसेज में लिखा- “मैं कैवोस हॉलीडे पर अपनी दो महिला मित्रों को के साथ अपके प्लेन से जा रही थी. हमने साथ में ओनलाइन चेक इन किया मगर हम तीनों को ही साथ में सीटें नहीं मिलीं. मैं समझ सकती हूं कि ज्यादा लोगों को प्लेन में एक साथ बैठाना मुश्किल है मगर 3 लोगों के ग्रुप को साथ में तो बैठाया ही जा सकता है. मुझे इस बात से काफी नाराजगी है.”

4 साल बाद मेगन के मैसेज का मिला जवाब
मेगन के इस मैसेज हाल ही में एयरलाइन कंपनी ने जवाब देते हुए लिखा- “देर से जवाब देने के लिए हमें खेद है. हमारे पास काफी हाई वॉल्यूम में मैसेजेस आए थे इसलिए हमें आपके मैसेज का जवाब देने में काफी वक्त लग गया. क्या आपको अभी भी मदद की जरूरत है?” मेगन ने जब ये मैसेज देखा तो वो दंग रह गईं. उन्होंने इस मैसेज का स्क्रीनशॉट ट्विटर पर शेयर किया और उनके इस ट्वीट को 9 हजार से ज्यादा लोगों ने रीट्वीट कर दिया. इसके अलावा 1 लाख से ज्यादा लोगों ने ट्वीट को लाइक किया है. मेगन ने तंज कसते हुए कैप्शन में लिखा था- “ग्रेट कस्टमर सर्विस!” इस गलती के बाद जेट2 ने मेगन के ट्वीट पर भी कमेंट किया और लिखा- “मेगन, हम आपके पब्लिक ट्वीट पर रिप्लाई करना चाहते थे जो आपने हमें कुछ दिन पहले भेजा था मगर गलती से हमने आपके मैसेज पर रिप्लाई कर दिया. हमें इस गलती के लिए खेद है.” मेगन के कमेंट सेक्शन में लोग कंपनी के मजे ले रहे हैं. जबकि कई लोग अपने इसी तरह के एक्सपीरियंस को शेयर कर रहे हैं. (news18.com)

80 साल पहले तरक्की के नाम पर पानी में डूबा दिया गया था पूरा गांव, पानी सूखते ही दिखने लगता है खंडहर
17-Oct-2021 12:37 PM (37)

तरक्की के नाम पर दुनिया ने कई तरह की बर्बादियां देखी है. कई सुविधाओं के बदले दुनिया को कई तरह के नुकसान भी उठाने पड़ते हैं. चाहे पॉल्यूशन हो या बर्फ का पिघलना, दुनिया को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. ऐसी ही तरक्की का खमियाजा यूके के एक छोटे से गांव को चुकाना पड़ा. डर्बीशायर का डेवेन्ट गांव आज से 80 साल पहले बर्बाद हो गया था. इस गांव को बनाए गए तालाब में डूबा दिया गया था. यूके के डर्बीशायर में स्थित डेवेन्ट गांव को 1940 में पानी में डूबा दिया गया था. आसपास की जगहों में पानी सप्लाई के लिए इस तालाब को बनाया गया था. लेकिन तरक्की के नाम पर इस गांव को पूरी तरह पानी में डूबा दिया गया था. पानी सूखते ही इस गांव के निशान सामने आ जाते हैं. सोशल मीडिया पर इस गांव की तस्वीरें वायरल हो रही हैं.

डर्बीशायर में स्थित डेवेन्ट गांव को आसपास के इलाके में पानी सप्लाई के लिए बनाए गए तालाब में डूबा दिया गया था. इस तालाब से डर्बी, शेफ़ील्ड, नाटिंघम और लीसेस्टर गांव में पानी सप्लाई किया जाता है. लेकिन इसके कारण पूरा का पूरा डेवेन्ट गांव तबाह हो गया.

80 साल के बाद भी जब इस तालाब का पानी सूखता है तो डेवेन्ट गांव के अवशेष सामने आ जाते हैं. इतने सालों बाद भी गांव के सारे मकान और झोपड़ियां आज भी सही सलामत दिखाई देते हैं. गांव के सारे ब्रिज आज भी वैसे ही नजर आते हैं.

Lets Go Peak District नाम की वेबसाइट ने इस डूब चुके गांव की कुछ तस्वीरें अपनी साइट पर शेयर की है. इस गांव के चर्च भी पानी सूखते ही दिखाई देने लगते हैं. इन चर्च को 1757 में बनाया गया था.

पानी सूखने के बाद पूरा का पूरा गांव वैसा ही दिखाई देने लगता है, जैसा वो सालों पहले था. हालांकि, ये गांव हर साल दिखाई नहीं देता है. किसी किसी साल जब पानी का लेवल काफी नीचे चला जाता है, तब इस शख्स के निशान नजर आने लगते हैं.

गांव में रहने वाले कई बुजुर्ग कहते हैं कि ये गांव कभी काफी समृद्ध था. लेकिन इस तालाब ने सबकुछ तबाह कर दिया. इस गांव के बारे में आज भी काफी बातें की जाती है. कुछ लोगों का यहां तक कहना है कि ये गांव भूतहा हो चुका है. (news18.com)

विवादित रेस्त्रां का शर्मनाक कारनामा, जबरदस्ती वेट्रेस को पहनवा रहा इतनी छोटी स्कर्ट!
17-Oct-2021 12:36 PM (51)

दुनिया में कई ऑफिस या वर्क प्लेस अपने कलीग्स के बीच यूनिफॉर्मिटी बनाए रखने के लिए ड्रेस कोड लागू करते हैं. इसमें कुछ एक पैटर्न के यूनिफॉर्म इम्प्लीमेंट करते हैं या फिर एक जैसे ही कपडे. ऐसा करने की मुख्य वजह होती है वहां काम कर रहे लोगों के मन में ये भाव आना कि वहां कोई किसी से कम नहीं है. लेकिन हाल ही में अमेरिका के मशहूर रेस्त्रां चेन ने अपने कर्मचारियों, खासकर महिला वेट्रेसेस को जो यूनिफॉर्म दी है, वो विवादों में आ गया है. रेस्त्रां में काम करने वाली कई वेट्रेसेस ने इस यूनिफॉर्म के खिलाफ वीडियो बनाकर सकल मीडिया पर शेयर किया.

हूटर्स नाम के इस रेस्त्रां चेन ने हाल ही में नया ड्रेस कोड लागू किया. इसमें लड़कियों के लिए कुछ ज्यादा ही छोटे स्कर्ट्स शामिल किये गए हैं. इन्हें पहनकर कई वेट्रेसेस कुछ ख़ास खुश नहीं हैं. इसकी फ्रस्ट्रेशन उन्होंने टिकटोक पर वीडियो बनाकर शेयर की. इस रॉन्ची फ़ूड चेन के बारे में कहा जाता है कि ये अपने स्टाफ को बेहद भड़काऊ कपड़े पहनवता है. लेकिन अब जो स्कर्ट दी गई है, वो काफी अनकम्फर्टेबल है. इसमें सुपर स्किनी स्कर्ट शामिल है, जो बेहद टाइट और बेहद छोटी है.

इतनी छोटी और टाइट स्कर्ट पहनकर काम करना पड़ता है
इस स्कर्ट को पहनकर कई वेट्रेसेस खुश नहीं है. उन्होंने स्कर्ट पहनकर टिकटोक पर वीडियो शेयर किया. कई वेट्रेसेस ने इस स्कर्ट की तुलना अंडरवियर से कर दी. उनका कहना है कि ये स्कर्ट कायदे से कुछ भी कवर नहीं करता. रेस्त्रां में काम करने वाली 22 साल की बारटेंडर किर्स्टेन सोंगर ने बताया कि इस स्कर्ट को पहन कर काम करना काफी मुश्किल है. साथ ही उसने बताया कि इसे पहनने से पीछे का पूरा हिस्सा खुला रहता है. साथ ही इसके साइड्स की वजह से जांघों में घाव हो जाता है. (news18.com)

हैती में 17 अमेरिकी ईसाई मिशनरियों का उनके परिवार-बच्चों समेत अपहरण
17-Oct-2021 12:34 PM (24)

हैती में एक गिरोह ने 17 अमेरिकी ईसाई मिशनरियों का उनके परिवारवालों के साथ अपहरण कर लिया है. यह वारदात तब हुई, जब सभी मिशनरी राजधानी पोर्ट-ऑ-प्रिंस के एक अनाथालय से बाहर जा रहे थे. ये लोग अपने ग्रुप के कुछ मेंबर्स को छोड़ने के लिए बस से एयरपोर्ट की ओर जा रहे थे. जिनका अपहरण किया गया है, उनमें मिशनरियों के बच्चे भी शामिल हैं.

स्थानीय अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि समूह के कुछ सदस्यों को छोड़ने के लिए हवाई अड्डे की ओर जाने वाली एक बस से उनका अपहरण किया गया था. वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता जेनिफर वियाउ ने बताया कि “हम इस घटना पर नजर रखे हुए हैं. हैती में अमेरिकी दूतावास ने अभी इस पर कमेंट करने से मना कर दिया है.

बता दें कि हैती में सामूहिक हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं. इसमें हजारों लोगों को विस्थापित किया है. इससे सबसे गरीब देश में आर्थिक गतिविधियों भी लगभग रुक गई हैं. जुलाई में राष्ट्रपति जोवेनेल मोइस की हत्या और अगस्त में आए भूकंप के बाद हिंसा में तेजी आई, जिसमें करीब 2,000 से अधिक लोग मारे गए. (news18.com)

ईरान के इस कदम से दहशत में है अमेरिका, बातचीत के लिए बना रहा दबाव, जानें पूरा मामला
17-Oct-2021 9:08 AM (36)

वॉशिंगटन. अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान पर बंद पड़ी परमाणु वार्ता को दोबारा शुरू करने और बातचीत के लिए राजी होने का दबाव बना रहे हैं. देशों ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखता है तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अलग-थलग पड़ सकता है, उसे नए आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है और यहां तक की उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई भी की जा सकती है.

वॉशिंगटन में इस सप्ताह अमेरिका, यूरोप, इजराइल और अरब के अधिकारियों की राजनयिक स्तर की कई बैठकों में इस बात पर सहमति बनी कि ईरान को यह स्पष्ट कर दिया जाए कि विएना में वार्ता में शामिल होने की उसकी लगातार अनिच्छा को अनदेखा नहीं किया जाएगा या इसके लिए उसे दंडित नहीं किया जाएगा.

यह सहमति उन चिंताओं के बीच बनी है कि तेहरान बातचीत करने का इच्छुक नहीं है, जिनका मकसद अमेरिका और ईरान को उन समझौतों की ओर वापस लाना है, जिन पर पर साल 2015में सहमति बनी थी. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाद में अपने देश को इस समझौते से अलग कर लिया था और इसके बाद ऐतिहासिक परमाणु समझौते पर कोई नीति स्पष्ट नहीं रह गई थी.

देश के वर्तमान राष्ट्रपति जो बायडन ने पदभार संभालने के कुछ ही वक्त बाद इस समझौते में अमेरिका के वापस शामिल होने की घोषणा की थी. ईरान के लिए अमेरिका के विशेष दूत रॉबर्ट मिले, खाड़ी के अरब देशों के साथ ईरान को लेकर बातचीत कर रहे हैं, वहीं संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानीकर्ता राफेल ग्रोसी आगे की बातचीत के लिए अगले सप्ताह अमेरिका में होंगे. ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह अमेरिका के साथ फिर से बातचीत करेगा, लेकिन अभी संबंध में तारीख की घोषणा नहीं की है. (news18.com)

आखिर ताइवान से तकरार का चीन को होगा कितना फायदा
16-Oct-2021 2:19 PM (37)

चीन में साम्यवादी सरकार के गठन की वर्षगांठ अक्टूबर में होती है और इसी के साथ ताइवान के साथ उसका विवाद भी भड़क जाता है. इस साल चीन ने तो ऐसे तेवर दिखाए कि युद्ध जैसी नौबत दिखने लगी पर युद्ध चीन के फायदे में नहीं है.

  डॉयचे वैले पर राहुल मिश्र की रिपोर्ट

पूर्व और दक्षिणपूर्व एशिया के देशों में वायांग या कटपुतली का खेल बड़ा मशहूर है. लोककथाओं पर आधारित इन नाटकों का मंचन कुछ इस तरह होता है कि देखने वाला परदे पर घूमती परछाईयों की गतिविधियों में इस कदर डूबने लगता है मानो पल भर के लिए वह सब सच ही हो. और अगर बैकग्राउंड संगीत भी नाटकीय हो तो फिर क्या कहने? बीते दो हफ्तों में चीन और ताइवान के बीच सामरिक जोर-आजमाइश भी कुछ हद तक वायांग के खेल जैसी ही लगी. दुनिया भर के लोगों को यही लगा कि चीन और ताइवान के बीच युद्ध अब शुरू हुआ कि तब. दोनों तरफ के नेताओं के वक्तव्य और वायु सेनाओं की गतिविधियां ही ऐसी थीं कि इस तरह की अटकलों का बाजार गर्म होना लाजमी था.

दरअसल, 1 अक्टूबर को चीन का राष्ट्रीय दिवस था. इसी दिन सन् 1949 में चीन में साम्यवादी पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना हुई थी. और जैसा कि अमूमन हर आधुनिक देश के साथ होता है, चीन में भी सालगिरह के आस-पास के दिनों में राष्ट्रवाद कुलांचे मारने लगता है. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर यह जिम्मेदारी कुछ ज्यादा ही है क्योंकि एक छोर से वह सरकार की तरह बैटिंग करती है और दूसरे छोर से जनता के बदले खुद ही बॉलिंग भी कर लेती है. जनता चाहे तो बैठे दर्शक दीर्घा में क्योंकि वेनगार्ड के आगे उसे खुद तो सही गलत की परख है नहीं.

राष्ट्रवाद के रंग में रंगी चीनी वायु सेना ने देश की जनता को एक मजबूत संदेश देने के लिए एक के बाद एक दर्जनों युद्धक जहाज ताइवान के दक्षिण पश्चिमी एडीआईजेड (एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन) के अंदर दाखिल होने के लिए भेज दिए. 1 से 4 अक्टूबर के बीच ही तकरीबन चीनी वायु सेना के 150 लड़ाकू जहाजों ने ताइवान की एडीआईजेड सीमा का उल्लंघन किया.
शी जिनपिंग के आक्रामक तेवर

राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आक्रामक तेवर दिखाए और ताइवान को चीन में मिला लेने का संकल्प भी दुहराया. चीनी क्रांति की एक सौ दसवीं सालगिरह के अवसर पर 9 अक्टूबर को हुई बैठक में भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि चीन के राष्ट्रीय पुनरोत्थान के लिए चीन का पूरी तरह भौगोलिक एकीकरण होना जरूरी है. यह चीनी लोगों के लिए साझा सम्मान की ही बात नहीं, उनके साझा मिशन का भी हिस्सा है.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस बात को हलके में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि वह सिर्फ चीन के सर्वोच्च नेता ही नहीं, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमेटी के जनरल सेक्रेटरी और मिलिटरी कमीशन के प्रधान भी हैं. मार्च 2018 में नेशनल पीपल्स कांग्रेस की एक बैठक में जिनपिंग को 5 साल के असीमित कार्यकालों तक सत्ता पर बने रहने का निर्णय दिया गया.

इस बात के मद्देनजर भी अब यह साफ है कि जिनपिंग के लिए हर निर्णय के दूरगामी परिणाम होंगे. माओ जेडोंग के चीन की तरह अब शी जिनपिंग के फैसलों को भी अब बरसों तक चलाया जा सकता है. शी जिनपिंग की बातों से यह साफ है कि चीन ताइवान पर अपना दवा फिलहाल तो छोड़ने से रहा. तो क्या चीन ताइवान पर हमला करने जा रहा है? नहीं. चीन आने वाले कुछ समय में ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे उसके अपने हितों को सीधा नुक्सान पहुंचे. फिलहाल चीन ताइवान पर हमला नहीं करने जा रहा है, लेकिन हां, चीन की ये सरगर्मियां ताइवान के लिए कब सरदर्दियों में बदल जाएंगी, यह कहना मुश्किल है.
सालों से जारी चीन ताइवान विवाद

जहां तक पिछले दो हफ्तों की घटनाओं का सवाल है तो चीन और ताइवान के बीच बातों और धमकियों की रस्साकशी नई नहीं है. पिछले कई सालों में देखा गया है कि चीन और ताइवान के बीच खींचतान अक्टूबर के महीने में बढ़ जाती है. इन दोनों ही देशों के लिए यह सबसे प्रमुख मुद्दा है जिस पर सुलह करना मुश्किल ही नहीं, लगभग नामुमकिन है. खास तौर पर तब तक, जब तक ताइवान में साई इंग-वेन की सरकार है. और ऐसा इसलिए क्यों कि ताइवानी राष्ट्रपति साई इंग-वेन कट्टर राष्ट्रवादी हैं. और इस मुद्दे पर उनके विचार चीन की शी जिनपिंग की सरकार से बिलकुल मेल नहीं खाते.

जहां चीन ने ताइवान को अपना हिस्सा बना लेने की कसमें दोहराईं तो ताइवान भी चुप नहीं है. अपनी सालगिरह के दिन 10 अक्टूबर को, जिसे ताइवान के सन्दर्भ में 'डबल टेन' की संज्ञा भी दी जाती है, ताइवान ने भी अपने तेवर दिखाए और सैन्य शक्ति का मुजाहिरा किया. राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने चीन की अतिक्रमणवादी नीतियों की जमकर आलोचना की और कहा कि ताइवान यथास्थिति बनाये रखने के लिए कटिबद्ध है और चीन का आह्वान करता है कि वह यथास्थिति का सम्मान करे. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तब भी ताइवान अपनी सुरक्षा और यथास्थिति बनाये रखने के लिए हर संभव कोशिश करेगा.

ताइवान के सख्त तेवरों को अमेरिका, जापान, और आस्ट्रेलिया से समर्थन मिला. यूरोपीय संघ ने भी ताइवान की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. चीन की अचानक बढ़ी सैन्य गतिविधियों से हलकान हुए ताइवान पर संकट के बादल फिर से मंडराए तो सही, लेकिन जल्द ही छंट भी गए. 5 अक्टूबर के बाद से ही चीनी सेना की गतिविधियों में काफी कमी आई है.
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम की बैटिंग

लेकिन चीन और ताइवान के बीच तकरार को और ज्यादा मीडिया कवरेज मिला भूतपूर्व ऑस्ट्रेलियन प्रधानमंत्री टोनी अबॉट के वक्तव्य से और ताइवान को भारतीयों के समर्थन से. टोनी अबॉट ताइपे में हो रही युषान फोरम कांफ्रेंस में मुख्य अतिथि के तौर पर शिरकत करने पहुंचे थे. अपने वक्तव्य में उन्होंने चीन को आड़े हाथों लिया और उस पर व्यापार को दूसरे देशों को दंडित करने का हथियार बनाने या यूं कहें कि कारोबार के शस्त्रीकरण करने का आरोप लगाया.

अबॉट ने चीन के हाथों हो रही अपने देश आस्ट्रेलिया की दुर्दशा का मुद्दा उठाया और कहा कि पड़ोसियों के साथ चीन का व्यवहार अनैतिक और निंदनीय है. उन्होंने कहा कि चीन ने खुद अपने ही नागरिकों पर साइबर जासूसी बढ़ा रखी है, और लाल तानाशाही के चलते लोकप्रिय शांतिदूतों को परे कर दिया है. हिमालय पर चीन ने भारतीय सैनिकों के साथ अमानवीय लड़ाई छेड़ रखी है. और पूर्वी सागर में और ताइवान के साथ उसने अनाधिकार अतिक्रमण करने की कोशिशें जारी रखी हैं. चीन की यह आक्रामककता उसकी कमजोर पड़ती अर्थव्यवस्था और तेजी से घटते राजकोष से भी जुड़ी हैं.

अपने देश में अब उतने लोकप्रिय नहीं रहे अबॉट ने इस भाषण से मानो कमाल ही कर दिया, जहां एक ओर चीन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी तो वहीं ताइवान और दुनिया के तमाम देशों ने इस वक्तव्य को काफी सराहा. भारत, दक्षिणपूर्व एशिया, जापान, और आस्ट्रेलिया को एक कड़ी में पिरो कर अबॉट ने चीन की छवि को कुछ इस कदर पेश किया कि चीन सरकार सैन्य कार्रवाईयों के बजाय कूटनीतिक तू तू मैं मैं में लग गई. इसी कड़ी में चीन ने भारत की आलोचना भी की जिसके साथ सीमा विवाद संबंधी तेरहवें दौर की वार्ता भी अब विफल हो चुकी है.
भारत में ताइवान के लिए बढ़ता समर्थन

इन घटनाओं की खबर जैसे ही सोशल मीडिया पर आई तो भारतीयों ने ताइवान की एडीआईजेड सीमा में चीनी अतिक्रमण पर चीन को आड़े हाथों लिया. ट्विटर और फेसबुक पर ताइवान की बहार रही. पिछले साल की तरह इस साल भी 10 अक्टूबर को भारत में चीनी दूतावास के सामने ताइवान के समर्थन में झंडे और बैनर लगाए गए और दोनों देशों की अटूट दोस्ती की बातें की गयीं. हालांकि भारत सरकार का इससे कुछ लेना देना नहीं लेकिन ताइवान को लेकर जनता का बढ़ता समर्थन तो साफ दिखता है.

कुल मिलाकर बात यह कि चीन के सैन्य जहाजों का मुकाबला ताइवान ने कूटनीतिक तौर पर करने की कोशिश की और इसमें सफल भी रहा. गौरतलब है कि पिछले तीन-चार दिनों में चीन के सैन्य और कूटनीतिक दोनों ही तेवरों में खासी नरमी आई है. इन तमाम बातों पर गौर किया जाय तो लगता यही है कि फिलहाल चीन और ताइवान युद्ध की ओर नहीं बढ़ रहे हैं.

महाशक्ति चीन के आगे छोटे से ताइवान का लम्बे समय तक टिकना मुश्किल है, और यही वजह है कि ताइवान सामान विचारधारा वाले तमाम लोकतांत्रिक देशों को साथ लाने की कवायद में लगा है. ताइवान को शायद पता है, संघे शक्ति कलयुगे. लेकिन यह शक्ति हासिल करना हिमालय चढ़ने जैसा ही मुश्किल है. कूटनीतिक वायांग का यह खेल इन दोनों के बीच फिलहाल जारी रहेगा. लेकिन शी जिनपिंग की सत्ता से निपटने के लिए ताइवान को एक सुदृढ़ और सूझबूझ भरी दूरगामी नीति जल्द ही बनानी होगी. (dw.com)
 

ला पाल्मा में और भड़केंगे ज्वालामुखी
16-Oct-2021 2:18 PM (36)

कुम्ब्रे विएखा ज्वालामुखी शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. विशेषज्ञों का अंदाजा है कि ये अभी और भड़केगा. इस ज्वालामुखी से निकले लावा से भारी बर्बादी हुई है, लेकिन आगे चलकर एक नया जीवन भी उन्हीं की बदौलत मुमकिन होगा.

डॉयचे वैले पर अलेक्जांडर फ्रॉएंड की रिपोर्ट

कैनरी द्वीपों जैसे ज्वालामुखी वाले द्वीपों में रहने वाले जानते हैं या उन्हें जानना चाहिए कि उनका गठन और उनकी अभूतपूर्व उर्वरता किस तरह धरती के नीचे सुसुप्त ज्वालामुखियों से जुड़ी हुई है. और उन्हें इससे जुड़े जोखिमों का भी अंदाजा होना चाहिए. ये ज्वालामुखी सदियों और सहस्त्राब्दियों तक सोए पड़े रह सकते हैं और फिर किसी दिन अचानक फट सकते हैं.

अधिकारियों के मुताबिक ला पाल्मा में तीन सप्ताह से भड़के कुम्ब्रे विएखा ऋंखला का एक ज्वालामुखी और भी ज्यादा उग्र हो उठा है. आने वाले दिनों में जानकार और ज्वालामुखी फटने की आशंका जता रहे हैं. पहाड़ पर नये मुंह खुल गए हैं जिनसे लावा रिसता हुआ समन्दर की ओर बह रहा है. इसी दौरान द्वीप पर भूकंप के और झटके आते रहे हैं. ये भी संकेत है कि ज्वालामुखी अभी और सक्रिय रह सकता है.

प्रारंभिक विस्फोट के दस दिन बाद, ला पाल्मा का लावा समन्दर तक पहुंच गया था. छह किलोमीटर बहते हुए दहकता लावा 470 हेक्टेयर की जमीन पर फैलता चला गया. 1000 इमारतें और कई सड़कें नष्ट हो गई. छह हजार लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर ले जाना पड़ा. विषैली गैसों के पनप जाने का खतरा भी था.
लावा से विनाशकारी नुकसान

ज्वालामुखी के हर विस्फोट से द्वीप की सूरतेहाल बदल जाती है. लावा और राख की परत विशाल इलाकों को ढांप लेती है. लावा के पसार के नीचे कुछ भी नहीं उगता. ला पाल्मा यूनिवर्सिटी में जैव विविधता और पर्यावरणीय सुरक्षा के विशेषज्ञ फर्नांडो टूया कहते हैं कि समुद्री पौधों और जानवरों पर लावा के शुरुआती असर विनाशकारी होते हैं. लावा के नीचे दफ्न हुए जीव तुरंत ही मर जाते हैं. और ठंडे पड़ चुके लावा पर खुद को पुनर्स्थापित करने में नये पौधों को सालों-साल या दशकों लग जाते हैं.

ला पाल्मा की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है. 85 हजार रैबासियों वाले ला पाल्मा में ज्वालामुखी फटने का मतलब है भारी आर्थिक नुकसान. उदाहरण के लिए लावा से बहुत सारे केला बागान नष्ट हो चुके हैं. और वे कैनरी द्वीपों की आय के मुख्य स्रोतों में से एक हैं.

इसके अलावा सैर सपाटे के लिए मशहूर द्वीप में, ज्वालामुखी की राख के चलते हवाई यातायात भी रोकना पड़ा था. गतिरोध के शुरुआती चार दिनों के बाद, पिछले सप्ताह ही द्वीप पर विमानों का फिर से उतरना शुरु हो पाया. द्वीप से मिल रही डरावनी तस्वीरों को देखते हुए लगता है कि पर्यटन की गतिविधियों को दोबारा शुरू करने में कुछ समय लग सकता है.
उभर रही है नयी जमीन

करीब 470 हेक्टेयर जमीन लावा के नीचे दब चुकी है. अक्सर की जाने वाली तुलना के हिसाब से ये फुटबॉल के 658 मैदानों जितनी जमीन है. इसी दौरान ये भी हुआ है कि ज्वालामुखी विस्फोट की बदौलत कैनरी द्वीप बढ़ने लगा है. पश्चिमी तट पर जहां लावा अटलांटिक में बह गया है, वहां गली हुई चट्टानों से निर्मित एक नया इलाका पहले  ही उभर आया है.

इस समय ये तीस हेक्टेयर इलाका है यानी फुटबॉल के 42 मैदानों के बराबर. और इसके साथ ही द्वीप भी वृद्धि करने लगा है. और टूया के मुताबिक प्रारंभिक नकारात्मक असर के बाद ये घटना आगे चलकर "संपन्नता लाने वाली” बन सकती है. "लावा से एक चट्टान बन जाएगी जहां पर बहुत सारी समुद्री प्रजातियों को पनपने का मौका मिलेगा और उसे ही वे तीन से पांच साल के लिए अपना ठिकाना भी बना लेंगी.”
वरदान बन गया उर्वर लावा

नया उभरता समन्दरी जीवन उन लोगों तो क्या ही सांत्वना दे पाएगा जिन्होंने अपना संपत्ति और आजीविका इस विस्फोट में गंवा दी है. लेकिन सक्रिय ज्वालामुखियों के नीचे और ढलानों पर लोग विस्फोट के जोखिम उठाकर भी बस ही रहे हैं और इसकी एक माकूल वजह है. वजह ये है कि लावा मिट्टी को असाधारण रूप से उर्वर बना देता है. उससे निकली राख में पौधों के लिए अहम पोषक तत्व मिलते हैं. लावा की राख में फॉस्फोरस, पोटेशियम और कैल्सियम भरपूर मात्रा में मिलता है और इसमें पानी भी जमा रहता है.

पौधों को ये पोषक तत्व हासिल करने में वक्त नहीं लगता है. मिट्टी की एक पतली परत चट्टान की सतह पर जल्द ही बन जाती है. लावा ऐश, उर्वरक की तरह भी काम करती है जिसकी बदौलत फसल भी अच्छी होती है. इसीलिए ला पाल्मा में केले के विशाल बागान लगाए गए हैं. करीब 3000 हेक्टेयर में एक लाख मीट्रिक टन से ज्यादा केले हर साल पैदा होते हैं. इसी के चलते केले की पैदावार, ला पाल्मा की अर्थव्यवस्था में पर्यटन के साथ साथ, सबसे महत्त्वपूर्ण सेक्टरों में से एक है.
हॉटस्पॉट से उभरा जीवन

धरती की मेन्टल परत में एक हॉटस्पॉट यानी गर्मस्थल से कैनरी द्वीपों का प्रत्यक्षतः निर्माण हुआ था. इसका मतलब ये है कि क्रस्ट और कोर के बीच की ये परत इस बिंदु पर सबसे अधिक तापमान रहता है. अगर धरती की क्रस्ट लेयर यानी उसका आवरण यहां अफ्रीकी प्लेट से आशय है, जब इस हॉटस्पॉट से रगड़ खाती है, तो एक नया ज्वालामुखी इसे भेद देता है. अटलांटिक महासागर में करीब 4000 मीटर की गहराई में करीब बीस से चालीस लाख साल पहले ये घटना हुई थी.

करीब सत्रह लाख साल पहले उभरते हुए शील्ड ज्वालामुखी ने समुद्र की सतह तक पहुंचकर ला पाल्मा के द्वीप को जन्म दिया और दूसरा सबसे बड़ा कैनरी द्वीप बना दिया. आज भी आप ला पाल्मा पर दो अलग अलग ज्लावमुखी संरचनाएं देख सकते हैं. उत्तर में केलडेरा डि टाबुरिइन्टे का पुराना, विशालकाय शील्ड ज्वालामुखी है और दक्षिण में भूगर्भीय लिहाज से ज्यादा नयी कुम्ब्रे विएखा ज्वालामुखी ऋंखला है जो इस समय खासी सक्रिय है.

तेज और सघन विस्फोटों के चलते, अपने सबसे ऊंचे बिंदु पर ये ज्वालामुखी द्वीप 2436 मीटर ऊंचा है. अपने आप में यही एक आकर्षक बात है. लेकिन महासागर की सतह के नीचे, ला पाल्मा पश्चिम में 4000 मीटर नीचे गिरा हुआ है. इसलिए समूचा ज्वालामुखी समूह, 6400 मीटर से भी ज्यादा की कुल ऊंचाई के साथ दुनिया के सबसे ऊंचे ज्वालामुखियों में से एक है. (dw.com)
 

पुर्तगाल को पर्यटन उद्योग के बेहतर होने की उम्मीद
16-Oct-2021 2:15 PM (37)

साल की शुरुआत में लंबे लॉकडाउन के बाद पर्यटक पुर्तगाल के अल्गार्वे लौट रहे हैं. होटल व्यवसायी और रेस्त्रां मालिक भविष्य को लेकर आशान्वित हैं.

  डॉयचे वैले पर निकॉल रीस की रिपोर्ट

दक्षिणी पुर्तगाल के अल्गार्वे शहर के फारो में फुटपाथों पर सूटकेस के पहियों की खड़खड़ाहट एक बार फिर लौट आई है. कुथ स्थानीय लोग इन आवाजों को अल्गार्वे की पहचान समझते हैं. अल्गार्वे पुर्तगाल का सबसे दक्षिणी क्षेत्र और एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है.

हालांकि अल्गार्वे में इस साल अन्य वर्षों की तुलना में मौसम उतना बेहतर नहीं है लेकिन फिर भी फ्रांस, यूके और जर्मनी के पर्यटकों की एक अच्छी संख्या को सड़कों पर टहलते हुए या पास के समुद्र तटों पर जाते हुए देखी जा सकता है.

इस इलाके के कई निवासियों के लिए पर्यटन की वापसी एक उपहार के रूप में देखी जा रही है. क्रिस्टीना लील फारो के भीतरी इलाके में मछली से बने पकवानों का एक छोटा रेस्त्रां चलाती हैं. हर शाम उनके रेस्त्रां की छत पर्यटकों से भरी रहती है.

लील लंबे समय से पर्यटकों के लौटने का इंतजार कर रही थीं. वे कहती हैं कि साल की पहली छमाही के दौरान उन्होंने उम्मीद ही खो दी थी, "कोविड-19 महामारी ने हमारी आजीविका ही छीन ली, जिससे हम बहुत तनाव और संकट में आ गए थे." हालांकि अब वे काफी खुश हैं और पर्यटकों के लगातार मिल रहे ऑर्डर की वजह से उनके चेहरे पर उभरी मुस्कान और खुशी आसानी से देखी जा सकती है.
आत्मविश्वास की वापसी

जोआओ कैरोलिनो भी इस साल पर्यटकों में लगातार बढ़ोत्तरी देख रहे हैं. वे कहते हैं कि उनके एक्वा रिया होटल में होने वाली बुकिंग साल 2020 की तुलना में पचास फीसद तक बढ़ गई है. कोविड संक्रमण के दौरान उन्हें अपने होटल को काफी दिनों तक बंद भी करना पड़ा था.

वे कहते हैं, "बहुत मुश्किल वक्ता था. हमें काम करना बंद करना पड़ा. एक साल तक हमारे पास कोई मेहमान नहीं था और हमने केवल बिलों का भुगतान किया और बिल लगातार आते रहे. लेकिन अब स्थिति काफी बेहतर है."

कैरोलिनो पिछले छह साल से अपने भाई के साथ यह होटल चला रहे हैं. यह लंबे समय से उनका सपना था और इसमें उन्होंने एक बड़ा निवेश भी किया. लेकिन उसके कुछ साल बाद ही महामारी ने दस्तक दे दी. कैरोलिनो कहते हैं, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा कुछ होगा. हमारे लिए यह एक बड़ा सबक था. भविष्य में हम ऐसी स्थितियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार रहना चाहते हैं."

कैरोलिना कहते हैं कि जरूरी स्वच्छता उपायों को लागू करने जैसे उपाय करने और पर्यटन उद्योग की स्थिति सामान्य और पर्यटकों के अनुकूल होने के बाद, होटल में रहने को लेकर मेहमानों का भी आत्मविश्वास काफी बढ़ा महसूस हो रहा है. वे कहते हैं, "टीकाकरण भी इसकी एक बड़ी वजह है."
टीकाकरण की ऊंची दर

पुर्तगाल ने हाल ही में 85 फीसदी की टीकाकरण दर हासिल की है जो दुनिया भर में सबसे ज्यादा है. नतीजतन, महामारी संबंधी कई प्रतिबंधों में अक्टूबर में अब ढील दी जानी है. बार और क्लब उन स्थानों में से होंगे जो फिर से खुलने जा रहे हैं, जबकि रेस्त्रां और होटलों के भीतर बैठने की पाबंदी में भी अब और ढील दी जा रही है.

इसके अलावा लोगों के बड़े समूहों को भी इकट्ठा होने की फिर से अनुमति दी जाएगी, जो इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुर्तगाल पर्यटकों का एक बेहद पसंदीदा स्थल है. ज्यादातर पर्यटक गर्मियों के महीनों में यूरोप से आते हैं, जबकि अमेरिका और ब्राजील जैसे कई देशों से लोग सर्दियों के दौरान आना पसंद करते हैं.

पुर्तगाल में पर्यटन क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में दस से पंद्रह फीसद की भागीदारी करता है जिसकी वजह से यह पुर्तगाल के सबसे महत्वपूर्ण उद्योगों में से एक माना जाता है. महामारी के कारण दूसरे उद्योगों की तरह पर्यटन की भी स्थिति बेहद खराब रही है और 1980 के दशक के बाद यह सबसे खराब स्थिति थी.

साल 2020 में छुट्टियों की संख्या में 76 फीसद की गिरावट आई, जबकि पुर्तगाल की गिनती उन देशों में होती है जहां कोविड महामारी के शुरुआती दौर में कम संक्रमण दर के कारण पुर्तगाल पर्यटन के लिए एक "मॉडल" था.
भविष्य पर विचार

2021 की शुरुआत में पुर्तगाल में संक्रमण और मृत्यु दर अचानक आसमान छूने लगी, जिससे पर्यटन क्षेत्र के जल्द से जल्द ठीक होने की उम्मीद धराशायी होने लगी. अब पुर्तगाली पर्यटन बोर्ड को उम्मीद है कि पतझड़ और सर्दियों में पर्यटन एक बार फिर उनके लिए उम्मीदों भरा होगा. उद्योग को मजबूत करने और यहां तक ​​कि इसका विस्तार करने के लिए सरकारी धन का भी निवेश किया गया है.

भविष्य में पर्यटन बोर्ड वाइन टेस्टिंग और कुछ विशेष आउटडोर छुट्टियों जैसे ऑफर पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहता है ताकि पर्यटकों का आकर्षण बढ़े. देश का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा डिजिटल खानाबदोशों को आकर्षित करना है क्योंकि वे लंबे समय तक रुकते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में लंबी अवधि के लिए योगदान करते हैं. 2023 तक पुर्तगाल में पर्यटन पूरी तरह से ठीक हो जाने की उम्मीद है.
मजदूरों की कमी

जोआओ कैरोलिनो जैसे होटल व्यवसायियों को धैर्य रखना होगा. हालांकि इस साल पर्यटकों की वापसी से पहले ही काफी फर्क पड़ा है. उनका कहना है कि उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. वे कहते हैं कि पर्यटन क्षेत्र में श्रमिकों की कमी है और उसकी वजह भी महामारी ही है, "विभिन्न यात्रा प्रतिबंधों के कारण पुर्तगाल में विदेशों से कुशल श्रमिक काम पर नहीं लौटे हैं. उन श्रमिकों में से कई ब्राजील और पूर्वी यूरोप के देशों से हैं. इस वजह से मुझे और मेरे भाई को पहले की तुलना में दोगुना काम करना पड़ता है."

क्रिस्टीना लील भी इसी समस्या का अनुभव कर रही हैं और कहती हैं कि वे पहले से कहीं ज्यादा काम कर रही हैं. लील कहती हैं कि पुर्तगाली नागरिक उद्योगों में खुले पदों के लिए बहुत कम संख्या में आवेदन कर रहे हैं जिसकी वजह से मजदूरों की कमी की पूर्ति नहीं हो पा रही है. उनका मानना है कि कई स्थानीय मजदूरों को महामारी से संबंधित सरकारी वित्तीय सहायता मिलती रहती है, जिसकी वजह से वे काम पर लौटने को लेकर ज्यादा उत्साहित भी नहीं हैं.

फिर भी, वे आशावादी बनी हुई हैं कि इन मौजूदा चुनौतियों को आखिरकार दूर कर लिया जाएगा. उन्हें पता है कि मौजूदा समय फिर भी काफी अच्छा है क्योंकि महामारी के दौरान काफी बुरे दिन देखने को मिले हैं. (dw.com)
 

अवसाद के दलदल से निकालेगा दिमाग का पेसमेकर
16-Oct-2021 2:14 PM (21)

डीप ब्रेन स्टिमुलेशन यानी गहन मस्तिष्क उद्दीपन के जरिए इलाज पाने वाली सारा अवसाद की पहली मरीज हैं जिनके उपचार का तमाम ब्यौरा दर्ज किया गया है. एक तरह से ये उपचार के साथ साथ प्रयोग भी था. नतीजे सकारात्मक पाए गए हैं.

  डॉयचे वैले पर मारी सीना की रिपोर्ट

अवसाद के गंभीर मामलों में ज्ञात उपचारों के बीच एक नयी तकनीक आजमाई गई है. इसे कहते हैं डीप ब्रेन स्टिमुलेशन जिसमें मरीज के दिमाग को इलेक्ट्रोड के जरिए झिंझोड़ा जाता है. लेकिन वैज्ञानिक और डॉक्टर बिरादरी की राय बंटी हुई है.

वर्षों से गहरे अवसाद ने सारा को अपनी जिंदगी खत्म करने के इरादे की ओर धकेल दिया था. उन्होंने 20 किस्म की दवाएं और उपचार किए, महीनों अस्पताल में भर्ती रहीं, दिमाग में बिजली के झटके भी खाए और नसों की चुंबकीय थेरेपी भी की. लेकिन अवसाद के लक्षण बने रहे.

अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर उत्तरी कैलिफोर्निया की 38 वर्षीय सारा ने बताया, "मेरा जीवन तो कगार पर आ गया था.” पांच साल पहले सारा का अवसाद गंभीर हो गया. इतना गंभीर कि उनके लिए अकेले रह पाना सुरक्षित नहीं रह गया था. वो अपने मातापिता के पास लौट आई और अपनी नौकरी छोड़ दी.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में तीस करोड़ लोग अवसाद की समस्या से प्रभावित हैं. सही समय पर सहायता, समर्थन और उपचार की बदौलत कुछ लोग आत्महत्या की प्रवृत्ति से निजात पाने में सफल रहे हैं. लेकिन सारा के साथ ऐसा नहीं था. वो उन 20-30 प्रतिशत लोगों में थी जिन्हें सामान्य उपचारों से कोई राहत नहीं मिलती है. वो कहती हैं, "मैं तो इस हालत में जीती नहीं रह सकती थी. अगर यही सब होना था तो फिर जीने का क्या फायदा था.”
एक फौरी उपचार?

जून 2020 में वो एक प्रयोगात्मक अध्ययन में शामिल होने वाली पहली मरीज बनीं. सैन फ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों के एक दल ने उनकी खोपड़ी में सिगरेट के डिब्बे के आकार की एक डिवाइस लगा दी. वो सारा के अवसाद के उभरने वाले लक्षणों की शिनाख्त करता है और मस्तिष्क में विद्युत उद्दीपन पैदा कर अपनी प्रतिक्रिया देता है. इस तरह दिमाग को अवसाद के ख्याल निकालने की ताकीद मिल जाती है. ये उसके लिए एक पेसमेकर की तरह है. अवसाद से छुटकारा पाने का ये तरीका था.

इस डिवाइस ने सारा का दुनिया को देखने का नजरिया बदल दिया. उन्होंने सीएनएन को बताया, "मुझे याद है कि एक रोज मैं डिवाइस लगाए घर लौट रही थी. मैं खाड़ी को देख सकती थी जहां वो दलदलों से मिलती है, और मेरे मन में ख्याल आया, हे भगवान, अलग अलग रंगों का क्या नजारा है, क्या उजाला है.” अपने अवसाद की गहराइयों में सारा अपने आसपास अभी तक सिर्फ बुरा ही देखती आई थी.

एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू के मुताबिक, डिवाइस लगने के बारह दिन के भीतर, 54 अंकों वाले मोंटोगोमरी-आस्बर्ग डिप्रेशन रेटिंग स्केल पर सारा के अवसाद का पैमाना 36 से गिरकर 14 पर पहुंच गया था. शोधकर्ताओं के मुताबिक, कुछ महीनों बाद वो 10 से नीचे आ गया जो इस बात का संकेत था कि उनका अवसाद ढलान पर था.

न्यू यार्क शहर में आइकान स्कूल ऑफ मेडिसिन के सेंटर फॉर एडवांस्ड सर्किस थेरेप्युटिक्स की निदेशक और न्यूरोलॉजिस्ट हेलेन मेबर्ग ने डीडब्ल्यू को बताया, "ये तकनीक वैज्ञानिक इंजीनियरिंग के एक प्रयत्न के रूप में अविश्वसनीय है. ये दिखाती है कि न्यूरोविज्ञान से जो हमने सीखा है उससे क्या कुछ संभव है.”
सभी अवसाद एक जैसे नहीं

सारा के अवसाद के उपचार में प्रयुक्त तरीके को डीप ब्रेन स्टिम्युलेशन कहा जाता है. इसमें दिमाग के एक हिस्से में लगातार विद्युत संवेग भेजे जाते हैं. ये उपचार तीस साल से चला आ रहा है. पार्किन्संस, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (जुनूनी बाध्यकारी विकार) और मिरगी जैसी बीमारियों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है.

करीब 20 साल पहले शोधकर्ताओं ने गंभीर अवसाद के इलाज के रूप में इसका परीक्षण शुरू किया था. लेकिन पूर्व के क्लिनिकल ट्रायलों में सीमित सफलताएं ही मिल पाईं. अमेरिका के दो ट्रायल तो बीच में ही रोकने पड़े क्योंकि मरीजों में डिवाइसों के जरिए प्लेसेबो की अपेक्षा बेहतर नतीजे नहीं मिल पाए थे.

जर्मन शहर ओबरहाउजेन में योहानिटर अस्पताल में मनोचिकित्सक येंस कून ने डीडब्ल्यू को बताया, "दुर्भाग्यवश डीप ब्रेन स्टिम्युलेशन से अवसाद के इलाज का साक्ष्य हमारे पास अब भी बहुत कम हैं.” दिमाग को झिंझोड़ने वाले इस उपचार से जुड़ी एक बड़ी चुनौती ये है कि इसमें हर व्यक्ति के दिमाग में अलग अलग हिस्से शामिल हो सकते हैं. फ्राइबुर्ग यूनिवर्सिटी क्लिनिक में न्यूरोसर्जन फोल्कर कोएनन ने डीडब्ल्यू को बताया कि "अवसाद हमेशा एक जैसा नहीं होता है.” इस लिहाज से ‘हर मर्ज का एक ही उपचार' वाला रवैया अख्तियार करना नामुमकिन है.
हर मरीज का अलग उपचार

इस केस स्टडी में खास और उत्साह बढ़ाने वाली बात ये है कि सारा के अवसादी मस्तिष्क पैटर्न के लिहाज से उपचार को व्यक्तिनिष्ठ बनाया गया है. अध्ययन की प्रथम लेखक और मनोचिकित्सिका कैथरीन स्कानगोस ने पत्रकारों को बताया, "हम लोग इससे पहले मनोचिकित्सा में इस किस्म की पर्सनलाइज्ड थेरेपी नहीं कर पाए थे.”

डिवाइस को सारा के अवसाद लक्षणों के हिसाब से सेट करने के लिए शोधकर्ताओं ने उनके दिमाग का दस दिनों तक अंवेषण किया. उन्होंने विभिन्न स्थानों पर इलेक्ट्रोड रखे, उन्हें उद्दीप्त किया और सारा से भावनाओं में आए बदलावों के बारे में पूछा.

डिवाइस और थेरेपी के मिलेजुले प्रभाव से सारा के भावनात्मक ट्रिगर और अटपटे ख्यालात उन पर हावी नहीं होने पाते. सारा कहती हैं, "वे ख्याल अब भी उभर आते हैं, लेकिन...बस ज़रा ही देर में...फनां भी हो जाते हैं.”
महंगा और जोखिम भरा उपचार

सारा के जीवन पर इस डिवाइस का बड़ा असर पड़ा है लेकिन इस तरीके की अंतर्वेधिता यानी भीतर घुसकर दखल देने की जरूरत, जोखिम भरी है. मरीज के दिमाग में इलेक्ट्रोड डालने से खून भी बह सकता है. गंभीर मामलों में इससे मौत भी हो सकती है. कोएनन कहते है, "ये उपचार की एक अपेक्षाकृत कठोर विधि है जो आमतौर पर सिर्फ मिरगी के मरीजों पर इस्तेमाल की जाती है.”

दिमाग में उल्लास और आनंद को नियंत्रित करने वाले हिस्से वेंट्रल स्ट्रिएटम को उद्दीप्त करना भी जोखिम भरा है. मेबर्ग कहती हैं, "ये वो इलाका है जिसमें लत लगने की क्षमता है.” वो इस पर भी हैरान हैं कि हो सकता है कि उपचार के दौरान मरीजों में आगे चलकर इस किस्म के उद्दीपन से कोई हरकत ही न हो यानी वे उसे जज्ब ही करने लग जाएं. तब क्या होगा.

शोधकर्ताओं के दिमाग में दूसरा सवाल ये है कि ये डिवाइस सारा के अलावा और लोगों की मदद कर सकता है या नहीं. इस विधि की सफलता उसकी पेचीदगी और वैज्ञानिक कौशल पर निर्भर है. यही चीजें उसकी सबसे बड़ी समस्या भी हैं. मेबर्ग कहती हैं, "इसका संचालन और क्रियान्वयन वाकई, वाकई पेचीदा है.”

डिवाइस को पर्सनलाइज यानी हर मरीज के लिहाज से तैयार करना होगा. हर मरीज के लिए अलग डिवाइस. इसका मतलब है दसियों हजार डॉलर की कीमत, विशेष किस्म के उपकरण, और अस्पताल में सप्ताह भर का निवास, इस किस्म की विलासिता सबके बस में नहीं. मेबर्ग कहती हैं, "उस रूप में तो इसकी माप नहीं हो सकती.”

कमियों और असुविधाओं के बावजूद, अध्ययन से हासिल जानकारी भविष्य में सैकड़ों मरीजों को फायदा पहुंचा सकती है. मनोचिकित्सक कैथरीन स्कानगोस कहती है, "लक्षणों के उभरते ही एक ही पल में हम उनका उपचार कर सकते हैं. ये विचार असल में, अवसाद के सबसे गंभीर और सबसे कठिन मामलों के इलाज से निपटने का पूरी तरह एक नया ही तरीका है” (dw.com)
 

ब्रिटिश सांसद सर डेविड की चाकू गोदकर हत्या में अब तक क्या हुआ?
16-Oct-2021 11:39 AM (31)

-डफ़ फोकनर

ब्रिटेन में कंज़र्वेटिव पार्टी के सांसद सर डेविड अमेस की हत्या को पुलिस ने आतंकवादी वारदात बताया है.

साउथेंड वेस्ट से सांसद सर डेविड पर ये हमला शुक्रवार को हुआ. उस समय सर डेविड ले-ऑन-सी के एक चर्च में लोगों से मुलाक़ात कर रहे थे. उन पर चाकू से कई वार किए गए.

मेट्रोपॉलिटिन पुलिस के बताया कि इस हमले के इस्लामिक अतिवाद से जुड़े होने की आशंका है. हत्या के संदेह में घटनास्थाल से एक 25 साल के ब्रितानी शख़्स को भी गिरफ़्तार किया गया है.

पुलिस ने बताया कि मामले की जांच चल रही है और वो इस समय लंदन के दो पतों की तलाश कर रहे हैं. पुलिस ने बताया कि संदिग्ध शख़्स एसेक्स काउंटी में कस्टडी में है.

पुलिस का मानना है कि उस शख़्स ने अकेले इस घटना को अंजाम दिया है लेकिन घटना की परिस्थितियों को लकर जाँच की जा रही है.

सरकारी सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि वो शख़्स ब्रितानी नागरिक है. शुरुआती जाँच में उसके सोमाली से होने का पता चला है.

69 साल के सर डेविड पर जब हमला हुआ तो वो बेलफेयर्स मेथोडिस्ट चर्च में आम लोगों से मिल रहे थे.

पुलिस के मुताबिक़ चाकू मारने की घटना की जानकारी मिलने के कुछ ही देर बाद वो घटनास्थल पर पहुंची. लेकिन पुलिस के पहुँचने से पहले मौक़े पर ही सर डेविड की मौत हो गई थी.

एसेक्स पुलिस चीफ़ कॉन्सटेबल बीजे हैरिंगटन ने कहा सर डेविड "बस अपना काम कर रहे थे, जब उनकी भयानक तरीके से जान ले ली गई."

मेट्रोपॉलिटिन पुलिस ने कहा कि आतंकवाद-रोधी अधिकारी एसेक्स पुलिस और इस्टर्न रीजन स्पेशलिस्ट ऑपरेशंस यूनिट (ईआईरएसओयू) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

पुलिस ने बताया, "ले-ऑन-सी में चाकू से हमले की इस घटना को आंतकवादी वारदात बताया गया है, जिसकी जाँच आतंकवाद-रोधी पुलिस के नेतृत्व में की जा रही है."

"शुरुआती जाँच में पता चला है कि इसके इस्लामिक चरमपंथ से जुड़े होने की आशंका है."

अधिकारियों ने लोगों से इस घटना की कोई भी जानकारी होने या सीसीटीवी, कैमरे या वीडियो डोरबेल की फुटेज होने पर संपर्क करने की अपील की है.

सांसदों की सुरक्षा की समीक्षा के आदेश
सर डेविड की मौत पर गृह मंत्री प्रीति पटेल ने पुलिस को सांसदों के सुरक्षा इंतजामों की तुरंत समीक्षा करने के आदेश दिए हैं.

प्रीति पटेल ने कहा कि ये हत्या ''लोकतंत्र पर एक संवेदनहीन हमला है. हमारे देश के जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं."

प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने सर डेविड को "राजनीति में सबसे दयालु, सबसे अच्छे, सबसे सज्जन लोगों में से एक" कहा था.

सर डेविड अमेस 1983 में पहली बार बैसिल्डन से सांसद चुने गए थे. वो पाँच बच्चों के पिता थे.

1992 में वो अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे, जिसके बाद पार्टी में उनकी इज्ज़त बहुत बढ़ गई. 1997 में उन्होंने पास के ही साउथेंड वेस्ट से चुनाव लड़ा.

वो अबॉर्शन के ख़िलाफ़ कैंपेन और जानवरों के मुद्दे पर खुलकर बोलने के लिए जाने जाते थे.

पिछले पाँच साल में ये दूसरा मौक़ा है, जब ब्रिटेन में एक सांसद की हत्या की गई है. इससे पहले साल 2016 में लेबर सांसद जो कॉक्स की वेस्ट यॉर्कशायर में हत्या की गई थी, जहाँ वो आम लोगों से मिलने गई थीं.

हम उम्मीद करते हैं कि जिन सासंदों को हमने चुना है उनसे हम मिल सकें, वो संसद के दरवाज़ों और चारदीवारों के पीछे ही ना रहें.

कई सांसदों ने लोगों की इस मांग को पूरा किया है. लेकिन, अब सांसदों और उनके स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार होने और धमकियां मिलने जैसी घटनाएं बढ़ गई हैं.

कैबिनेट के एक सदस्य ने आज मुझे बताया, "सभी को ख़तरा है... हर किसी के साथ डरवानी घटनाएं हुई हैं."

उत्पीड़न से निपटना, सुरक्षा चिंताओं का सामना करना और उन चिंताओं को पुलिस को रिपोर्ट करना, 21वीं सदी में राजनीति में ऐसा होना दुखद रूप से सामान्य हो गया है.

ये तय है कि आने वाले दिनों में वेस्टमिनिस्टर में उदार माहौल और असल ज़िंदगी व ऑनलाइन में शांति बरतने की अपील की जाएगी.

हालांकि, ये तय नहीं है कि इससे कुछ भी बदलेगा.

हाउस ऑफ कॉमन्स के स्पीकर सर लिंडसे होयल ने बीबीसी टूज़ न्यूज़नाइट को बताया कि पुलिस सभी सांसदों से संपर्क कर रही है ताकि उनकी सुरक्षा की जांच की जा सके और सर डेविड की हत्या के बाद उन्हें आश्वस्त किया जा सके.

सर लिंडसे होयल ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार शाम अपने निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से लोगों से मुलाक़ात की. यह ज़रूरी है कि सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के साथ संबंध बनाए रखने में सक्षम हों.

उन्होंने कहा, "हम ये सुनिश्चित करना होगा कि लोकतंत्र बना रहे."

लेकिन, कंजर्वेटिव सांसद टोबायस एलवुड ने बीबीसी रेडियो 4 के द वर्ल्ड टुनाइट से कहा कि सर डेविड पर हुए हमले को देखते हुए वो कहेंगे कि किसी भी सांसद को निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से आसने-सामने नहीं मिलना चाहिए.

उन्होंने कहा, "आप ज़ूम पर बात कर सकते हैं... आप टेलिफ़ोन पर भी अच्छी बात कर सकते हैं."

बैटले और स्पैन से सांसद और जो कॉक्स की बहन किम लेडबैटर ने बताया कि सर डेविड की मौत के बाद उनके पार्टनर ने उन्हें अपना पद छोड़ने के लिए कहा है.

सांसद जो कॉक्स की भी वेस्ट यॉर्कशायर में ''कंस्टीटूएंसी सर्जरी' के दौरान हत्या कर दी गई थी.

नेताओं से लेकर आम लोगों की श्रद्धांजलि

इस बीच सर डेविड को दोनों दलों के राजनेताओं ने और स्थानीय समुदाय के लोगों ने श्रंद्धाजलि दी.

पीएम बॉरिस जॉनसन ने कहा कि उनका "कमज़ोरों की मदद के लिए क़ानून पारित करने का बेहतरीन रिकॉर्ड" था, "हमने आज एक अच्छा जन सेवक और एक बहुत प्रिय-मित्र और सहकर्मी खो दिया है."

नज़दीक ही स्थित सेंट पीटर्स कैथोलिक चर्च के पादरी जेफ़ वूलनो ने सर डेविड को "एक बहुत महान व्यक्ति, एक अच्छा कैथलिक और सभी का दोस्त" बताया.

उन्होंने कहा, "ऐसा करते हुए उनकी जान गई ये असाधारण बात है. लोगों की सेवा करते हुए उनकी जान चली गई."

उन्होंने सर डेविड की याद में शुक्रवार शाम को चर्च में एक जनसमूह का नेतृत्व किया, जिसमें उन्हें "मिस्टर साउथेंड" बताया गया.

साउथेंड शहर के पार्षद जॉन लैम्ब ने कहा कि सर डेविड "एक बहुत अच्छे, मेहनती सांसद थे जिन्होंने सभी के लिए काम किया."

वहीं, लेबर पार्टी के नेता सर कीर स्टारमर ने कहा कि यह एक "काला और चौंकाने वाला दिन" था.

उन्होंने कहा कि जो कॉक्स की मौत के समय भी देश ने यही स्थिति देखी थी. (bbc.com)

पिछले साल आत्मघाती हमले में मारा गया था हैबतुल्लाह अखुंदजादा, पाकिस्तान ने रची थी साजिश
16-Oct-2021 9:56 AM (49)

-मनोज गुप्ता

नई दिल्ली. कई महीने तक चले रहस्यमयी माहौल के बाद अब तालिबान ने कंफर्म कर दिया है कि उसका सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा मारा जा चुका है. सीएनएन-न्यूज़18 को सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि 2016 से तालिबान का मुखिया रहा अखुंदजादा 2020 में पाकिस्तान में एक आत्मघाती हमले में मारा गया था.

एक सीनियर तालिबान नेता आमिर-अल-मुमिनिन ने कहा है कि हैबतुल्लाह अखुंदजादा पाकिस्तानी सेनाओं द्वारा समर्थित आत्मघाती हमले में ‘शहीद’ हो गया था. बता दें कि सीएनएन-न्यूज़18 ने पहले भी रिपोर्ट की थी कि या तो अखुंदजादा पाकिस्तान के कब्जे में है या फिर उसकी सेनाओं द्वारा मार दिया गया है.

तालिबान का शासन आने के बाद से ही कयासबाजी जारी
दरअसल अगस्त महीने में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से ही अखुंदजादा को लेकर कयासबाजी की जा रही है. लेकिन तालिबान की तरफ से लगातार कहा गया है कि अखुदंजादा जिंदा है और जल्द ही सार्वजनिक रूप से सामने आएगा. वास्तविकता में हैबतुल्लाह अखुंदजादा आज तक कभी भी लोगों के सामने नहीं आया. वह पर्दे के पीछे रहकर ही ऑपरेट करता रहा है. न्यू यॉर्क पोस्ट के होली मैक काय के मुताबिक अखुंदजादा की जो तस्वीर इंटरनेट पर है वो भी वर्षों पुरानी है.

तालिबान नेताओं के बीच भी थी अफवाहें
अब जबकि अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आ चुका है तो लोग उसकी सार्वजनिक मौजूदगी का इंतजार कर रहे थे. लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ था अफवाहों का दौर शुरू हो गया. अफवाहें तालिबान नेताओं के बीच भी चलने लगीं कि क्या अखुंदजादा जिंदा नहीं है?

साल 2016 में अमेरिका ने एक ड्रोन हमले में तालिबान के प्रमुख अख्तर मंसूर को मार गिराया था. इसके बाद अखुंदज़ादा को मंसूर का उत्तराधिकारी बनाने का ऐलान किया गया. अखुंदज़ादा कंधार का एक कट्टर धार्मिक नेता था. उसे एक सैन्य कमांडर से ज्यादा एक धार्मिक नेता के तौर पर लोग जानते थे. कहा जाता है कि अखुंदज़ादा ने ही इस्लामी सज़ा की शुरुआत की थी. जिसके तहत वो खुलेआम मर्डर या चोरी करने वालों को मौत की सजा सुनाता था. इसके अलावा वो फतवा जारी करता था. (news18.com)

कोरोना पॉजिटिव होकर अस्पताल पहुंचे पति-पत्नी, सरकार ने मार दिए उनके 12 पालतू कुत्ते
16-Oct-2021 9:51 AM (126)

दुनिया में कोरोना वायरस का ऐसा प्रकोप छाया कि लोग घरों में बंद हो गए. कई देशों में लॉकडाउन लग गया. बीते दो साल से इस वायरस ने सभी की जिंदगी बर्बाद कर दी. अब धीरे-धीरे लोग वैक्सीनेट हो रहे हैं, इससे वायरस का प्रकोप कम होता नजर आ रहा है. ऐसे में कई देश अब वायरस का प्रकोप बढ़ाने वाला कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है. विएतनाम सरकार भी कोविड इन्फेक्शन को फैलने से रोकने के लिए कुछ भी करने को तैयार है. इसी कड़ी में विएतनाम में रहने वाली फम मिन्ह हंग और उसकी 35 साल की बीवी न्गुयेन थी ची एम को जब कोरोना पॉजिटिव होने पर अस्पताल में एडमिट किया गया, तो सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया, जो हैरान करने वाला है.

कपल अस्पताल में कोरोना से जंग लड़ रहा है. दोनों अपने 12 कुत्तों के साथ रहता था. लेकिन जब दोनों को पता चला कि वो कोरोना पॉजिटिव हैं, तो दोनों अस्पताल में एडमिट हो गए. इसके बाद प्रसाशन ने दोनों के 12 कुत्तों को जान से मार दिया. ऐसा किया गया ताकि ये वायरस कुत्तों के जरिये किसी और में ना फैले. इस बेहद क्रूर घटना की भनक जब पति-पत्नी को लगी, तो उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया. कपल ने इन कुत्तों को अपने बच्चों की तरह पाला था. अस्पताल में दोनों की तबियत रोने के कारण और खराब हो गई है.

अपने कुत्तों को बच्चे सा पालता था कपल
BBC से बातचीत में कपल ने कहा कि उन्हें इन्साफ चाहिए. अभी तक ये कहीं भी नहीं क्लियर हुआ है कि कोरोना कुत्तों को होता है या उनसे फैलता है. ऐसे में आखिर किस आधार पर बिना उनकी जानकारी के उनके 12 कुत्तों को मार डाला गया. सोशल मीडिया पर इस केस ने बहस छेड़ दी है. लोगों ने इंसाफ के लिए पिटीशन साइन करना शुरू किया है. अभी तक इसे लेकर डेढ़ लाख लोगों ने सिग्नेचर किया है.

बताया जा रहा है कि कपल काम की तलाश में गाड़ी से अपने रिश्तेदार के घर जा रहा था. ऐसे में जब वो खानह हंग पहुंचे, तो वहां एंट्री के लिए उन्हें कोरोना टेस्ट करवाना पड़ा, जिसमें कपल पॉजिटिव आया. इसके बाद उन्हें अस्पताल भेजा गया और उनके कुत्तों को क्वारेंटाइन सेंटर. यहां प्रशासन ने उनके 12 कुत्तों को जिंदा जलाकर मार दिया ताकि इनसे कोरोना किसी और को ना फैले. मामले के तूल पकड़ने के बाद सरकार ने इसे लेकर सफाई देते हुए कहा कि वो किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते. हालांकि, लोग इस घटना को बेहद क्रूर बता रहे हैं. (news18.com)

एयरपोर्ट पर बिना कपड़ों के महिला को टहलते देख खुली रह गई लोगों की आंखें, पुलिस ने कंबल से ढका और फिर...
16-Oct-2021 9:50 AM (144)

सोशल मीडिया अजीबोगरीब खबरों का भंडार होता है. इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसी ही एक विचित्र खबर खूब चर्चा में है. अमेरिका के डेनवर एयरपोर्ट पर हाल ही में लोगों को एक ऐसा दृष्य देखने को मिला जिसे देखते ही उनकी आंखों खुली की खुली रह गईं. एयरपोर्ट पर जहां लोग फ्लाइट पकड़ने जाते हैं उन्हें वहां एक महिला दिख गई जिसके शरीर पर एक भी कपड़े नहीं थे. वो न्यूड होकर फ्लाइड पकड़ने आई थी.

ये पूरा मामला है अमेरिका के डेनवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का. डेनवर सीबीएस 4 वेबसाइट के मुताबिक ये घटना पिछले महीने की है मगर इस घटना से जुड़ा वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुआ है. वीडियो में नजर आ रहा है कि एक महिला बिना कपड़ों के एयरपोर्ट के अंदर घूम रही है. उसके पास कोई सामान भी नहीं है. उसने सिर्फ एक बोतल ली हुई है और अन्य यात्रियों के पास जाकर उनसे हालचाल पूछ रही है. सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें देखा जा सकता है कि महिला यात्रियों के पास जाकर पूछ रही है- “कैसे हैं, कहां रहते हैं आप?” इस बीच वहां मौजूद कई लोगों ने महिला को रिकॉर्ड करना भी शुरू कर दिया था.

मानसिक रूप से अस्थिर थी महिला
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक वहां मौजूद लोगों ने बताया कि एयरपोर्ट सिक्योरिटी स्टाफ महिला को पकड़ने के लिए उसके पीछे भागा. कथित तौर पर महिला ने शराब पी हुई थी. इसके अलावा वो मानसिक रूप से अस्थिर थी. एयरपोर्ट पर मौजूद पुलिस ने महिला को पहले कंबल से ढका और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया. वहां मौजूद लोगों ने बताया कि महिला हंसी जा रही थी और जब पुलिस उसे पकड़ने आयी तो वो वहां से भागने लगी. पहली बार जब उन्होंने उसे कंबल से ढकने की कोशिश की तो वो चकमा देकर भाग गई. पुलिस ने बताया कि उसे गिरफ्तार करने के बाद तुरंत ही यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल भेज दिया गया. डेनवर पुलिस के अनुसार ये मामला 19 सितंबर के दिन हुआ था. पुलिस और एयरपोर्ट स्टाफ ने महिला की पहचान को गोपनीय रखने के लिए उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं पब्लिक की है. (news18.com)

तालिबान की हिमाकत! काबुल के गुरुद्वारे में घुसे भारी हथियारों से लैस इस्लामिक अमीरात के अधिकारी
16-Oct-2021 9:48 AM (107)

नई दिल्ली. तालिबान के कब्जे वाले अफ़ग़ानिस्तान के इस्लामिक अमीरात की विशेष इकाई से होने का दावा करने वाले भारी हथियारों से लैस अधिकारी शुक्रवार को काबुल के कारते परवान स्थित गुरुद्वारे दशमेश पिता में जबरन घुस गए. इतना ही उन्होंने गुरुद्वारे में समुदाय विशेष को ना सिर्फ धमकाया, बल्कि पवित्र स्थान की शुचिता को अपमानित भी किया. भारतीय विश्व मंच के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने यह जानकारी दी.

उन्होंने आगे कहा, “हथियारों से लैस लोग गुरुद्वारे के साथ ही उससे जुड़े सामुदायिक स्कूल के पूरे परिसर में भी छापेमारी कर रहे हैं. गुरुद्वारे के प्राइवेट सुरक्षा गार्डों ने शुरू में उन्हें प्रवेश करने से रोका, लेकिन उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई और उनके साथ मारपीट भी की गई.”

फोरम के अध्यक्ष चंडोक ने बताया कि इस्लामिक अमीरात की स्पेशल यूनिट से जुड़े होने का दावा करने वाले अधिकारियों ने गुरुद्वारे से सटे सांसद नरिंदर सिंह खालसा के पूर्व आवास और कार्यालय पर भी छापेमारी की है. उन्होंने कहा कि समुदाय के लगभग 20 सदस्य गुरुद्वारे के अंदर मौजूद हैं.

चंडोक ने भारत सरकार से अपील की है कि वे इस मुद्दे को तुरंत उच्च स्तर पर अपने समकक्षों के साथ उठाएं. उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार से निवेदन करता हूं कि वे अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू और सिख समुदायों की चिंताओं को तुरंत ही उनके समकक्षों के साथ उच्चतम स्तर पर उठाएं. अफगानिस्तान में मौजूदा शासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और वहां रहने वाले अल्पसंख्यकों की भलाई के लिए कदम उठाया जाए.” (news18.com)

ब्रिटेन में एक लैब की भयानक गलती पड़ी भारी, जांच में 43 हजार लोगों को बताया संक्रमित
16-Oct-2021 9:47 AM (48)

लंदन. ब्रिटेन में एक प्राइवेट लैब की भयानक गलती की वजह से 43 हजार लोगों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव बता दी गई है. ब्रिटिश स्वास्थ्य अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि शायद हजारों लोगों को गलत रिपोर्ट दी गई, वह संक्रमित नहीं थे.

ब्रिटिश स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने कहा कि गलत निगेटिव रिपोर्ट की वजह से मध्य इंग्लैंड के वोल्वरहैम्पटन स्थित इम्मेंसा हेल्थ क्लीनिक लिमिटेड नामक प्रयोगशाला ने नमूनों की जांच करने की प्रक्रिया स्थगित कर दी है. जन स्वास्थ्य एजेंसी के निदेशक ने कहा कि वह प्रयोगशाला की जांच में गलत रिपोर्ट आने की तकनीकी खामी का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

प्रयोगशाला की यह खामी उस समय आई, जब कुछ लोग रैपिड एंटीजन जांच में संक्रमित पाए गए, जबकि अपेक्षाकृत अधिक सटीक मानी जाने वाली आरटी-पीसीआर जांच में उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई.

स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया, ‘प्रयोगशाला के जरिए करीब चार लाख नमूनों की जांच की गई, जिनमें से अधिकतर की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन अनुमान है कि 43 हजार लोगों की गलत निगेटिव रिपोर्ट आई.’ इनमें से अधिकतर दक्षिण पश्चिम इंग्लैंड के रहने वाले हैं.

एजेंसी ने बताया कि गलत रिपोर्ट आठ सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच हुई जांचों की दी गई. एजेंसी ने कहा कि यह एक लैब की गलती है और प्रभावित लोगों से संपर्क कर उन्हें दूसरी जांच कराने की सलाह दी जा रही है.

गौरतलब है कि ब्रिटिश सरकार ने इम्मेंसा को 16.3 करोड़ डॉलर का ठेका कोविड-19 जांच के लिए पिछले साल अक्टूबर में दिया था. कंपनी की मुख्य कार्यकारी एंड्रिया रिपोसाती ने बताया कि कंपनी ब्रिटिश स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है. (news18.com)

रूस की Sputnik V वैक्सीन के वजह से आधी दुनिया में मचा हड़कंप, क्या है इसकी वजह
16-Oct-2021 9:47 AM (134)

काराकस. लैटीन अमेरिका से लेकर पश्चिम एशिया तक विकासशील देशों में लाखों लोग स्पूतनिक-वी कोरोना वैक्सीन की खुराक लेने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन टीकाकरण अभियान में पहली खुराक और दूसरी खुराक के बीच अंतर बढ़ता ही जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक, रूस ने कोविड-19 रोधी टीके की एक अरब खुराक देने का वादा किया था, लेकिन उसने केवल 4.8% खुराकों का ही निर्यात किया है.

टीके में निवेश करने वाले रूस के सरकार नियंत्रित राजकोष के प्रमुख ने बुधवार को कहा था कि टीके की आपूर्ति की समस्या हल कर ली गई है. एस्पेरिता गार्शिया द पेरेज (88) ने मई में कोविड-19 रोधी टीके की पहली खुराक ली थी. वह अब स्पूतनिक वी टीके की दूसरी खुराक का इंतजार कर रही हैं. वह पिछले महीने कोरोना वायरस से संक्रमित हुई. उनके जीवित रहने की उम्मीद कई दवाओं और घर पर हो रही देखभाल पर टिकी हुई है.

वेनेजुएला ने दिसंबर 2020 में स्पूतनिक की एक करोड़ खुराक का ऑर्डर दिया था, लेकिन उसे 40 लाख से भी कम खुराकें मिली. अर्जेंटीना को 25 दिसंबर को स्पूतनिक की पहली खेप मिली थी, लेकिन वह अब भी दो करोड़ खुराकों का इंतजार कर रहा है.

स्पूतनिक वी का प्रयोग सबसे पहले अगस्त 2020 में किया गया और करीब 70 देशों में इसे मान्यता मिली। कोविड-19 के अन्य टीकों के बजाय स्पूतनिक की पहली और दूसरी खुराक अलग हैं। उत्पादन में मुश्किलों खासतौर से दूसरी खुराक के अवयवों को बनाने में दिक्कतों से इस टीके के निर्माण में देरी हुई है. विशेषज्ञों ने इसके लिए उत्पादन की सीमित क्षमता के साथ ही इस प्रक्रिया की जटिलता को जिम्मेदार ठहराया है. (news18.com)

चीन-भूटान बॉर्डर एमओयू पर अपना रुख न जताए भारत : चीनी मुखपत्र
16-Oct-2021 8:24 AM (50)

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर | चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा कि भारत ने भूटान पर दीर्घकालिक व्यापक नियंत्रण और प्रभाव का प्रयोग किया है, जिसने भूटान को विदेशी संबंधों को विकसित करने से प्रतिबंधित कर दिया है। चीन और भूटान के वरिष्ठ राजनयिक अधिकारियों ने गुरुवार को एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान भूटान-चीन सीमा वार्ता में तेजी लाने के लिए तीन-चरणीय रोडमैप पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

भूटान एकमात्र पड़ोसी देश है, जिसने चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित नहीं किए हैं।

भूटान हिमालय के दक्षिणी ढलानों में स्थित है। 38,000 वर्ग किमी के क्षेत्रफल और 800,000 से कम आबादी के साथ, यह छोटा सा देश चीन और भारत के बीच स्थित है।

ग्लोबल टाइम्स ने कहा, "भूटान के चीन के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं, न ही उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के किसी अन्य स्थायी सदस्य के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं। यह असामान्य है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि भारत ने भूटान पर दीर्घकालिक व्यापक नियंत्रण और प्रभाव का प्रयोग किया है, जिसने इसे विदेशी संबंधों को विकसित करने से प्रतिबंधित कर दिया है।"

अखबार ने आगे कहा, "भूटान के साथ सीमा वार्ता को पूरा करना इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए था। समस्या भूटान के पीछे देश में है -भारत , जिसने एक जटिल कारक के रूप में काम किया है।"

चीनी मुखपत्र ने कहा, "हमें नहीं लगता कि नई दिल्ली को अपना रुख व्यक्त करना चाहिए। यह समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए दो संप्रभु देशों के बीच का मामला है। अगर भारत इस पर उंगली उठाता है, तो यह दुनिया को केवल यह साबित कर सकता है कि भारत एक कमजोर और छोटे देश की संप्रभुता को खत्म कर रहा है।"

ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक संपादकीय में कहा, "भारत को सार्वजनिक रूप से कुछ भी नहीं कहना चाहिए, न ही उसे भूटान पर दबाव डालना चाहिए या यह निर्देश देना चाहिए कि भूटान को चीन के साथ अपनी सीमा वार्ता में क्या करना चाहिए। चीन और भूटान के बीच एक सीमांकन रेखा दोनों देशों के क्षेत्रों का परिसीमन करेगी। यदि भारत यह मानता है कि सीमांकन कैसे तय किया गया है, तो यह भारत के राष्ट्रीय हित को प्रभावित करेगा, यह साबित करेगा कि भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को भूटान के क्षेत्र में अनुचित रूप से बढ़ाया है और भूटान को भारत की चीन नीति की आउटपोस्ट (चौकी) में बदलना चाहता है। ये अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मानदंडों का उल्लंघन भी है।"

इसमें आगे कहा गया है, "भारत दक्षिण एशिया में सबसे बड़ी और सबसे मजबूत शक्ति है। लेकिन यह भूटान पर अपने पुराने जमाने के नियंत्रण को समाप्त करने का समय है। भारत को नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों पर असामान्य प्रभाव डालने की अपनी इच्छा पर भी अंकुश लगाना चाहिए। दक्षिण एशियाई देश विकास के इच्छुक हैं। दक्षिण एशियाई देश चीन के साथ संबंध विकसित करने के इच्छुक हैं और उन्हें ऐसा करने का अधिकार है।"

ग्लोबल टाइम्स ने कहा, "चीन के साथ आर्थिक और अन्य संबंधों को मजबूत करने के इन देशों के कदमों को देखते हुए भारत को संकीर्ण सोच वाली भू-राजनीतिक सोच से पार पाना चाहिए और यह कल्पना नहीं करनी चाहिए कि चीन भारत को घेर रहा है। चीन का न तो कोई सैन्य गठबंधन है और न ही विशेष सहयोग, जो उन देशों में से किसी के साथ भारत को निशाना बनाए। भारत अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। इसके लिए, इसे पहले खुले विचारों वाला होना चाहिए और अति संवेदनशील नहीं होना चाहिए।"

ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि ऐसा लगता है कि चीन और भूटान जल्द या बाद में एक सीमा समझौते पर पहुंचेंगे और अंतत: राजनयिक संबंधों की स्थापना की ओर बढ़ेंगे।

इसमें कहा गया है, "यह प्रगति है, जो दोनों पड़ोसी देशों के बीच होनी चाहिए। अगर यह रुक जाती है, तो लोगों को आश्चर्य होगा कि क्या भारत ने फिर से भूटान पर दबाव डाला और उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया है।"(आईएएनएस)

भारत की तारीफ सुनकर जला पाकिस्तानी मीडिया, इमरान खान को जमकर कोसा
15-Oct-2021 5:47 PM (72)

इस्लामाबाद. दो दिन पहले अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी के 9.5% से बढ़ने की उम्मीद जताई है. आईएमएफ की रिपोर्ट के बाद पड़ोसी देश पाकिस्तान में बवाल मचा हुआ है. पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि भारत काेविड-19 महामारी में भी ग्रोथ कर रहा है. जबकि पाकिस्तान लगातार नीचे जा रहा है. हर दिन पाकिस्तानी रुपए के मुकाबले डॉलर की कीमत बढ़ रही है. इस दौरान पाक मीडिया की इमरान हुकूमत को कोसने से बाज नहीं आता. 

डिबेट में आए एक गेस्ट इमरान सरकार पर कमेंट करते हुए बताते, “इस वक्त मुल्क में इकानॉमी का बेड़ा गर्क हो चुका है. जब ये आए थे तो कहते थे लोगों को एक करोड़ नौकरियां देंगे, 50 लाख घर बनाएंगे. बाहर का पैसा यहां आएगा, लेकिन आज ही आईएमएफ की रिपोर्ट में भारत को ग्रोथ को लेकर बड़ी बातें कहीं गई हैं, इंडिया 9 फीसद तरक्की करेगा, हम तीन फीसद तरक्की करेंगे. हमारी कुल आमदनी 300 अरब डॉलर है, हम इंडिया से क्या मुकाबला करेंगे.” (news18.com)

अफगानिस्तान: कंधार की शिया मस्जिद में 3 सीरियल ब्लास्ट, नमाज में जुटे थे लोग, 32 के मारे जाने की खबर
15-Oct-2021 5:45 PM (32)

काबुल. अफगानिस्तान के कंधार की इमाम बारगाह मस्जिद में बम धमाके की खबर है. अफगान मीडिया टोलो न्यूज के मुताबिक, धमाके में अब तक 32 लोगों के मारे जाने की खबर है. वहीं, 45 लोग घायल हुए हैं. यह एक शिया मस्जिद है, जिसमें शुक्रवार की नमाज के लिए लोग जुटे थे. प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मस्जिद में एक के बाद एक तीन धमाके हुए थे.

वहीं, गृह मंत्रालय के प्रवक्ता सईद कोस्ती ने बताया कि दर्जनों के लोगों के इस धमाके में मारे जाने और घायल होने की सूचना है. तालिबान की स्पेशल फोर्सेस घटनास्थल पर पहुंच चुकी हैं. हम जांच कर रहे हैं कि आखिर यह किस तरह का धमाका था.

इससे पहले बीते शुक्रवार को उत्तरी अफगानिस्तान की एक शिया मस्जिद में धमाके में 100 से ज्यादा की मौत हो गई थी. धमाका ठीक उस वक्त हुआ था, जब सैकड़ों लोग नमाज अदा कर रहे थे. इस्लामिक स्टेट खुरासान ने बम धमाके की जिम्मेदारी ली थी. आईएस ने आत्मघाती हमलावर की पहचान एक उइगर मुस्लिम के तौर पर की और कहा कि हमले में शियाओं और तालिबान दोनों को निशाना बनाया गया जो चीन से उइगरों की मांगों को पूरा करने में बाधा बन रहे हैं.

शिया को क्यों बनाया निशाना?
इस्लामिक स्टेट समूह के आतंकवादियों का अफगानिस्तान के शिया मुस्लिम अल्संख्यकों पर हमला करने का लंबा इतिहास रहा है. जिन लोगों को निशाना बनाया गया, वे हजारा समुदाय से हैं, जो सुन्नी बहुल देश में लंबे समय से भेदभाव का शिकार बनते रहे हैं. यह हमला अमेरिका और नाटो सैनिकों की अगस्त के आखिर में अफगानिस्तान से वापसी और देश पर तालिबान के कब्जे के बाद एक भीषण हमला है. (news18.com)

अमेरिकी रियल एस्टेट टाइकून को बेस्ट फ्रेंड की हत्या के जुर्म में उम्रकैद, सामने आई शॉकिंग स्टोरी
15-Oct-2021 12:53 PM (44)

लॉस एंजिलिस. अमेरिका में रियल एस्टेट टाइकून रॉबर्ट डर्स्ट को अपनी ही बेस्ट फ्रेंड सूजन बर्मन की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. इसके साथ ही उन्हें पैरोल भी नहीं मिलेगी.

78 वर्षीय बिजनेसमैन ने बेवर्ली हिल वाले घर में दोस्त की हत्या साल में 2000 में की थी. वह उसे बीवी के गायब हो जाने के बाद पुलिस से बात करने से रोक रहा था. हालांकि डर्स्‍ट ने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है. रॉबर्ट डर्स्ट पर HBO की डॉक्युमेंट्री “The Jinx” भी बन चुकी है. हालांकि उसने हमेशा इस हत्या से इनकार किया.

क्यों की हत्या?
सरकारी वकील ने कहा कि उसने 2000 में क्राइम राइटर बर्मन का कत्ल किया था. क्योंकि न्यूयॉर्क पुलिस रॉबर्ट की पत्नी के गायब होने के बारे में सूजन से सवाल करना चाहती थी. उसकी पत्नी दो दशक से गायब थी. रॉबर्ट उसे पुलिस से बात नहीं करने देना चाहता था.

उसके बाद उसने दोस्त को गोली मार दी. दरअसल, पुलिस को शक था कि पत्नी के गायब होने के पीछे रॉबर्ट का हाथ है. सूजन की हत्या पर रॉबर्ट ने हमेशा इनकार किया, लेकिन उसने इस बात को माना कि पुलिस को उसने की एक अज्ञात खत भेजा था और बताया कि बेवर्ली हिल के उसके घर में सूजन की लाश है.

रॉबर्ट न्यूयॉर्क के सबसे अमीर और प्रभावशाली लोगों में शामिल है और उसे पत्नी के केस में कभी आरोपित नहीं किया गया. लेकिन मार्च 2015 में न्यू ओरलिएंस के एक होटल रूम से गिरफ्तार किया गया, ठीक कुछ देर बाद ही उसकी डॉक्युमेंट्री का The Jinx: The Life and Deaths of Robert Durst का आखिरी एपिसोड प्रसारित होने वाला था.

इस आखिरी एपिसोड में उसे खुद से बड़बड़ाते हुए सुना गया, जिसमें वह कह रहा था कि तुम पकड़े गए हो, तुमने निश्चित ही सबको मार डाला. दरअसल, रॉबर्ट भूल गया था कि रेस्टरूम में जाने के दौरान उसका माइक्राेफोन ऑन था. (news18.com)