राजपथ - जनपथ
विस्टाडोम कोच बस्तर की ट्रेन में..
रेलवे ने सबसे पहला विस्टाडोम कोच सन् 2018 में मुंबई-मडगांव रूट पर जन शताब्दी एक्सप्रेस में शुरू किया था। इसका मकसद पर्यटन को बढ़ावा देना था।
अब तक तिनसुकिया-नाहर लागून एक्सप्रेस, नाहर-लागून गुवाहाटी एक्सप्रेस, दार्जिलिंग-हिमाचल रेलवे टॉय ट्रेन, न्यू जलपाईगुड़ी-अलीराजपुर जंक्शन, सीएसटी मुंबई-पुणे, यशवंतपुर-बेंगलुरु, पुणे-मुंबई डेक्कन एक्सप्रेस, मुंबई-दादर-मडगांव और कालका शिमला ट्रेन में विस्टाडोम कोच लगाये जा चुके हैं। और अब रेलवे ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से विशाखापट्टनम जाने वाली और विशाखापट्टनम से अरकू घाटी चलने वाली ट्रेनों में विस्टाडोम कोच लगाने का निर्णय लिया है। एक माह के भीतर यह लग जायेगी।
यानी अब जो लोग बस्तर से विशाखापट्टनम आते जाते हैं, वे इस रास्ते में पडऩे वाले मनमोहक दृश्यों को चारों ओर से 360 डिग्री कांच की चौड़ी खिड़कियों से देख सकेंगे। यह कोच केवल दिन में चलने वाली ट्रेनों में जोड़ा जाएगा।
रेलवे की ओर से पर्यटन को बढ़ावा देने की यह पहल बस्तर की खूबसूरती को और नजदीक से निहारने का मौका देगा।
रेलवे को बजट में क्या मिला?

अंबिकापुर को कोरबा और रेनुकूट तथा दिल्ली मुख्य मार्ग से रेल के जरिए जोडऩे की मांग करीब एक दशक पुरानी है। पिछले साल जनवरी महीने में सर्वेक्षण का काम पूरा हुआ तो लोगों को लगा कि इस बार बजट में इस परियोजना के लिए कोई राशि मिलेगी। इसके अलावा कुछ नई रेल लाइनों के सर्वे की मांग है, जिनमें जशपुर को रेल लाइन से जोडऩे की भी है। उसलापुर, मुंगेली, कवर्धा होते हुए राजनांदगांव के लिए नई ट्रैक के लिए भी सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुका है। 9 साल पहले बताया गया था कि यह काम 3 साल में पूरा हो जाएगा। इसकी रफ्तार इतनी धीमी है कि 10-12 साल भी कम पड़ेंगे।
अब तो रेलवे बजट अलग से नहीं लाया जाता। पता नहीं चलता कि किसे क्या मिला। आने वाले सालों में 400 नई वंदे मातरम ट्रेनें चलाने की घोषणा की गई हैं। नई ट्रेनें, रुकी हुई ढेरों परियोजनायें, दूसरी तरफ रेलवे नौकरी भी खत्म कर रही है। दिमाग पर जोर डालिये, समझने की कुछ कोशिश करिये।
दुर्लभ वाइल्डलाइफ फोटोग्रॉफी

वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी बहुत धीरज और अनिश्चितकाल की प्रतीक्षा मांगती है। अब इसी तस्वीर को लीजिए। अंबिकापुर के एडिशनल एसपी नरेंद्र वर्मा बताते हैं की सारस क्रैन एक प्रवासी पक्षी है। लेकिन एक जोड़े ने बीते कई सालों से उसने सरगुजा में डेरा डाल रखा है। बड़ी मुश्किल से वे अपने मित्र प्रतीक के साथ उनके ठिकाने का पता लगा पाए और यह तस्वीर ले सके।


