राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : नितिन नबीन का साल
01-Jan-2026 5:52 PM
राजपथ-जनपथ : नितिन नबीन का साल

नितिन नबीन का साल 

गुजरे साल में प्रदेश भाजपा में कई बड़े बदलाव हुए, और कुछ को तरक्की भी मिली। सबसे बड़ी तरक्की प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन की हुई, जो पार्टी संगठन के शीर्ष नेता के रूप में स्थापित हुए। बहुत कम लोगों को मालूम है कि नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की स्क्रिप्ट छत्तीसगढ़ में लिखी गई थी।

छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनी, तो नितिन नबीन की मेहनत को काफी सराहा गया। उन्होंने अपने गृह प्रदेश बिहार के विधानसभा चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व के बीच पुल का काम किया। उनके चुनाव प्रबंधन की काफी प्रशंसा भी हुई। वो बिहार सरकार में ताकतवर मंत्री भी बन गए। मगर उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय  स्तर पर शीर्ष जिम्मेदारी दी जाएगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।

बताते हैं कि बस्तर ओलंपिक के समापन कार्यक्रम के लिए 11 दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रायपुर आए थे। इस दौरान प्रदेश संगठन की एक अलग बैठक कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में हुई थी। इस बैठक में शिरकत करने नितिन नबीन को रायपुर आना था, लेकिन उनकी फ्लाइट छूट गई। इसी बीच नवा रायपुर के होटल में ठहरे शाह ने नबीन के आने को लेकर पूछताछ की, और फिर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा राज्य शासन का विमान लेकर पटना पहुंचे। उनके साथ नितिन नबीन रायपुर आए। वो कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में जाने के बजाए अमित शाह से मिले। दोनों के बीच करीब आधा घंटे बंद कमरे में चर्चा हुई।

बैठक के बाद शाह जगदलपुर निकल गए। नितिन नबीन,कुशाभाऊ ठाकरे परिसर पार्टी बैठक में शामिल हुए, और फिर बैठक के बाद स्टेट प्लेन से वापस पटना चले गए। उन्हें छोडऩे के लिए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव पटना साथ गए थे। इसके दो दिन बाद नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। नबीन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ भाजपा के छोटे -बड़े नेता काफी खुश हैं। कुल मिलाकर गुजरा साल भाजपा के लिए बेहतर रहा।

निष्कासित से राष्ट्रीय पदाधिकारी!

पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने फेसबुक पर महिला कांग्रेस के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची साझा की, और छत्तीसगढ़ से नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी। इनमें पंडरिया की पूर्व विधायक ममता चंद्राकर को राष्ट्रीय महासचिव, मयूरी सिंह, और तूलिका कर्मा को राष्ट्रीय सचिव के साथ ही प्रीति उपाध्याय व राशि त्रिभुवन को राष्ट्रीय समन्वयक  का दायित्व सौंपा गया है।

महासमुंद की पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राशि त्रिभुवन को राष्ट्रीय समन्वयक बनाए जाने पर पार्टी में गुस्सा फुट पड़ा है। दिलचस्प बात ये है कि राशि को विधानसभा चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लडऩे पर पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। न सिर्फ राशि बल्कि उनके पति त्रिभुवन महिलांग को भी छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया।

दोनों के साथ ही महासमुंद के आठ और नेताओं को निष्कासित किया गया था। इन सभी की पार्टी में वापसी नहीं हो पाई है। बावजूद इसके राशि को राष्ट्रीय स्तर का पद दे दिया गया। इसकी शिकायत अलग-अलग स्तरों पर हुई है। यह पूछा जा रहा है कि निष्कासित नेत्री को राष्ट्रीय पदाधिकारी  बनाने की सिफारिश किसने की थी? यह बात सामने आ रही है कि प्रदेश के किसी बड़े नेता ने राशि की सिफारिश नहीं की थी, बल्कि  दिल्ली में अपने संपर्कों के जरिए पद पाने में कामयाब रही। निष्कासित नेत्री को पद देने पर पार्टी के अंदरखाने में हलचल मची हुई है। अब आगे क्या होता है, यह देखना है।

महानदी विवाद पुराना, माहौल नया

छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा महानदी यहां से निकलकर ओडिशा पहुंचती है और वहां के लाखों लोगों की सिंचाई, उद्योग और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करती है।हाल ही में छत्तीसगढ़ द्वारा उदंती नदी पर बैराज बनाने की प्रक्रिया शुरू करने पर ओडिशा में विपक्षी दल बीजेडी और कांग्रेस ने वहां की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। 

धमतरी जिले से निकलने वाली महानदी करीब 858 किलोमीटर बहकर ओडिशा में समुद्र में मिलती है। इसका करीब 53 प्रतिशत हिस्सा छत्तीसगढ़ में है, बाकी ओडिशा में। 1957 में बना हीराकुंड बांध इस नदी पर स्थित है, जो ओडिशा के बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए महत्व रखता है। महानदी में कई सहायक नदियां मिलती हैं। उनमें से ही एक उदंती है। यह छत्तीसगढ़ से निकलकर ओडिशा के नुआपाड़ा और कालाहांडी जिलों से गुजरते हुए तेल नदी में मिल जाती है, और अंतत: महानदी के सिस्टम में। छत्तीसगढ़ का दावा है कि हम ऊपरी भाग में बैराज बनाकर अपने इलाके की सिंचाई और विकास सुनिश्चित कर रहे हैं, जबकि ओडिशा का कहना है कि ये निर्माण पानी की मात्रा कम कर देंगे, जिससे हीराकुड बांध प्रभावित होगा।

महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर बहस हीराकुंड बांध के निर्माण के समय से ही चल रही है। छत्तीसगढ़ जब मध्यप्रदेश से अलग हुआ तब भी विवाद था। मगर, 2016 में यह ज्यादा तीव्र हुआ, जब ओडिशा ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ ऊपरी इलाकों में बिना अनुमति के कई बांध और बैराज बना रहा है। उस समय छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी, और ओडिशा में नवीन पटनायक की बीजेडी सरकार। ओडिशा ने सुप्रीम कोर्ट में केस किया, जिसके बाद 2018 में महानदी रिवर वाटर डिस्प्यूट ट्रिब्यूनल बना। ट्रिब्यूनल अभी भी काम कर रहा है, और अगली सुनवाई फरवरी 2026 में है।

सन् 2016 में ओडिशा का एक हाई-पावर प्रतिनिधिमंडल, जिसमें सांसद, विधायक और अधिकारी शामिल थे, छत्तीसगढ़ पहुंचा था। उन्होंने रायपुर और बिलासपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में महानदी की ऊपरी धारा पर करीब 7 बैराज कांकेर, महासमुंद और अन्य इलाकों में बिना केंद्रीय जल आयोग की मंजूरी के बनाए जा रहे हैं। ओडिशा की टीम ने साइट विजिट भी की और दावा किया कि ये बैराज पानी को रोककर ओडिशा के हिस्से को कम कर रहे हैं, साथ ही उद्योगों को अवैध रूप से पानी सप्लाई किया जा रहा है। बीजेडी और कांग्रेस ने अलग-अलग डेलिगेशन भेजे थे। जवाब में, रमन सिंह ने 2017 में ओडिशा का दौरा किया और कहा कि यह गलतफहमी है। छत्तीसगढ़ केवल अपना हक इस्तेमाल कर रहा है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी 2016 में दोनों मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई, लेकिन कोई स्थायी हल नहीं निकला।

अब यह ताजा खबर उदंती बैराज की मंजूरी की है। इस बैराज का 2018 में ओडिशा ने इसका विरोध किया था, लेकिन हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने इन-प्रिंसिपल अप्रूवल दिया है। ओडिशा सरकार ने ज्वाइंट टेक्निकल कमेटी की दो बैठकों में इस पर चर्चा की, लेकिन विपक्षी बीजेडी के लेनिन मोहंती और कांग्रेस के भक्त चरण दास ने सवाल उठाया कि जब छत्तीसगढ़ बैराज बना रहा है, तो समझौता कैसे आगे बढ़ेगा? 

दिलचस्प बात यह है कि अब दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है। पहले जब सरकारें अलग दलों की थीं, विवाद ज्यादा जोर-शोर से उठता था। अब ओडिशा सरकार खुलकर विरोध नहीं कर रही, जबकि विपक्ष ने मोर्चा संभाल लिया है। छत्तीसगढ़ का स्टैंड वही है- हम ओडिशा को जरूरी पानी दे रहे हैं, इसलिए अपने इलाके में बैराज बनाने का हक है।


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