राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : भूपेश की कथा, साहू समाज नाराज
03-Jan-2026 5:54 PM
राजपथ-जनपथ : भूपेश की कथा, साहू समाज नाराज

भूपेश की कथा, साहू समाज नाराज

छत्तीसगढ़ की राजनीति में कथावाचकों पर बयानों से इतर कथा की आड़ में सियासी निशाने साधे जा रहे हैं। कुछ कथावाचकों को अंधविश्वास फैलाने वाला बताकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन दिनों अलग-अलग समाज के कार्यक्रमों में खुद कथा-कहानी सुना रहे हैं, उनकी ऐसी ही कथा-कहानी पर साहू समाज बिफर गया है। मामला शुरू हुआ बिलासपुर के लिंगियाडीह से, जहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव पर तंज कसते हुए छत्तीसगढ़ी में कह दिया- बेंदरा ल राजा बना दिस। जंगल की कहानी थी, बंदर राजा था, और संकेत साफ था कि राजा तो बना दिया गया है, लेकिन काम उछल-कूद तक ही सीमित है, इसी मिसाल के साथ बघेल ने कहा कि इन दिनों अरुण साव की भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। इस पर डिप्टी सीएम अरुण साव ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि नेताओं को भाषा की मर्यादा रखनी चाहिए, एक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ये बयान अक्षम्य है।

राजनीति में तंज नई बात नहीं, लेकिन यहां कहानी जंगल से निकलकर समाज तक पहुंच गई। साहू समाज ने भूपेश बघेल को 10 दिन का अल्टीमेटम दे दिया, अगर वे सार्वजनिक माफी नहीं मांगेगे तो समाज प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगा। इधर, टीएस सिंहदेव ने इसे व्यक्तिगत टिप्पणी बताकर मामला हल्का करने की कोशिश की, लेकिन सोशल मीडिया ने वजन बढ़ा दिया। इधर एक साहू समाज के बुद्धिजीवी ने तो बाकायदा दार्शनिक व्याख्या कर दी है, उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा है कि बंदर गलत है, वानर बेहतर होता। क्योंकि वानर तो त्रेतायुग में राम भक्त थे, संजीवनी लाने वाले थे। अगर बघेल जी ने वानर कहा होता, तो शायद बात अभिनंदनीय बन जाती। इतना ही नहीं बीते दिनों साहू समाज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अरुण साव के सामने अंतरजातीय विवाह पर रोक लगाने और ओरिजिनल साहूओं की संख्या घटने की चर्चा पर भी चटकारे लिए जा रहे हैं। लिखा जा रहा है कि राजनीति में बंदर की कहानी सुनाई जा सकती है, लेकिन समाज में ओरिजिनल और नकली की बहस खतरनाक होती है।

किसानों को आखिर जीत मिली

जमीन और खेती बचाने के लिए किए जाने वाले किसानों के आंदोलन को कभी-कभी सफलता भी मिल जाती है, वरना प्रशासन कार्पोरेट के दबाव में मामले को लंबा खिंचता रहता है। खैरागढ़ जिले के जगमड़वा और आसपास के तीन गांवों में चूना पत्थर के लिए 305 हेक्टेयर जमीन की नीलामी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब केवल यह साफ होना था कि खदान किसे आवंटित होगा। मगर, इस बीच किसानों का आंदोलन तेज हो गया। इस खदान से प्रभावित होने वाले करीब 55 गांवों के किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि चूना पत्थर खदान खोला गया तो वे आंदोलन करेंगे। दो दिन के भीतर नीलामी निरस्त करने की मांग भी उठाई। इलाके में पहले से ही काफी संख्या में चूना पत्थर की खदानों के कारण खेती को बड़ा नुकसान हो रहा है। नई खदान खुली तो उनकी कृषि भूमि पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। फिलहाल तो प्रशासन ने इस नीलामी को निरस्त कर दिया है, पर ग्रामीणों की मांग है कि क्षेत्र में प्रस्तावित सभी चूना पत्थर ब्लॉक और सीमेंट फैक्ट्रियों की परियोजनाओं को निरस्त किया जाए।

जांच जारी, और प्रमोशन?!

नए साल में आईएएस अफसरों के प्रमोशन तो हो गए हैं, लेकिन आईपीएस अफसरों की प्रमोशन लिस्ट जारी नहीं हो पाई है। चर्चा है कि जांच के घेरे में आए कुछ अफसरों के प्रमोशन प्रस्ताव पर उलझन पैदा हो गई है।

बताते हैं कि आईएएस अफसरों की एक प्रमोशन लिस्ट में जेपी मौर्य का नाम है। वो सचिव के पद पर प्रमोट होंगे। वो ईडी के जांच के घेरे में थे। मगर प्रमोशन में रूकावट नहीं आई। हालांकि अभी औपचारिक आदेश जारी नहीं हुए हैं। सचिव के पदों की संख्या को लेकर अनुमोदन के लिए फाइल डीओपीटी को भेजी गई। मंजूरी मिलते ही संभवत: अगले हफ्ते प्रमोशन आर्डर जारी हो जाएंगे।

दूसरी तरफ, आईपीएस में डीआईजी से आईजी पद पर  प्रमोशन की फाइल अटकी पड़ी है। वजह ये है कि दो डीआईजी स्तर के अफसर जांच के घेरे में आए हैं। ईडी ने ईओडब्ल्यू-एसीबी प्रमुख को कार्रवाई के लिए लिखा था। ऐसे में पीएचक्यू में सवाल उठाए जा रहे हैं कि मौर्य के प्रमोशन में अड़चन नहीं है, तो बाकी दोनों पुलिस अफसरों के प्रमोशन में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।  चर्चा है कि इन बिंदुओं पर परामर्श लिया जा रहा है  देखना है आगे क्या कुछ होता है।

दिल्ली की ओर

आईपीएस के वर्ष-2013 बैच के अफसर जितेन्द्र शुक्ला केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति चले गए हैं। वो एनएसजी ग्रुप कमांडर बन गए हैं। उन्हें शुक्रवार को रिलीव कर दिया गया है।  दुर्ग एसपी पद से हटने के बाद जितेन्द्र शुक्ला बटालियन में पोस्टेड थे। उनके राजनांदगांव एसपी बनने की चर्चा थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने केन्द्रीय एजेंसी की राह पकड़ ली। इसी तरह राजनांदगांव में एसपी रहे मोहित गर्ग भी केन्द्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए आवेदन दिया है। उनकी पोस्टिंग नारकोटिक्स ब्यूरो में होने की चर्चा है। सब कुछ ठीक रहा, तो पखवाड़े भर में वो भी दिल्ली की राह पकड़ लेंगे।

चौथी इकॉनामी वाले देश में...

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम भरतपुर लकरालता की यह तस्वीर किसी एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि विकास के दावों पर करारा तमाचा है। दुर्गम पहाड़ी इलाके में बसे इस गांव में आज भी सडक़ जैसी बुनियादी सुविधा नसीब नहीं है। हालात इतने बदतर हैं कि यहां इंसान को जीते-जी तो संघर्ष करना ही पड़ता है, मरने के बाद भी उसे सम्मानजनक अंतिम यात्रा तक नसीब नहीं होती।

तालाब में मछली पकडऩे के दौरान डूबने से आदिवासी युवक सुरेन्द्र तिर्की की मौत हो गई। सडक़ नहीं होने के कारण परिजन और ग्रामीण शव को खाट पर लादकर कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचे। 

सरगुजा, बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों से इस तरह की तस्वीरें लगातार आ रही हैं। यह तस्वीर उसी दिन सामने आई जब देश की मीडिया में दो बड़ी उपलब्धियों की चर्चा हो रही थी। एक- कुछ महीनों के बाद देश में पहली बुलेट ट्रेन चलने लगेगी, दूसरी- भारत ने जापान की अर्थव्यवस्था को पीछे कर दिया है और अपना देश इस मामले में चौथे नंबर पर आ गया है।


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