राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : दिग्गजों में मुकाबला
11-Jan-2026 5:57 PM
राजपथ-जनपथ : दिग्गजों में मुकाबला

दिग्गजों में मुकाबला

भाजपा के दो दिग्गज आपस में भिड़ गए हैं। दोनों ही ऊंचे ओहदों पर हैं, और विनम्र माने जाते हैं। सामाजिक रूप से भी एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। बावजूद इसके दोनों के बीच मतभेद की पार्टी के अंदरखाने में काफी चर्चा हो रही है।

बताते हैं कि दोनों के बीच विवाद की खबर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची है। पहले तो स्थानीय संगठन के बड़े नेताओं ने दखल देकर शांत कर दिया था, लेकिन अब मतभेद गहराने लगे हैं। फिलहाल तो दोनों ही सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी से परहेज कर रहे हैं, लेकिन देर-सबेर दोनों के बीच विवाद सार्वजनिक होने के आसार दिख रहे हैं। एक कोशिश यह भी चल रही है कि दोनों दिग्गजों को साथ बिठाकर विवाद सुलझा लिया जाए, लेकिन अब तक इसमें सफलता नहीं मिली है। देखना है आगे क्या होता है।

सरकार में सराहना लायक काम

साय सरकार अब बेहतर कार्यों के लिए विभागों, और जिलों को पुरस्कृत कर रही है। शनिवार को सीएम विष्णुदेव साय ने एक कार्यक्रम में सुशासन, और नवाचार के लिए पांच विभागों और जिलों को पुरस्कृत किया। इनमें दंतेवाड़ा, जशपुर, जीपीएम, गरियाबंद व नारायणपुर हैं।

5 विभागों की योजनाओं की काफी प्रशंसा हुई, और विभाग प्रमुख को सम्मानित किया गया। इनमें पंचायत ग्रामीण विकास विभाग की चर्चित मनरेगा की क्यूआर सूचना प्रणाली शामिल है। बिना कोई खर्च के मनरेगा के कार्यों में पारदर्शिता आई है। ग्राम पंचायतों में क्यूआर चस्पा कर दिए गए हैं।

कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर मनरेगा की पिछले 5 साल की सम्पूर्ण जानकारी ले सकते हैं।  इसका अन्य राज्य भी अनुशरण कर रहे हैं। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह और मनरेगा आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा को पुरस्कृत किया गया।

इसी तरह वन विभाग में ई-कुबेर डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू की गई है। जिससे विभागीय कार्यों में भुगतान में पारदर्शिता आई है, और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है। इन सबके बीच गरियाबंद जिले में हाथी ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप की भी काफी सराहना हुई है। इससे मोबाइल पर हाथियों का लोकेशन पता चलता है।

आबकारी विभाग की ई-गर्वेनेंस सुधार, और उद्योग विभाग के वन क्लिक सिस्टम विन्डो सिस्टम को भी सराहा गया, और सीएम ने पुरस्कृत किया। कुल मिलाकर अब बेहतर कार्यों की सराहना होने लगी है।

बिना नेता के विज्ञापन...

यह तस्वीर ‘पहल’ के मार्च 1977 के अंक के अंदरूनी कवर पेज पर छपा एक सरकारी विज्ञापन है। यह वह दौर था, जब सरकारी संदेश सादगी, संवेदना और सीधे संवाद के साथ जनता तक पहुँचते थे। नारे छोटे होते थे, लेकिन अर्थ गहरे। इस पोस्टर में बाल विवाह के खिलाफ संदेश साफ है। मां अपनी नाबालिग बेटी के कान में काम की बात बता रही है। 18 की होने तक विवाह मत करना, कानून इसकी मनाही करता है।

अस्पतालों की दीवारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सिनेमाघरों के बाहर ये पोस्टर लगे होते थे। उद्देश्य किसी दल या नेता प्रचार नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना था। 

आज हालात बदल गए हैं। बड़े-बड़े होर्डिंग्स पर नेताओं की विशाल तस्वीरें छाई रहती हैं, लेकिन संदेश कहीं कोने में सिमट जाता है या पूरी तरह गुम है। संदेश से ज़्यादा प्रदर्शन महत्वपूर्ण हो गया है।


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