राजपथ - जनपथ
मंत्रियों के स्टाफ के किस्से
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार को 2 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर राज्य सरकार के मंत्री विभागवार अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं, तो इस दौरान मंत्रियों के निजी स्थापना में लगातार ओएसडी, पीए बदले जाने पर भी चर्चा हो रही हैं।
वित्तमंत्री ओपी चौधरी को छोड़ सभी मंत्रियों के ओएसडी बदले गए हैं। इसके पीछे कई प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं। इनका मंत्री के साथ तालमेल न होना, मंत्री के क्षेत्र और विभागीय काम में ओएसडी का सक्रिय ना होना, मंत्रियों को अंधेरे में रख दाएं-बाएं से काम करवाना आदि-आदि। भाजपा संगठन को मिली शिकायतों पर भी एक दो बदलाव किए गए। यह बदलाव विपक्ष के लिए सीधे आरोपों का अवसर दे जाते हैं।
पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि कहीं ना कोई कोई गड़बड़ी हुई होगी इसलिए हटाया गया है। इन आरोपों पर डिप्टी सीएम अरुण साव का कहना है प्रशासनिक परिवर्तन समय-समय पर होते रहता है। कांग्रेसियों को केवल भ्रष्टाचार ही दिखता है। जिन्होंने अपने कांग्रेस शासन काल में भ्रष्टाचार में रिकार्ड कायम किए। कांग्रेस सरकार सिंडिकेट तरीके से भ्रष्टाचार करती थी। जिसमें कांग्रेस सरकार में कई अधिकारी शामिल थे। जिनमें कई जेल में तो कई पर मुकदमे चल रहे हैं।
आरोप-प्रत्यारोपों से परे दो वर्षों में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के ओएसडी संजय मरकाम और अजय कन्नौजे हटाए गए। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के ओएसडी भागवत जायसवाल, पीए प्रवीण पांडेय हटाए गए। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने ओएसडी संजय गजघाटे हटाए गए। डिप्टी सीएम अरुण साव के ओएसडी विपुल गुप्ता हटाए गए।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा की निजी स्थापना से ओएसडी दुर्गेश वर्मा और बी रघु, पीए दुर्गेश धारे को हटाया गया है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के ओएसडी तारकेश्वर देवांगन, वन मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी सुनील तिवारी और जितेंद्र गुप्ता हटाए गए। तीनों नए मंत्री गजेन्द्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब, और राजेश अग्रवाल भी अपनी निजी स्थापना में बदलाव कर चुके हैं। पिछली सरकार में भी मंत्रियों की निजी स्थापना से ओएसडी-पीए हटाए गए थे, लेकिन इस बार संख्या अधिक होने पर चर्चा ज्यादा हो रही है।
लोकार्पण का स्थगन, सियासत का प्रदर्शन!
बिलासपुर नगर निगम की ओर से सोमवार को सकरी क्षेत्र में करीब 50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमिपूजन का कार्यक्रम तय किया गया था। समय सुबह 11.30 बजे होना था, लेकिन कुछ घंटे पहले ही सूचना आई कि कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। सरकारी स्तर पर वजह बताई गई कि कुछ और लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यों को कार्यक्रम में शामिल किया जाना है, इसलिए आयोजन बाद में होगा।
चूंकि कार्यक्रम नगर निगम की ओर से तय था, इसलिए जब महापौर पूजा विधानी से ही कारण पूछा गया। उन्होंने अलग तर्क दिया। उनके अनुसार, सकरी क्षेत्र तखतपुर विधानसभा का हिस्सा है। यहां के विधायक धर्मजीत सिंह ठाकुर की तबीयत ठीक न होने के कारण कार्यक्रम टालना पड़ा।
मगर स्थगन की जड़ निमंत्रण पत्र और प्रचार सामग्री में दिखी। इनमें बिलासपुर सांसद एवं केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल का नाम शामिल ही नहीं किया गया था। कहा जा रहा है कि दोनों नेताओं के नाम गायब होने से मामले ने तूल पकड़ लिया और अंतत: कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। मीडिया के सवालों पर महापौर के जवाबों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से इसी आशंका की पुष्टि कर दी। उन्होंने कहा कि अगली बार निमंत्रण पत्र प्रकाशित करते समय ध्यान रखा जाएगा कि किसी जनप्रतिनिधि का नाम न छूट जाए।
यह पहला मौका नहीं है जब विधायक अमर अग्रवाल को ऐसी उपेक्षा का सामना करना पड़ा हो। महज 15 दिन पहले, मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में हुए युवा महोत्सव में उनकी सीट पीछे रखी गई थी। समर्थकों की नाराजगी के बाद और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से स्थिति संभली, लेकिन असंतोष मंच पर सबके सामने दिख गया।
दरअसल, इन दिनों बिलासपुर भाजपा के भीतर सियासी संतुलन तेजी से बदलता दिख रहा है। केंद्रीय स्तर पर तोखन साहू और राज्य में अरुण साव ताकतवर स्थिति में हैं। कई विधायक और नगरीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि, जो कभी अमर अग्रवाल के आवास के इर्द-गिर्द नजर आते थे, अब पाला बदल चुके हैं या बदलने की तैयारी में हैं।
मंत्रिमंडल में दोबारा वापसी की संभावना कमजोर पडऩे के साथ रही सही झिझक भी टूटती नजर आ रही है। इसके बावजूद, अमर अग्रवाल के पास अब भी भरोसेमंद समर्थकों की एक सशक्त टीम है, जो शहर की राजनीति में किसी और के वर्चस्व को रोकने की कोशिश में जुटी हुई है।
महंगी कॉलोनियों पर निशाना
पिछले तीन-चार साल में राजधानी रायपुर के सौ से अधिक उद्योगपति, कारोबारी, नेता, और अफसरों के यहां छापेमारी हुई। इन छापों का केन्द्र बिन्दु स्वर्णभूमि, लॉ विस्टा, वालफोर्ट सिटी, आनंदम, और सिग्नेचर होम रहा है। इन कॉलोनियों को मध्य भारत की सबसे महंगी कॉलोनियों में गिना जाता है। तमाम प्रभावशाली लोग इन्हीं कॉलोनियों में रहते हैं।
वीआईपी रोड स्थित लॉ विस्टा में तो करीब दर्जनभर से अधिक लोगों के यहां छापे डल चुके हैं। बाकी जगहों की तुलना में मीडियाकर्मियों को यहां छापे का कवरेज के लिए ज्यादा सुविधाजनक हो गया है। ये सुविधा किसी और की तरफ से नहीं बल्कि कांग्रेस के मीडिया विभाग के सदस्य विकास बजाज ने उपलब्ध कराई है। वो मीडियाकर्मियों के लिए चाय नाश्ते का बंदोबस्त करते हैं। पिछले दिनों जमीन कारोबारी हरमीत खनूजा के यहां ईडी ने छापेमारी की। सुबह-सुबह ईडी की टीम खनूजा के निवास पर पहुंच गई थी। मीडिया को खनूजा निवास पर ईडी की कार्रवाई की जानकारी हुई, तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोग के वहां पहुंच गए। ठंड में चाय की तलब लगी, तो खनूजा के पड़ोस में रहने वाले विकास बजाज के घर पहुंच गए। बजाज ने भी खातिरदारी में कोई कसर बाकी नहीं रखी। उनके यहां दोपहर 12 बजे तक चाय नाश्ता का दौर चलता रहा। इस दौरान सुरक्षा के लिए आए सीआईएसएफ के जवान भी वहां पहुंच गए, और उन्होंने भी मीडियाकर्मियों के साथ चाय नाश्ता किया।
इससे पहले भी इसी कॉलोनी में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के करीबी राजू अरोरा के यहां भी ईओडब्ल्यू-एसीबी ने छापेमारी की थी। तब भी विकास ने मीडियाकर्मियों के जलपान का बंदोबस्त किया था। यही वजह है कि लॉ विस्टा में कवरेज के लिए जाना मीडियाकर्मियों को सुविधाजनक लगने लगा है।


