राजपथ - जनपथ
फिर वही गलती दोहराई गई
बीते साल 10 अक्टूबर को राजधानी रायपुर के मेकहारा में एक एचआईवी पीडि़त महिला की पहचान उजागर कर दी गई थी। न केवल पहचान बताई गई बल्कि उसके नवजात की बेड के सामने एक पोस्टर लिखकर चिपका दिया गया था कि उसकी मां एचआईवी ग्रस्त है। महिला के पति ने मेडिकल कॉलेज के डीन और पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा था। कोर्ट ने कहा था कि यह अमानवीय और अनैतिक कृत्य है। कोर्ट ने पीडि़त परिवार के लिए 2 लाख रुपये मुआवजा तय किया और दोषियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया। दो लाख रुपये तो पीडि़त को दे दिए गए लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसके लिए जिम्मेदार स्टाफ पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस ने एफआईआर पर कोई एक्शन नहीं लिया, न ही राज्य के दूसरे अस्पतालों के लिए कोई दिशा निर्देश स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए गए। हालांकि दिशा-निर्देश जारी करने की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि आम लोगों को भी पता है कि एड्स पीडि़तों की पहचान उजागर नहीं की जानी चाहिए। मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े लोगों को इतना ज्ञान होगा, यह अपेक्षा स्वाभाविक रूप से की जा सकती है। मगर, एक बार फिर ऐसी ही घटना सामने आ गई है। एक माह पहले जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज में डिलीवरी के लिए आई गर्भवती महिला की पहचान डॉक्टरों और वहां के स्टाफ ने उजागर कर दी। महिला के पति ने इस मामले में भी एफआईआर दर्ज करा दी। खबरों के मुताबिक एफआईआर के बाद पीडि़ता के परिवार को, खासकर महिला सदस्यों को फोन पर धमकियां दी गई। पुलिस ने न तो पहचान उजागर करने के मामले में कोई एक्शन लिया न ही धमकी के मामले में। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन बीते एक माह से जांच ही कर रहा है कि पहचान उजागर करने वाले स्टाफ के कौन से लोग हैं। एक परिसर का ही मामला है, फिर भी इतना वक्त लगा है। स्थिति यह है कि पीडि़त महिला के परिवार ने पुलिस को फिर बताया है कि पहचान उजागर होने के कारण उसे गांव और रिश्तेदारों के बीच उपेक्षा और अपमान का सामना करना पड़ रहा है। पीडि़ता तो गांव से वापस ही लौट चुकी है और वापस जाने से घबरा रही है। पुलिस ने यह सब बयान दर्ज किया है, पर कार्रवाई अब तक किसी के खिलाफ न उसने की है न ही अस्पताल प्रबंधन ने। ऐसी उम्मीद भी करना ठीक नहीं कि रायपुर के मामले में हाईकोर्ट के रुख को नजीर मानते हुए, जगदलपुर की पीडि़ता को भी कुछ मुआवजा देने की पहल सरकार करे।
ऑटो-बूम की तैयारी
छत्तीसगढ़ में ऑटो सेक्टर में बूम आने के आसार हैं। वजह यह है कि राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 20 जनवरी से 5 फरवरी तक ऑटो एक्सपो लग रहा है। इसमें रोड टैक्स पर 50 फीसदी की छूट जैसे बड़े ऑफर दिए गए हैं। कैबिनेट ने रोड टैक्स में छूट के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद से छत्तीसगढ़ के आसपास के पांच राज्यों से भी वाहन खरीदी के लिए लोग यहां आ सकते हैं।
बताते हैं कि ऑटो एक्सपो में रोड टैक्स के लिए सरकार पहले तैयार नहीं थी। वजह यह है कि पड़ोस के राज्यों की आपत्ति भी रही है। उनके यहां वाहनों की खरीदी कम हो जाती है। ग्राहक वहां से वाहन खरीदना पसंद करते हैं, जहां छूट ज्यादा होती है। चर्चा है कि ऑटो एक्सपो के लिए व्यापारी संस्था कैट ने मेहनत की थी। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी तो यहां लगातार वित्त मंत्री ओपी चौधरी से चर्चा करते रहे हैं।
दिल्ली के भी कैट के पदाधिकारी छत्तीसगढ़ में ऑटो एक्सपो के लिए अपने-अपने संपर्कों से सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं। चैम्बर के पदाधिकारी भी अपने-अपने स्तर पर जोर लगाते रहे हैं। व्यापारी संगठनों की मेहनत का नतीजा रहा कि ऑटो एक्सपो में सरकार ने रोड टैक्स में भारी भरकम छूट की घोषणा कर दी। इससे बड़ी संख्या में वाहनों की खरीदी होने के आसार हैं। स्वाभाविक है कि ऑटो डीलर काफी खुश हैं।
खबरों में बृजमोहन
विवादों के बीच बालोद के दुधली में शुक्रवार को जंबूरी की रंगारंग शुरुआत हो गई। इसमें देश-विदेश से 15 हजार स्काउट्स एंड गाइड्स शिरकत कर रहे हैं। जंबूरी के खिलाफ सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मोर्चा खोल रखा है। वो खुद को स्काउट्स एंड गाइड्स के प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने के तौर तरीके से खफा हैं। उन्हें मनाने की कोशिश भी हुई। गृहमंत्री विजय शर्मा ने बृजमोहन से चर्चा भी की, और इसके बाद बृजमोहन के तेवर नरम पड़ते दिखाई दिए।
बाद में स्काउट्स एंड गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन के एक बयान से फिर नाराज हो गए। डॉ. जैन ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ तौर पर कह दिया कि बृजमोहन अग्रवाल की जगह गजेन्द्र यादव स्कूल शिक्षा मंत्री की हैसियत से पदेन प्रदेश अध्यक्ष हैं। उन्होंने बृजमोहन के निर्वाचित होने के दावे को भी खारिज कर दिया। डॉ. जैन ने कह गए कि चुनाव के लिए मुख्यालय से कभी ऑब्ज़र्वर नहीं भेजे गए थे।
डॉ. अनिल जैन, छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी रहे हैं। उनके बयान के बाद बृजमोहन की प्रतिक्रिया सामने आ गई। उनके दफ्तर ने बकायदा प्रेस नोट जारी किया, और बताया कि किस तरह नियमों में संशोधन कर बृजमोहन अग्रवाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।
बृजमोहन ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय मुख्यालय ने नियमों में संशोधन पर सहमति दी थी। इसका भी पत्र मीडिया को जारी किया। कुल मिलाकर बृजमोहन अब पीछे हटने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह भी कल रायपुर में थे। वो वन मंत्री केदार कश्यप, और पूर्व स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल से उनके परिवार में शोक पर मिलने भी गए थे। खास बात ये है कि सौदान सिंह से आपसी बातचीत में बृजमोहन के तेवर की चर्चा होती रही। हल्ला तो यह भी है कि देर सबेर मामले पर हाईकमान दखल दे सकती है। देखना है आगे क्या होता है।
कर्मफल का भय और जीरो टॉलरेंस

जेन जी के युग में ऐसे भी लोग हैं जो नेताओं को अवतार और भगवान की श्रेणी में रख देते हैं। नैतिकता तो यह कहती है कि जो ईष्ट और देव स्वरूप हैं, जिनके द्वारा सृष्टि के रचनाकारों में की जाती है उनके समकक्ष मानवों को न खड़ा किया जाए। खैर अंधभक्त ऐसा करें तो समझ में आता है लेकिन यह लोकतांत्रिक संस्था कार्यपालिका के ज्ञानी लोग ऐसा करें तो यह समझ नहीं आता। एक सरकारी विभाग ने छत्तीसगढ़ के शक्तिपीठों व देवी मंदिरों की प्रतिमाओं के चित्र टेबल कैलेंडर में छापे हैं, उनकी मंशा रही होगी कि अधिकारी कर्मचारी दिन की शुरुआत अपने छत्तीसगढ़ की देवी शक्तियों दर्शन के साथ करें ताकि उनमें भ्रष्टाचार के कर्मफल का भय हो। लेकिन देवी देवताओं के क्रम में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की तस्वीर भी लगा दी गई है, यानी वे भी पूजनीय और प्रात: स्मरणीय हो गए हैं? वैसे दिल्ली से लेकर रायपुर तक भ्रष्टाचार तो ज़ीरो टालरेंस से निपटा जा रहा है।


