राजपथ - जनपथ
इधर तबादले, उधर चुनाव प्रचार
सरकार ने शुक्रवार को तहसीलदारों, और राजस्व निरीक्षकों की ट्रांसफर सूची जारी की। सूची जारी होने के बाद कुछ के तबादले के खिलाफ कोर्ट जाने की आशंका थी इसलिए सरकार ने पहले ही कैविएट दायर कर दिया।
राजस्व अफसरों के तबादले की खूब चर्चा हो रही है। तहसीलदारों की सूची में एक दिव्यांग भी हैं जिन्हें रायपुर से सीधे बीजापुर भेजा गया है। रायपुर के दो राजस्व निरीक्षकों को लेकर यह चर्चा है कि उन्होंने एक भाजपा नेता को जमीन के प्रकरण में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। इस वजह से उन्हें दूसरे संभाग में भेज दिया गया।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा सूची जारी होने से पहले ही हरियाणा चुनाव प्रचार के लिए चले गए हैं। कई प्रभावित अफसर तबादला रुकवाने दूसरे मंत्रियों के बंगले घूम रहे हैं। देखना है आगे क्या कुछ होता है।
दक्षिण में शक्ति प्रदर्शन
रायपुर दक्षिण विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा, और कांग्रेस में हलचल मची हुई है। कांग्रेस से ज्यादा भाजपा में टिकट को लेकर खींचतान चल रही है। भाजपा के कुछ दावेदारों ने तो प्रचार भी शुरू कर दिया है। एक उत्साही युवा भाजपा नेता ने तो बकायदा वाल राइटिंग भी करना शुरू कर दिया है।
एक दावेदार ने तो अपने जन्मदिन के मौके पर जोरदार पार्टी देकर शक्ति प्रदर्शन किया था जिसमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, और स्पीकर भी पहुंचे थे। एक अन्य दावेदार ने वार्डों में बैठक लेना शुरू कर दिया है। अब तक वो दस वार्डों में कार्यकर्ताओं की बैठक ले चुके हैं।
हालांकि इसका विरोध भी हो रहा है क्योंकि पार्टी का सदस्यता अभियान चल रहा है और दावेदार की बैठकों की वजह से अभियान पर असर पड़ रहा है। इसको लेकर शिकवा शिकायतें भी हो रही है। मगर जब तक अधिकृत तौर पर प्रत्याशी घोषित नहीं होता है तब तक शक्ति प्रदर्शन का दौर जारी रहेगा।
पदयात्रा का नुस्खा
पीसीसी कार्यकारिणी की शुक्रवार को बैठक हुई। इसमें अध्यक्ष दीपक बैज सभी से चर्चा कर तय किया कि वे इसी महीने से पदयात्रा शुरू करेंगे। जो आगे भी समय-समय पर जारी रहेगी। क्या उन्हें यह आभास हो गया है कि पदयात्रा से रास्ता सत्ता तक पहुंचता है। क्योंकि यह पड़ोस के आंध्रप्रदेश, तेलंगाना में आजमाया हुआ सफलतम नुस्खा रहा है । जहां इसकी शुरूआत स्व.वाईएस राजशेखर रेड्डी,फिर उनके बेटे जगन रेड्डी और पिछले पांच वर्ष वर्तमान डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने एंड टू एंड पदयात्रा कर सीएम हाउस पहुंचे। इसी कदमताल से एबीवीपी के पूर्व छात्र नेता रहे रेवंत रेड्डी ने भी कांग्रेस में आकर कई मूल कांग्रेसियों को पछाड़ कर सीएम कहला रहे हैं। इनसे बैज की काफी निकटता है। कहीं ये गुरू मंत्र उन्हीं से तो नहीं लिया। संभव भी है क्योंकि हर माह दो बार तो दीपक हैदराबाद जाते ही है। मेल मुलाकात होती ही है। यह भी बता दें कि अपने ही पूर्व सीएम बघेल भी छत्तीसगढ़ में पदयात्रा कर चुके थे। और हाउस पहुंचकर ही दम लिया।
हाथी हमलावर हो तो किसका दोष?

सरगुजा जिले के उदयपुर में 12 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। उदयपुर वही इलाका है जहां कोयला खदानों को मंजूरी दी गई है। हाथियों को देखने के लिए लोगों की भीड़ सडक़ पर जमा हो गई है। फॉरेस्ट गार्ड इन्हें भागने, दूर हटने के लिए कह रहा है लेकिन लोग नहीं सुन रहे हैं, बल्कि आवाज दे रहे हैं। कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें हाथियों को ललकारने, चिढ़ाने, उनके पास जाकर तस्वीर खींचने की कोशिश करने पर उसने हमला कर दिया है। अभी भीड़ है इसलिये शायद हाथी इनकी ओर न दौड़ें, मगर जब वे तब बदला ले लेते हैं जब उसे बीच जंगल में कोई मिल जाता है।
डीजे जोर से बजाने की मांग
उत्सवों के माहौल में ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ इस बार सरकार ने कुछ कड़े तेवर दिखाए हैं। जिलों में एसपी और थानों में थानेदारों ने डीजे, धुमाल के संचालकों को बैठकें लेकर चेतावनी दी है। इसमें सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के समय-समय पर दिए गए आदेश का हवाला दिया गया है। 55 डेसिबल से अधिक आवाज में डीजे बजाने पर जब्त कर लिया जाएगा। उसके आगे मालवाहकों को मोडिफाई कर डीजे लगाने पर भी जब्त करने का आदेश दिया गया है। अब प्रदेश भर में डीजे के कारोबार से जुड़े लोग गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें 55 डेसिबल से ज्यादा की अनुमति दी जाए। कार का हॉर्न भी 90 डेसिबल के करीब होता है। इस मांग पर शायद ही कोई रियायत बरती जाएगी, क्योंकि ध्वनि प्रदूषण का पैमाना भी कोर्ट ने ही तय किया है। यह बस्तियों, हाईवे, स्कूल, अस्पतालों, सब के लिए अलग-अलग है। अधिक तेज यानि नाचने वालों की अधिक भीड़, अधिक नशा और अपराध होने की आशंका भी उतनी ही ज्यादा। छत्तीसगढ़ में डीजे के नाम पर पुलिस वालों को भी नहीं बख्शा गया है। उनके साथ हाल ही में मारपीट की घटना रतनपुर में हुई थी। कई बार चाकूबाजी और यहां तक कि हत्या भी हो चुकी है। यदि सचमुच प्रशासन अपनी चेतावनी पर अमल करे तो आम लोगों को राहत मिलेगी।


