राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : भाजपा में नंबर वन
13-Sep-2024 3:48 PM
राजपथ-जनपथ : भाजपा में नंबर वन

भाजपा में नंबर वन 

भाजपा में सदस्यता अभियान चल रहा है। पार्टी ने इस बार पूरे प्रदेश में करीब 50 लाख सदस्य बनाने का टारगेट रखा है। मगर यह आसान नहीं है क्योंकि सदस्य बनाने की पारदर्शी है और इसके लिए दबाव भी नहीं बनाया जा सकता है। इन सबके बीच पार्टी ने एक स्कीम भी लांच की है जिसमें कहा गया कि जो भी कार्यकर्ता 3 हजार सदस्य बनाएंगे, उन्हें सीएम के डिनर करने का मौका मिलेगा।

दूसरी तरफ, विधायक,और सांसदों को अपने क्षेत्र में क्रमश: 10 और 20 हजार सदस्य बनाने का टारगेट दिया गया है। मगर अब तक ज्यादातर विधायक और सांसद पांच सौ सदस्य भी नहीं बना पाए हैं। इन सबके बीच तमाम दिक्कतों के बाद भी पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर  सबसे आगे निकल गए हैं। उन्होंने अब तक साढ़े 8 हजार सदस्य बना लिए हैं। उनका एक-दो दिन के भीतर टारगेट पूरा होने के आसार हैं। बाकी का परफॉर्मेंस क्या रहता है, इस पर नजरें टिकी हुई है। 

सीएम की चेतावनी  

सीएम विष्णुदेव साय ने कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में अफसरों को भाषा में संयम रखने की नसीहत दी है। कलेक्टर से लेकर निचले अफसरों के व्यवहार को लेकर कई तरह की शिकायतें हुई है। पिछले दिनों एक महिला तहसीलदार के ऊपर गाज भी गिरी थी। ओवरटेक करने पर ट्रैक्टर चालक के साथ बदसलूकी करने के मामले में महिला तहसीलदार को सस्पेंड भी कर दिया गया। 

धमतरी कलेक्टर नम्रता गांधी के खिलाफ भी कुछ इसी तरह की शिकायतें सामने आई है। स्थानीय व्यापारियों ने कलेक्टर पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए सीएम से लिखित शिकायत की थी। नम्रता के खिलाफ जिले के तहसीलदार भी आंदोलित हैं। बताते हैं कि पिछले दिनों कलेक्टर ने एक तहसीलदार के खिलाफ कमिश्नर से शिकायत की थी, और यह कहा था कि बिना बताए वो गैर हाजिर रहते हैं। कमिश्नर ने तहसीलदार को सस्पेंड कर दिया। 

अब बात सामने आई है कि तहसीलदार ने मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए एसडीएम से बकायदा छुट्टी ली थी, और फिर कलेक्टर को मौखिक रूप से सूचना दी थी। बावजूद इसके तहसीलदार को गैर हाजिर बताकर सस्पेंड किया गया। कार्रवाई के बाद प्रदेशभर के तहसीलदारों ने ऑनलाइन मीटिंग की, और फिर कमिश्नर से मिलकर कलेक्टर के खिलाफ शिकायत का फैसला लिया है। कलेक्टर कॉन्फ्रेंस के पहले सीएम तक सारी बातें पहुंच चुकी थी। यही वजह है कि उन्होंने किसी का नाम लिए बिना सबको चेता दिया है। 

वंदे भारत पर गोपनीयता

विशाखापट्टनम वंदे भारत एक्सप्रेस को लेकर निचले स्तर के आपरेशनल स्टाफ उहापोह से गुजर रहा है। डीआरएम समेत तमाम आला अफसर किसी भी तरह की जानकारी को निचले स्तर तक जाने नहीं दे रहे। इन कर्मचारियों को यह डर सता रहा है कि अफसर सूचना नहीं दे रहे और मौके पर काम न होने पर अपनी चमड़ी बचाने सस्पेंशन की गाज छोटे कर्मचारी पर गिरेगी। आखिर इतनी गोपनीयता किसलिए। ऐसा पहले कभी नहीं हुई। 

अफसर राज्यपाल, सरकार सांसद सबको जानकारी दे रहे लेकिन जो ट्रेन चलाने के जिम्मेदार हैं वे नावाकिफ हैं। कर्मचारियों को आधिकारिक स्तर पर ट्रेन को लेकर कोई सूचना नहीं हैं। उद्घाटन कब होना, उसके बाद कब से रूटीन में चलनी है, टिकिट बुकिंग कब से  शुरू करनी है, आदि- आदि। पहले कहा गया 15 सितंबर को पीएम मोदी टाटानगर से हरी झंडी दिखाएंगे। कल से चर्चा है 16 की शाम उद्घाटन होगा। उद्घाटन रायपुर में होगा या दुर्ग में, पता नहीं। दुर्ग स्टेशन में रंगरोगन, प्लेटफॉर्म पर टाइल्स बदलने जैसे खर्चीले काम शुरू कर दिए गए हैं। जबकि रायपुर में कोई तैयारी नहीं की गई।

जोखिम में जवान

बस्तर में यह जवान अपनी जान जोखिम में डालकर जमीन के भीतर बिछाए गए जिंदा आईईडी बम को बाहर खींचकर निकाल रहा है। इसका पहनावा देखिये- लोवर और टी-शर्ट- और बाइक में इस्तेमाल होने वाला सिर पर हेलमेट। यानि खुद की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे विस्फोटक निकालते समय कई जवान बस्तर में हताहत हो जाते हैं। (बस्तर टॉकीज हैंडल से सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट)

अंधविश्वास के जाल में फंसा छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के कसडोल में जादू टोना का अंधविश्वास चार निर्दोष लोगों की जान ले गया। गनीमत रही कि परिवार के दो लोग घर से बाहर थे, वरना यह संख्या शायद छह हो जाती। एनसीआरबी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। देश में अंधविश्वास और जादू टोने के चलते सबसे अधिक हत्याएं छत्तीसगढ़ में होती हैं। सन् 2021 में हुई ऐसी 74 हत्याओं में से 6 मानव बलि थीं।

21वीं सदी में हमारे राज्य के कई हिस्सों में लोग अब भी बलि दे रहे हैं। पुलिस हर साल 300 से ज्यादा मामले दर्ज करती है, जिनमें हत्या, बलवा, और सामाजिक बहिष्कार शामिल हैं। मई महीने में बलरामपुर में एक पिता ने अपने बेटे का गला काट दिया, क्योंकि उसे लगा कि यही सही है।

अब सवाल उठता है, सरकार क्या कर रही है? 2005 में टोनही प्रथा के खिलाफ कानून बना था, लेकिन हालात जस के तस हैं। कानून बनाना और उसका असर दिखना, दो अलग बातें हैं। सरकार चाहे तो साइबर फ्रॉड और ट्रैफिक नियमों की तरह जादू टोने के खिलाफ भी अभियान चला सकती है। समाज कल्याण विभाग का इस्तेमाल कर, स्कूल के पाठ्यक्रम में जागरूकता लाने वाले विषय शामिल किए जा सकते हैं। पर कौन करेगा? एक मात्र संगठन, श्रद्धा निर्मूलन समिति, इस मोर्चे पर व्यक्तिगत प्रयासों से काम कर रही है, और वह भी एक डॉक्टर के नेतृत्व में। 

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