राजपथ - जनपथ
झारखंड एमपी-सीजी के हवाले !!
छत्तीसगढ़ के भाजपा नेता झारखंड में पसीना बहा रहे हैं। पार्टी ने जब से केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को प्रभारी बनाया है, तब से उन्हें दोगुना मेहनत करनी पड़ रही है।
शिवराज सिंह एक-एक विधानसभा की बारीक समीक्षा कर रहे हैं, और रोजाना फील्ड में काम कर रहे नेताओं के लिए उनके आफिस से निर्देश आ रहे हैं।
यही नहीं, पार्टी ने झारखंड की सीमा से सटे सरगुजा के कई नेताओं को वहां तैनात दिया है। उनसे विधानसभा टिकट के लिए नामों का पैनल लिया जा रहा है। यहां केन्द्रीय मंत्री तोखन साहू, दोनों डिप्टी सीएम अरूण साव व विजय शर्मा को भी वहां चुनाव प्रबंधन देखने के लिए कहा गया है। वित्तमंत्री ओपी चौधरी के पास पूरे दो जिले की सीटों की जिम्मेदारी है।
चौधरी चार दिन झारखंड में रहकर आए हैं। वे भी वीडियो कॉन्फ्रेंस कर स्थानीय नेताओं के संपर्क में हैं। कुल मिलाकर शिवराज सिंह ने पूरी पार्टी को झोंक दिया है। छत्तीसगढ़ के नेता, शिवराज सिंह की कार्यशैली की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।
राधिका को लेकर कांग्रेस में कलह
हाल ही में भाजपा में आई राधिका खेरा ने एक बार फिर यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर लोकसभा चुनाव के दौरान राजीव भवन में अपने साथ कथित बदसलुकी के मामले पर कांग्रेस नेताओं को जमकर कोसा। और जब कांग्रेस नेताओं ने उन्हें जवाब दिया, तो प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को मानहानि की नोटिस भिजवा दी। अब राधिका खेरा के मसले पर तो श्मशानघाट में कांग्रेस के दो नेताओं के बीच कहा सुनी भी हो गई।
हुआ यूं कि कांग्रेस के पूर्व प्रभारी महामंत्री सुभाष शर्मा के अंतिम संस्कार के मौके पर पार्टी के बड़ी संख्या में नेता-कार्यकर्ता मौजूद थे। सुभाष शर्मा करीब 10 साल से अधिक समय तक प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री रहे हैं। उनके अंतिम संस्कार के मौके पर जुटे नेता आपस में राधिका खेरा के आरोपों पर बातचीत कर रहे थे।
इसी बीच पार्टी के एक प्रमुख नेता ने जूनियर की तरफ इशारा करते हुए उन्हें राधिका खेरा का दोस्त बता दिया। फिर क्या था, जूनियर नेता भडक़ गए, और उसी अंदाज में पलटवार किया। जूनियर नेता ने पूछ लिया कि राधिका खेरा को सरकारी उत्सव में किसके कहने पर बुलाया जाता था। जूनियर के तेवर देखकर प्रमुख नेता भी खामोश रह गए। राधिका अब कांग्रेस नेताओं पर भारी पड़ दिख रही हैं।
भाजपा के ओजस्वी सांसद
केंद्र में मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल को याद करिये। भाजपा सांसदों से जब पूछा जाता था कि आप छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के साथ हो रहे अन्याय को लेकर आवाज क्यों नहीं उठाते, तो जवाब मिलता था कि देश के विकास के लिए मालगाडिय़ों को समय पर चलाना, रेल लाइनों का आधुनिकीकरण जरूरी है। इसलिए ट्रेन यदि कैंसिल हो रहे हैं, देर से चल रही हैं तो उसे थोड़ा बर्दाश्त कर लेना चाहिए। सतर्क रहते थे कि कहीं जनता के असंतोष को हवा देंगे तो ऊपर बैठे लोग नाराज न हो जाएं। लेकिन मोदी के तीसरे कार्यकाल में कम से कम छत्तीसगढ़ के सांसद अपने बयानों और चि_ियों से लोगों का दिल जीतने में लगे हुए हैं। सांसद विजय बघेल को पेंशनर्स महासंघ के सम्मेलन में खूब तालियां मिलीं, जब उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश रहेगी कि मोदी की गारंटी झूठी साबित नहीं हो। कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। हमने महंगाई भत्ता, एरियर्स, केंद्र के समान गृह भाड़ा, 300 दिन का अवकाश नगदीकरण का वायदा किया है। अपनी हंसी मत उड़ाइये। मांगे पूरी न हुई तो कर्मचारियों के साथ खुद भी आंदोलन में उतर जाऊंगा। विधानसभा चुनाव में बघेल भाजपा की घोषणा पत्र समिति के संयोजक थे। सो, लोग घोषणाओं के पूरा नहीं होने पर उनसे ही सवाल करेंगे। जब कांग्रेस की सरकार थी तो ऐसी ही असहज स्थिति टीएस सिंहदेव के लिए हो गई थी। पर उन्होंने बघेल जैसा तेवर नहीं दिखाया, बल्कि सरकार का बचाव करते रहे। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने रायपुर में हुई रेलवे जोनल सलाहकार समिति की बैठक में ट्रेनों की लेटलतीफी और लंबित परियोजनाओं को लेकर अफसरों की खूब खिंचाई की। कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य रंजीत रंजन भी इसमें शामिल थीं लेकिन विपक्ष में होने के बावजूद वे भी सांसद अग्रवाल की तरह मुखर नहीं रहीं। सांसद अग्रवाल ने संसद में भी इस बात को रखा था। उसके बाद भी बयान दिए। सीमेंट की कीमत बढऩे पर भी उन्होंने अपनी ही सरकार को घेर लिया। उनके बयान के बाद कांग्रेस को भी पता चला कि ऐसी किसी समस्या से लोग जूझ रहे हैं। उसने तत्काल हाथोंहाथ लेकर इस मुद्दे पर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। बिलासपुर में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने भी रेलवे के साथ बैठक में ट्रेनों के विलंब होने, रद्द होने व लंबित प्रोजेक्ट्स पर काम आगे नहीं बढऩे को लेकर तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने अमृत भारत योजना के तहत बिलासपुर स्टेशन की पुरानी हेरिटेज बिल्डिंग को तोडक़र नया बनाने का विरोध भी सार्वजनिक कर दिया। इसके एक दिन बाद रेलवे ने साफ किया कि यह बिल्डिंग सुरक्षित रहेगी। इसे नहीं गिराया जाएगा। इसके पहले वह स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही थी। कुल मिलाकर, सांसद इन दिनों साबित करने पर तुले हुए हैं कि सरकार चाहे उनकी अपनी ही पार्टी की क्यों न हो, लोगों के काम न हुए तो नाक में दम करेंगे। इसका संबंध आप केंद्र में इस बार अकेले भाजपा की नहीं- गठबंधन की सरकार है, उससे भी जोड़ सकते हैं।
मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए..

यूपी के बदायूं के एचपी इंटरनेशनल स्कूल की टीचर्स ने बच्चों को मोबाइल से दूर करने के लिए एक अवेयरनेस प्लान बनाया। वीडियो में एक टीचर आंखों पर पट्टी बांधकर रोती नजर आती है। टीचर के पूछने पर कहती है कि ज्यादा मोबाइल देखने से आंखो से खून आ रहा है। इससे बच्चे सहम जाते हैं। इस दौरान दूसरी टीचर बच्चों को मोबाइल देती है लेकिन बच्चे लेने से मना कर देते हैं। बच्चों से मोबाइल छुड़ाने का ये तरीका ठीक है या नहीं इस पर बहस हो सकती है। मगर, यह तो सच है कि छोटे बच्चों को भी खतरे के हद तक इसकी लत लग रही है। ये सब नर्सरी के बच्चे हैं।


