राजपथ - जनपथ
तबादलों के आगे-पीछे
केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे अफसरों की वजह से मंत्रालय में छोटा सा फेरबदल हुआ। इसमें रजत कुमार को उद्योग विभाग का प्रभार दिया गया। रजत के साथ अमित कटारिया ने भी जॉइनिंग दी है, लेकिन वो डेढ़ महीने की छुट्टी पर चले गए हैं। फेरबदल में कुछ अफसर अपने पुराने विभाग लौटे हैं। मसलन, एसीएस रिचा शर्मा को वन के साथ-साथ खाद्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।
रिचा, रमन सरकार में लंबे समय तक खाद्य महकमा संभाल चुकी हैं। इसी तरह आईएएस के वर्ष-06 बैच के अफसर अंकित आनंद को सचिव आवास-पर्यावरण विभाग के साथ ही साथ चेयरमैन, पर्यावरण संरक्षण मंडल का दायित्व सौंपा गया है। अंकित पिछली सरकार में भी दोनों जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
पिछली सरकार के रणनीतिकारों के करीबी रहे दो अफसर भीम सिंह, और भूरे सर्वेश्वर नरेन्द्र ने इस सरकार में भी अपनी जगह बना ली है। भूरे को निर्वाचन आयोग में भेजा गया था। लेकिन उन्हें जल जीवन मिशन संचालक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसी तरह भीम सिंह को पंचायत सचिव के साथ-साथ सूडा के अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
आईएफएस अफसरों में पी. अरुण प्रसाद के नाम सबसे ज्यादा छह साल तक सीएसआईडीसी एमडी रहने का रिकॉर्ड है। अरुण प्रसाद सीएसआईडीसी के एमडी के दायित्व से तो मुक्त हो गए, लेकिन पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव का अहम दायित्व तो उनके पास यथावत रहेगा। सीएसआईडीसी एमडी का प्रभार विश्वेश कुमार को दिया गया है, जो कि वन विभाग में थे। इन सबके बावजूद एक सूची और आ सकती है। क्योंकि सचिव स्तर के अफसर डॉ. रोहित यादव इसी माह के अंत में आने वाले हैं।
निगम-मण्डल सनसनी
भाजपा में निगम-मंडलों की सूची जारी होने की चर्चा मात्र से विवाद खड़ा हो गया है। सुनते हैं कि सोशल मीडिया पर कुछ नामों को लेकर पार्टी के दो नेताओं के बीच आपस में बहस भी हुई। एक पुराने नेता को हस्तक्षेप कर विवाद को शांत करने के लिए आगे आना पड़ा। खास बात यह है कि सोशल मीडिया पर पार्टी के नेता खुलकर सूची को लेकर अपनी बात रख रहे हैं।
चर्चा तो यह है कि कथित सूची को लेकर चल रहे विवाद की जानकारी महामंत्री (संगठन) पवन साय, और क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल को भी दी गई है।
पार्टी के रणनीतिकारों की कोशिश है कि पितृपक्ष से पहले कुछ प्रमुख नेताओं को पद दे दिया जाए, जिन्होंने टिकट नहीं मिलने के बावजूद विधानसभा चुनाव में काम किया था। मगर विवाद को देखते हुए अगर सूची अटक जाए, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। देखना है आगे क्या होता है।
सीट बेल्ट कस कर बांध लें..
हाल ही में, कारों की बिक्री में गिरावट की खबरें आ रही थीं। इसी बीच, टाटा मोटर्स ने अपने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की कीमतों में 3 लाख रुपये तक की कटौती की घोषणा की है। कंपनी का दावा है कि वह इलेक्ट्रिक कारों की कीमत को पेट्रोल-डीजल कारों के बराबर लाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, सच यह है कि पेट्रोल और डीजल से चलने वाली कारें भी बड़ी संख्या में शोरूम और डीलरों के गोडाउन में पड़ी हैं। इनमें भी भारी छूट चल रही है। आमतौर पर डीलर्स चाहते हैं कि उनके पास आई गाडिय़ां 60 दिनों के भीतर बिक जाएं, लेकिन अब यह स्टॉक 80-90 दिनों तक फंसा हुआ है। डीलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कहना है कि उनके पास स्टॉक रिकॉर्ड स्तर पर है, इसलिए अधिक छूट देकर बिक्री बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
कुछ मॉडलों जैसे वैगन आर की बिक्री में 19 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। हालांकि, ग्राहकों के लिए यह छूट फायदेमंद है, लेकिन ऑटोमोबाइल उद्योग पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। यदि किसी फैक्ट्री में प्रतिदिन 50 कारें बनाने के लिए सेटअप तैयार है और बिक्री में कमी आती है, तो उसे कर्मचारियों की छंटनी या उत्पादन में कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बेहद सीमित है, निजी वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 2022 से 2023 के बीच राज्य में सभी प्रकार के वाहनों की बिक्री में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, जिसमें से 50 प्रतिशत से अधिक निजी वाहन थे। बाइक, स्कूटर और कारों की बढ़ती संख्या से सडक़ों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। चौड़ी सडक़ों, नए फ्लाईओवर और एक्सप्रेस-वे बनने के बावजूद ट्रैफिक की समस्या गंभीर होती जा रही है।
गणेश चतुर्थी से लेकर दीपावली तक त्योहारों के इस मौसम में कारों की बिक्री बढऩे की संभावना है, क्योंकि तब डीलर्स और निर्माता छूट और बढ़ा देंगे। दिसंबर में साल खत्म होने वाला ऑफर आएगा। मतलब, आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की सडक़ों पर निजी गाडिय़ों का दबाव और बढऩे वाला है। वहीं, केंद्र सरकार द्वारा घोषित रायपुर और बिलासपुर की एसी इलेक्ट्रिक बसों की नई खेप की प्रतीक्षा खत्म नहीं हो रही है। तो, आने वाले दिनों में सडक़ों पर अधिक निजी वाहनों, खासकर कारों का दबाव, अधिक जाम, अधिक हादसे, अधिक वायु प्रदूषण देखने को मिल सकता है। दुपहिया में चल रहे हों तो हेलमेट पहनना और कार पर हों तो सीट बेल्ट बांधना अब ज्यादा जरूरी हो जाएगा।


