राजपथ - जनपथ
सूचना आयोग और कोर्ट
खबर है कि मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति को लेकर राज्य वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेन्द्र पाण्डेय हाईकोर्ट जा सकते हैं। यह पद पिछले दो साल से खाली पड़ा है। पाण्डेय ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सीएम विष्णुदेव साय से मिलकर प्रमुख लोकायुक्त, और मुख्य सूचना आयुक्त की जल्द नियुक्ति को लेकर ज्ञापन सौंपा था। सरकार ने प्रमुख लोकायुक्त की नियुक्ति तो कर दी है, लेकिन मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति होना बाकी है।
अब तक तीनों मुख्य सूचना आयुक्त एके विजयवर्गीय, सरजियस मिंज, और एमके राउत रिटायर्ड आईएएस रहे हैं। वीरेन्द्र पाण्डेय इस बात पर जोर दे रहे हैं कि मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर किसी ब्यूरोक्रेट के बजाए न्यायिक सेवा अथवा सीनियर वकील की नियुक्ति की जाए।
पाण्डेय का तर्क है कि सूचना से जुड़े ज्यादातर मामले ब्यूरोक्रेट्स से जुड़े होते हैं, और सूचना देने में ही वो हील-हवाला करते हैं। सूचना आयोग से भी उन्हें एक तरह से संरक्षण मिल जाता है। रिटायर्ड जज अथवा सीनियर वकील की नियुक्ति से सूचना आयोग के काम में पारदर्शिता आएगी। अब सरकार क्या सोचती है, यह तो मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के बाद ही पता चल पाएगा। वैसे मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा सूचना आयोग में सूचना आयुक्त का एक पद पहले से ही खाली है। इसके लिए आवेदन मंगाए गए थे, और करीब 100 से अधिक आवेदन आए भी थे। मगर नियुक्ति रूक गई है। देखना है कि दोनों पदों पर नियुक्ति कब तक होती है।
अब महिला बड़ा मुद्दा है
पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव हरियाणा, और जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र व झारखंड के चुनाव के लिए घोषणा पत्र तैयार करने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इस काम में दोनों राज्यों के स्थानीय नेताओं के साथ-साथ अमिताभ दुबे भी उनका सहयोग कर रहे हैं। अमिताभ दुबे, दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दोस्त-पत्रकार सुमन दुबे के बेटे हैं। अमिताभ, कांग्रेस के रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। चर्चा है कि घोषणा पत्र में महिलाओं पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार लाने में महतारी वंदन योजना ने अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि उस वक्त कांग्रेस ने डॉ. चरणदास महंत, और टीएस सिंहदेव के सुझाव पर महिलाओं के लिए नारी न्याय योजना लाया गया था। पहले सीएम भूपेश बघेल इसके लिए तैयार नहीं थे, बाद में वे किसी तरह तैयार हुए, और पहले चरण के चुनाव के बाद इसकी घोषणा की गई। तब तक काफी देर हो चुकी थी।
खैर, भाजपा महाराष्ट्र में महतारी वंदन की तर्ज पर लाडली योजना ला रही है। इससे हर महिला के खाते में 1500 रुपए जमा होंगे। कुछ ऐसी ही योजना भाजपा की दूसरे राज्यों के लिए भी है। सिंहदेव और कांग्रेस के दूसरे रणनीतिकार भी महिला वोटरों को अपने पाले में करने के लिए इससे मिलती जुलती योजना लाने की तैयारी में है। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में महिलाओं की ताकत सिंहदेव देख चुके हैं। देखना है कि चुनाव वाले राज्यों के महिला वोटरों के लिए वे क्या कुछ कर पाते हैं।
दो आईपीएस पदोन्नत
राज्य पुलिस सेवा के दो अधिकारियों को आईपीएस में पदोन्नति को हरी झंडी मिल गई है। इनमें 1998 बैच के एएसपी प्रफुल्ल ठाकुर और विजय पांडे को आईपीएस अवार्ड हो गया है। दोनो अफसरों को 2014 बैच मिलना तय है। इसके आदेश जल्द जारी हो जाएंगे। इसके लिए पिछले दिनों दिल्ली में उच्च स्तरीय पदोन्नति समिति की बैठक हुई थी। इन्हें वर्ष 2022-23 में हुई रिक्तियों की पूर्ति के तहत पदोन्नति दी गई है । हालांकि ये दोनों, निर्धारित समय से तीन वर्ष देर से पदोन्नत हो पाए हैं। इसके पीछे, पैरा मिलिट्री फोर्स के दो अफसरों के छगपु में संविलियन और उनकी आईपीएस पदोन्नति कारण रही है। इसका रापुसे संघ ने रमन राज में बड़ा विरोध किया था। लेकिन सरकार ने अपने अफसरों की न सुनी। ये दोनों, अब तक पूरे राज्य कैडर के अफसरों की चेन टूटने का भी कारण बन चुके हैं ।
कोल घोटाले में फंसी डीपीसी
पुलिस के मुक़ाबले डिप्टी कलेक्टरों के आईएएस अवार्ड हर वर्ष होते रहे हैं। राप्रसे में तो 2008 बैच तक क्लियर हो गए हैं। वैसे इस कैडर में भी कोल घोटाले के चलते डीपीसी चार वर्ष से अटकी हुई है, क्योंकि पिछली सरकार ने सौम्या चौरसिया को आईएएस मिलने के पहले किसी और को आगे नहीं बढऩे दिया था। । इस बार भी, 5 जुलाई को डेट तय होने के बाद डीपीसी कैंसिल कर दी गई।
मेनका गांधी की अपील काम करेगी?

वन्यजीवों के प्रति गहरी संवेदना रखने वाली पूर्व सांसद मेनका गांधी ने सोशल मीडिया पर एक अपील की है। उन्होंने अचानकमार अभयारण्य में 10 साल पहले लाए गए सोनू हाथी को रिहा करने की मांग करते हुए पोस्ट डाली है जिसे केंद्रीय वन मंत्रालय और राज्य के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन को टैग किया है। सोनू हाथी की कहानी बड़ी तकलीफदेह रही है। सन् 2015 में उसे अंबिकापुर से यह कहकर अचानकमार में कैद कर दिया कि वहां उसने कई मनुष्यों को मार डाला। उसके व्यवहार में बदलाव आएगा, तब उसे छोड़ा जाएगा। कुछ महीने बाद इस हाथी की अचानकमार से आई तस्वीर से घमासान मच गया। उसके पैर मोटी जंजीरों से बांध दिए गए थे, जिससे खून रिस रहा था। मामला हाईकोर्ट में भी चला गया। अदालत ने तब चार माह बाद,, इलाज हो जाने पर छोड़ देने का आदेश दिया था। मगर सोनू अब तक कैद है। अब मेनका गांधी ने इस ओर सरकार का ध्यान यह कहते हुए दिलाया है कि गणेश चतुर्थी पर एक हाथी के प्रति दया की जाए। छत्तीसगढ़ के अनेक वन्यजीव प्रेमी पहले से ही सोनू की रिहाई की मांग करते आ रहे हैं। हाईकोर्ट का आदेश भी है लेकिन उसे छोड़ा नहीं जा रहा है। वन विभाग के पास इसका कोई ठोस कारण हो भी तो उसे वह जाहिर नहीं कर रहा है।
मूर्ति में झलकती रचनात्मकता

दूसरे कई त्यौहारों की तरह गणेश चतुर्थी भी भव्य से भव्यतम होता जा रहा है। हर गली में दो चार गणेश जी विराजे हैं। पर घरों में छोटी सी गणेश प्रतिमा की स्थापना को बच्चों के व्यक्तित्व विकास से जोडक़र देखा जाता है। कुछ साल से पीओपी प्रतिमाओं की बाजार में भरमार होने लगी है, जो पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है। ऐसे में बच्चों को इस पर्व में अपने हाथों से मिट्टी की प्रतिमा बनाने के लिए कई स्कूल, घरों में प्रेरित किया जा रहा है। उनके बीच प्रतियोगिताएं भी रखी जा रही है। ऐसी ही एक बच्ची के हाथ में मिट्टी के गणेश जी, जो उसने खुद से बनाए। तस्वीर यदुनंदन नगर बिलासपुर के एक स्कूल की है।


