राजपथ - जनपथ
रेलवे से सांसद खफा
बिलासपुर में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मंडल की बैठक में शुक्रवार को भाजपा सांसदों ने तेवर दिखाए। इस बैठक में छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, और ओडिशा के 10 सांसद सदस्य हैं। बैठक में 8 सांसद मौजूद थे। बैठक में भाजपा के सांसद इस बात को लेकर खिन्न थे कि रेलवे यात्री सुविधाओं के बजाए माल ढुलाई पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
रायगढ़ राजपरिवार के सदस्य, और राज्यसभा सदस्य देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने रेलवे को 44 मील जमीन दान में दी थी। तब रेलवे का वादा था कि उस रूट की सभी ट्रेनें रायगढ़, और सक्ती में रुकेंगी। कोरोना काल में जिन ट्रेनों का रायगढ़ में स्टॉपेज था, वो बंद हो गया। उन्होंने तत्काल प्रभाव से ट्रेनों का रायगढ़ में स्टॉपेज शुरू करने पर जोर दिया।
बताते हैं कि रेलवे अफसर इस पर कुछ ज्यादा आश्वासन देने की स्थिति में नहीं थे। तब देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि वो बैठक के बाद जनता को क्या कहेंगे? रेलवे बोर्ड के अफसर ने उन्हें समझाया कि ट्रेनों के स्टॉपेज पर तुरंत फैसला नहीं लिया जा सकता है। मगर इसका परीक्षण कर यथासंभव कदम उठाया जाएगा।
बैठक में पार्किंग के ठेके पर केन्द्रीय मंत्री तोखन साहू ने साफ तौर पर कह दिया कि पार्किंग का ठेका स्थानीय व्यक्ति को ही दिया जाना चाहिए। तोखन साहू सहित अन्य सांसदों की शिकायत थी कि रेलवे उनके पत्रों का जवाब नहीं देता है। कुल मिलाकर रेलवे अफसरों को सांसदों का कोप भाजन बनना पड़ा।
कांग्रेस में बदलाव के पहले...
नगरीय निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस से दर्जनभर जिलाध्यक्षों को बदलने की चर्चा चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज इस सिलसिले में पार्टी के प्रमुख नेताओं से रूबरू चर्चा भी कर रहे हैं। वरिष्ठ नेताओं ने अपनी तरफ से नाम भी दिए हैं।
रायपुर शहर जिला अध्यक्ष के लिए कई नेता दौड़ में हैं। शहर अध्यक्ष गिरीश दुबे को अध्यक्ष के रूप में दो कार्यकाल हो चुके हैं। उनका बदलना तय माना जा रहा है। इसके लिए पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय के अलावा सुबोध हरितवाल, श्रीकुमार मेनन, और विनोद तिवारी के नाम भी चर्चा है। मगर रायपुर दक्षिण के चुनाव की वजह से शहर अध्यक्ष की नियुक्ति कुछ समय के लिए टल भी सकती है।
दूसरी तरफ, रायपुर ग्रामीण अध्यक्ष उधो वर्मा के कार्यकाल को एक साल अधिक हो चुके हैं। हालांकि उधो वर्मा को लेकर कहीं कोई शिकायत नहीं है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेन्द्र साहू, और डॉ. शिव डहरिया उन्हें बदलने के पक्ष में नहीं है। मगर जिलाध्यक्षों के बदलाव की चर्चा से संगठन की गतिविधियां थोड़ी धीमी हो गई है। जिलाध्यक्ष बदले जाएंगे या नहीं, इस पर फैसला अगले कुछ दिनों में हो सकता है।
विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद से ही प्रदेश कांग्रेस में बदलाव की चर्चा चल रही है लेकिन इसमें काफी देर हो चुकी है। कई सीटों पर पदाधिकारियों ने खुद चुनाव लड़ा और हार गए लेकिन वे अब तक पद पर जमे हुए हैं। इसकी गिनती प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज से ही शुरू की जा सकती है। बिलासपुर के जिला ग्रामीण अध्यक्ष विजय केशरवानी सहित कुछ अन्य इनमें शामिल हैं। एक ओर भाजपा ने जोर-शोर से सदस्यता अभियान शुरू कर दिया है, सबको नए सिरे से सदस्य बनाने जा रही है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अपनी कार्यकारिणी और जिला इकाईयों में फेरबदल नहीं कर पा रही है। प्रदेश के प्रभारी महासचिव सचिन पायलट की दिलचस्पी भी पूर्ववर्ती महासचिवों के मुकाबले कम दिखाई देती है। कुछ ही महीनों बाद नगरीय निकायों के चुनाव होने वाले हैं। अब यह सुनने में आ रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष चाहे न भी बदला जाए लेकिन जिलों में अध्यक्षों को बदला जाएगा, साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी से भी कुछ पदाधिकारी हटाए जाएंगे और कुछ नए लोग लाए जाएंगे।
बस्तर का बिसर...

इन दिनों पूरे प्रदेश की तरह बस्तर में भी नदी नालों में खूब पानी है। मछलियां भी खूब मिल रही हैं। इस उपकरण को ‘बिसर’ कहा जाता है। बिसर एक पारंपरिक जाल की तरह होता है, जिसे पानी के प्रवाह में बिछाया जाता है। जैसे ही मछलियाँ इस के संपर्क में आती हैं, इसी में फंस जाती हैं। बिसर बस्तर के आदिवासी समाज की एक पुरानी और प्रभावी मछली पकडऩे की तकनीक है, जो प्राकृतिक संसाधनों के प्रति उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।


