रायपुर में चौथा हिंद युग्म महोत्सव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 21 सितंबर। पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम में शनिवार को चौथे हिंद युग्म साहित्य महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना ने दीप प्रज्वलन कर दो दिवसीय उत्सव की शुरुआत की।
इस अवसर पर देश के शीर्षस्थ कवि-कथाकार और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल महोत्सव के मुख्य आकर्षण रहे। उनके चर्चित उपन्यास दीवार में एक खिडक़ी रहती थी की अभूतपूर्व सफलता पर प्रकाशक ने उन्हें 30 लाख रुपये की रॉयल्टी का प्रतीकात्मक चेक भेंट किया। यह उपन्यास मार्च से जून 2025 तक लगातार अमेजऩ बेस्टसेलर सूची में पहले स्थान पर रहा। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी नरेश सक्सेना और युवा लेखक नीलोत्पल मृणाल रहे।
इसी मंच से विनोद कुमार शुक्ल की नई पुस्तक कहानियों का कहानियाना का विमोचन भी हुआ। उन्होंने कहा कहानियाना शब्द नया है। जब अभिव्यक्ति के लिए कोई शब्द नहीं मिलता, तो मैं नया शब्द गढ़ लेता हूँ—जैसे नदियों का समुद्र में मिलना ‘समुद्राना’। इस अवसर पर उनकी पत्नी सुधा शुक्ल और अंतर्राष्ट्रीय पाठिका नीतू गुजराल भी मौजूद थीं।
प्रमुख सत्र
कविता कैंपस- महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों के चयनित विद्यार्थियों—अंकिता कौशिक, उदय शंकर साहू, चंचल कुंवर, प्रतीक कश्यप और यशपाल जंघेल—ने कविता पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। निर्णायक मंडल में नरेश सक्सेना, आनंद शंकर बहादुर और बाबुषा कोहली सम्मिलित रहे।
दलित आत्मकथा पर विमर्श: ज़ख्म से ज़ुबान तक विषय पर प्रो. सरवर कुमार चहल और राकेश कुमार सिंह ने विचार साझा किए।
कविता और डिजिटल युग: पूजा राय, मुकेश कुमार सिन्हा, रोहित कुमार और अंकुश कुमार ने इंस्टाग्राम व डिजिटल माध्यमों में कविता की नई संभावनाओं पर चर्चा की।
हिंदी साहित्य के आउटसाइडर: मानस भारद्वाज, सुशील कुमार, अश्वनी प्रताप और डॉ. आनंद कुमार कश्यप ने हाशिए के साहित्य पर विमर्श किया।
नई किताबों का विमोचन: हिमांशु गुप्ता की कविता-संग्रह सहर और संजीव बख्शी का उपन्यास गांव, खेड़ा, मौहाभाठा (पूर्व उपन्यास भूलन कांदा पर आधारित फिल्म भूलन द मेज़ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है)।
पंडवानी प्रस्तुति: चेतन देवांगन की गायकी ने लोकसंगीत का रंग बिखेरा। सस्पेंस साहित्य पर विमर्श: जयंती रंगनाथन, रणविजय, के डी सिंह, गफ्फ़़ार अत्तार और संजय शेफर्ड़ ने जुर्म, जाँच और जिज्ञासा विषय पर चर्चा की।
राइटिंग वर्कशॉप: मोहित, हेना नक़वी, विनीता अस्थाना, कोशलेन्द्र मिश्र और लोकेश गुलयानी ने लेखन सिखाने की प्रक्रिया पर अनुभव साझा किए।
विशेष सत्र: "जो मेरे घर कभी नहीं आएँगे" (चिन्मयी त्रिपाठी, जोएल मुखर्जी) और "इश्क़ बग़ावत: प्यार में हल्ला बोल" — नीलोत्पल मृणाल का ‘उलगुलान शो’ विशेष आकर्षण रहा।
डॉ. रमन सिंह ने सराहा आयोजन
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी महोत्सव में शिरकत की। उन्होंने कहा—"हिंद युग्म महोत्सव साहित्य, कला और संस्कृति का ऐसा संगम है जो पूरे देश और विश्व में अपनी छाप छोड़ेगा। यह गर्व का विषय है कि देशभर से 100 से अधिक साहित्यकार इसमें शामिल हुए हैं।" उन्होंने विशेष रूप से विनोद कुमार शुक्ल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका उपन्यास "दीवार में एक खिडक़ी रहती थी" साधारण परिवार की कहानी के माध्यम से समाज की गहरी असमानताओं को उजागर करता है। व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि राजनीति के 40 वर्षों में उन्होंने कभी ऐसा दिन नहीं देखा जब वे किताब न पढ़ें।
इस अवसर पर साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने भी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि यदि लेखकों को लेखन से ही जीवनयापन का अवसर मिले, तो निश्चित रूप से युवा बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में आएँगे।
21 सितंबर के कार्यक्रम
सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक कई महत्वपूर्ण सत्र होंगे:
रील्स, रिव्यू और रीडिंग: अर्पित आर्या, रेणु मिश्रा, मधु चतुर्वेदी, उज्ज्वल मल्हावनी
स्त्री लेखन: दोहरी दुनिया का सफऱ: सुषमा गुप्ता, अंकिता जैन, चित्रा पंवार, ज्योति शर्मा, मुदिता शर्मा
‘चार फूल हैं और दुनिया है’ की स्क्रीनिंग: अचल मिश्रा, निहाल पराशर
साठ सेकंड की कहानियाँ: अंजली मिश्रा, सर्वेन्द्र विक्रम सिंह, पूनम पूर्णाश्री, शिवोहम
बड़े पर्दे का छत्तीसगढ़: मनोज वर्मा, ऋचा ठाकुर, मीर अली मीर, राहुल कुमार सिंह
क्या ्रढ्ढ साहित्यिक लेखन का विकल्प हो सकता है? विजेन्द्र एस विज, सूरज प्रकाश डड़सेना, विश्वास शर्मा, प्रकृति करगेती, पूजा उपाध्याय
एक अनाम पत्ती का स्मारक: नरेश सक्सेना के नए कविता-संग्रह का लोकार्पण व चर्चा (सहभागी—रमेश अनुपम, नरेश सक्सेना)
न लिख पाने की बेचैनी: राकेश कायस्थ, विजयश्री तनवीर, यतीश कुमार, संगीता मनराल विज
‘नीली गली, बारिश और आल्हा’ का विमोचन
नई वाली हिंदी: प्रवृत्ति और पहचान: नीलोत्पल मृणाल
लोकगीत प्रस्तुति: चोला माटी के राम (पूनम विराट व साथी)
बेस्टसेलर: नाम का जादू या बिक्री का सच?: दिव्य प्रकाश दुबे
परदे और पन्ने: बॉलीवुड लेखक वैभव विशाल से संवाद (संवादकर्ता: कृष्णकांत जोन्नलगड्डा)
गाँव-देहात का बड़ा परदा: फ़ैसल मलिक से बातचीत (संवादकर्ता: गौरव गिरिजा शुक्ला)
रंगमंचीय प्रस्तुति: भई राहगीर ये तुम किस गाड़ी पे चढ़ गए राहगीर (क्रहृत्र समूह व सहयोगी संस्थाएँ)