रायपुर
रकम से कोलकाता में सोना खरीदा गया, आमानाका पुलिस जांच कर रही
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 22 सितंबर। राजधानी के बड़े बिल्डर डेवलपर सुबोध सिंघानिया के नाम पर 8.70 लाख रुपए की ठगी हो गई। ठग ने इंडियन ओवरसीज बैंक टाटीबंध शाखा से एक अन्य खातेदार के खाते में रकम ट्रांसफर करा लिया।
मिली जानकारी अनुसार बीते बुधवार को दोपहर 1.30 बजे की है ।अपनी रिपोर्ट में कमी मुर्मु ने बताया कि उनकी शाखा में हर्षित अर्बन सिटी बिल्डकॉन प्रा.लि. का एक रेरा रेगुलर बैंक खाता है। कम्पनी के डायरेक्टर सुबोध सिंघानिया हैं। उक्त कम्पनी हमारे बैंक के शाखा की हाई वैल्यू कस्टमर है इसीलिये उक्त कम्पनी को हमारी शाखा द्वारा यथासंभव शीघ्रातिशीघ्र प्राथमिकता के आधार पर बैंकिंग सेवा प्रदान की जाती है। 17 सितंबर को भी जब शाखा के मुख्य प्रबंधक मुकेश कुमार बैंक की विभागीय ट्रेनिंग के लिए चेन्नई गये हुए थे तब मुकेश कुमार के मोबाइल नं.
9296170263 से फोन आया जो अपने को सिंघानिया बिल्डकॉन प्रा.लि. का डायरेक्टर सुबोध सिंघानिया होना बताया एंव दो करोड़ का शाखा में फिक्स्ड डिपॉजिट कराने के संबंध में बैंक की ब्याज दर आदि के बारे में पूछताछ किया। चुंकि बैंक के मुख्य प्रबंधक बाहर होने के कारण मुख्य प्रबंधक के द्वारा अमकी को कॉल एवं मैसेज किया गया। एक मो.नं. देकर जानकारी देने के लिये बोला गया। तब अमकी ने मोबाईल नबंर जो अपने आप को सुबोध सिंघानिया बता रहा था, उससे सम्पर्क किय। बैंक की सभी योजनाओं और ब्याज दर एवं एफ.डी. की जानकारी वाटसएप मैसेज से भेजा। उसके पश्चात कमी के मोबाईल पर काल बैक फोन आया और फोनकर्ता ने अपने आपको मेसर्स सिंघानिया बिल्डकॉन प्रा.लि. का डायरेक्टर सुबोध सिंघानिया के रूप में परिचय दिया और नाराजगी के अंदाज में मुझसे सीधा सवाल किया कि कम्पनी की ओर से रोज भेजे जाने वाले अंतरण के पत्रों पर अभी तक कार्यवाही कर कम्पनी के बैंक खाते से रकम पत्र में दिये गये निर्देश के अनुसार व्यक्तियों के खाते में अंतरित क्यों नहीं हुई है? अमकी ने
उन्हें तत्काल बताया कि हमारी शाखा से कम्पनी के निर्देशानुसार सभी आज के अंतरण किये जा चुके हैं तब उसने कहा कि मेरे ऑफिस में एक पार्टी बैठी है जिसे तत्काल पैसे का भुगतान किया जाना आवश्यक है और फोन पर बात करते करते उन्होंने मेरे वाट्स एप पर उक्त मेसर्स सिंघानिया बिल्डकॉन प्रा.लि. कम्पनी का एक लेटर पैड पर टंकित एवं सिंघानिया बिल्डकॉन प्रा.लि. के डायरेक्टर की सील लगा हुआ एवं डायरेक्टर सुबोध सिंघानिया का हस्ताक्षरित पत्र प्रेषित किया। इस पर यह निर्देश शाखा प्रबंधक को लिखित में दिया गया था कि मेसर्स सिंघानिया बिल्डकॉन प्रा.लि. के उक्त बैंक खाता क्र. 34790**** से 8,95,000/- की राशि को श्री अवतार सिंह खाता क्र. 42400****, आईएफएस कोड- क्च्यढ्ढष्ठ0004244 में तत्काल अंतरित करने का दबाव बनाया गया। और फोन में बात करते-करते ही उक्त रकम को अंतरण करने को कहा गया। जब अमकी ने कम्पनी का खाता देखकर उन्हें बताया कि कम्पनी के खाते में पर्याप्त रकम नहीं है। इसीलिये उक्त 8,95,000/- राशि का अंतरण नहीं हो सकता। इस पर उन्होंने पूछा कि खाते का बैलेंस क्या है । जब उन्हें बताया कि खाते में 8,70,000/- की राशि है तो फोनकर्ता ने कहा कि तत्काल 8,70,000/- की राशि अंतरित कर दी जाये। वह पुन: सुधार कर पत्र भेज देंगे कहा गया । और बात करते करते फोनकर्ता ने 8,70,000/- की राशि अंतरण करा ली। उसके पश्चात् फोनकर्ता द्वारा मुझे वाट्स एप कर उक्त कम्पनी की सिस्टर कन्सर्न मेसर्स आर्चर पावर एण्ड इस्पात प्रा.लि. के खाता क्र. से भी 16,50,000/- की राशि नामे कर बेनिफिशरी अवतार सिंह के खाता क्र. एवं 1200,000/- की राशि का अंतरण मुकेश कुमार गुज्जर खाता में अंतरण करने निर्देशित किया था। तब खाता को चेक कर अमकी ने बताया कि उक्त खाते में भी राशि पर्याप्त नहीं इसीलिये उक्त रकम अंतरित नहीं हो सकती। इस पर वह मुझसे पूछने लगे कि उक्त खाते में कितनी रकम है जिसके पश्चात् मुझे उक्त फोनकर्ता का व्यवहार संदिग्ध प्रतीत हुआ। बातचीत के दौरान उक्त फोनकर्ता द्वारा कम्पनी का पैन नम्बर बताकर बैंक में कम्पनी के संचालित अन्य बैंक खातों के बारे में भी पूछताछ की जाने लगी। इस पर अमकी ने शालिनता पूर्वक टालमटोल कर फोन रख दिया गया। और सर्वप्रथम बैंक की आरटीजीएस शाखा को उक्त अंतरण के 15-20 मिनट के भीतर ही ई-मेल कर उक्त आरटीजीएस की गई राशि को रोकने कहा। परन्तु तब तक राशि बैंक ऑफ इंडिया के उक्त खाते में अंतरित हो चुकी थी । इसके पश्चात् अमकी ने सिंघानिया बिल्डकॉन की दूसरी डायरेक्टर श्रीमती मोनाली सुबोध सिंघानिया को काल कर उक्त अंतरण के बारे में जानकारी पूछी जिस पर उन्होंने उक्त अंतरण के संबंध में अनभिज्ञता बताई। और अपने एकाउण्टेंट पाठक से अपने ही फोन से बात कराई इस पर एकाउण्टेंट ने ऐसे किसी अंतरण और पत्र के जारी किये जाने पर स्पष्ट इंकार किया। और वह मोबाईल नम्बर कम्पनी के किसी भी कर्मचारी के होने के विषय में इंकार किया। कुछ ही देर में कम्पनी से एकाउण्टेंट श्री पाठक एवं मैनेजर प्रदीप कुमार गुप्ता बैंक आकर अंतरण के संबंध में समस्त जानकारी ली । तो पता चला कि उक्त रकम अवतार सिंह पिता श्री धरमिंदर सिंह के बैंक ऑफ इंडिया कलकत्ता के खाता से ट्रान्सफर होकर कोलकत्ता के कोटक महिन्द्रा बैंक के खाता नाम सेनको गोल्ड लिमिटेड मे ट्रांसफर हो चुका है। और रकम से सोना खरीदा गया है।
इस पर बैंक मैनेजर ने रविवार शाम आमानाका पुलिस में धारा 318-4,336-2,340-2 के तहत मामला दर्ज कर साइबर सेल की मदद से पड़ताल शुरू कर दी है।
कुछ इसी तरह की ठगी पिछले दिनों विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल के बेटे नितिन के नाम का इस्तेमाल करते हुए भी की गई थी। इसमें अंतत: बैंक को करीब 58 लाख रुपये नितिन को लौटनी पड़ी थी।


