रायपुर
स्त्री लेखन, डिजिटल प्रभाव और लेखकीय दुविधाओं पर हुआ विमर्श
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 22 सितंबर। पंडित दीनदयाल ऑडिटोरियम में हिंद युग्म महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को साहित्य, सिनेमा, संगीत और संवाद देखने को मिला।
दिन की शुरुआत रील्स, रिव्यू और रीडिंग सत्र से हुई, जिसमें अर्पित आर्या, रेणु मिश्रा, मधु चतुर्वेदी और उवल मल्हावनी ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के साहित्यिक प्रभाव पर चर्चा की। इसके बाद स्त्री लेखन: दोहरी दुनिया का सफऱ सत्र में सुषमा गुप्ता, अंकिता जैन, चित्रा पंवार, ज्योति शर्मा और मुदिता शर्मा ने महिलाओं की लेखन यात्रा और सामाजिक जि़म्मेदारियों के बीच संतुलन पर विचार रखे।
न लिख पाने की बेचैनी विषय पर राकेश कायस्थ, विजयश्री तनवीर, यतीश कुमार और संगीता मनराल विज ने लेखक की रचनात्मक दुविधाओं पर बात रखी। इसी क्रम में नीली गली एवं बारिश और आल्हा का विमोचन हुआ। नई वाली हिंदी: प्रवृत्ति और पहचान विषय पर नीलोत्पल मृणाल ने अपने विचार रखे। साठ सेकंड की कहानियाँ सत्र ने दिखाया कि रील्स और शॉर्ट वीडियो साहित्य का नया माध्यम कैसे बन रहे हैं। शाम को मशहूर लेखक दिव्य प्रकाश दुबे के साथ बेस्टसेलर: नाम का जादू या बिक्री का सच? सत्र हुआ, जबकि परदे और पन्ने संवाद में लेखक वैभव विशाल और कृष्णकांत जोन्नलगड्डा ने दर्शकों को बाँधे रखा। बड़े पर्दे का छत्तीसगढ़ सत्र में मनोज वर्मा, ऋचा ठाकुर और मीर अली मीर ने क्षेत्रीय सिनेमा की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की।
क्या ्रढ्ढ साहित्यिक लेखन का विकल्प हो सकता है? सत्र में विजेंद्र एस. विज, सूरज प्रकाश डड़सेना, विश्वास शर्मा, प्रकृति करगेती और पूजा उपाध्याय ने गहन विमर्श किया।
जितने स्थानीय होंगे, उतने वैश्विक: विनोद कुमार शुक्ल
वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना के कविता-संग्रह एक अनाम पत्ती का स्मारक का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल ने कहा—आप जितने स्थानीय होंगे, उतनी ही वैश्विकता आपके भीतर होगी। अपनी स्थानीयता और बचपन की स्मृतियों को सँभालकर रखना चाहिए।
सिनेमा और साहित्य के संगम के रूप में ‘चार फूल हैं और दुनिया है’ की विशेष स्क्रीनिंग हुई। इसके बाद निर्देशक अचल मिश्रा और निहाल पराशर के साथ संवाद का आयोजन किया गया। यह डाक्यूमेंट्री रिलीज़ के बाद से ही सुर्खियों में है और दर्शकों के बीच खूब चर्चित रही है।
आयोजन के पहले दिन भी विनोद कुमार शुक्ल पर बनी एक और डाक्यूमेंट्री ‘हमारे विनोद जी’ दिखाई गई थी, जिसका निर्माण वरिष्ठ पत्रकार आलोक पुतुल और फिल्ममेकर देवेंद्र शुक्ला ने किया है।
हबीब तनवीर की थियेटर टीम से जुड़ी पूनम विराट और उनकी टीम ने लोकगीतों की प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। विशेषकर जब उन्होंने चोला माटी के राम गाया, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने हबीब तनवीर के नाटकों के गीतों की प्रस्तुति दी। युवाओं के प्रिय गायक-लेखक राहगीर ने राहगीर ये तुम किस गाड़ी पे चढ़ गए, कच्छा घड़ा और मेरे गाँव आओगे जैसे गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
हिंद युग्म महोत्सव ने साबित किया कि यह घुमंतू साहित्य उत्सव केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद, प्रयोग और विविध कलाओं का साझा मंच है। महोत्सव में हिंद युग्म प्रकाशन के स्टॉल से लगभग 2500 किताबों की बिक्री हुई, जिसमें सबसे अधिक लोकप्रिय विनोद कुमार शुक्ल की दीवार में खिडक़ी रहती थी और कहानियों का कहानियाना, तथा नीलोत्पल मृणाल की डार्क हॉर्स रही।


