‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलौदाबाजार, 24 दिसम्बर। शिक्षा, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना के त्रिवेणी संगम का साक्षी बना अंबुजा विद्यापीठ रवान, जहां शनिवार 20 दिसंबर को विद्यालय का 34वां वार्षिक उत्सव ‘स्पेक्ट्रा’ अत्यंत भव्य, सुव्यवस्थित एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन विद्यार्थियों की अंतर्निहित प्रतिभा, रचनात्मकता एवं सर्वांगीण विकास का जीवंत प्रतिबिंब रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ अपराह्न 4.30 बजे मुख्य अतिथियों के आगमन के साथ हुआ। मंच पर विराजमान अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। इसके पश्चात राज्य गीत की सुमधुर प्रस्तुति हुई। सुरक्षा के प्रति सजगता का परिचय देते हुए कंप्यूटर विभाग के विभागाध्यक्ष संदीप बसु महोदय के द्वारा सुरक्षा निर्देश प्रस्तुत किया गया एवं विद्यार्थियों द्वारा सेफ्टी सॉन्ग प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को जागरूकता का संदेश दिया।
इसके उपरांत अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया गया। स्वागत गीत ने पूरे सभागार को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय कुमार पाण्डेय ने अपने स्वागत उद्बोधन एवं वार्षिक प्रतिवेदन में सत्र 2024–25 की शैक्षणिक उपलब्धियों, बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम, खेलकूद, विज्ञान, कला, साहित्य, सामाजिक सेवा एवं नवाचार से जुड़ी गतिविधियों का विस्तार से विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु विद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि दीपक सोनी (आईएएस), कलेक्टर बलौदाबाजार-भाटापारा, मुख्य अतिथि जगदीश बर्मन (क्षेत्रीय अधिकारी, सीबीएसई, रायपुर), तथा वंदनीय अतिथि – एस. आर. तिर्की (चीफ प्लांट मैनेजर, अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अतिथियों ने अपने प्रेरणास्पद उद्बोधनों में कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्य एवं सामाजिक दायित्व का समावेश आवश्यक है। उन्होंने विद्यालय के अनुशासित वातावरण एवं विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान शैक्षणिक, खेलकूद एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं प्रतिस्पर्धात्मक भावना को प्रोत्साहन मिला।
वार्षिक उत्सव का मुख्य आकर्षण रहा सांस्कृतिक उत्सव, जिसमें नर्सरी से कक्षा बारहवीं तक के विद्यार्थियों ने विविध रंगारंग प्रस्तुतियां दीं।
नन्हे बच्चों द्वारा प्रस्तुत ‘गंगा अवतरण’ ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इसके बाद बॉलीवुड रेट्रो नृत्य (1960-70, 1980-90, 1991-2000) के माध्यम से भारतीय सिनेमा की स्वर्णिम यात्रा को मंच पर सजीव किया गया।
विभिन्न कक्षाओं द्वारा प्रस्तुत थीम आधारित बॉलीवुड नृत्य, ऋतु नृत्य, लोकनृत्य, म्यूजिकल रॉक बैंड, यूनिटी एंड डाइवर्सिटी, नेचर डांस ने सामाजिक एकता एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
‘देवलोक पर साइबर अटैक’ शीर्षक से प्रस्तुत हिंदी नाटक ने साइबर सुरक्षा जैसे समसामयिक विषय को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
इसके अतिरिक्त हॉरर कॉमेडी, थीमैटिक डांस, वेस्टर्न फ्यूजन, साउथ इंडियन डांस, इंडियन रिदमिक इम्प्रोवाइजेशन, कॉन्टेम्पररी माइम, सेमी क्लासिकल एवं भांगड़ा ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। हर प्रस्तुति में विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और मंचीय आत्मविश्वास स्पष्ट झलक रहा था।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर समन्वयक पद्माकर मिश्रा द्वारा भावपूर्ण धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन समिति, प्राचार्य महोदय, सभी अतिथियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, अभिभावकों, विद्यार्थियों, तकनीकी टीम, सुरक्षा कर्मियों एवं सहयोगी स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सामूहिक सहयोग एवं समर्पण से ही यह भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।
अंत में राष्ट्रीय गान के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। संपूर्ण आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित, प्रेरणादायक एवं स्मरणीय रहा, जिसने शिक्षा के साथ संस्कृति के महत्व को पुन: रेखांकित किया।