बलौदा बाजार

वन अग्नि की रोकथाम के लिए जनभागीदारी जरूरी-अफसर
11-Feb-2026 4:38 PM
वन अग्नि की रोकथाम के लिए जनभागीदारी जरूरी-अफसर

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलौदाबाजार, 11 फरवरी। गर्मी के मौसम में वन क्षेत्रों में आग की घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा वन अग्नि सीजन 2026 को ध्यान में रखते हुए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला बल्दाकछार परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम बरबसपुर में आयोजित की गई। कार्यशाला में वन अग्नि प्रबंधन से संबंधित तैयारियों, ग्रामीणों की सहभागिता तथा विभागीय समन्वय पर चर्चा की गई।

यह कार्यशाला वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर के निर्देश पर आयोजित की गई, जिसमें वे स्वयं उपस्थित रहे। अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि वन अग्नि सीजन 16 फरवरी से प्रारंभ होकर 15 जून  तक प्रस्तावित है।

कार्यशाला में बीते पांच वर्षों के दौरान बलौदाबाजार वनमंडल अंतर्गत दर्ज वन अग्नि की घटनाओं की समीक्षा की गई। बीट गार्डों, वन प्रबंधन समिति के अध्यक्षों एवं सदस्यों के साथ चर्चा कर यह विश्लेषण किया गया कि किन क्षेत्रों में आग की घटनाएं हुईं और उनके संभावित कारण क्या रहे। इन बिंदुओं के आधार पर आगामी अग्नि सीजन के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर विचार किया गया।

वन विभाग के अधिकारियों द्वारा बताया गया कि अधिकांश मामलों में जंगलों में आग प्राकृतिक कारणों से नहीं, बल्कि मानवीय गतिविधियों के कारण लगती है। चर्चा के दौरान बीड़ी-सिगरेट के जले हुए अवशेष फेंकना, महुआ संग्रह के दौरान पत्तों को जलाना तथा खेतों में पराली जलाने जैसी गतिविधियों को संभावित कारण बताया गया। इस संबंध में ग्रामीणों और समिति सदस्यों से सतर्कता बरतने की अपील की गई। कार्यशाला में आग से होने वाले नुकसान पर भी जानकारी दी गई। अधिकारियों के अनुसार आग से वन संपदा, वन्यजीवों के आवास और जैव विविधता प्रभावित होती है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता, जल स्रोतों और स्थानीय पर्यावरण पर भी इसका प्रभाव पड़ता है, जिससे लोगों की आजीविका पर असर पड़ सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि वन अग्नि की रोकथाम के लिए जनभागीदारी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से ग्राम स्तर पर पोस्टर, मुनादी और प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी दलों की तैनाती तथा फायर ब्लोअर जैसे उपकरणों के उपयोग की जानकारी भी दी गई।

वन अग्नि नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी देते हुए बताया गया कि अग्नि नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है। इसके साथ ही सतत गश्त के लिए स्ट्राइक फोर्स वाहनों के माध्यम से दल तैनात किए जाते हैं। कार्य आयोजना के अनुसार 6 मीटर एवं 12 मीटर चौड़ी फायर लाइनों की कटाई तथा फायर वाचरों की तैनाती की जा रही है। महुआ संग्रह से जुड़े संभावित जोखिम को देखते हुए महुआ वृक्षों की ग्रामवार सूची भी तैयार की जा रही है।

कार्यशाला के दौरान यह जानकारी दी गई कि वर्ष 2025 में दंडखार, नावाडीह, अल्दा, सुरबाय, मुढ़ीपार एवं सैयाभाटा वन प्रबंधन समितियों के अंतर्गत किसी भी आगजनी की घटना दर्ज नहीं हुई। इसके लिए संबंधित समितियों को सम्मानित किया गया।

वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने कहा,वन अग्नि प्रबंधन को केवल विभागीय जिम्मेदारी न मानकर सामूहिक दायित्व के रूप में देखने की आवश्यकता है। जिन क्षेत्रों में आग की घटनाएं नहीं हुईं, उनकी भूमिका सराहनीय है। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को फील्ड में फायर ब्लोअर के उपयोग की व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दी गई। आग की स्थिति में उपकरणों के सुरक्षित संचालन की प्रक्रिया समझाई गई।


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