शंभू यादव
कोण्डागांव, 11 जनवरी (‘छत्तीसगढ़’)। धार्मिक नजरिए से 11 जनवरी कोण्डागांव के लिए महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि आज यहां के स्थानीय देव सोन कुंवर आंगा, भुरसा कुंवर आंगा और बंजारीन माता के सवार का लगभग 450 वर्ष पश्चात नव सृजन किया गया।
सवार का नव सृजन कार्य लगभग 5 माह पूर्व किया गया था, जो कि अब जाकर पूरा होने वाला है। इस रिवाज के तहत शिशु जन्म के दौरान किए जाने वाले सभी नेन किए जा रहे हैं, जिनमें नाल कटने से लेकर हल्दी कार्यक्रम शामिल हैं। इस अनुष्ठान को पूरा करने कोण्डागांव के माता पुजारी, गायता, सिरहा, आम जन भारी संख्या में कोण्डागांव के कोपाबेड़ा बुढ़ाराव कोर्ट में उपस्थित हुए।
इस बारे में शीतला माता मंदिर समिति के सह सचिव और देव भगत नरपति पटेल ने बताया कि, सन 1630 के आसपास तीनों देवी-देवता के सवार का पहली बार सृजन हुआ था, जिसके बाद अब वर्ष 2022 में लगभग 450 वर्ष के बाद दोबारा सृजन किया जा रहा है।
नरपति पटेल के अनुसार, सवार नव सृजन की प्रक्रिया लगभग 5 माह पूर्व प्रारंभ हुई थी। देव आदेश अनुसार उनके सवार का सृजन कार्य प्रारंभ किया गया। इसके लिए दक्षिण वन मंडल अंतर्गत नारंगी परिक्षेत्र से काष्ठ तेंदू और बेल का पेड़ चिंहिन्त किया गया। जिससे सवार का निर्माण किया गया हैं।
बिना किसी दाग वाले पेड़ की लकड़ी से हुआ सवार निर्माण
आंगा देव व बंजारीन माता जिन पर सवार रहती है, वे पूरी तरह से कष्ठ निर्मित होता है। इन काष्ठ का चुनाव भी काफी जटिल होता है। नरपति पटेल के अनुसार आंगा के लिए तेंदू और पलकी के लिए जिस बेल पेड़ से लकड़ी लिया जाना होता है, उस पेड़ को पहले अच्छे से परखा जाता है। उस पेड़ पर पहले से किसी भी हथियार से चोट या निशान नहीं होना चाहिए। इसी अधार पर चुनाव के बाद पेड़ को गायता पूजरी पूजन करने के बाद कटवाते हैं। इससे प्राप्त काष्ठ का कोपाबेड़ा स्थित बुढ़ाराव कोर्ट में लाकर सवार का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया।
शिशु जन्म नेन के सभी रिवाज हैं शामिल
किसी बच्चें के जन्म लेने पर धार्मिक मान्यता अनुसार जितने नियम होते हंै, वे सारे नियम आज कोण्डागांव के कोपाबेड़ा स्थित बुढ़ाराव कोर्ट में देखने के लिए मिला। यहां सबसे पहले नाल काटने की विधि की गई। इसके लिए कोपबेड़ा गायता की पत्नी गायतीन और सिरसी नायक की पत्नी नायक़ीन खास तौर से आमंत्रित की गई थी। नाल कटने के बाद नारंगी नदी में स्नान सभी ने स्नान किया। स्नान कर वापसी के दौरान कोंडीभाटा में श्रृंगार और हल्दी रचन का रस्म पूरा किया गया।
दो दिनों तक चलते वाले इस अनुष्ठान के के बाद सोनकुंवर आंगा का नगर गायता कोर्राम परिवार के घर, भुरसाकुंवर आंगा को सोढ़ी परिवार (मांझी परिवार) के घर और बंजारीन माता को बड़ेपुजारी घर 12 फरवरी को विदा कर दिया जाएगा।
नकटामुंडा, राम मंदिर तालाब और बंधा तालाब के साथ हुआ था आंगा और पालकी का निर्माण
नगर के धार्मिक जुड़ाव रखने वाले मंदिर समिति के सदस्य व कोटवार के अनुसार, सन 1630 के आस पास कोण्डागांव में नकटामुंडा, राम मंदिर तालाब, बंधा तालाब का निर्माण किया गया था। इसी के साथ पहली बार सोनकुंवर व भुरसाकुंवर के लिए आंगा और बंजारीन माता के लिए पालकी का निर्माण किया गया था।