कोण्डागांव
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
कोण्डागांव, 9 जनवरी। विकासखण्ड माकड़ी अंतर्गत संकुल समन्वयकों ने 8 व 9 जनवरी को दो दिवसीय नवा जतन प्रशिक्षण प्राप्त किया। कोविड-19 के चलते पिछले दो सत्रों में राज्य भर की शालाएं प्रभावित हुई हैं, जिसमें बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर बुरा असर पड़ा है। इससे बच्चों के अध्ययन-अध्यापन में लर्निंग गैप और लर्निंग लॉस हुआ है।
इस डेढ़ साल की अवधि में बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए बहुत सारी शैक्षणिक तरीके अपनाए गए। जैसे ऑनलाइन क्लास, ऑफलाइन, मोहल्ला क्लास, बूल्टू बोल, ब्लूटूथ विधि, छतरी वाले गुरुजी, अंगना मा शिक्षा, आमा राईट, प्रिंट रिच विधि आदि।
इस बारे में मीडिया प्रभारी शिक्षक शैलेन्द्र ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि, इस लर्निंग गैप और लर्निंग लॉस को दूर करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा उपचारात्मक करने के लिए नवा जतन (सेतु पाठयक्रम 2.0) कार्यक्रम में राज्य स्तर पर लागू किया गया है। इस योजना में बच्चों की बुनियादी शिक्षा को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से बच्चों को सौ प्रतिशत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से कैसे जोड़ें व प्रतिफल प्राप्त करेंगे, बताया गया है।
प्रशिक्षण विकासखण्ड माकड़ी के संकुल समन्वयकों व पीएलसी सदस्यों को दिया गया। जिसमें इस कार्यक्रम में निहित निर्देशों, बिंदुओं के प्रयोग से विस्तारपूर्वक चर्चा-परिचर्चा के माध्यम से एसआरजी शिक्षकों द्वारा बताया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यशाला जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान डाइट बस्तर के निर्देशन व जिला शिक्षा अधिकारी राजेश मिश्रा के नेतृत्व मेें जिला मिशन समन्वयक महेंद्रनाथ पांडे के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ, जिसमें जिला प्रशिक्षण प्रभारी सहायक परियोजना समन्वयक रूपसिंह सलाम, हीरालाल चुरेंद्र एसआरजी, शैलेन्द्र ठाकुर, एसआरजी, दीपक प्रकाश, एसआरजी शंकरलाल मंडावी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी रामलाल नेताम, बीआरसी रामप्रसाद कुपाल, बीआरपी, माकड़ी विकासखण्ड के 42 संकुल के समन्वयक व तीन पीएलसी सदस्य मौजूद रहे।


