राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : प्रकृति हमें पुकार रही है, आइये इसे सुनें..
07-May-2026 5:56 PM
राजपथ-जनपथ : प्रकृति हमें पुकार रही है, आइये इसे सुनें..

प्रकृति हमें पुकार रही है, आइये इसे सुनें..

छत्तीसगढ़ शायद केवल 36 गढ़ों की भूमि नहीं है। इससे अधिक गढ़ों का साक्षात स्वरूप है, यदि जंगलों की ओर निकल जाएं। अनगिनत घने साल-बांस के जंगलों को, लहराती नदियों, झरनों, गुफाओं और पठारों को किन गढ़ों में गिना जाएगा? दूसरे राज्यों का भ्रमण करने के पहले अपने छत्तीसगढ़ को ही ठीक से घूम लेना चाहिए, सरगुजा से लेकर बस्तर के छिपे दूरस्थ इलाकों तक। अपने यहां लगभग 44 प्रतिशत इलाका वनाच्छादित है, जो देश के कुल वनों का लगभग 12 प्रतिशत है। अनेक जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों का आश्रय है। देशभर में राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों की भरमार है, मगर सेंट्रल इंडिया को जोडऩे वाली कड़ी छत्तीसगढ़ ही है। अचानकमार, इंद्रावती, कांगेर, उदंती-सीतानदी, तमोर पिंगला में दूसरे राज्यों से पहुंचने वाले बाघ बताते हैं कि यह उनके लिए स्वर्ग है। बाघ ही नहीं, तेंदुआ, भालू, जंगली भैंस-बायसन, गौर और हिरणों का यह इलाका है। सैकड़ों पक्षी प्रजातियों, सरीसृपों और कीट-पतंगों का भी घर है। अब तो बारनवापारा काले हिरणों की बढ़ती आबादी के चलते राष्ट्रीय वन्यजीव-मानचित्र में अलग स्थान बना चुका है।

ऐसे मौके पर छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ पत्रकार और वन्यजीव प्रेमी प्राण चड्ढा, जो एक बेहतरीन फोटोग्राफर भी हैं, ने फेसबुक पर एक पोस्ट दर्ज की है। ऑरेंज ओक लीफ- हम आप शायद इसे नहीं समझ पाएंगे, यदि इस नाम से कोई पुकारेगा। यह तितली की एक दुर्लभ प्रजाति है। आंतरिक रूप से अनंत सौंदर्य और जीवन लिप्सा से भरपूर। सूखे पत्ते की तरह यह जीव दिखता है। मगर, जैसे ही पंख खोलती है- नीले, नारंगी और काले रंगों की चकाचौंध बिखेर देती है। शिकारियों से बचने के लिए वह प्राय: अपने पंखों को बंद रखती है। यह तस्वीर अचानकमार अभयारण्य से ली गई है। यह तितली छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यभारत के अन्य जंगलों में भी पाई जाती है। हम हाथी जैसे विशालकाय जानवरों की बात करते हैं लेकिन ऐसे छोटे-छोटे जीव-जंतुओं, कीट और तितलियों का भी अस्तित्व जलवायु परिवर्तन, वन कटाई और मानवीय अतिक्रमण के चलते संकट में है। कार्बन संग्रहण, जल संरक्षण और आदिवासी संस्कृति के भी संरक्षण में इन छोटे-छोटे कीट-पतंगों की बड़ी भूमिका होती है।

महिला अफसरों पर भरोसा, विकास कार्यों पर फोकस

सीएम विष्णु देव साय ने बुधवार को 43 आईएएस अफसरों के तबादले कर प्रशासन में बड़ा फेरबदल किया। इस बदलाव में सरकार ने एक तरफ लंबे समय से एक ही विभाग संभाल रहे अफसरों की जिम्मेदारियां बदलीं गईं। दूसरी तरफ, कुछ अहम विभागों में नए प्रयोग भी किए हैं।

सबसे चर्चित फैसला गृह विभाग को लेकर रहा। राज्य गठन के बाद पहली बार किसी महिला आईएएस अफसर को गृह विभाग की कमान सौंपी गई है। 1997 बैच की सीनियर आईएएस निहारिका बारिक सिंह को गृह विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। इससे पहले एके विजयवर्गीय, राबर्ट हरंगडोला, आरपी बगई, एनके असवाल और बीवीआर सुब्रमण्यम जैसे वरिष्ठ अफसर इस विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

फेरबदल में एसीएस ऋचा शर्मा, मनोज पिंगुआ, सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आर संगीता, बसवराजु, डॉ. कमलप्रीत सिंह और मुकेश बंसल समेत कई अफसरों के प्रभार बदले गए हैं। इनमें अधिकांश अफसर दो साल से ज्यादा समय से एक ही विभाग में कार्यरत थे। सीएम सचिवालय में पदस्थ मुकेश बंसल से वित्त विभाग लेकर लोक निर्माण विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। माना जा रहा है कि सरकार निर्माण कार्यों, खासकर सडक़ों और अधोसंरचना परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है। सुशासन तिहार के दौरान सरगुजा क्षेत्र में खराब सडक़ों को लेकर मुख्यमंत्री की नाराजगी भी सामने आई थी। ऐसे में पीडब्ल्यूडी में यह बदलाव सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।

यही नहीं, आबकारी विभाग की जिम्मेदारी दुबारा एक महिला अफसर को सौंपी गई है। पहले यह विभाग आर संगीता संभाल रही थीं, जबकि अब खाद्य सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले को आबकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। एक और उल्लेखनीय है कि प्रदेश के 33 में से 10 जिलों में महिला कलेक्टर बनाई गई हैं।

मनिंदर कौर ऐसी तीसरी अफसर...

केंद्र सरकार ने श्रीमती डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी की प्रतिनियुक्ति दो वर्ष बढ़ा दी है। वह कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं। वह अगस्त 28 तक केंद्र में बनी रहेंगी। इस वृद्धि के साथ वह छत्तीसगढ़ कैडर की ऐसी तीसरी अफसर हो गई हैं जो एक दशक से अधिक समय से केंद्र में सेवाएं दे रहीं हैं।

केन्द्रीय अधिकारी-कर्मचारी ही सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 60 वर्ष है। ऐसे में एक अधिकारी कर्मचारी की कुल सेवावधि 30-38 वर्ष रहती है। प्रदेश में सबसे ज्यादा पहले सबसे ज्यादा समय तक बीवीआर सुब्रमण्यम ने दो से तीन चरणों में 15-16 वर्ष तक पीएमओ, वर्ल्ड बैंक, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव के रूप में सेवाएं दी है। वे रिटायर भी दिल्ली से ही हुए। उनके बाद अमित अग्रवाल को भी 12 वर्ष से अधिक हो रहे हैं। इसी तरह से स्व. एम. गीता भी राज्य गठन के बाद मप्र, फिर केंद्र में सेवाओं  के  15 वर्ष बाद छत्तीसगढ़ आईं थीं। मनिंदर कौर को भी दो चरणों में 12 वर्ष हो गए हैं। तीन वर्ष के कूलिंग ऑफ पीरियड के बाद कोई भी अभा सेवा का अफसर फिर से प्रतिनियुक्ति पर जा सकते हैं। वैसे भी आईएएस, आईपीएस, आईएफएस केंद्र के अफसर होते हैं वह जब चाहे बुला सकता है। एक तरह से वे राज्य में प्रतिनियुक्ति पर माने जा सकते हैं। और फिर केंद्र रिजल्ट ओरिएंटेड अफसरों को ही बुलाता है।

बहरहाल मनिंदर के अतिरिक्त उनके पति गौरव द्विवेदी को भी दो चरणों में 10 वर्ष बीत रहे हैं। गौरव द्विवेदी भी केंद्रीय प्रसार भारती में सीईओ हैं। इनके अलावा एसीएस ऋचा शर्मा भी 7 वर्ष केंद्र में सेवाएं दे चुकी थीं। सीएस विकासशील भी 7 वर्ष केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रहे। उनकी पत्नी निधि छिब्बर भी, अभी नीति आयोग में प्रतिनियुक्ति पर हैं। इनके अलावा पूर्व सीएस अमिताभ जैन, एसीएस मनोज पिंगुवा, सुबोध सिंह, सोनमणि बोरा, निहारिका बारिक, रोहित यादव,पी. संगीता, अमित कटारिया,रजत कुमार आदि  भी 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लौटे हैं। 

उधर, आईपीएस अधिकारियों में  स्वागत दास, बिनय कुमार सिंह, रवि सिन्हा तो केंद्र में 20-25 वर्ष रहकर रिटायर हुए। दिवंगत पूर्व डीजीपी विश्वरंजन जरूर छत्तीसगढ़ लौटे। इन अफसरों के अलावा अमित कुमार ऐसे अकेले आईपीएस हैं जो 7 वर्ष से अधिक डेपुटेशन पर रहे। वहीं आईएफएस कैडर में छत्तीसगढ़ का ऐसा अफसर नहीं जो 5 वर्ष से अधिक प्रतिनियुक्ति पर रहा हो।


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