राजपथ - जनपथ
विधायक की अनदेखी पर बवाल
कवर्धा जिले की भाजपा राजनीति इन दिनों अंदरूनी खींचतान को लेकर चर्चा में है। विवाद की वजह भोरमदेव जंगल सफारी के शुभारंभ कार्यक्रम को माना जा रहा है। यह सरकारी आयोजन रविवार को हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डिप्टी सीएम विजय शर्मा शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मंत्री केदार कश्यप ने की, जबकि सांसद संतोष पाण्डेय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
हालांकि पूरे विवाद की जड़ पंडरिया विधायक भावना बोहरा का नाम आमंत्रण सूची से गायब होना है। जिले की विधायक होने के बावजूद उन्हें न तो निमंत्रण दिया गया और न ही कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति रही। इससे उनके समर्थकों में नाराजगी खुलकर सामने आई है।
कवर्धा जिले में दो विधानसभा सीटें हैं, कवर्धा से खुद विजय शर्मा प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि पंडरिया से भावना बोहरा विधायक हैं। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधि के रूप में उनका नाम आमंत्रण पत्र में होना स्वाभाविक माना जा रहा था। नाम छूटना महज त्रुटि थी या जानबूझकर किया गया, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन समर्थक इसे राजनीतिक उपेक्षा बता रहे हैं।
मामला अब सोशल मीडिया तक पहुंच गया है, जहां समर्थक खुलकर विरोध जता रहे हैं। 24 घंटे के भीतर कलेक्टर और डीएफओ से जवाब मांगने की चेतावनी दी गई है, और इस सिलसिले में पोस्टर भी जारी किए गए हैं।
खुद भावना बोहरा ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उनका और विजय शर्मा का कुछ मुद्दों को लेकर पहले से मतभेद रहा है। हल्ला है कि सीएम विष्णुदेव साय से भी इस मामले की शिकायत की है और पार्टी संगठन में आपत्ति दर्ज कराई है। फिलहाल सरकार या संगठन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विवाद के और बढऩे के संकेत मिल रहे हैं।
केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति का ट्रेंड
राज्य पुलिस सेवा में एक नया रुझान देखने को मिल रहा है। वर्ष-2021 बैच के आईपीएस अधिकारी चिराग जैन भी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की तैयारी में हैं। वर्तमान में वे एडिशनल एसपी के पद पर हैं और हाल ही में पीएचक्यू में पदस्थ हुए हैं।
इससे पहले 2020 बैच के आईपीएस विकास कुमार भी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा चुके हैं। उनकी पोस्टिंग हो चुकी है और उन्हें रिलीव भी कर दिया गया है।
परंपरागत रूप से आईपीएस अधिकारियों के लिए कम से कम एक जिले में एसपी के रूप में कार्य करने के बाद ही केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने का चलन रहा है। लेकिन अब यह ट्रेंड बदलता दिख रहा है और अधिकारी शुरुआती दौर में ही केंद्र का रुख कर रहे हैं।
विकास कुमार का मामला थोड़ा अलग रहा। उन्हें कवर्धा के लोहारडीह हिंसा प्रकरण में निलंबित किया गया था, आरोप था कि वे स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रहे। हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई। इसके बाद उन्हें पीएचक्यू में एसपी बनाया गया और फिर रायपुर कमिश्नरी में डिप्टी कमिश्नर के रूप में पदस्थ किया गया।
उनके बैच के कई अधिकारी पहले ही जिले के एसपी बन चुके थे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला। ऐसे में उन्होंने केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति का विकल्प चुना और अब वे केंद्र में सेवाएं देने रवाना हो चुके हैं।
यह नाम कहाँ से आया?

रायपुर -जबलपुर के बीच चलने वाली ट्रेन नंबर 11701/11702, जिसे अब तक लोग रायपुर-जबलपुर एक्सप्रेस के नाम से जानते थे, उसे जनवरी 2026 में एक नया नाम दिया गया, ‘मूक माटी एक्सप्रेस’। कई लोग इस नाम को लेकर हैरान होते हैं, कि यह कहाँ से आया है?
यह नामकरण जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज की स्मृति में किया गया है। ‘मूक माटी’ उनकी प्रसिद्ध रचना का नाम है, जिसे उनके साहित्यिक और दार्शनिक योगदान के रूप में व्यापक पहचान मिली है। रेलवे मंत्रालय ने 7 जनवरी 2026 के आसपास इस नाम परिवर्तन का आदेश जारी किया। यह बदलाव मुख्य रूप से आचार्य विद्यासागर जी को श्रद्धांजलि देने और उनके विचारों को व्यापक स्तर पर स्मरण में रखने के उद्देश्य से किया गया है।
हालात को हराया, वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज

जीवन जब बार-बार ठोकर देता है, तब कुछ लोग टूट जाते हैं। मगर, कुछ लोग उसी दर्द को अपनी ताकत बना लेते हैं। अंबिकापुर, सरगुजा की शिवानी सोनी की कहानी दूसरे श्रेणी की है। बहुत छोटी उम्र में ही पिता ने परिवार का साथ छोड़ दिया। घर की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। वह आंगनबाड़ी में काम करती हैं। सीमित आय में पूरे परिवार को वह संभालती रहीं। इन परिस्थितियों में शिवानी का बचपन बीता, लेकिन मां ने उसके सपनों को टूटने नहीं दिया, बेटी को आगे बढऩे का हौसला दिया।
शिवानी का एक समय ऐसा भी था जब वह घोर निराशा के करीब पहुंच चुकी थी। उसी दौर में खेल ने उनके जीवन में चमत्कार की तरह प्रवेश किया। शुरुआत बास्केटबॉल से हुई। मां रोज उन्हें मैदान तक लेकर जाती थीं। लेकिन एक चोट ने रास्ता बदल दिया। कोच की सलाह पर उन्होंने मिनी गोल्फ और स्पीडबॉल को अपनाया।
धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदला और जुनून ने उपलब्धियों का रूप ले लिया। शिवानी ने लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया, 2017 से 2019 तक, फिर 2023 और 2024 में। इस निरंतरता के चलते उनका नाम इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कर लिया गया। वह छत्तीसगढ़ की एकमात्र खिलाड़ी हैं, जिन्होंने स्पीडबॉल और मिनी गोल्फ दोनों में देश का प्रतिनिधित्व किया है।
उनकी झोली में वर्ल्ड चैंपियनशिप और इंडो-इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं के कई ब्रॉन्ज मेडल हैं, जबकि एशियन और वर्ल्ड स्तर पर भी उन्होंने शीर्ष स्थान हासिल किए। दुर्भाग्यवश, आज भी आर्थिक चुनौतियां बनी हुई हैं। शिवानी चाहती हैं कि उन्हें खेल कोटे से सरकारी नौकरी मिले, ताकि वह अपनी मां का सहारा बन सकें।
जरा सी जगह तो दे दी

अब आदिवासी गौरव तो अच्छी बात है, लेकिन आदिवासी प्रतीक चिन्हों के बीच, नाम और जय जोहार से घिरे हुए मोटर सायकिल के नंबर को जरा सी जगह मिल गई है, वह बड़ी मेहरबानी हो गई है!


