राजपथ - जनपथ

राजपथ-जनपथ : आईबी में गए आंजनेय वार्ष्णेय
09-May-2026 7:07 PM
राजपथ-जनपथ : आईबी में गए आंजनेय वार्ष्णेय

आईबी में गए आंजनेय वार्ष्णेय

छत्तीसगढ़ कैडर के एक और आईपीएस अधिकारी आंजनेय वाष्र्णेय केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं। वर्ष-2018 बैच के आईपीएस वाष्र्णेयकी पोस्टिंग इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में हुई है। वे हाल तक सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के एसपी के रूप में पदस्थ थे और शुक्रवार को उन्हें रिलीव कर दिया गया।

आंजनेय वाष्र्णेय इससे पहले बीजापुर और धमतरी जिले के एसपी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनके केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद राज्य पुलिस महकमे में सीमित स्तर पर फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि कोंडागांव जिले में भी एसपी का पद फिलहाल खाली चल रहा है। वहां एएसपी को एसपी का प्रभार दिया गया है, जबकि एसपी पंकज चंद्रा प्रशिक्षण के लिए हैदराबाद गए हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कुछ जिलों के एसपी बदलने की संभावना जताई जा रही है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ कैडर के अफसर जयदीप सिंह पहले ही आईबी में सेवाएं दे रहे हैं।

 

फार्म में 33 प्रश्न, फील्ड में 5-6,..!

जनगणना-2027 के लिए ऑनलाइन स्वगणना का चरण पूरा होने के बाद अब प्रगणकों का घर-घर सर्वे जारी है। 15 से 30 अप्रैल तक ऑनलाइन स्वगणना कराने वालों के आंकड़े भी सामने आ गए हैं। करीब तीन करोड़ आबादी वाले छत्तीसगढ़ में, सिंगल-डबल सिम मिलाकर 4.30 करोड़ से अधिक मोबाइल उपभोक्ता होने के बावजूद केवल 1 लाख 49 हजार 800 लोगों ने ही ऑनलाइन फार्म भरा। अब 1 मई से जनगणना कर्मी घर-घर जाकर जानकारी जुटा रहे हैं।

पहले तो वे स्व-गणना के ऑनलाइन पर्ची को नहीं मान रहे। उनका कहना है कि ये मैच नहीं कर रहे, और फिर जनगणना फार्म के प्रश्नों में डंडी मार रहे। फार्म में कुल 33 प्रश्न शामिल हैं, जिन्हें प्रगणकों को नागरिकों से पूछकर भरना है। लेकिन फील्ड से जो शिकायतें मिल रही हैं, वे अलग तस्वीर दिखा रही हैं। फाफाडीह, रमण मंदिर, अश्विनी नगर और लाखे नगर क्षेत्र के कम से कम 8-9 लोगों ने बताया कि प्रगणक महज 5-6 सवाल पूछकर बाकी हम भर लेंगे, कहकर अगले घर की ओर बढ़ जाते हैं।

लोगों के मुताबिक प्रगणक अक्सर ऐसे समय पहुंचते हैं जब घर के पुरुष सदस्य मौजूद नहीं होते और उपलब्ध महिलाओं या अन्य सदस्यों से सीमित जानकारी लेकर फार्म पूरा मान लिया जाता है। जिन सवालों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है उनमें मकान खुद का है या किराए का, घर ईंट या टाइल्स का है, भोजन में चावल खाते हैं या रोटी, केबल टीवी है या डीटीएच, जाति, मोबाइल-लैपटॉप, एसी, कार या दोपहिया वाहन जैसी जानकारियां शामिल हैं।

इसके बाद के प्रश्न क्या हैं और प्रगणक अपनी ओर से क्या भर रहे हैं, इसे लेकर लोगों में संशय है। जबकि सरकार की ओर से डेटा गोपनीय रखने का भरोसा दिया गया है, अधूरी या अनुमान आधारित जानकारी भविष्य में परेशानी का कारण बन सकती है।

इस संबंध में संयुक्त संचालक जनगणना श्री साव का कहना है कि विभाग की टीम शहर में घूम-घूमकर प्रगणकों की कार्रवाई की निगरानी कर रही है और सभी प्रश्न पूछे जा रहे हैं। उनका कहना था कि उनके अपने क्षेत्र में भी लोगों ने पूरी जानकारी लिए जाने की पुष्टि की है। हालांकि फील्ड से आ रही शिकायतों पर उन्होंने कहा कि यदि कहीं ऐसी स्थिति है तो संबंधित प्रगणकों को निर्देशित किया जाएगा। 


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