धमतरी
पांच दिवसीय कर्णेश्वर मेला शुरू
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
नगरी, 16 फरवरी। सिहावा में श्रृंगी ऋषि पर्वत के नीचे महानदी के तट पर ग्राम देउर पारा स्थित है यहां महानदी व बालका नदी का संगम होता है, माघ पूर्णिमा पर यहा हज़ारो श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते है। समीप ही 11वी शताब्दी में राजा कर्णराज द्वारा निर्मित शिव मंदिर,राम जानकी मंदिर, नन्दी,गणेश मन्दिर,विष्णु के मंदिर है इस स्थान को लोग कर्णेश्वर धाम के नाम से जानते है कर्णेश्वर धाम में माघ पूर्णिमा के अवसर पर 16 फरवरी से विशाल मेला का आयोजन प्रति वर्ष अनुसार किया जा रहा है। कर्णेश्वर धाम मे सोमवंशी राजाओं द्वारा निर्मित भगवान शिव एवं राम जानकी का मंदिर है।
मंदिर में लगे सोलह पंक्तियों की आयताकर भीतर शिलालेख कांकेर के सोमवंशी राजा कर्णराज के शासनकाल में शक् सम्वत 1114 में उत्कीर्ण कराया गया। शिलालेख संस्कृत भाषा के देवनागरी लिपि में लिखी गयी है।शिलालेख से विदित होता है कि महराज कर्णराज ने अपने वंश की कीर्ति को अमर बनाने के लिए कर्णेश्वर देवहद मे छह मंदिरों का निर्माण किया।
एक अपने नि:संतान भाई कृष्णराज के नाम, दूसरा मंदिर प्रिय पत्नी भोपालादेवी के नाम निर्मित कराया। कर्णराज ने त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना कर प्रतिष्ठा किया। कर्णराजद्वारा निर्मित मंदिर में शिव के अलावा मर्यादा पुरुषोत्तम राम जानकी मंदिर प्रमुख है।
भगवान शिव को बीस वर्ग फुट आयताकार गर्भ गृह में प्रतिष्ठित किया गया ही। गर्भगृह का शीर्ष भाग कलश युक्त है। मंदिर का अग्रभाग मंडप शैली मे बना है, जिसकी छत आठ कोडीय प्रस्तर स्तंभों पर टिक़ी है। मंदिर का पूरा भाग पाषाण निर्मित है।
जनश्रुति है कि कांकेर के सोमवंशी राजाओं के पूर्वज जग्गनाथपूरी उड़ीसा के मूल निवासी थे। सोमवंशी राजाओं ने पहले पहल नगरी मे अपनी राजधानी बनायी।
असाध्य रोगों के लिए अमृत कुण्ड
कर्णेश्वर धाम मे एक प्राचीन अमृतकुण्ड है।किवदंती ही कि इस कुंड के जल के स्नान से कोड जैसे असाध्य रोग ठीक हो जाता था।
सोमवंशी राजाओ ने इसे मिट्टी से भर दिया। अमृतकुंड से लगा हुआ छोटा सरोवर मोती तालाब राजा के दो पुत्रियां सोनई-रूपई के नाम से जाना जाता है। सोनई रूपई कांकेर के राजा धर्म देव की पुत्रियाँ थी ।मन्दिर परिसर में विविध देवी देवताओं की प्रतिमा है सोम वन्शीय राजाओ का विजय स्तम्भ है माघपुर्णिमा के पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालु बालका व महानदी के संगम में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य के भागीदार बनेगे।
लुप्त हो जाती हैं अस्थियां
बालका व महानदी संगम स्थल से दक्षिण दिशा में महानदी पर पचरी घाट पर स्थित कुण्ड में अस्थियां विसर्जित की जाती है मान्यता है कि यहाँ ढाई पहर में विसर्जित अस्थिया लुप्त हो जाती है।
कर्णेश्वर धाम में विकास के कई कार्य हो रहे
ट्रस्ट अध्यक्ष विकल गुप्ता ने बताया कि कर्णेश्वर धाम के विकास में ट्रस्ट के संरक्षक व सिहावा विधायक डॉ.लक्ष्मी ध्रुव का सतत प्रयास रहता है,जनभागीदारी से भी कार्य हो रहे है कुंड तालाब का सौन्दरीकरण, मन्दिर तक पहुँच मार्ग से कर्णेश्वर धाम की शोभा बढ़ी है ।
बाबा बालग़ीर करते है ंदेवी देवताओं की अगुवाई
मेला में इलाके भर से पारम्परिक रूप से देवी देवताओं का आगमन होगा। बस्तर, उड़ीसा के देवी देवता भी पुन्नी स्नान व कर्णेश्वर महादेव का दर्शन कर बाबा बालगीर के अगुवान व छिपली पारा के टिकरी वाली के मार्गदर्शन में माता खम्बेस्वरी से जोहार भेंट कर मड़ाई की परिक्रमा करेंगे जिसके तैयारी में प्रशासन व ट्रस्ट जुटा हुआ है।
संरक्षक कैलाश पवार, ट्रस्ट अध्यक्ष विकल गुप्ता, उपाध्यक्ष राम प्रसाद मरकाम, सचिव ललित शर्मा, कोशाध्यक्ष निकेश ठाकुर, सह सचिव राम भरोसा साहू, कमलेश मिश्रा, नागेन्द्र शुक्ला, शिव कुमार परिहार, रवि दुबे कलम सिंह पवार, रवि ठाकुर, गगन नाहटा, पवन भट्ट, नोहर साहू, छबि ठाकुर, राम लाल नेताम, प्रकाश बेश, मोहन पुजारी, योगेश साहू अमर सिंह पटेल, के एस श्रीमाली, भरत निर्मलकर, अंजोर निषाद, उत्तम साहू दीपक यदु, सचिन भंसाली, महेंद्र कौशल, प्रताप सुरेशा, पंकज, मिलेश साहू बबलू गुप्ता, ललित निर्मलकर, रुद्र प्रताप नाग, आलोक सिन्हा, अमर सिंह पटेल, सरपंच शारदा, दिशा ध्रुव, राजू सोम, रंजना सूर्य वंशी, राजेश कोर्राम सचिन ठाकुर, आरती, ईश्वर जांगड़े, महेंद्र धेनुसेवक, दुर्गेश कश्यप, अनिरुद्ध साहू, मनोहर मानिकपुरी नन्द यादव, प्रदीप जैन, सुनील निर्मलकर, निखिल साहू, रवि भट्ट,हनी कश्यप, भानु साहू, होरी लाल पटेल, टेश्वर, अनिरुद्ध साहू आदि जुटे है।


