रायपुर
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
रायपुर, 16 फरवरी। राजधानी में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने लागू पुलिस कमिश्नर प्रणाली के बाद आज बड़ा आधिकारिक फैसला लागू कर दिया गया। सोमवार से रायपुर में सभी 7 एसीपी मजिस्ट्रियल पावर के साथ कार्य करना शुरू करेंगे। उनकी कोर्ट भी लगेगी। वे बीएनएस की धारा 126, 135 सहित अन्य धाराओं में सजा या जमानत दे सकेंगे। इस नई व्यवस्था से अब एसीपी स्तर पर ही छोटे मामलों की सुनवाई और कानूनी कार्रवाई संभव होगी।
सोमवार को पत्रकारों से चर्चा में डीसीपी नार्थ जोन मंयक गुर्जर ने बताया कि एसीपी कोर्ट के संचालन से पूर्व पुलिस कमिश्नर ने सी-4 सभागार में समीक्षा बैठक ली। बैठक में एडिशनल पुलिस कमिश्नर, सभी डीसीपी और एसीपी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य एसीपी कोर्ट की कार्यप्रणाली, कानूनी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक समन्वय को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश देना था। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे मजिस्ट्रियल अधिकारों का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता, जिम्मेदारी और कानून के दायरे में रहकर करें।
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि इस नई व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और छोटे मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण में भी मदद मिलेगी।
बैठक के दौरान ड्रग्स, अवैध शराब और अन्य नशीले पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए गए। स्पष्ट रूप से कहा गया कि ड्रग तस्करी में शामिल गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। अवैध शराब के नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए। आदतन अपराधियों और असामाजिक तत्वों पर सतत निगरानी रखी जाए।
संगठित अपराध में शामिल लोगों पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। एसीपी कोर्ट के शुरू होने से पुलिस कार्रवाई अधिक प्रभावी होगी और प्रशासनिक निर्णयों में तेजी आएगी। छोटे मामलों में तत्काल सुनवाई और दंडात्मक कार्रवाई से अपराध नियंत्रण में मदद मिलने की उम्मीद है।


