बलरामपुर
निवारण शिविर, ग्रामीणों ने खुलकर रखीं समस्याएं
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बलरामपुर, 12 मई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन संकल्पों के तहत जिले में लगातार जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड शंकरगढ़ के पुरातात्विक स्थल डीपाडीह में आम के पेड़ों की ठंडी छांव के नीचे जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया, जहां ग्रामीणों ने बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं।
डीपाडीह में आयोजित इस शिविर में अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ सुना। कई मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि अन्य समस्याओं के शीघ्र समाधान का भरोसा दिया गया।
शिविर को संबोधित करते हुए सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशानुरूप सुशासन तिहार के माध्यम से आम जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन नागरिकों को किसी भी प्रकार की समस्या है, वे आवेदन प्रस्तुत करें, उनकी समस्याओं का नियमानुसार निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
सांसद ने अधिकारियों को राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश देते हुए कहा कि श्रम विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र श्रमिकों तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने सभी श्रमिकों का पंजीयन कर उन्हें योजनाओं से लाभान्वित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार करना सभी विभागों की जिम्मेदारी है। योजनाओं की जानकारी स्थानीय बोली में भी लोगों तक पहुंचाई जाए, ताकि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी सीधे तौर पर लाभ ले सकें।
शिविर में लगाए गए विभागीय स्टॉलों का सांसद ने अवलोकन किया तथा प्राप्त आवेदनों और उनके निराकरण की जानकारी ली। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से लोगों को शासकीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी दी गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल में हरी सब्जियों एवं पौष्टिक आहार का प्रदर्शन कर ग्रामीणों को संतुलित भोजन और पोषणयुक्त खानपान के महत्व के बारे में बताया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री से तैयार पारंपरिक व्यंजनों का भी प्रदर्शन किया गया, जिसे ग्रामीणों ने काफी सराहा।
वन विभाग द्वारा वन औषधियों का प्रदर्शन किया गया, वहीं विद्युत विभाग ने बिजली बिल भुगतान और विभागीय योजनाओं की जानकारी साझा कर लोगों को जागरूक किया।


