बलरामपुर

जीराफूल की खुशबू से बदली किस्मत पूर्णिमा बनीं ‘लखपति दीदी’
04-May-2026 10:29 PM
जीराफूल की खुशबू से बदली किस्मत पूर्णिमा बनीं ‘लखपति दीदी’

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

बलरामपुर, 4 मई। कभी घर चलाने के लिए संघर्ष करने वाली पूर्णिमा बासिन आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की रहने वाली पूर्णिमा अब ‘लखपति दीदी’ के नाम से जानी जाती हैं। उनकी सफलता की कहानी न सिर्फ एक महिला की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह लाखों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

पूर्णिमा के जीवन में बदलाव तब आया जब उन्होंने स्व-सहायता समूह से जुडक़र बैंक लिंकेज और सीआईएफ के माध्यम से ऋण प्राप्त किया। इस अवसर को उन्होंने सही दिशा दी और जैविक खेती का रास्ता अपनाते हुए पारंपरिक सुगंधित धान जीराफूल चावल की खेती शुरू की। आज यही फैसला उनकी सफलता की नींव बन गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने जब पूर्णिमा ने बताया कि उन्होंने एक साल में करीब 3 लाख रुपये की बिक्री की है, तो यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं था—यह उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और संघर्ष की जीत का प्रमाण था।

पूर्णिमा कहती हैं, अब बच्चों को बेहतर पढ़ा पा रही हूं। उनके लिए यही सबसे बड़ी कमाई है। आज उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत है और उन्हें किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती।

यह कहानी केवल पूर्णिमा तक सीमित नहीं है। जिले के कई स्व-सहायता समूह जैसे बरियों का गांधी समूह, दुर्गापुर का संतरा समूह और दुर्गा समूह भी अब हस्तशिल्प और खाद्य उत्पादों के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं। ये महिलाएं अपने हुनर को बाजार तक पहुंचाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

रविवार को आयोजित प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इन समूहों के स्टॉल का अवलोकन किया और उनके प्रयासों की सराहना की। इस दौरान उन्होंने 5 स्व-सहायता समूहों को बैंक लिंकेज के तहत 21 लाख रुपये के चेक भी वितरित किए।

यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक मजबूती दे रही है, बल्कि समाज में उनकी पहचान और आत्मसम्मान को भी नई ऊंचाई दे रही है। पूर्णिमा जैसी कहानियां यह साबित करती हैं कि सही अवसर और मजबूत इरादों के साथ गांव की महिलाएं भी बड़े सपने साकार कर सकती हैं।


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