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Posted Date : 15-Jul-2018
  • पटना, 15 जुलाई। बिहार में शुरू की गई एक नवोन्मेषी और लागत प्रभावी पेयजल परियोजना से प्रदेश के लोगों को दुनिया में सबसे सस्ता पीने का पानी मिलेगा। परियोजना के तहत लोगों को 50 पैसे में एक लीटर पीने का पानी मुहैया करवाने का वादा किया गया है। सुलभ इंटरनेशनल ने दरभंगा में शनिवार को सुलभ जल नाम से इस परियोजना का शुभारंभ किया। इस परियोजना में तालाब के गंदे पानी को स्वच्छ पेयजल में बदला जाएगा।
    सामाजिक संगठन ने एक विज्ञप्ति में कहा, एक दशकों पहले सुलभ इंटरनेशनल द्वारा बिहार में ही सुलभ शौचालय की संकल्पना की नींव पड़ी थी जिसका प्रसार देशभर में हुआ। आज (शनिवार) एक नवोन्मेषी परियोजना की नींव रखी गई जिसके तहत दुनिया में सबसे सस्ता पीने का पानी महज 50 पैसे में एक लीटर मुहैया करवाया जाएगा।
    संगठन ने कहा, सुलभ जल शुद्धिकरण के विविध चरणों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। यह नदी या तालाब जैसे जलाशयों से स्वच्छ व सुरक्षित जल मुहैया करवाएगा। सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने दरभंगा नगर निगम परिसर स्थित हरिबोल तालाब में परिजयोजना की नींव रखी। पाठक ने कहा, परियोजना जल्द शुरू की जाएगी। दिसंबर तक यह चालू हो जाएगी।
    इस परियोजना पर करीब 20 लाख रुपये की लागत आएगी और इसमें 8,000 लीटर पेयजल रोजाना निकाला जाएगा जिसकी लागत नाममात्र होगी। उन्होंने कहा, स्थानीय लोग और एनजीओ इसका रखरखाव कार्य संभालेंगे। समुदाय की सक्रिय भागीदारी से यह परियोजना चलेगी। इसमें रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
    प्रायोगिक परियोजना पश्चिम बंगाल के 24 परगना, मुर्शिदाबाद और नादिया जिलों में सुलभ और एक फ्रांसीसी संगठन के साथ शुरू की गई थी जो सफल रही। (आईएएनएस)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 14 जुलाई । भारतीय जीवन बीमा निगम के आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी खरीदने का विरोध कर रहे बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने की धमकी दी है। बैंक कर्मचारियों ने कहा है कि वह एलआईसी और आईडीबीआई डील के विरोध में सोमवार से 6 दिन की हड़ताल पर जाएंगे।
    दरअसल आईडीबीआई बैंक ने रेग्युलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकरी दी। बैंक के कर्मचारी इस डील के अलावा वेतन बढ़ोतरी न होने को लेकर विरोध कर रहे हैं।
    इसकी वजह से आशंका जताई जा रही है कि अगर इनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो ये लोग सोमवार से 6 दिनों की हड़ताल करेंगे। इस दौरान बैंकिंग सेवाएं लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
    आईडीबीआई ने रेग्युलेटरी फाइलिंग में बताया, बैंक को अधिकारियों के एक धड़े से नोटिस मिला है। इसमें उन्होंने 16 जुलाई से 21 जुलाई तक हड़ताल पर जाने की बात कही है। आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी का मुद्दा नवंबर, 2012 से अटका पड़ा हुआ है।  पिछले साल भी कर्मचारियों  ने हड़ताल पर जाने की धमकी दी थी। हालांकि बाद में ऐसा नहीं किया गया क्योंकि मैनेजमेंट ने उनकी मांगें पूरी करने का वादा किया था।
    ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने वित्त मंत्री अरुण जेटली के सामने एलआईसी और आईडीबीआई डील को लेकर विरोध जताया है। (आज तक)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 14 जुलाई। पेट्रोल पंपों पर आए दिन होने वाली चोरी की शिकायतें पर गौर करते हुए तेल कंपनियों ने कदम उठाना शुरू कर दिया है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम अगले साल तक अपने सभी पेट्रोल पंपों को स्वाचलित कर देगा, जिसके बाद घटतौली की शिकायतें बिलकुल कम हो जाएंगी। 
    एचपी के करीब देश भर में 15 हजार पंप हैं। इनमें से 9 हजार पंप पूरी तरह से स्वचालित हैं, हालांकि 6 हजार पंपो पर अभी भी पेट्रोल-डीजल गाडिय़ों में कर्मचारी खुद ही डालते हैं। इनमें से अधिकांश पंप छोटे शहरों, कस्बों व गांवों के पास बने हैं। अभी इनकी मॉनेटरिंग भी नहीं होती है। 
    एचपीसीएल के कार्यकारी निदेशक टी आर सुदंररमण ने कहा है कि उनकी कंपनी सभी पेट्रोल पंपों को सीथे सर्वर से कनेक्ट कर देगी, जिससे इनकी मॉनेटरिंग हो सकेगी। इससे पंप कर्मी पेट्रोल-डीजल देते वक्त किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा।  
    हाल ही में पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें 2015 से 2017 तक पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी के मामलों का पूरा लेखा-जोखा था। इस रिपोर्ट के मुताबिक कई पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों से पैसे तो लिए जाते हैं, लेकिन उन्हें कम पेट्रोल दिया जाता है। 
    कई बार पंप ऑपरेटर मशीन में रुपये भरता है, जितना ग्राहक पेट्रोल चाहते हैं। नॉजेल को कार-बाइक की टंकी में डालते ही मीटर को चला दिया जाता है, लेकिन मीटर तय कीमत से पहले या बाद में रुक जाता है। इससे एक लीटर पेट्रोल में कम से कम 200 एमएल तक की कमी की जाती थी।  (अमर उजाला)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 14 जुलाई । अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढऩे के बावजूद सरकार ने घरेलू बाजार में सब्सिडाइज्ड एलपीजी सिलेंडर के दाम पुराने ही रखे हैं जिसकी वजह से एलपीजी सब्सिडी में पिछले दो माह के दौरान 60 प्रतिशत उछाल दर्ज किया गया। इंडियन आयल कॉरपोरेशन के चेयरमैंन संजीव सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में वृद्धि के बाद भी सरकार ने ग्राहकों को राहत देते हुये घरेलू बाजार में सब्सिडाइज्ड सिलेंडर के दाम नहीं बढ़ाए।
    उन्होंने कहा कि बैंक खातों में ट्रांसफर की जाने वाली सब्सिडी राशि मई में जहां 159.29 रुपये प्रति सिलेंडर थी, जून में यह बढ़कर 204.95 रुपये और जुलाई में 257.74 रुपये पर पहुंच गई।
    जून से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी के दाम बढ़ रहे हैं। बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर का दाम मई में 653.50 रुपये प्रति सिलेंडर था। जून में यह बढ़कर 698.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गया है, यानी इसमें 48 रुपये की बढ़ोतरी हुई। इस महीने बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 55.50 रुपये और बढ़कर 754 रुपये हो गई।
    उपभोक्ताओं को एक साल में सब्सिडी वाले 12 सिलेंडर मिलते हैं। उसके बाद उन्हें बाजार मूल्य पर सिलेंडर लेना पड़ता है। सिंह ने कहा कि एलपीजी के दाम बढ़े हैं लेकिन सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम नहीं बढ़ाए गए। उपभोक्ताओं पर कर के मामूली हिस्से का ही बोझ डाला गया है। नियमों के अनुसार एलपीजी पर जीएसटी का कैलकुलेशन ईंधन के बाजार मूल्य पर की जाती है। कीमतें बढऩे के साथ कर भी बढ़ा है। इससे सब्सिडी वाला सिलेंडर लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए दरों में मामूली वृद्धि हुई है. मई में सब्सिडीयुक्त सिलेंडर का दाम 491.21 रुपये थान  दूसरी ओर नीति आयोग ने पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री को सुझाव दिया है कि एलपीजी से जुड़ी सब्सिडी ईंधन के स्पष्ट रूपों को अपनाने में दिक्कत पैदा कर रही है। मंत्रालय को लिखे नोट में नीति आयोग ने यह बात कही है। नीति आयोग ने कहा है एलपीजी पर सब्सिडी पाने वाले पात्र लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से खाना पकाने की सब्सिडी दी जानी चाहिए।(न्यूज 18)

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Posted Date : 14-Jul-2018
  • सेंट लुईस, 14 जुलाई। अमरीका की सेंट लुईस स्थित एक अदालत ने जॉनसन एंड जॉनसन पर 32 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी पर आरोप था कि उसके बेबी पाउडर के इस्तेमाल से कैंसर होता है। बताया जाता है कि दुनियाभर की 9,000 महिलाओं ने कंपनी के खिलाफ शिकायत की थी। अदालत ने इनमें से 22 महिलाओं के दावे को सही माना है। इस पाउडर की जांच के दौरान इसमें एस्बेटस के कण (बहुत छोटे-छोटे टुकड़े) पाए गए। वहीं, कंपनी का कहना है कि इस फैसले तक पहुंचने की प्रक्रिया ठीक नहीं रही। साथ ही, तमाम सबूतों को नजरअंदाज किया गया। कंपनी इस फैसले से निराशा जाहिर करते हुए इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है। लगभग पांच सप्ताह तक चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी ओर से विशेषज्ञ पेश किए। हालांकि, अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कंपनी ने कहा कि मामले की सुनवाई सही तरीके से नहीं हुई है और वह फैसले को चुनौती देगी। अदालत का फैसला आने के बाद शेयर बाजार में जॉनसन एंड जॉनसन के शेयर का मूल्य गिर गया। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 13-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 13 जुलाई। भारत द्वारा अमरीका से कच्चा तेल आयात करने में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। वहीं, पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक करीब दोगुना कच्चा तेल अमरीका से आयात किया जा चुका है। रॉयटर्स के मुताबिक इस बढ़ोतरी को अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी से जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने ईरान से तेल कारोबार बंद नहीं करने की सूरत में भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की बात कही थी।
    सरकार के ताजा आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि कच्चे तेल की आपूर्ति के मामले में अमरीका भारत के लिए एक बड़ा निर्यातक बन चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई के अंत तक अमरीकी तेल उत्पादक और व्यापारी भारत को डेढ़ करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल निर्यात कर देंगे। जबकि पिछले साल जुलाई महीने तक यह मात्रा 80 लाख बैरल ही थी। कहा जा रहा है कि 'व्यापार युद्धÓ के चलते अगर चीन ने अमरीका के कच्चे तेल पर शुल्क बढ़ा दिए तो भारत के आयात में और बढ़ोतरी हो सकती है।
    इसके साथ ही भारत की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन के वित्तीय प्रमुख एके शर्मा ने कहा है कि अमरीका से आने वाले कच्चे तेल की कीमत कम है इसलिए उसकी मांग ज्यादा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर चीन अमरीका से तेल आयात करने में कमी करता है तो भारत अपने आयात की मात्रा बढ़ा सकता है। उधर, भारत द्वारा ईरान से हर महीने आयात होने वाले कच्चे तेल की मात्रा में कमी आई है। खबर के मुताबिक जून में प्रति दिन कच्चे तेल के आयात में पांच लाख 92,800 बैरल की कमी देखने को मिली। मई की अपेक्षा जून में 16 प्रतिशत कम तेल आयात किया गया है।  (टाईम्स ऑफ इंडिया)

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Posted Date : 13-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 13 जुलाई। आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार के लिए बुरी खबर है। जून में खुदरा महंगाई दर बढ़कर पांच फीसदी हो गई है। यह बीते पांच महीने में इसका सबसे ऊंचा स्तर है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की तरफ से गुरुवार को ये जानकारी दी गई है। इससे पिछले महीने यानी मई में खुदरा महंगाई की दर चार दशमलव आठ सात फीसदी थी।
    इस उछाल की मुख्य वजह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी को माना जा रहा है। इसके अलावा औद्योगिक उत्पादन की विकास दर में भी गिरावट दर्ज की गई है। मई में देश के औद्योगिक उत्पादन में तीन दशमलव दो फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इससे पिछले महीने यह आंकड़ा चार दशमलव नौ फीसदी था।
    इससे पहले आरबीआई ने जून के पहले हफ्ते में हुई मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक में रेपो रेट को बढ़ाकर 6.25 फीसदी कर दिया था। केंद्रीय बैंक ने यह फैसला बढ़ती महंगाई और अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी चुनौतियों की वजह से लिया था। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 13-Jul-2018
  • -चंदन शर्मा
    रुपये के लगातार गोता लगाने के बीच कुछ दिन पहले खबर आई कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार गिर गया है। खबरों के मुताबिक बीते दो महीने में इसमें 18 अरब डालर की गिरावट आई। इसके बाद यह अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 426 अरब डॉलर से घटकर 408 अरब डॉलर रह गया।
    जानकारों के अनुसार देश-दुनिया के मौजूदा आर्थिक हालात में इस गिरावट दो-तीन मुख्य कारण हैं। सबसे पहला और प्रमुख यह कि पिछली कई तिमाहियों से देश में विदेशी निवेश लगातार घटा है। आंकड़े बताते हैं कि पिछली दो तिमाहियों में भारतीय अर्थव्यवस्था से करीब नौ अरब डॉलर का निवेश वापस लौट गया है। इसके अलावा कच्चे तेल का भाव बढऩे का भी देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर नकारात्मक असर पड़ा है। वहीं रुपये को स्थिर (या मजबूत) बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मुद्रा एक्सचेंजों में डॉलर की जमकर बिकवाली करना भी इसका एक कारण है।
    हालांकि भारत के इस कदम से अमरीका नाराज है और चिंतित भी। उसका मानना है कि भारत की आयात जरूरतें पूरी करने के लिए 400 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त है लिहाजा उसे इसको और बढ़ाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। लेकिन कई सलाहकार भारत सरकार को राय दे चुके हैं कि उसे अपने मुद्रा भंडार को अगले कुछ वर्षों में 750 या 1,000 अरब डॉलर तक बढ़ा लेना चाहिए।
    जानकारों के अनुसार अमरीका ऐसी सोच को शक की निगाह से देख रहा है। उसका मानना है कि भारत अपने बड़े विदेशी मुद्रा भंडार के जरिए लगातार डॉलर को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। यही वजह है कि पिछले साल के आखिर में अमरीका ने भारतीय मुद्रा रुपये को अपनी निगरानी सूची में डाल दिया। भारत से पहले इस सूची में उसने जापान, जर्मनी, दक्षिण कोरिया जैसे मित्र देशों की मुद्रा को भी डाल रखा है। चीन तो इसमें है ही।
    अमरीका किसी देश की मुद्रा को अपनी निगरानी सूची में तभी डालता है जब वह मुद्रा पूर्वनिर्धारित तीन में से कम से कम दो शर्तें पूरी करने लगे। रुपये को इस सूची में लाने की मुख्य वजह यह रही कि भारतीय रिजर्व बैंक पिछले कुछ साल से अपनी जीडीपी के दो फीसदी से भी ज्यादा की विदेशी मुद्रा खरीद रहा है। साल 2017 में भारत ने 56 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा खरीदी थी जो देश की 2.56 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी की 2.2 फीसदी ठहरती है।
    अमरीका के इस कदम की दूसरी वजह यह है कि पिछले कई वर्षों से भारत के साथ उसका व्यापार घाटा 20 अरब डॉलर से ज्यादा का बना हुआ है। पिछले वित्त वर्ष (2017-18) में यह घाटा 28 अरब डॉलर का था। हालांकि भारत पर तीन फीसदी से अधिक के चालू खाते के घाटे (वस्तुओं और सेवाओं के आयात-निर्यात का अंतर) की तीसरी शर्त फिलहाल लागू नहीं हो रही है। बीते वित्त वर्ष यह आंकड़ा 1.9 फीसदी (48.7 अरब डॉलर) था।
    वैसे अभी अमरीका ही नहीं आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी संस्था भी कह रही है कि निर्यात की तुलना में ज्यादा आयात करने वाली अर्थव्यवस्था के चलते भारत अपनी मुद्रा को जानबूझकर मजबूत बनाए हुए है। जाहिर सी बात है इसमें आरबीआई के मुद्रा बाजार में डॉलर बेचने वाले कदम की निर्णायक भूमिका है। हालांकि आरबीआई इस आरोप को गलत बताता है। उसका तर्क है कि भारत ने दो दशक पहले ही अपनी मुद्रा की विनिमय दर तय करने का जिम्मा बाजार को सौंप दिया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक वह तभी बाजार में हस्तक्षेप करता है जब रुपये में तेज उछाल या गिरावट दर्ज की जाती है। हालांकि अमरीका इस तर्क से सहमत नहीं है।
    उधर, जानकार मानते हैं कि विनिमिय दर तय करने के मामले में भारत को अपनी छवि साफ-सुथरी ही रखनी चाहिए। उनके मुताबिक ऐसा न होने पर उस पर भी चीन की तरह 'अनुचित मुद्रा व्यवहारÓ वाले देश का ठप्पा लग सकता है। इससे भविष्य में कई देशों से हमारे कारोबारी संबंध बिगड़ सकते हैं जैसा कि चीन के साथ हो चुका है। वैसे चीन पर भारत से उलट अपनी मुद्रा 'युआनÓ को कमजोर रखने का आरोप लगता रहा है क्योंकि वह आयात से ज्यादा निर्यात करता है।
    आलोचकों के अनुसार भारत पर रुपये को जरूरत से ज्यादा मजबूत रखने का आरोप अनायास नहीं लगा है। असल में पिछले पांच-छह वर्षों से भारतीय अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। दुनिया के कई देशों की हालत भी इस दौरान अच्छी नहीं रही है। इस वजह से भारत का निर्यात इस दौरान लगातार घटा है जिससे चालू खाते का घाटा कई बार चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया। इससे भारती मुद्रा तो कमजोर हुई ही है, महंगाई भी नियंत्रण में आने के बजाय अभी तक सबको परेशान कर रही है।
    आलोचकों की राय में ऐसी दशा में परेशानी और न बढ़े, इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक डॉलर की बिकवाली करके रुपये को कृत्रिम रूप से मजबूत बना रहा है। हालांकि इसे तात्कालिक उपाय माना जाता है लेकिन, जानकारों की राय में आरबीआई के पास अभी कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है क्योंकि उत्पादन और निर्यात बढ़ाने वाला जो दीर्घकालिक उपाय है, उसके होने में अभी कई साल और लगेंगे। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 12-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 12 जुलाई । हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ रामायण में वर्णित प्रमुख स्थलों के दर्शनों के लिए भारतीय रेल ने एक विशेष पर्यटक ट्रेन 'श्री रामायण एक्सप्रेसÓ चलाने की योजना बनाई है। यह ट्रेन नई दिल्ली से रामेश्वरम के बीच चलेगी और यह अपनी पहली यात्रा पर 14 नवंबर को रवाना होगी। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को एक ट्वीट में कहा है कि भगवान राम को करीब से जानने की इच्छा रखने वालों के लिए यह यात्रा एक बेहतरीन विकल्प साबित होगी।
    इस ट्रेन का पहला पड़ाव राम की जन्मस्थली माने जाने वाला अयोध्या होगा। इसके बाद नंदीग्राम, सीतामढ़ी, जनकपुर, प्रयाग, वाराणसी, चित्रकूट, हम्पी, नासिक जैसे शहरों से गुजरते हुए यह ट्रेन रामेश्वरम पहुंचेगी। इस ट्रेन की यह पूरी यात्रा 16 दिनों के भीतर तय होगी। रेलवे ने इसका प्रतिव्यक्ति किराया 15120 रुपये तय किया है। इस किराये में यात्रियों के खाने-पीने समेत स्थानीय इलाकों की सैर और ठहरने का खर्च भी शामिल है। आठ सौ यात्रियों वाली इस ट्रेन की टिकटों की बुकिंग जल्दी ही शुरू की जाएगी।
    इस ट्रेन के यात्रियों को रेलवे ने श्रीलंका की यात्रा का विकल्प भी दिया है। जो यात्री रामेश्वरम के आगे श्रीलंका की यात्रा पर जाना चाहेंगे उन्हें चेन्नई से हवाई जहाज के जरिये कोलंबो ले जाया जाएगा इसके बाद वहां कैंडी, नुवारा एलिया, नेगोंबो जैसे रामायण काल के स्थलों की सैर कराई जाएगी। हालांकि इस यात्रा के लिए यात्रियों को प्रतिव्यक्ति की दर से 36,970 रुपये की अतिरिक्त रकम चुकानी होगी।(इंडियन एक्सप्रेस)

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Posted Date : 12-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 12 जुलाई । शेयर बाजार आज शानदार बढ़त के साथ खुला। सेंसेक्स ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए 36,500 का आंकड़ा पार कर लिया है। वहीं, निफ्टी का कारोबार भी 11,000 के ऊपर शुरू हुआ। ताजा जानकारी के मुताबिक सुबह 10.30 बजे तक सेंसेक्स 0.74 प्रतिशत की उछाल के साथ 36,535 (270 अंकों की बढ़त) पर बना हुआ है। वहीं, निफ्टी 0.78 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 11,034 पर है।(सत्याग्रह)

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Posted Date : 12-Jul-2018
  • गुडग़ांव, 12 जुलाई (नवभारत टाईम्स)। गुडग़ांव के सेक्टर-45 स्थित एचडीएफसी बैंक की शाखा के एटीएम से छेड़छाड़ कर वहां से कई लोगों के खातों की जानकारी लेकर करीब 15 लाख रुपये निकालने का मामला सामने आया है। जांच में पता चला कि मार्च और अप्रैल के दौरान मशीन में छेड़छाड़ कर करीब 100 लोगों के खाते को हैक किया गया। एक ही बैंक के इतने कस्टमर्स का पैसा निकलने के बाद पुलिस को शिकायत दी गई। वहीं, साइबर क्राइम मामलों के जानकार का कहना है कि कार्ड पैनल (जहां कार्ड लगाते हैं) से छेड़छाड़ कर पैनल में चिप लगा दिया जाता है। लोग जैसे ही कार्ड डालते हैं, खाते से जुड़ी तमाम जानकारी चिप में सुरक्षित हो जाती है। इसके बाद खाते से रुपये निकालने के अलावा अन्य तरह की धोखाधड़ी की जाती है।  
    पुलिस को दी शिकायत में एचडीएफसी बैंक के अमित साहनी ने बताया कि बैंक के कुछ ग्राहकों के खातों से 1 मई 2018 से रुपये ट्रांसफर होने शुरू हुए। इन ग्राहकों ने बैंक को शिकायत दी। सभी का कहना था कि एटीएम कार्ड इनके पास ही थे जबकि खातों से रुपये निकल गए। दर्जनों शिकायतें आईं तो बैंक ने अपने स्तर पर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि इन सभी ग्राहकों के साथ एक बात सामान्य थी कि इन्होंने मार्च व अप्रैल महीने में सेक्टर-45 स्थित बैंक शाखा के एटीएम से ट्रांजैक्शन की थी। 
    साइबर क्राइम मामलों के एक्सपर्ट इंस्पेक्टर सुधीर ने बताया कि एटीएम में कार्ड डालने वाले स्लॉट के ऊपर उसी तरह का एक स्कीमर (एटीएम कार्ड का डेटा चोरी करने वाली मशीन) लगा दिया जाता है। इसमें एक चिप लगी होती है। ऐसे में जब भी कोई कार्ड मशीन में डालेगा तो ठगों द्वारा लगाई गई चिप में एटीएम कार्ड का डेटा सेव हो जाएगा। इसके साथ ही पिन नंबर डालने वाले बटनों के ठीक ऊपर एचडी कैमरा लगा होता है। इससे पिन नंबर भी सेव हो जाता है। एक बार एटीएम में चिप व कैमरा लगाने के बाद कई दिनों तक ठग उसे नहीं हटाते। काफी डेटा एकत्र होने के बाद चिप को हटा लिया जाता है। 
    ऐसे बनते हैं क्लोन कार्ड 
    मशीन के जरिए क्लोन कार्ड बनाए जाते हैं। किसी भी एटीएम कार्ड को इस मशीन में डाला जाता है। मशीन से जुड़े सिस्टम में डिलीट व रीड की कमांड होती है। डिलीट की कमांड देते ही कार्ड में मौजूदा डेटा डिलीट कर दिया जाता है। फिर एटीएम मशीन में स्कीमर चिप से चुराए गए एक कार्ड के डेटा को इस खाली एटीएम कार्ड में रीड कर दिया जाता है। इस क्लोन एटीएम में असल एटीएम कार्ड का डेटा आ जाता है। एटीएम में लगे कैमरे में दर्ज हुआ पिनकोड पहले से ठगों के पास होता है। इसके बाद क्लोन कार्ड से रुपये निकाल लिया जाता है। 
    मशीन की करें जांच 
    साइबर क्राइम मामलों के एक्सपर्ट इंस्पेक्टर सुधीर ने बताया कि बदमाश एटीएम के कार्ड पैनल (जहां लोग कार्ड लगाते हैं) से छेड़छाड़ करते हैं। उस पैनल में चिप लगा दिया जाता है। कार्ड डालते ही तमाम जानकारी उस चिप में सुरक्षित हो जाती है। बाद में चिप को एटीएम पैनल से निकाल लिया जाता है। इसके बाद उसमें दर्ज सभी जानकारी का इस्तेमाल कर खाते से पैसे निकाल लिया जाता है। इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए एटीएम के कार्ड पैनल को जरूर ध्यान से देखना चाहिए। यदि कहीं कुछ भी संदिग्ध लगे तो मशीन का उपयोग न करें। इसकी सूचना पुलिस और बैंक को दें। 
    खातों को सेफ रखने के लिए समय-समय पर एटीएम का पिन भी बदलते रहना चाहिए। अगर हर 3 से 5 माह में एटीएम का पिन बदलते हैं तो इससे खाते व कार्ड को हैक करने की आशंकाएं काफी कम हो जाती हैं।  (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 11-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 11 जुलाई । पायलटों को अब पहले से ज्यादा से घंटे ड्यूटी करनी पड़ सकती है। इस बाबत विमानन नियामक (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इनमें विमानन कंपनियों को विशेष परिस्थितियों में चालक दल के काम के घंटे बढ़ाने की अनुमति दी गई है।
    डीजीसीए ने पायलटों और फ्लाइट अटेंडेंट्स के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) और रेस्ट टाइमिंग (आराम के घंटे) तय किए हैं। सभी एयरलाइंस को इन्हें अनिवार्य रूप से लागू करना होगा। इन्हीं गाइडलाइंस में यह भी शामिल है कि एयरलाइंस मेडिकल इमरजेंसी, प्राकृतिक आपदा, तकनीकी दिक्कतों और खराब मौसम जैसी विशेष परिस्थितियों में चालक दल के सदस्यों के काम के घंटे बढ़ा सकती हैं। डीजीसीए ने इस बाबत 23 जून को आदेश जारी किया है।
    इससे पहले भी एयरलाइंस को विशेष परिस्थितियों में चालक दल के सदस्यों के काम के घंटे बढ़ाने की छूट थी। लेकिन किन परिस्थितियों में ऐसा कर सकती हैं यह स्पष्ट नहीं था। अब इन्हें यात्रियों की सुविधा के मद्देनजर और स्पष्ट कर दिया गया है। साथ में यह भी स्पष्ट किया है कि एयरलाइंस अगर चालक दल के सदस्यों के काम के घंटे बढ़ाती हैं तो उनके पास इसका वैध आधार होना चाहिए।
    बीती 18 अप्रैल को दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस बाबत याचिकाकर्ता यशवंत शेनॉय की याचिका पर एक आदेश जारी किया था। इसके मुताबिक डीजीसीए को एयरलाइंस के लिए एफडीटीएल में किसी भी तरह की छूट देने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। लेकिन डीजीसीए ने इस फैसले पर पुनर्विचार की अपील की। इसके बाद अदालत ने विशेष परिस्थितियों में ऐसी छूट की इजाजत देने की डीजीसीए को मंज़ूरी दे दी थी। हालांकि शेनॉय का कहना है कि वे अब डीजीसीए के इस आदेश पर अदालत की अवमानना संबंधी याचिका लगाएंगे। (द हिंदू)

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Posted Date : 11-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 11 जुलाई । उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति रुकने के बीच आटा मिलों का उठाव बढऩे के कारण स्थानीय थोक अनाज बाजार में मंगलवार को गेहूं की कीमत में 20 रुपये प्रति च्न्टिल की तेजी आई। हालांकि मामूली कारोबार के बीच अन्य अनाजों की कीमतों में स्थिरता रही। बाजार सूत्रों ने कहा कि आटा मिलों का उठाव बढऩे के अलावा उत्पादक क्षेत्रों से आपूर्ति में गिरावट के कारण मुख्यत: गेहूं में तेजी आई। राष्ट्रीय राजधानी में गेहूं दड़ा (मिल के लिए) और गेहूं मप्र की कीमतें 20 - 20 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 1,830 - 1,835 रुपये और 2,120 - 2,220 रुपये प्रति च्न्टिल हो गई। आटा चक्की डिलीवरी की कीमत भी समान अंतर की तेजी के साथ 1,840 - 1,845 रुपये प्रति 90 किग्रा हो गई।
    गेहूं में तेजी के अनुरूप ही आटा फ्लोर मिल, मैदा और सूजी की कीमतें 10 - 10 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 990 - 1,000 रुपये, 1,010 - 1,020 रुपये और 1,080 - 1,090 रुपये प्रति 50 किग्रा पर बंद हुई। मंगलवार को बंद भाव (रुपया प्रति च्ंिटल में) इस प्रकार रहे।
    गेहूं मप्र (देसी) 2,120 - 2,220 रुपये, गेहूं दड़ा (मिल के लिए) 1,830 - 1,835 रुपये, चक्की आटा (डिलीवरी) 1,840 - 1,845 रुपये, आटा राजधानी (10 किग्रा) 230 - 260 रुपये, शक्तिभोग (10 किग्रा) 255 - 290 रुपये, रोलर फ्लोर मिल 990 - 1,000 रुपये (50 किग्रा) , मैदा 1,010 - 1,020 रुपये (50 किग्रा) और सूजी 1,080 - 1,090 रुपये (50 किग्रा)।
    बासमती चावल (लालकिला) 10,700 रुपये, श्री लाल महल 11,300 रुपये, सुपर बासमती चावल 9,900 रुपये, बासमती सामान्य नया 7,600 - 7,700 रुपये, चावल पूसा (1121) 6,900 - 7,000 रुपये, परमल कच्चा 2,425 - 2,450 रुपये, परमल वैन्ड 2,525 - 2,575 रुपये, सेला 3,050 - 3,150 रुपये और चावल आईआर-आठ 2,025 - 2,075 रुपये, बाजरा 1,200 - 1,205 रुपये, ज्वार पीला 1,650 - 1,700 रुपये, सफेद 2,850 - 2,950 रुपये, मक्का 1,210 - 1,215 रुपये, जौ 1,480 - 1,490 रुपये। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 10-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 10 जुलाई। यह खबर सोमवार शाम से बड़ी तेजी से सामने आई है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों वोडाफोन और आइडिया के विलय को मंजूरी दे दी है। हालांकि इसके साथ सूत्रों के हवाले कुछ खबरें ऐसी भी आई हैं जिनमें बताया गया है कि अभी अंतिम तौर पर देश में दूरसंचार क्षेत्र के इस सबसे बड़े सौदे को मंजूरी नहीं दी गई है। बल्कि सूत्रों की मानें तो दूरसंचार विभाग ने वोडाफोन पर कुछ शर्तें लगाई हैं उन्हें पूरा करने पर ही सौदे को मंजूरी दी जाएगी।
    दूरसंचार विभाग ने सौदे की अंतिम मंजूरी से पहले वोडाफोन से 7,200 करोड़ मांगे हैं। इनमें 3,900 करोड़ नगद और 3,300 करोड़ बैंक गारंटी के तौर पर जमा कराने को कहा गया है। यह पैसे एक बार में जमा किए जाने वाले स्पेक्ट्रम शुल्क के रूप में लिए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक 4.4 मेगाहर्ट्ज तक की एयरवेव्ज वोडाफोन से आइडिया सेलुलर के नाम ट्रांसफर करने के एवज में नगद शुल्क लिया जा रहा है। इसके अलावा 4.4 मेगाहर्टज से ऊपर की एयरवेव्ज के लिए बैंक गारंटी मांगी गई है।
    सूत्र बताते हैं कि इसके अलावा दूरसंचार विभाग के पास अभी वोडाफोन इंडिया की जो बैंक गारंटी है उसे भी आइडिया सेलुलर को अपनी बैंक गारंटी से बदलना (रिप्लेसमेंट) होगा। वोडाफोन इंडिया को लिखित वादा भी करना होगा कि अदालत में विचाराधीन पिछले बकाये (टैक्स आदि) से संबंधित मामलों में अगर उसके खिलाफ फैसला आया तो वह निर्धारित पूरी रकम चुकाएगी। दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि वोडाफोन-आइडिया जब इन शर्तों को पूरा कर देंगे उनके विलय को मंजूरी मिल जाएगी।
    इकॉनॉमिक टाईम्स में छपी खबर की मानें तो वोडाफोन-आइडिया के विलय की सशर्त मंजूरी प्रधानमंत्री कार्यालय के सीधे दखल के बाद ही मिल सकी है। बताया जाता है कि बीते कुछ वर्षों में दूरसंचार क्षेत्र में देश का यह सबसे बड़ा सौदा होगा। इसके बाद जो कंपनी बनेगी वह देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी होगी। फिलहाल करीब 15 साल से देश में भारती-एयरटेल देश की नंबर-एक दूरसंचार कंपनी बनी हुई है। अभी आइडिया दूरसंचार क्षेत्र में नंबर-दो तथा वोडाफोन तीसरे नंबर पर काबिज हैं। (लाइव मिंट)

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Posted Date : 10-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 10 जुलाई। टेलिकॉम सेक्टर की तरह ही रिलायंस जियो अब देश के फीचरफोन मार्केट में भी बड़ी उथल-पुथल मचाने की तैयारी में है। रिलायंस के दूरसंचार उद्योग में कदम रखने के बाद प्राइवेट कंपनियों की संख्या 8 से घटकर 3 पर आ गई है। वहीं, अब कंपनी किसी भी पुराने फीचरफोन को 501 रुपये में अपने 4जी वोल्टई आधारित जियोफोन से बदलने का ऑफर दे रही है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के 21 जुलाई से लागू होने वाले इस ऑफर से जियो के मार्केट शेयर में बढ़ोतरी होगी। कंपनी के इस कदम से जियो हैंडसेट मार्केट में भी अच्छी-खासी हिस्सेदारी हासिल कर सकती है।  
    रिलायंस को उम्मीद है कि उसके इस ऑफर से फीचरफोन पर फोकस करने वाली छोटी कंपनियां मैदान छोड़ देंगी। वहीं, बड़ी कंपनियां नुकसान कम करने के लिए प्रॉडक्शन घटा देंगी। इंटरनैशनल डेटा कॉरपोरेशन (आईडीसी) इंडिया के सीनियर मार्केट एनालिस्ट जसपाल सिंह ने बताया, कंपनी के इस ऑफर में काफी हद तक 2जी मार्केट को प्रभावित करने की क्षमता है। इससे फीचर फोन बाजार में तेजी से कंसॉलिडेशन हो सकता है।
    उन्होंने कहा, छोटे वेंडर इस कैटिगरी से हटने के लिए मजबूर हो जाएंगे, जबकि बड़े खिलाड़ी शॉर्ट-टर्म में प्रॉडक्शन वॉल्यूम कम कर सकते हैं। इसके बाद वे उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जहां अभी भी 2जी हैंडसेट की मांग बनी हुई है। फीचरफोन सेगमेंट में सैमसंग, आईटेल, नोकिया, माइक्रोमैक्स, लावा, कार्बन, इंटेक्स और जीवी जैसे भारतीय कंपनियां मौजूद हैं। वहीं, 1 लाख यूनिट के करीब फीचरफोन की बिक्री करने वाली रॉकटेल, जीफाइव, आईकॉल, क्यूटेल, मिडो, स्नेक्सियन, एमटीआर जैसी छोटी कंपनियों को कामकाज बंद करने पर मजबूर होना पड़ सकता है क्योंकि वे जियो की मनी पावर का मुकाबला नहीं कर पाएंगी। 
    इस बारे में काउंटरपॉइंट रिसर्च के असोसिएट डायरेक्टर तरुण पाठक का कहना है कि सैमसंग, आईटेल और यहां तक कि भारतीय कंपनियों को भी प्रॉडक्ट्स की क्वॉलिटी सुधारने के साथ रणनीति बदलनी पड़ेगी क्योंकि उनकी बिक्री का ज्यादातर हिस्सा फीचरफोन सेगमेंट से ही आता है। काउंटरप्वाइंट के मुताबिक, इस साल मार्च में फीचरफोन मार्केट में जियोफोन ने 35.8 पर्सेंट शेयर के साथ पहली पोजिशन हासिल की थी। इसके बाद सैमसंग की 9.8 पर्सेंट, आईटेल की 9.4 पर्सेंट, नोकिया की 7.3 पर्सेंट और लावा की 5.6 पर्सेंट बाजार हिस्सेदारी थी। 
    रिलायंस ने मॉनसून हंगामा स्कीम के तहत फीचरफोन एक्सचेंज ऑफर ऐसे समय में पेश किया है, जब कंपनियां फेस्टिव सीजन को देखते हुए प्रॉडक्शन बढ़ाती हैं। सूत्रों के मुताबिक, फीचरफोन कंपनियां इस सेगमेंट में कम मार्जिन के साथ बिजनेस कर रही थीं। प्रिंटेड सर्किट बोर्ड्स की असेंबली पर ड्यूटी बढ़ाने और डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने पहले से ही उनकी मुश्किलें बढ़ाई हुई हैं। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

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Posted Date : 09-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 9 जुलाई। जापानी टू-वीलर निर्माता कंपनी होंडा की इंडियन आर्म ने अपनी फ्लैगशिप 2018 होंडा गोल्ड विंग टुअरिंग मोटरसाइकल की डिलिवरी भारत में शुरू कर दी है। होंडा गोल्ड विंग की नई दिल्ली में एक्स-शोरूम कीमत 26.85 लाख रुपये है। यह भारत की इकलौती ऐसी बाइक है जिसमें रिवर्स गियर दिया गया है। इसकी कोच्चि शहर में तीन यूनिट्स ग्राहकों को डिलिवर की गई हैं। गोल्ड विंग बाइक को होंडा ने 2018 ऑटो एक्स्पो में पेश किया था। इसमें ऐपल कार प्ले इंटिग्रेशन समेत कई हाइटेक फीचर्स दिए गए हैं। 
    होंडा गोल्ड विंग बाइक में 1833सीसी का पावरफुल इंजन दिया गया है। यह इंजन 93 हॉर्सपावर की ताकत और 170 न्यूटन मीटर टॉर्क जेनरेट करता है। इंजन को 7 स्पीड ड्यूल क्लच ट्रांसमिशन यानी डीसीटी से लैस किया गया है। यह होंडा की पहली ऐसी बाइक है जिसमें विशबोन फ्रंट सस्पेंशन दिया गया है। 
    इसकी खूबी है कि इसमें न तो गियर लिवर है और न ही क्लच। इसके गियर को हैंडलबार पर लगे स्विच से कंट्रोल किया जाता है। डीसीटी से लैस बाइक ट्रैफिक में वॉकिंग मोड में चलने के साथ ही रिवर्स गियर में भी चल सकती है। होंडा इस तकनीक पर बहुत विश्वास करती है। इसमें क्रूज कंट्रोल, इलेक्ट्रिक विंडस्क्रीन अजस्ट करने की सुविधा, स्मार्ट की कंट्रोल आदि फीचर्स भी दिए गए हैं। 
    इसमें 7 इंच का टीएफटी टचस्क्री इंफोटेनमेंट सिस्टम है जो कि आप आपने ऐपल आईफोन से कनेक्ट कर सकते हैं। इसकी मदद से आप ऐपल मैप्स, ऐपल म्यूजिक आदि सर्विसेज को बाइक की स्क्रीन पर देख सकते हैं। इतना ही नहीं, होंडा की यह बाइक स्मार्ट ऑडियो सिस्टम से भी लैस है जो कि आपको बिना हेल्मेट निकाले ही फोन कॉल करने की सुविधा देता है।  (नवभारत टाईम्स)

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Posted Date : 09-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 9 जुलाई। आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद से ही रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। जहां एक तरफ देश के बैंकों को सबसे अधिक मात्रा में जाली नोट मिले, वहीं इस दौरान संदिग्ध लेन-देन में भी 480 प्रतिशत से भी अधिक का इजाफा हुआ था। पहले भी आरबीआई की सालाना रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ था कि 1000 रुपये की 8 करोड़ 90 लाख प्रतिबंधित नोट वापस नहीं आए। इसके बाद एक आरटीआई के जवाब में अब एक और नया खुलासा हुआ है।
    नोटबंदी के बाद जारी किये गए 2000 और 500 रुपये के नये नोटों की ढुलाई में भारतीय वायु सेना के अत्याधुनिक परिवहन विमान- सी -17 और सी -130 जे सुपर हरक्यूलिस के इस्तेमाल पर 29.41 करोड़ से अधिक की रकम खर्च की गई। भारतीय वायु सेना द्वारा एक आरटीआई आवेदन का दिये गए जवाब के अनुसार सरकार के आठ नवंबर 2016 को 1000 और 500 रुपये के पुराने नोटों को अचानक से प्रचलन से बाहर करने के बाद उसके परिवहन विमानों सी -17 और सी -130 जे सुपर हरक्यूलिस ने सेक्युरिटी प्रिंटिंग प्रेस और टकसालों से देश के विभिन्न हिस्सों में नोटों की ढुलाई करने के लिये 91 चक्कर लगाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को प्रचलन से बाहर करने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री की इस घोषणा से 86 फीसदी नोट व्यवस्था से बाहर हो गए थे। इसकी भरपाई नोटबंदी के बाद जारी 2000 और 500 रुपये के नए नोटों से अविलंब करने की आवश्यकता थी।
    आरबीआई और सरकारी आंकड़ों के अनुसार आठ नवंबर 2016 तक 500 के 1716.5 करोड़ नोट थे और 1000 रुपये के 685.8 करोड़ नोट थे। इस तरह इन नोटों का कुल मूल्य 15.44 लाख करोड़ रुपये था जो उस समय प्रचलन में मौजूद कुल मुद्रा का तकरीबन 86 फीसदी था।
    सेवानिवृत्त कोमोडोर लोकेश बत्रा की आरटीआई के जवाब में वायु सेना ने कहा कि उसने सरकारी स्वामित्व वाले सेक्युरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड को अपनी सेवाओं के बदले में 29.41 करोड़ रुपये का बिल सौंपा है। (अमर उजाला)

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Posted Date : 09-Jul-2018
  • नई दिल्ली, 9 जुलाई । देश में लगातार पांचवें दिन पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं।  इंडियन ऑयल की साइट के मुताबिक पेट्रोल के दाम दिल्ली में 76.36 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं। चेन्नई और कोलकाता में पेट्रोल के दाम 79.25 और 79.03 रुपये प्रति लीटर दाम क्रमश: हो गए। मुंबई में पेट्रोल के दाम 83.75 रुपये प्रति लीटर है जो देश में मेट्रो में सबसे ज्यादा है वहीं, डीजल के दाम दिल्ली में 68.07 रुपये प्रति लीटर हो गए हैं जबिक कोलकाता में 70.62 रुपये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में 72.23 रुपये प्रति लीटर तो चेन्नई में 71.85 रुपये प्रति लीटर दाम हो गए हैं।
    इससे पहले देश के प्रमुख चार महानगरों में लगातार चौथे दिन रविवार को तेल के दाम में वृद्धि दर्ज की गई थी। तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में पेट्रोल रविवार को 76.13 रुपये प्रति लीटर हो गया था। पेट्रोल कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में क्रमश: 78.80 रुपये, 83.52 रुपये और 79.01 रुपये प्रति लीटर हो गया था। राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को डीजल 67.86 रुपये प्रति लीटर था।
    कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में डीजल की कीमतें क्रमश: 70.41 रुपये, 72 रुपये और 71.63 रुपये प्रति लीटर रहीं थी। पेट्रोल के दाम में बुधवार से लेकर रविवार तक 57-61 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि हुई है और डीजल के दाम में 48-51 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई थी।
    भारत में तेल की कीमतों का निर्धारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में उतार-चढ़ाव से तय होता है। पिछले महीने तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक की ओर से तेल की आपूर्ति रोजाना 10 लाख बैरल करने के फैसले के बाद उम्मीद जगी थी कि तेल के दाम में कमी आएगी मगर, शुरुआत में वैश्विक बाजार ओपके के फैसले को लेकर असमंजस में था, इसलिए फैसले के तुरंत बाद उम्मीद के विपरीत कच्चे तेल में तेजी दर्ज की गई। उसके बाद अमरीका द्वारा तेल आयातक देशों पर ईरान से तेल नहीं खरीदने के लिए दबाव बनाने से तेल का दाम ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।  (एनडीटीवी)

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Posted Date : 08-Jul-2018
  • देवांश शर्मा
    नई दिल्ली, 8 जुलाई । पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से ग्राहक परेशान हैं। देश में पेट्रोल पंपों पर कम नाप करना या मिलावट करना आम है। ऐसे में आपको सावधान रहने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए। पिछले महीने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल पंप फ्रॉड की रैंकिंग साझा की थी जिसमें दिल्ली का तीसरा स्थान था। दिल्ली में अप्रैल 2014 से दिसंबर 2017 तक शॉर्ट फ्यूलिंग के 785 मामले सामने आए। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की रैंकिंग दिल्ली से ऊपर थी। ऐसे में आपको कुछ इस तरह सावधानी रखनी चाहिए- 
    1- अगर आप कार में फ्यूल डला रहे हैं तो कुछ बातें आपको शंका में डाल सकती हैं। इंजन में होने वाली दिक्कत और कम माइलेज पेट्रोल की क्वालिटी की ओर संकेत करता है। ऐसे में पेट्रोल का फिल्टर पेपर टेस्ट कराना चाहिए। कंज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट 1986 के मुताबिक पेट्रोल पंप के पास फिल्टर पेपर होना चाहिए और ग्राहक के मांगने पर उपलब्ध कराना चाहिए। पेपर पर तेल की बूंद डालकर देखना होता है कि क्या यह बिना दाग छोड़ उड़ जाता है। अगर ऐसा नहीं होता तो तेल में मिलावट है। 
    2- स्टार्ट-स्टॉप शॉर्ट फ्यूलिंग 
    ज्यादा ईंधन भराने पर शॉर्ट फ्यूलिंग की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं। ऐसे में सावधानी बरतने की जरूरत है। मान लीजिए आपने 1500 का पेट्रोल डालने को कहा। वर्कर ने 500 का भरा और रोक दिया। जब आपने दोबारा 1000 का भरने को कहा तो उसने बिना रीस्टार्ट किए 1000 का भर दिया। ऐसे में आपका 500 रुपये का नुकसान हो गया। ऐसे ही तरीके निकालकर शॉर्ट फ्यूलिंग की जाती है। जीरो मशीन पर ध्यान देना बहुत जरूरी होता है। 
    3- पांच लीटर टेस्ट 
    दरअसल कई बार पेट्रोल पंप पर नॉजल में छेड़छाड़ करके 100 से 150 मिली तक ईंधन में हेरफेर की जाती है। ऐसे में शक होने पर पांच लीटर टेस्ट करना चाहिए। पेट्रोल पंप पर 5 लीटर का एक प्रमाणित बर्तन होता है। आप उसमें 5 लीटर पेट्रल/डीजल डलवाकर जांच सकते हैं कि नाप सही है या नहीं। 
    4- अन्य सावधानियां 
    हमेशा ईंधन का सेलिंग प्राइस जरूर चेक करें। डीलर को प्राइस डिस्प्ले करना चाहिए। डीलर ज्यादा धनराशि नहीं ले सकता है। डिस्प्ले की गई कीमत से चार्ज की कई कीमत का मिलान करना चाहिए। ( इकॉनॉमिक टाईम्स)

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Posted Date : 06-Jul-2018
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    रायपुर, 6 जुलाई। रिलायंस कंपनी द्वारा गुरूवार को 501 रूपए वाले नए मोबाइल लांच होने से मोबाईल कारोबारी दबाव में हैं। माना जा रहा है सस्ते मोबाइल मार्केट में आने से दूसरी कंपनी के मोबाइल विक्रेताओं को शुरू में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। सस्ते में मोबाइल सेल करने वाली कुछ कंपनियों को जियो की सस्ती मोबाइल के चलते भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। लेकिन बाद में कारोबार संभल जाएगा जिसका फायदा आम आदमी समेत मोबाइल कारोबारियों को भी होगा। 
    अब पुराने फोन को बदलकर नया जियो फोन सिर्फ 501 रूपए में मिलेगा। इसकी शुरूआत 21 जुलाई से होगी। बताया जा रहा है कि 501 रूपए के साथ पुराना मोबाइल देने पर जियो का 15 सौ रूपए का पिछले साल लांच किया गया जीओ फोन दिया जाएगा। जो जियो फोन-2 खरीदना चाहते हैं उन्हें 2 हजार 9 सौ 99 में 15 अगस्त से नया फोन मिलेगा। 
    मोबाइल कारोबारी सूद ब्रदर्स ने कहा कि जियो के नए मोबाइल मार्केट में आने से कितना फर्क पड़ेगा ये तो मार्केट में स्टॉक आने के बाद ही पता चलेगा। 501 रूपए वाले फोन के लिए जियो के पुराने फोन को ही रिप्लेस करना होगा। इससे निश्चित रूप से नए मोबाइल की सेलिंग में फर्क पड़ेगा। दिनेश सुंदरानी ने कहा कि जियो फोन के पीछे नाटफाट सेल लिखा हुआ है, जिसका मतलब समझ नहीं आता है। जियो के सस्ते फोन मार्केट में आने से अन्य मोबाइल विक्रेताओं के कारोबार में फर्क पड़ेगा। 
    राजेश वासवानी ने कहा कि जियो के सस्ते फोन मार्केट में आने से सस्ता मोबाइल बेचने वाली कुछ कंपनियों के मोबाइल की बिक्री में कमी आएगी। लेकिन इससे भविष्य में डिजिटल क्रांति आएगी। वर्तमान में कम कीमतों वाले मोबाइल बेचने वाले दुकानदारों को परेशानी होगी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने पहले ही मुफ्त मोबाइल देने की घोषणा की है और इसका वितरण भी अगले महीने शुरू होगा। मुफ्त मोबाइल के आने से मोबाइल कारोबार पहले से ही चिंतित हैं और अब जियो का सस्ता मोबाइल आने से कारोबार को जबरदस्त झटका लगने की आशंका जताई जा रही है। 

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